“मुद्दे की बात पर ‘बकलोली‘ का ठप्पा! मुरौल में गैस संकट पर भिड़े माननीय, जनता पूछ रही— हमारा हक कहाँ है?”
मुरौल (मुजफ्फरपुर): नगर पंचायत मुरौल में जनता की मूलभूत सुविधाओं को लेकर सियासत का पारा चढ़ गया है। एक तरफ वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने गैस आपूर्ति की समस्या को लेकर 30 अप्रैल से ‘आमरण अनशन’ का बिगुल फूंक दिया है, तो दूसरी तरफ नगर सरकार के शीर्ष पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों के बयानों ने इस विवाद में घी डालने का काम किया है। न्यूज़ भारत टीवी के पत्रकार कुमार ‘पंकज’ ने जब इस मुद्दे पर ‘नगर सरकार’ के कर्ता-धर्ताओं से सीधी बात की, तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई।

मुख्य पार्षद की बेरुखी: सवाल सुनते ही काटा फोन
नगर पंचायत के अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) नरेश मेहता का रवैया इस गंभीर मुद्दे पर पूरी तरह उदासीन दिखा। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस अनशन या पार्षद आनंद कंद साह से कोई लेना-देना नहीं है। हद तो तब हो गई जब पत्रकार ने उनसे जनता से जुड़ा वाजिब सवाल पूछा— “नगर पंचायत घोषित होने के बाद भी जनता को शहरी गैस सुविधा क्यों नहीं मिल रही?” इस सवाल का जवाब देने के बजाय मुख्य पार्षद ने फोन ही काट दिया। उनका यह मौन, इशारा करता है कि जैसे क्षेत्र में कोई समस्या ही नहीं है।
उप-मुख्य पार्षद का ‘बकलोली‘ वाला तंज और लाचारी

उपाध्यक्ष (उप-मुख्य पार्षद) अजय कुमार ने इस पूरे आंदोलन को ही ‘बकलोली’ करार दे दिया। उन्होंने कहा कि यह आनंद कंद साह की ‘स्पेशल राजनीति’ है। हालांकि, जब उनसे किये गये कागजी कार्रवाई पर सवाल हुआ, तो उन्होंने अपनी लाचारी जाहिर करते हुए यहाँ तक कह दिया कि— “उप मतलब ‘चुप’ होता है।” उन्होंने अधिकारियों (EO) पर असहयोग का ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि वे लिखकर थक चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती।
पार्षदों का मिला-जुला रुख: कोई साथ, कोई अनजान
जहाँ वार्ड 2 के पार्षद श्याम कुमार और वार्ड 6 की पार्षद गुड़िया देवी ने आनंद कंद साह के अनशन का खुला समर्थन किया है और साथ बैठने का दावा किया है, वहीं वार्ड 1 के पार्षद राजीव कुमार, वार्ड 5 के पार्षद विजय पासवान और वार्ड 7 की पार्षद संजू देवी के प्रतिनिधि विजय राय ने बताया कि उन्हें इस अनशन की जानकारी व्यक्तिगत तौर पर नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है। हालांकि, सभी ने माना कि गैस आपूर्ति का मुद्दा जायज है।

इन जनप्रतिनिधियों से नहीं हो सका संपर्क
जनता की आवाज बुलंद करने की इस कोशिश में कई पार्षदों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली। वार्ड संख्या 8 के पार्षद संजय कुमार के बारे में पता चला कि वे बीमार हैं। वार्ड संख्या 9 की पार्षद जुबैदा खातून को कई बार (शाम 4:17 और 4:27 बजे) कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। वहीं वार्ड संख्या 10 की पार्षद सरस्वती देवी एवं उनके प्रतिनिधी संतोष कुमार के नंबर पर संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में इन वार्डों की जनता की राय इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सामने नहीं आ पाई।

टैक्स शहरी, सुविधा ग्रामीण! आखिर क्यों?
नगर पंचायत मुरौल की जनता आज दोहरी मार झेल रही है। नियमतः नगर निकाय बनने के बाद गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी 25 दिनों के भीतर होनी चाहिए, लेकिन यहाँ आज भी 45 दिनों का ग्रामीण नियम लागू है। पार्षद बबलू कुमार (वार्ड 4) ने सही सवाल उठाया है कि सरकार होल्डिंग टैक्स तो शहरी दर पर वसूल रही है, लेकिन राशन, बिजली और गैस जैसी बुनियादी सुविधाओं के समय हमें ‘ग्रामीण’ मानकर छोड़ दिया जाता है।
30 अप्रैल का अनशन यह तय करेगा कि मुरौल की नगर सरकार जनता के प्रति जवाबदेह है या फिर यह आपसी गुटबाजी और ‘चुप’ रहने के खेल में ही उलझी रहेगी।
ब्यूरो रिपोर्ट: न्यूज़ भारत टीवी।
अन्य खबर के लिए नीचे ‘’ न्यूज भारत टीवी ’’के लिंक पर क्लिक करें,




