विशेष संवाददाता, पटना। बिहार की पंचायती राज व्यवस्था में एक नया इतिहास रचते हुए रोहतास जिले की एक महिला मुखिया ने पूरे देश में राज्य का नाम रोशन कर दिया है। रोहतास प्रखंड के तेलकप ग्राम पंचायत की मुखिया अनीता टोप्पो को केंद्र सरकार की ओर से प्रतिष्ठित ‘नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार-2025’ (राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार) की श्रेणी में पूरे भारत में दूसरा (द्वितीय) स्थान प्राप्त हुआ है। इस धमाकेदार और ऐतिहासिक कामयाबी के बाद पटना से लेकर दिल्ली तक तेलकप पंचायत की चर्चा हो रही है।
इस गौरवमयी उपलब्धि पर पंचायती राज विभाग, बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश ने मुखिया को विशेष रूप से आमंत्रित कर अपनी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी। पटना में आयोजित एक उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान पंचायती राज विभाग के निदेशक ने भी विजेता मुखिया को पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया और उनके द्वारा धरातल पर किए गए कार्यों की जमकर सराहना की।

मंत्री दीपक प्रकाश ने थपथपाई पीठ, चुनौतियों पर भी हुई आर-पार की बात
मुलाकात के दौरान पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने मुखिया अनीता टोप्पो से पंचायत में संचालित विकास कार्यों और वहां की स्थानीय चुनौतियों के बारे में वन-टू-वन फीडबैक लिया। बातचीत में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता और साफ-सफाई जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा हुई। मंत्री ने माना कि तेलकप ग्राम पंचायत के कुछ वार्डों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने मुखिया को भरोसा दिलाते हुए ऐलान किया कि इस चुनौती को जड़ से खत्म करने के लिए पंचायती राज विभाग हरसंभव तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा। मंत्री ने जिला पंचायत संसाधन केंद्र द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की भी तारीफ की, जिसने मुखिया के क्षमता संवर्धन और योजनाओं के सटीक क्रियान्वयन में संजीवनी का काम किया। इसके साथ ही निदेशक ने पंचायत सचिव के कार्यों की भी सराहना की और कहा कि जमीन पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही इस राष्ट्रीय पुरस्कार का असली आधार है।
लाइब्रेरी से लेकर ओपन जिम तक… जानिए कैसे पलटी तेलकप पंचायत की किस्मत?
राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने के बाद मुखिया अनीता टोप्पो ने अपनी इस सफलता की पूरी कहानी और पंचायत की तस्वीर बदलने वाले ऐतिहासिक कामों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस तरह एक योजनाबद्ध तरीके से उन्होंने अपनी पंचायत को मॉडल पंचायत में तब्दील कर दिया:

- शिक्षा क्रांति और लाइब्रेरी: बच्चों के पढ़ने के लिए पंचायत में दो अलग-अलग जगहों पर अत्याधुनिक लाइब्रेरी (पुस्तकालय) की स्थापना की गई, ताकि गरीब बच्चों को पढ़ाई के लिए शहर न भागना पड़े।
- कीचड़ से मुक्ति और पेवर ब्लॉक: स्कूलों में आने-जाने वाले रास्तों और स्कूल कंपाउंड में जलजमाव एवं कीचड़ की भारी समस्या थी। बच्चों की इस परेशानी को दूर करने के लिए पूरे परिसर में शानदार पेवर ब्लॉक लगवाए गए और चकाचक सड़कें बनवाई गईं।
- स्वास्थ्य और हाईटेक सुविधाएं: उप स्वास्थ्य केंद्र की कायापलट करते हुए मरीजों के बैठने के लिए कुर्सियों और बुनियादी सुविधाओं की मुकम्मल व्यवस्था की गई।
- भीषण गर्मी में राहत: आम जनता को चुभती गर्मी से बचाने के लिए जगह-जगह वाटर कूलर लगवाए गए हैं ताकि लोगों को ठंडा और स्वच्छ पेयजल मिल सके। इसके अलावा मुसाफिरों के बैठने के लिए बस स्टैंड के पास सीमेंटेड चेयर (कुर्सियां) लगवाई गईं।
- हेल्थ और फिटनेस: पंचायत के युवाओं और ग्रामीणों की सेहत को ध्यान में रखते हुए ओपन जिम की शुरुआत की गई।
- भ्रष्टाचार पर चोट, पंचायत भवन में ही सारा काम: अब ग्रामीणों को जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र या वृद्धावस्था पेंशन के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ते। पंचायत सरकार भवन में ही आरटीपीएस (RTPS) काउंटर के माध्यम से पंचायत सचिव के साथ बैठकर मुखिया खुद सारे दस्तावेज तुरंत तैयार करवाती हैं।
- महिला सभा और मनरेगा से बंपर रोजगार: अनीता टोप्पो खुद हर गांव में जाकर महिलाओं के साथ विशेष ‘महिला सभा’ करती हैं और उनकी समस्याओं को सीधे सुनकर फैसला लेती हैं। इसके साथ ही मनरेगा के तहत सैकड़ों बेरोजगारों को लगातार काम देकर पलायन रोका गया है।
विजेता मुखिया ने अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी का श्रेय बिहार के मुख्यमंत्री, पंचायती राज मंत्री और पूरे पंचायती राज विभाग को दिया है, जिनके सहयोग से तेलकप आज एक विकसित और आदर्श पंचायत बनकर देश के सामने मिसाल पेश कर रहा है।

