सीतामढ़ी: बिहार की प्रतिभा ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी धमक दिखाई है. जिले के नाहर चौक निवासी और सेक्रेड हार्ट स्कूल के 10वीं कक्षा के मेधावी छात्र रुद्रचंद्र मिश्रा (पिता- अधिवक्ता रितेश कुमार) ने एक ऐसा क्रांतिकारी एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) मॉडल तैयार किया है, जो पौधों में बीमारी के बाहरी लक्षण नजर आने से पहले ही उसकी सेहत और उसमें छिपे संक्रमण की सटीक जानकारी दे देता है. इस उल्लेखनीय उपलब्धि से न सिर्फ सीतामढ़ी बल्कि पूरे बिहार और देश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है. बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस शानदार सफलता पर छात्र को ढेरों शुभकामनाएं दी हैं और इसे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताया है.

कैसे काम करता है यह चमत्कारी एआई मॉडल? (विशेषताएं)
रुद्रचंद्र द्वारा तैयार किए गए इस नवाचार ने कृषि और तकनीक के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है:
- समय से पहले बीमारी की पहचान: यह एआई मॉडल पौधों में किसी भी बीमारी या फंगस के संक्रमण के लक्षण बाहर से दिखने से पहले ही उसकी आंतरिक स्थिति भांपकर किसानों को सतर्क कर देता है.
- पोषक तत्वों और पानी की सटीक निगरानी: इसमें लगे उन्नत सेंसर मिट्टी की नमी, तापमान और पौधे के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखते हैं, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पौधे को इस समय किस पोषक तत्व या पानी की आवश्यकता है.
- इस्तेमाल किए गए उपकरण: इस मॉडल को बनाने में 8-माइक्रोकंट्रोलर, एयर मॉड्यूल, मिट्टी सेंसर और आधुनिक कैमरा सिस्टम का बेहतरीन संयोजन किया गया है.

प्रेरणा की अनोखी शुरुआत और संघर्ष
रुद्रचंद्र को इस मॉडल को विकसित करने का विचार जिला स्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस के दौरान एक सूखे और बीमार पेड़ को देखकर आया था. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में इस पर गहन शोध और काम करना शुरू किया. उन्होंने इंटरनेट के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक्स, कोडिंग और आधुनिक तकनीक की बुनियादी बारीकियां सीखी थीं.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर फ्रांस में गाड़े झंडे
गत 16 और 17 सितंबर को फ्रांस के ल्योन शहर में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता ‘इनोरोबो बाई एसआईडीओ 2026′ में रुद्रचंद्र ने अपने इस मॉडल का ऑनलाइन प्रस्तुतिकरण किया था. इस वैश्विक प्रतियोगिता में दुनिया भर के 87 देशों के 1472 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने अपने नवाचार प्रस्तुत किए थे, जिनमें रुद्रचंद्र के एआई मॉडल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 37वां स्थान हासिल किया.

इसरो से भी मिल चुका है बुलावा
यह उपलब्धि पहली बार नहीं मिली है। इससे पहले अप्रैल 2026 में रुद्रचंद्र को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा प्रतिष्ठित युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम (युविका 2026) के तहत बेंगलुरु स्थित यू.आर. राव उपग्रह केंद्र में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था.

लागत और किसानों के लिए वरदान भविष्य की योजना
वर्तमान में इस मॉडल को तैयार करने में लगभग 29 हजार से 45 हजार रुपये तक की लागत आई है। हालांकि, रुद्रचंद्र इसे और अधिक सुलभ बनाने पर काम कर रहे हैं, ताकि इसके छोटे आकार के मॉडल को लगभग 10 से 15 हजार रुपये की कम लागत में किसानों के लिए तैयार किया जा सके। आने वाले दिनों में उनका प्रयास है कि कम बारिश या जलसंकट की स्थिति में यह मॉडल उपलब्ध पानी के आधार पर किसानों को उपयुक्त फसल चुनने में भी मदद करे।

शिक्षा जगत में खुशी की लहर
शिक्षकों एवं अभिभावकों ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि रुद्रचंद्र ने अपनी जिज्ञासा और लगन को एक उपयोगी वैज्ञानिक प्रयोग में बदला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली इस सफलता से समाज और परिवार गौरवान्वित है। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावहारिक विज्ञान और नवाचार के नए अवसर प्रदान करना है।
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