उद्योगपति अनिल अग्रवाल ने कहा— “बिहार मेरे लिए सिर्फ राज्य नहीं, एक ‘इमोशन‘ है, टीम को दूंगा बिना शर्त समर्थन”; सरकार बोली— हमारे पास स्पष्ट ‘विजन‘ और नीति, अब मिलकर बदलेगा इतिहास!
पटना/मुजफ्फरपुर: बिहार के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों और युवाओं के सपनों को आज उस वक्त नए पंख लग गए, जब देश के दिग्गज उद्योगपति और वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की ‘बिहार आईपीएल टीम’ बनाने की मुहिम को बिहार सरकार का खुला और ऐतिहासिक समर्थन मिल गया। इस बड़े राजनीतिक और कॉर्पोरेट तालमेल के बाद खेल गलियारों में भारी हलचल है। अब वह दिन दूर नहीं जब दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट मंच आईपीएल (IPL) में बिहार की अपनी स्वतंत्र टीम चौके-छक्के बरसाती नजर आएगी।

अनिल अग्रवाल की हुंकार: क्यों पहचान से महरूम है बिहार का टैलेंट?
इस खेल क्रांति की शुरुआत तब हुई जब वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक और जोश से भरा एक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा, “अगर आप सपने देखोगे नहीं, तो सपने पूरे कैसे होंगे? क्या आपको नहीं लगता कि चेन्नई सुपर किंग्स, मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स की तरह बेमिसाल बिहार की भी एक टीम होनी चाहिए? बिहार की मिट्टी ने देश को बहुत से बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी दिए हैं।” अग्रवाल ने सूबे के चमकते सितारों का जिक्र करते हुए कहा कि, पटना में जन्मे ईशान किशन ने वनडे में सबसे तेज दोहरा शतक लगाया, समस्तीपुर के वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र में IPL डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बने, और गोपालगंज के साधारण परिवार से आने वाले साकिब हुसैन की गेंदबाजी पर आज पूरी दुनिया की नजरें हैं। उन्होंने आगे कसम खाते हुए ऐलान किया, “एक बात मुझे हमेशा खलती है कि हमारे बिहार को वह नाम और पहचान क्यों नहीं मिल पा रही जिसके हम हकदार हैं। मैं बिहार की क्रिकेट टीम और यहाँ के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए अपनी तरफ से unconditional support (बिना शर्त समर्थन) दूंगा।”
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का तुरंत रिप्लाई: ‘विजन‘ के साथ ‘मिशन मोड‘ में सरकार
उद्योगपति अनिल अग्रवाल के इस बड़े प्रस्ताव पर बिहार सरकार ने भी पलक झपकते ही अपनी मुहर लगा दी। सूबे के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तुरंत अग्रवाल के पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए साफ कर दिया कि सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर है। मुख्यमंत्री ने लिखा— “आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन‘ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन‘ के साथ ‘मिशन‘ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस भरोसे ने साफ कर दिया है कि बिहार सरकार अब बैकफुट पर नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर आकर खेलने के मूड में है।

उद्योगपति अनिल अग्रवाल के इस ड्रीम प्रोजेक्ट और भावुक अपील पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी बिना वक्त गंवाए अपनी मुहर लगा दी। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में किए गए ट्वीट को न केवल री-ट्वीट किया, बल्कि राज्य के युवाओं और खेल प्रेमियों को भरोसा दिलाते हुए बेहद मजबूत और सधे हुए शब्दों में लिखा— “आपकी बात से पूर्णतः सहमत हूँ। बिहार के क्रिकेट ‘इमोशन’ के लिए सरकार स्पष्ट ‘विजन’ के साथ ‘मिशन’ मोड में कार्यरत है। आपके सहयोग से निश्चित ही बिहार की क्रिकेट टीम को लेकर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।” मुख्यमंत्री के इस त्वरित और सकारात्मक जवाब से साफ हो गया है कि बिहार सरकार राज्य के क्रिकेट टैलेंट को विश्वस्तरीय मंच देने के लिए पूरी तरह गंभीर है और प्रशासनिक स्तर पर इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ने को तैयार है।
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह का बड़ा बयान: बुनियादी ढांचे के लिए कसी कमर
इस बड़ी मुहिम को धरातल पर उतारने के लिए बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने भी पटना में बड़ी घोषणा की। राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता और खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने अनिल अग्रवाल की मांग का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी ने भी इस सोच का दिल से स्वागत किया है। मैं खेल मंत्री होने के नाते भी इस विजन के साथ खड़ी हूं। मैं हर संभव प्रयास करूंगी कि बिहार के खिलाड़ियों को एक बेहतरीन और विश्वस्तरीय मंच मिले। बिहार सरकार कभी भी अपने खिलाड़ियों की मदद करने से पीछे नहीं हटेगी। हमारे खेल विभाग में भी अब काम बेहद तेजी से आगे बढ़ रहा है।”
कॉर्पोरेट और सरकार के गठबंधन से मचेगा तहलका
खेल विश्लेषकों का मानना है कि जहाँ एक तरफ वेदांता जैसा विशाल कॉर्पोरेट ग्रुप टीम को वित्तीय और वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर का बैकअप देने को तैयार है, वहीं दूसरी तरफ सरकार प्रशासनिक और नीतिगत बाधाओं को दूर करने के लिए ‘मिशन मोड’ में आ चुकी है। इस त्रिकोणीय जुगलबंदी (उद्योगजगत, मुख्यमंत्री और खेल मंत्रालय) के बाद अब बीसीसीआई (BCCI) और आईपीएल गवर्निंग काउंसिल पर भी बिहार को उसका हक देने का दबाव बढ़ेगा। वह दिन दूर नहीं जब आईपीएल के मैदान पर गूंजेगा— ‘जियो हो बिहार के लाला!‘

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