बनारस की गृहस्थी से देश की संसद तक: संघर्ष और आत्मनिर्भरता की अद्भुत मिसाल
कभी बनारस में अपने बच्चों के भविष्य को संवारने और एक साधारण गृहस्थी संभालने वाली अनीता टोप्पो का देश की संसद (पार्लियामेंट) तक का सफर बेहद प्रेरणादायी और संघर्षपूर्ण रहा है। अपने मायके में माता-पिता की इकलौती संतान के रूप में पली-बढ़ीं अनीता टोप्पो के जीवन में नया मोड़ तब आया, जब तेलकप पंचायत में अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए मुखिया पद की सीट आरक्षित हुई। उनकी शिक्षा और काबिलियत को देखते हुए पूरे पंचायत के प्रबुद्ध गार्जियनों और ग्रामीणों ने उन्हें बनारस से वापस बुलाकर पंचायत की कमान सौंपने का फैसला किया। चुनाव के दौरान किसी बड़े लाव-लश्कर के बजाय उन्होंने अकेले ही घर-घर जाकर, हाथ जोड़कर जनता से वोट मांगा, जहां पंचायत की महिलाओं ने उनका सबसे बड़ा संबल बनते हुए एक महिला को जिताने का संकल्प लिया।

शुरुआती दौर में जब कभी सरकारी कार्यों के लिए ब्लॉक या अनुमंडल जाना होता था, तो ड्राइवर्स के नखरों और समय पर न आने की आदत से तंग आकर उन्होंने हार नहीं मानी; बल्कि अपने पति द्वारा शौक से दिलाई गई फोर-व्हीलर की स्टीयरिंग खुद थाम ली। जल्द ही उन्होंने न सिर्फ गाड़ी चलाना सीखा, बल्कि बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप या ‘स्टेपनी’ (सहारे) के पूरे पंचायत प्रशासन को अकेले अपने दम पर ड्राइव करना शुरू कर दिया।
उनकी इसी आत्मनिर्भरता और जमीनी स्तर पर शिक्षा व महिला सशक्तिकरण के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों की बदौलत बिहार सरकार ने उन्हें राज्य की उन शीर्ष पांच अनुसूचित जनजाति महिला मुखियाओं में चयनित किया, जिन्हें देश की संसद (पार्लियामेंट) भेजा गया। पंचायत सरकार भवन से शुरू हुआ यह सफर तब अपनी बुलंदी पर पहुंचा जब उन्होंने नए संसद भवन का दौरा किया, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला व महिला आयोग की मंत्रियों से मुलाकात की और राष्ट्रपति भवन में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ आमने-सामने बैठकर डिनर किया। राष्ट्रपति से मिली ‘सांसद बनने’ की प्रेरणा और एक मिनट से अधिक की आत्मीय बातचीत को वह अपने जीवन का सबसे गौरवान्वित करने वाला क्षण मानती हैं। आज वह घर की कामकाजी और मामूली पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए एक ‘पथ-प्रदर्शक’ बन चुकी हैं, जिनका साफ संदेश है कि महिलाओं को किसी और पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के कंधे और दम पर आत्मनिर्भर बनना चाहिए।
अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
|| https://newsbharattv.in ||



