विशेष संवाददाता, पटना।
बिहार की सियासत में इस वक्त बयानों के तीखे तीर चल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर दिए गए बयान पर बिहार सरकार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बेहद तीखा और करारा पलटवार किया है। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मंत्री ने न सिर्फ लालू परिवार पर निशाना साधा, बल्कि खान सर के कोचिंग संस्थान पर हुए हमले और सूबे के मदरसों को लेकर भी सरकार की भावी कड़क कार्रवाई का पूरा खाका सामने रख दिया। मंत्री के इस तेवर से साफ है कि सरकार कानून-व्यवस्था और नियमों के मामले में किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है।

“पूरे खानदान को सरकारी घर नहीं दिया जा सकता”
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकारी आवास विवाद पर कहा था कि ‘2030 तक हमारा कार्यकाल है, जब यह खत्म होगा तो हम इसी चप्पल में यहाँ से निकल जाएंगे।’ इस पर पलटवार करते हुए मंत्री मिथिलेश तिवारी ने दो टूक कहा, “हम राहुल गांधी के बयानों को सीरियस नहीं लेते। राबड़ी देवी जी को समझना होगा कि वह अब मुख्यमंत्री नहीं हैं, सूबे के मुख्यमंत्री माननीय सम्राट चौधरी जी हैं।”
मंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि सम्राट चौधरी की सरकार ने जो फैसला लिया है, उसका पालन उन्हें करना ही पड़ेगा। कानून सबके लिए बराबर है और पूरे खानदान को सरकारी घर नहीं दिया जा सकता। उन्हें तय वक्त पर बंगला खाली करना ही होगा।

खान सर के हमलावरों को ‘पाताल‘ से खोजेगी सम्राट की पुलिस
पटना में खान सर के कोचिंग संस्थान पर हुए हमले को लेकर भी मंत्री मिथिलेश तिवारी का गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा। उन्होंने उपद्रवियों को खुली चेतावनी देते हुए कहा, “जिसने भी यह दुस्साहस किया है, वह किसी भी कीमत पर बचेगा नहीं। सम्राट चौधरी जी की पुलिस उसे पाताल से भी खोजकर निकालेगी और सलाखों के पीछे भेजेगी।”
मंत्री ने इस दौरान एक बड़ा नीतिगत एलान भी किया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की अराजकता को रोकने के लिए शिक्षा विभाग अगले 3 महीने के भीतर कोचिंग संस्थानों के नियमन के लिए एक नई और सख्त नीति तैयार कर रहा है। इसके बाद बिहार के सभी कोचिंग संस्थान एक कड़े नियम और कानून के दायरे में आ जाएंगे, जिससे कोचिंग माफियाओं पर पूरी तरह लगाम कसी जा सकेगी।

मदरसों और संस्कृत विद्यालयों की खुलेगी डिजिटल कुंडली
सूबे के मदरसों की जांच के लिए बनाई गई कमेटी के सवाल पर मंत्री ने सरकार की मंशा साफ कर दी। उन्होंने कहा कि जब सरकार किसी संस्थान को जनता के टैक्स का पैसा देती है, तो उसकी जांच का हक भी सरकार को है।
“हम मदरसों को शिक्षकों के वेतन के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर (भवन निर्माण) के लिए भी फंड देते हैं, जबकि संस्कृत विद्यालयों को सिर्फ वेतन के लिए अनुदान मिलता है। इसलिए सरकार ने दोनों की स्थिति का आकलन करने के लिए एक साझा अभियान शुरू किया है। किस संस्थान को क्या दिक्कत है और कहाँ गड़बड़ी है, इसकी पूरी जांच रिपोर्ट पूरी तरह से ऑनलाइन और डिजिटल रहेगी।”
बांकीपुर उपचुनाव: VIP सीट पर लड़ेगा भाजपा का ‘सामान्य कार्यकर्ता‘
बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव और वहां हो रहे आंदोलनों को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने सस्पेंस खत्म कर दिया। उन्होंने कहा कि यह सीट हमारे आदरणीय राष्ट्रीय अध्यक्ष की सीट है। यहाँ से भारतीय जनता पार्टी किसी बड़े वीआईपी को नहीं, बल्कि अपने एक सामान्य कार्यकर्ता को चुनावी मैदान में उतारेगी। वह कार्यकर्ता शीर्ष नेतृत्व का आशीर्वाद लेकर ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगा और सदन पहुंचेगा।
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