पटना : बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने एक और कार्रवाई करते हुए रिश्वत लेते पुलिस अधिकारी को पकड़ा है। औरंगाबाद जिला के रिसिएप थाना में पदस्थापित पुलिस अवर निरीक्षक उमेश कुमार को 50,000 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है।
केस से नाम हटाने और धाराएं कम करने के नाम पर मांग रहा था रिश्वत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिसिएप थाना क्षेत्र के गणपत तेन्दुआ गांव निवासी परिवादी लक्ष्मण राम (पिता- सरयू राम) ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी और उनके पड़ोसियों के बीच मारपीट का काउंटर केस दर्ज हुआ था। रिसिएप थाना कांड संख्या 159/26 (दिनांक 15.07.26) के अनुसंधानकर्ता पुलिस अवर निरीक्षक उमेश कुमार ने विपक्ष द्वारा दर्ज मुकदमे से परिवादी के दो बेटों का नाम हटाने, केस की कुछ धाराएं हटाने तथा रिश्वत न देने पर और धाराएं जोड़ने का भय दिखाकर 50,000 रुपये की मांग की थी।

निगरानी की टीम ने बिछाया जाल, रंगे हाथ दबोचा
शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग द्वारा मामले का सत्यापन कराया गया। सत्यापन के दौरान दरोगा द्वारा रिश्वत मांगे जाने का आरोप सही पाया गया। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (निगरानी) संतोष कुमार के नेतृत्व में एक विशेष धावा दल का गठन किया गया।
दिनांक 31.07.2026 को धावा दल ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की। जैसे ही परिवादी ने रिसिएप थाना के पीछे स्थित पंचायत भवन के सामने सड़क पर दरोगा उमेश कुमार को 50,000 रुपये दिए, निगरानी की टीम ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।

न्यायालय में किया जाएगा पेश
निगरानी थाना कांड संख्या 091/26 (दिनांक 30.07.2026) के तहत मामला दर्ज कर आरोपी पुलिस अधिकारी उमेश कुमार से पूछताछ की जा रही है। आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।
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