मुजफ्फरपुर: बिहार विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। राष्ट्रीय जनता दल द्वारा इन सीटों पर एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को मैदान में न उतारने पर ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बिहार एवं मानवाधिकार संस्थान बिहार के महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने राजद नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इसे मुस्लिम बुद्धिजीवियों और शिक्षित मतदाताओं को फुसलाने वाला एक मात्र “लॉलीपॉप लेटर” और राजनीतिक पाखंड करार दिया है।

क्या है पूरा मामला?
बिहार विधान परिषद के 8 सीटों के चुनाव में राजद द्वारा शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से किसी भी मुस्लिम चेहरे को टिकट न दिए जाने के बाद पूरे बिहार के अल्पसंख्यकों और बुद्धिजीवियों में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है। विरोध की यह आग तब और भड़क उठी जब राजद के एक घरेलू कर्मचारी और तथाकथित मुस्लिम नेता ने यह बयान दिया कि “बुद्धिजीवी क्षेत्र से एक भी मुस्लिम उम्मीदवार नहीं मिला।” इस बयान के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या पूरे बिहार में एक भी शिक्षित, सक्षम और बुद्धिजीवी मुसलमान नहीं है?
मोहम्मद इश्तेयाक ने कड़े शब्दों में सवाल किया कि राष्ट्रीय स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का गठन सिर्फ सभाओं में मुसलमानों से दरी बिछाने और कुर्सी लगवाने के लिए किया जाता है क्या?

ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बिहार एवं मानवाधिकार संस्थान बिहार
राष्ट्रीय स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का गठन सिर्फ सभाओं में मुसलमानों से दरी बिछाने और कुर्सी लगवाने के लिए किया जाता है क्या? तेजस्वी यादव ने अपने सहयोगी संजय और एक गोल टोपी पहने हुए प्यादे को आदेश दिया था कि सभी जिलों में अल्पसंख्यक और सभी वर्गों में एक लिस्टेड बुद्धिजीवी कमेटी बनाई जाए और साल में दो बार बैठक कर फीडबैक लिया जाए। लेकिन कुंभकर्णी राजनीतिक निंद्रा के कारण आज तक न कोई कमेटी बनी और न ही कोई सुधि ली गई- मोहम्मद इश्तेयाक, महासचिव , ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस ए मुशावरत बिहार एवं मानवाधिकार संस्थान बिहार
कुंभकर्णी नींद और मास्टरस्ट्रोक का ढोंग
राज्य स्तर पर सुलग रहे इस आक्रोश को शांत करने और लीपापोती करने के लिए तेजस्वी यादव की ओर से एक लॉलीपॉप लेटर वाला मास्टरस्ट्रोक चलाया गया है। जानकारों का कहना है कि लगभग 5 महीने बाद कुंभकर्णी निंद्रा से जागे तेजस्वी यादव अब पत्रबाजी कर रहे हैं, लेकिन इससे नाराजगी कम होने वाली नहीं है।
मोहम्मद इश्तेयाक ने अपनी पिछली मुलाकातों का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने 16 सितंबर 2024 को हुई मुलाकात के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया था कि पार्टी में एक्टिविस्ट, विद्वान, स्कॉलर, बुद्धिजीवी, लॉ एक्सपर्ट और उच्च शिक्षित लोगों को उचित स्थान दिया जाए। उस मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव ने अपने सहयोगी संजय और एक गोल टोपी पहने हुए प्यादे को आदेश दिया था कि सभी जिलों में अल्पसंख्यक और सभी वर्गों में एक लिस्टेड बुद्धिजीवी कमेटी बनाई जाए और साल में दो बार बैठक कर फीडबैक लिया जाए। लेकिन कुंभकर्णी राजनीतिक निंद्रा के कारण आज तक न कोई कमेटी बनी और न ही कोई सुधि ली गई।

उर्दू और फारसी शिक्षकों की नियुक्ति पर भी साधा निशाना
211 डिग्री कॉलेजों में उर्दू, फारसी और अरबी शिक्षकों की नियुक्ति के मुद्दे पर बिहार के तमाम मिली एवं सामाजिक संगठनों, उर्दू बचाओ के क्रांतिकारी संगठनों तथा अल्पसंख्यक विधायकों, विधान पार्षदों और जनप्रतिनिधियों द्वारा राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के कई चक्कर लगाने और मांग पत्र सौंपने के बाद, लगभग 6 महीने बीत जाने पर अब तेजस्वी यादव की अल्पसंख्यक चेतना जागी है और उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

मोहम्मद इश्तेयाक ने तेजस्वी यादव को नेक मशविरा देते हुए कहा है कि वे अपने सलाहकार चेतना मंडल में दारू माफिया, बालू माफिया और जमीन माफिया को रखने के बजाए कभी-कभी विद्वानों और बुद्धिजीवियों की भी सुन लिया करें, ताकि समय रहते ज्वलंत और जीवंत मुद्दों पर पिछड़ने से बचा जा सके।
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