अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप; मानवाधिकार संस्थान और मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत ने सीधे केंद्र सरकार और NTA से की परीक्षा टालने की मांग।
पटना/मुजफ्फरपुर : देश की सबसे बड़ी परीक्षाओं में से एक, ‘कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट’ (CUET UG 2026) विवादों के घेरे में आ गई है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर एक बार फिर गंभीर लापरवाही और धार्मिक संवेदनशीलता की अनदेखी करने का आरोप लगा है। दरअसल, सरकारी गैजेट कैलेंडर के अनुसार 28 मई 2026 (गुरुवार) को मुस्लिम समुदाय का पवित्र त्योहार बकरीद (ईद-उल-अज़हा) है, लेकिन इसी दिन NTA ने CUET UG के चार महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षा निर्धारित कर दी है। इस फैसले के बाद से मुस्लिम अभ्यर्थियों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश और बेचैनी का माहौल है।

लापरवाही या अनभिज्ञता? त्योहार के दिन सुबह 7 बजे रिपोर्टिंग टाइम!
मानवाधिकार संस्थान बिहार के महासचिव और ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (बिहार) के स्टेट जनरल सेक्रेटरी, मोहम्मद इश्तेयाक ने इस मामले को लेकर भारत सरकार के उच्च शिक्षा सचिव, शिक्षा विभाग के मंत्रालय सचिव और NTA के अध्यक्ष/निदेशक को एक आधिकारिक पत्र (ईमेल) भेजकर तीखा विरोध दर्ज कराया है।
मोहम्मद इश्तेयाक ने अपने पत्र में कहा है कि पूरे भारत में 11 मई से 31 मई तक CUET UG 2026 की परीक्षाएं चल रही हैं। लेकिन 28 मई को English, Accountancy, Book Keeping और General Aptitude Test जैसे बड़े विषयों की परीक्षा होनी है। इसके लिए छात्रों का रिपोर्टिंग टाइम सुबह 7:00 बजे रखा गया है और परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अंतिम समय सीमा सुबह 8:30 बजे है।

नमाज और कुर्बानी छोड़ परीक्षा देने कैसे जाएंगे छात्र?
देशभर के मुस्लिम संगठनों का कहना है कि बकरीद के दिन सुबह 6:30 बजे से लेकर 10:00 बजे तक मस्जिदों और ईदगाहों में विशेष सामूहिक नमाज अदा की जाती है। इस नमाज में बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं सभी अनिवार्य रूप से शामिल होते हैं। नमाज के तुरंत बाद कुर्बानी की पवित्र परंपरा का निर्वहन किया जाता है, जिसके कारण मुस्लिम परिवारों में पूरे दिन अत्यधिक व्यस्तता रहती है।
ऐसे में सुबह 7 बजे परीक्षा केंद्र पर पहुंचना मुस्लिम छात्रों के लिए व्यावहारिक रूप से असंभव है। यदि छात्र परीक्षा देने जाते हैं, तो वे अपने इस बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक कर्तव्य से वंचित रह जाएंगे।

संविधान प्रदत्त अधिकारों के हनन का बड़ा आरोप
शिक्षा मंत्रालय को भेजे गए पत्र में सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है कि त्योहार के दिन परीक्षा आयोजित करना भारत की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था पर एक बड़ा आघात है। यह धार्मिक अल्पसंख्यकों को संविधान द्वारा दिए गए मौलिक अधिकारों का खुला हनन है। मुस्लिम समुदाय ने मांग की है कि देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को अक्षुण्ण रखने के लिए 28 मई की परीक्षा तिथि को तत्काल बदला जाए, ताकि छात्र बिना किसी मानसिक तनाव के अपने त्योहार और परीक्षा दोनों में शामिल हो सकें।
अब देखना यह है कि देश भर से उठ रही इस जायज मांग पर शिक्षा मंत्रालय और NTA क्या कदम उठाता है। क्या लाखों मुस्लिम छात्रों के भविष्य और उनकी धार्मिक आस्था को देखते हुए परीक्षा की तारीख आगे बढ़ाई जाएगी या विवाद और गहराएगा?
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
|| https://newsbharattv.in ||


