Saturday, March 7, 2026
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नैनीताल में आयोजित अंतरराज्यीय युवा कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर का डंका, लोकनृत्य में मिला प्रथम पुरस्कार

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नैनीताल/मुजफ्फरपुर: युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) के तत्वावधान में नैनीताल में आयोजित पाँच दिवसीय अंतर-राज्यीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य समापन हुआ। इस प्रतिष्ठित आयोजन में बिहार के पाँच जिलों—मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, वैशाली और पटना—के 35 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

समापन समारोह में बिहार की सांस्कृतिक विरासत ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में बिहार की लोक संस्कृति पर आधारित झिझिया, छठ और सामा चकेवा जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की शानदार प्रस्तुति देने के लिए मुजफ्फरपुर की टीम को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इन प्रतिभागियों ने बढ़ाया मान मुजफ्फरपुर टीम की इस बड़ी उपलब्धि में शुभम रानी, विनीत कुमार सिंह, प्रिंस कुमार, संजीत कुमार, गौतम कुमार झा, विकाश कुमार और विवेक कुमार शामिल थे। टीम का नेतृत्व एस्कॉर्ट चंदन कुमार ने किया।

विधायक ने किया सम्मानित कार्यक्रम के अंतिम दिन आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में नैनीताल की विधायक श्रीमती सरिता आर्या और सांसद प्रतिनिधि गोपाल सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अतिथियों ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।

कार्यक्रम की उप निदेशक (MY Bharat, नैनीताल) डॉल्वी तेवतिया ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और बिहार के युवाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन और सांस्कृतिक योगदान की जमकर प्रशंसा करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

UGC गाइडलाइन पर रोक के खिलाफ समस्तीपुर में छात्रों का आक्रोश, निकाला गया प्रतिवाद मार्च

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समस्तीपुर, 13 फरवरी 2026, UGC की गाइडलाइन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के विरोध में शुक्रवार को समस्तीपुर में छात्र संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा। RYA (रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन), AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) और बहुजन छात्र संगठनों के संयुक्त बैनर तले एक विशाल प्रतिवाद मार्च निकाला गया।

शहर के मुख्य मार्गों से गुजरा मार्च छात्रों का यह मार्च शहर के स्टेडियम गोलंबर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों का भ्रमण करते हुए कर्पूरी स्मारक स्थल पहुँचा, जहाँ यह एक जनसभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारी छात्र हाथों में बैनर लिए हुए थे और केंद्र सरकार व सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे।

प्रमुख मांगें प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से उठाईं:

  • UGC गाइडलाइन पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए।
  • शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर पूर्ण रोक लगे।
  • शैक्षणिक परिसरों में ‘रोहित एक्ट’ लागू किया जाए।

यह बहुजनों के साथ अन्याय” सभा को संबोधित करते हुए AISA के जिला अध्यक्ष लोकेश राज ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब EWS आरक्षण लाया गया, तो कोई PIL दाखिल नहीं हुई और तुरंत 10 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया गया। लेकिन जब UGC ने बहुजनों के हक में गाइडलाइन जारी की, तो केंद्र सरकार के इशारे पर PIL दाखिल कर आनन-फानन में रोक लगवा दी गई। यह बहुजन छात्रों के साथ सीधा अन्याय है। जब तक यह गाइडलाइन बहाल नहीं होगी, संघर्ष जारी रहेगा।”

AISA के जिला उपाध्यक्ष दीपक यदुवंशी ने कहा कि इस फैसले के खिलाफ अब स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी से लेकर गांव-टोले तक छात्रों को गोलबंद कर बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा।सभा की अध्यक्षता लोकेश राज और संचालन दीपक यदुवंशी ने किया। इस दौरान भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राजद के जगदीश चौपाल, कांग्रेस के विश्वनाथ सिंह हजारी समेत विभिन्न छात्र नेताओं ने सभा को संबोधित किया।

सकरा में ग्रामीण चिकित्सकों की हुंकार: कम खर्च में बेहतर इलाज और समाज सेवा का लिया संकल्प

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सकरा (मुजफ्फरपुर), 12 फरवरी 2026: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से आज सकरा प्रखंड में ग्रामीण चिकित्सकों का एक बड़ा समागम हुआ। सकरा वाजिद पंचायत के जहांगीरपुर मार्ग स्थित विजन वैली हॉल में ग्रामीण चिकित्सक एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित इस बैठक में चिकित्सा जगत की चुनौतियों और सेवा भाव पर विस्तृत चर्चा की गई।

सस्ता और सुलभ इलाज ही प्राथमिकता

बैठक का मुख्य एजेंडा ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं को आम आदमी की जेब के अनुकूल बनाना रहा। उपस्थित चिकित्सकों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि समाज के गरीब और पिछड़े वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना उनकी पहली प्राथमिकता है।

बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ चिकित्सकों ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल उपचार करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक तंगी के कारण कोई भी ग्रामीण बेहतर चिकित्सा से वंचित न रहे। हम कम से कम खर्च में प्रभावी इलाज के मॉडल पर काम कर रहे हैं।”

अग्निकांड पीड़ितों की मदद कर पेश की मानवता की मिसाल

यह बैठक केवल चिकित्सा चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि संगठन की सामाजिक प्रतिबद्धता भी खुलकर सामने आई। हाल ही में क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड का जिक्र करते हुए एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि संगठन ने सक्रिय रूप से पीड़ितों की सहायता की है।

संकट की इस घड़ी में चिकित्सकों की टीम ने प्रभावित परिवारों के बीच पहुँचकर उन्हें मुफ्त दवाइयां, वस्त्र, कंबल और भोजन की आवश्यक सामग्री वितरित की। चिकित्सकों ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी किसी भी प्राकृतिक आपदा या संकट के समय पूरा संगठन एकजुट होकर राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगा।

इन चिकित्सकों ने साझा किए विचार

इस संवाद और संकल्प सभा में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित चिकित्सक शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. राजेश कुमार, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. गणेश कुमार राय, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. चंद्रकिशोर, डॉ. रवि कुमार, डॉ. संजीव कुमार, डