“कानून बहुत बने, अब सोच बदलनी होगी”: DGP विनय कुमार का पुलिसिया सिस्टम पर बड़ा प्रहार

पटना | मुख्य संवाददाता बिहार में महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घरेलू और लैंगिक हिंसा को रोकने के लिए अब केवल फाइलों में कानून बनाना काफी नहीं होगा, बल्कि पुलिसिंग के नजरिए और समाज की सोच को बदलना होगा। यह सख्त संदेश बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने  पटना स्थित पुलिस मुख्यालय (सरदार पटेल भवन) के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान दिया।

पटना स्थित पुलिस मुख्यालय (सरदार पटेल भवन) में आयोजित ‘घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण’ विषय पर कार्यशाला का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते बिहार के DGP विनय कुमार। साथ में ADG (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन, विशेष सचिव (गृह) के.एस. अनुपम व अन्य गणमान्य।

सिस्टम की कमियों को किया उजागर “घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005” तथा “लिंग आधारित हिंसा” विषयों पर आयोजित इस एकदिवसीय प्रशिक्षण-सह-संवेदीकरण कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए DGP विनय कुमार ने पुलिसिया कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने बेबाकी से स्वीकार किया कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए अनगिनत योजनाएं और कड़े कानून होने के बावजूद जमीनी स्तर पर वह ‘आउटकम’ (परिणाम) नहीं दिख रहा है, जिसकी उम्मीद थी। उन्होंने कहा, “इतनी कोशिशों के बाद भी अपेक्षित परिणाम न मिलना यह दर्शाता है कि हमारे एटीट्यूड और माइंडसेट (सोच) में आज भी अपेक्षित परिवर्तन नहीं हुआ है।”

अपराधी पकड़ने से आगे बढ़ना होगा DGP ने कार्यशाला में मौजूद पुलिस अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा केवल एक अपराध नहीं, बल्कि उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, “लॉ एनफोर्समेंट एजेंसी होने के नाते हम न्याय की पहली कड़ी हैं। हमारी भूमिका केवल अपराधी को पकड़कर जेल भेजने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि हमें पीड़ित महिला के मन में यह विश्वास पैदा करना होगा कि कानून पूरी मजबूती के साथ उसके पीछे खड़ा है।” उन्होंने ‘रिएक्टिव’ पुलिसिंग (घटना के बाद कार्रवाई) को छोड़कर ‘प्रो-एक्टिव’ पुलिसिंग (घटना को रोकने के लिए सक्रियता) अपनाने पर जोर दिया।

प्रभावी क्रियान्वयन और पुनर्वास पर जोर कार्यक्रम में उपस्थित डॉ. अमित कुमार जैन (अपर पुलिस महानिदेशक, कमजोर वर्ग) ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के लिए बने कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना अनिवार्य है। उन्होंने न केवल सुरक्षा बल्कि पीड़ित महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था को भी प्राथमिकता देने की बात कही ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मान के साथ वापस लौट सकें।

इन प्रमुख अधिकारियों की रही मौजूदगी बिहार पुलिस के ‘कमजोर वर्ग प्रभाग’ द्वारा ‘महिला एवं बाल विकास निगम’ के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में राज्य के कई दिग्गज अधिकारी शामिल हुए:

  • विनय कुमार, पुलिस महानिदेशक (DGP), बिहार
  • डॉ. अमित कुमार जैन, अपर पुलिस महानिदेशक (ADG), कमजोर वर्ग
  • के.एस. अनुपम, विशेष सचिव, गृह विभाग
  • योगेश सागर, प्रबंध निदेशक, महिला एवं बाल विकास निगम
  • आमिर जावेद, पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG), कमजोर वर्ग
  • ख्वाजा सादत नूर, राज्य कार्यालय प्रमुख, यूएनएफपीए (UNFPA)

कार्यशाला में तेजाब हमला (Acid Attack) की सर्वाइवर्स भी मौजूद रहीं, जिन्होंने पुलिस और समाज के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पुलिस बल को संवेदनशील बनाना था ताकि घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को थानों में भटकना न पड़े और उन्हें तुरंत न्याय मिल सके।

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