खेती-किसानी: उत्तर बिहार के किसान हो जाएं सावधान! 21-22 मार्च को बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी, अपनी फसलों को बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय

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पूसा, समस्तीपुर: डॉ० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा द्वारा उत्तर बिहार के किसानों के लिए विशेष मौसम आधारित कृषि बुलेटिन जारी किया गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 21-25 मार्च की अवधि के दौरान आसमान में हल्के बादल छाए रह सकते हैं और 21-22 मार्च के आसपास हल्की वर्षा, आकाशीय बिजली और कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की प्रबल संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है।

🌾 फसलों की सिंचाई और कटाई पर विशेष सलाह

  • सिंचाई प्रबंधन: 21-22 मार्च के आसपास बारिश की संभावना को देखते हुए खड़ी फसलों की सिंचाई फिलहाल रोक दें।
  • गरमा सब्जियां: भिंडी, नेनुआ, करेला, लौकी (कद्दू) और खीरा की फसलों में 22 मार्च तक सिंचाई स्थगित रखें। यदि वर्षा न हो, तभी आगे सिंचाई का निर्णय लें।
  • रबी मक्का और गेहूं: रबी मक्का और देर से बोए गए गेहूं में दाना बनने से लेकर दूध भरने की अवस्था तक नमी बनाए रखना जरूरी है। हालांकि, सिंचाई तभी करें जब हवा शांत हो।
  • सावधानीपूर्वक कटाई: तैयार हो चुकी फसलों की कटाई मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर सावधानी से करें।

🥔 ओल (जिमीकंद) और गरमा मूंग-उड़द की बुआई

  • ओल की वैज्ञानिक खेती: ओल की रोपाई के लिए ‘गजेन्द्र’ किस्म का चयन करें। रोपाई हेतु कम से कम 0.5 किलोग्राम वजन वाले कंद का उपयोग करें और कंदों को 75×75 सेमी की दूरी पर लगाएं। प्रति हेक्टेयर 80 क्विंटल बीज दर रखें।
  • मूंग और उड़द: गरमा मूंग और उड़द की बुआई को प्राथमिकता दें। बुआई से पहले प्रति हेक्टेयर 20 किग्रा नत्रजन, 45 किग्रा स्फूर, 20 किग्रा पोटाश और 20 किग्रा गंधक का प्रयोग करें।
  • बीज उपचार: बुआई से दो दिन पहले बीजों को कार्बेन्डाजिम (2.5 ग्राम प्रति किग्रा) से उपचारित करें और बुआई के ठीक पहले राइजोबियम कल्चर का प्रयोग करें। बुआई 30×10 सेमी की दूरी पर करें।

🐛 कीटों का हमला और बचाव के तरीके

  • थ्रिप्स कीट: बढ़ते तापमान में थ्रिप्स पत्तियों का रस चूसकर उन्हें सफेद दागयुक्त बना देते हैं। इसके नियंत्रण हेतु प्रोफेनोफॉस या इमिडाक्लोप्रिड का 10-15 दिन के अंतराल पर दवाओं को बदल-बदल कर छिड़काव करें।
  • लाल भृंग कीट: नेनुआ, करेला, लौकी और खीरा जैसी बेल वाली सब्जियों में यह कीट जड़ों और पत्तियों को नुकसान पहुंचाता है। बचाव के लिए सुबह गोबर की राख में थोड़ा केरोसिन मिलाकर छिड़कें। अधिक प्रकोप होने पर क्लोरपाइरीफॉस धूल मिट्टी में मिलाएं और पत्तियों पर डाइक्लोवॉस का छिड़काव करें।
  • बैंगन की सुरक्षा: फल और तना छेदक कीट दिखने पर प्रभावित हिस्सों को तोड़कर नष्ट करें और साफ मौसम में स्पिनोसैड या क्विनालफॉस का छिड़काव करें।

🥭 आम के बागान और पशुपालन

  • आम की देखभाल: आम के पेड़ों में अभी मंजर आ रहे हैं। मंजर से लेकर मटर के दाने जितने फल बनने तक किसी भी रासायनिक दवा का प्रयोग न करें। खराब या विकृत मंजरों को तोड़कर बगीचे से बाहर जला दें या मिट्टी में दबा दें।
  • पशु स्वास्थ्य: दूध देने वाले पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए दिन में छायादार और सुरक्षित स्थान पर रखें तथा उन्हें पर्याप्त स्वच्छ पानी पिलाएं।

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