क्रांतिकारी नारों और कविताओं से गूंज उठा समस्तीपुर कॉलेज! जन संस्कृति मंच के सम्मेलन में आधी रात तक बंधी रही शेरो-शायरी की महफिल

समस्तीपुर, 27 सितंबर 2026 : जन संस्कृति मंच (जसम) के बिहार राज्य सम्मेलन के अवसर पर शनिवार की देर शाम समस्तीपुर कॉलेज भवन में आयोजित कवि गोष्ठी और मुशायरे ने शहर के सांस्कृतिक और वैचारिक माहौल में एक नया भूचाल ला दिया। फासीवादी सत्ताओं और जनविरोधी नीतियों पर तीखे प्रहार करती कविताओं, गज़लों और शेरो-शायरी की गूंज से पूरा सभागार आधी रात तक गूंजता रहा। इस भव्य और धमाकेदार सांस्कृतिक संध्या ने उपस्थित सभी साहित्य प्रेमियों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समस्तीपुर कॉलेज भवन में आयोजित सम्मेलन के दौरान कविता पाठ और विचार रखते हुए जसम के अनिल अंशुमन ।

सुमन कुमार सिंह की अध्यक्षता में सजा गोष्ठी का मंच

कार्यक्रम की अध्यक्षता जसम के राज्य सह सचिव सुमन कुमार सिंह ने की। उनकी देखरेख में आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या ने यह साबित कर दिया कि वैचारिक संघर्षों की धार तेज करने में कला, कविता और साहित्य की भूमिका सबसे अहम होती है। कार्यक्रम का संचालन और संयोजन भी बेहद प्रभावी रहा, जिसने श्रोताओं को अपनी सीटों से हिलने नहीं दिया।

फासीवादी सत्ता पर प्रहार: बुलडोजर वाली कविता ने बटोरी सुर्खियां

कवि गोष्ठी के दौरान एक से बढ़कर एक क्रांतिकारी और विद्रोही रचनाएं पेश की गईं। गोष्ठी का सबसे बड़ा आकर्षण डॉ. प्रभात कुमार की वह कविता रही, जिसमें उन्होंने मौजूदा फासीवादी सत्ता पर अत्यंत करारा प्रहार किया। उनकी इन पंक्तियों—

“इसके पहले कि तेरा घर टूटे / चोर हत्यारा तुमको लूटे / तोड़ दो इसका अंजर-पंजर / नहीं हो तुम मदारी के बंदर।”

—ने श्रोताओं के रोंगटे खड़े कर दिए और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

इसके अलावा, मदन कश्यप की चर्चित कविता “चांद क्यों नज़्म”, अनिल अंशुमन की झकझोर देने वाली रचना “क्यों जल रहे हैं रोज मकानात शहर में”, और कौशल किशोर की भावुक कर देने वाली प्रस्तुति “एक पिता का ब्यान” ने लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। वहीं दूसरी ओर, मो. सगीर के मुशायरे और बेहतरीन कलाम ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया और उनकी प्रस्तुति को उपस्थित जनसमूह से जबरदस्त सराहना मिली।

समस्तीपुर कॉलेज भवन में आयोजित जन संस्कृति मंच के बिहार राज्य सम्मेलन के दौरान सांस्कृतिक संध्या में उपस्थित श्रोता, साहित्य-प्रेमी और प्रतिनिधि।

25 से अधिक कवियों और शायरों ने दी प्रस्तुतियां

इस वृहद आयोजन में बिहार भर से आए 25 से अधिक नामचीन कवियों, शायरों और गीतकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ किया। कविता, गजल और शेरो-शायरी की इस बहुआयामी और विविध प्रस्तुति ने सम्मेलन की सांस्कृतिक संध्या को अविस्मरणीय और एतिहासिक बना दिया। इस सत्र में भारी संख्या में साहित्य-प्रेमी, क्रांतिकारी सांस्कृतिक कार्यकर्ता एवं सम्मेलन के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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