सीएम सम्राट चौधरी ने कोसी-गंडक के बाढ़ के दंश को जड़ से उखाड़ने और एक्सप्रेस-वे व सोलर पावर प्लांटों का जाल बिछाने का किया ऐेलान!

बक्सर से भागलपुर तक तीन सौ अड़तालीस किलोमीटर लंबे छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे और पीरपैंती पावर प्लांट के कार्यों में तेजी लाने का कड़ा निर्देश!

पटना : बिहार में आधारभूत संरचना, जल संसाधन प्रबंधन और ऊर्जा क्षेत्र को अभूतपूर्व गति देने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए सम्राट चौधरी ने राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए कई कड़े और दूरगामी निर्देश जारी किए। सरकार का मुख्य फोकस बाढ़ के स्थायी समाधान, आधुनिक सड़क नेटवर्क के विस्तार और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने पर है।

कोसी और गंडक नदी प्रणाली: बाढ़ के दंश से स्थायी मुक्ति की रणनीति

बिहार के उत्तरी हिस्से खासकर कोसी और गंडक नदी के क्षेत्र में आने वाली बाढ़ की विभीषिका से लोगों को स्थायी राहत दिलाने के लिए सरकार ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि अब केवल वार्षिक बाढ़ राहत कार्यों तक सीमित नहीं रहा जाएगा, बल्कि दीर्घकालिक बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण (लॉन्ग-टर्म फ्लड रिस्क मिटिगेशन) की नीति पर काम होगा।

कोसी क्षेत्र को बहु-जिला नदी गलियारे के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया गया है ताकि लोगों, संपत्तियों और कनेक्टिविटी को सुरक्षित किया जा सके। इसके साथ ही, कोसी नदी के शुरुआती एक सौ किलोमीटर के विशेष डेंजर जोन में डबल शीट पायलिंग करने और गाद (सिल्ट) प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है, जिससे नदियों की जल संग्रहण और प्रवाह क्षमता में सुधार होगा। साथ ही, नए बैराज के निर्माण की दिशा में भी त्वरित कार्रवाई करने को कहा गया है। गंडक नदी के तटबंधों पर सोलर प्लांट लगाने का भी अनूठा निर्देश दिया गया है, जिससे ऊर्जा उत्पादन के साथ तटबंधों की उपयोगिता बढ़ेगी। गंगा, कोसी और गंडक के दोनों तटों को मजबूत करते हुए उनके किनारे फोरलेन सड़कों के निर्माण की योजना है ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को एक समृद्ध क्षेत्र में बदला जा सके।

बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे और अन्य पथ परियोजनाओं से बदलेगी कनेक्टिविटी

पथ निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान बक्सर से भागलपुर तक बनने वाले छह-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की प्रगति की विशेष रूप से चर्चा हुई। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लंबाई तीन सौ अड़तालीस दशमलव एक नौ छह किलोमीटर है, जिसमें से तीन सौ छत्तीस दशमलव दो शून्य पांच किलोमीटर का हिस्सा बिहार में और लगभग बारह किलोमीटर का हिस्सा उत्तर प्रदेश में पड़ता है। इसके अलावा, गंगा-अंबिका पथ (बिदुपुर-दिघवारा), नारायणी पथ (दरिहारा-डुमरिया घाट) और विश्वामित्र पथ (बक्सर-आरा-मनेर) जैसी प्रमुख सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और तय समय-सीमा का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

ऊर्जा और हरित विकास: पीरपैंती प्लांट और पी०एम० कुसुम योजना पर जोर

ऊर्जा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। बैठक में तीन गुणा आठ सौ मेगावाट यानी चौबीस सौ मेगावाट क्षमता वाली पीरपैंती तापीय विद्युत परियोजना और बांका तापीय विद्युत संयंत्र के कार्यों की गहन समीक्षा की गई।

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन के कार्य को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया गया है। कृषि क्षेत्र को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली मुहैया कराने के लिए यह कदम बेहद अहम है। इसके तहत राजकीय नलकूपों (ट्यूबवेल) को भी सौर ऊर्जा से संचालित करने के लिए तेजी से काम करने को कहा गया है, जिससे किसानों को निर्बाध सिंचाई सुविधा मिल सके।

समीक्षा बैठक में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति

इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक स्तर पर कई दिग्गज अधिकारी मौजूद रहे, जिनमें दीपक कुमार, प्रत्यय अमृत, पंकज कुमार पाल, अजय यादव, संजय कुमार सिंह, डॉ० चन्द्रशेखर सिंह और सौरभ जोरवाल शामिल थे। सरकार ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय और नियमित निगरानी के साथ सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का स्पष्ट संदेश दिया है।

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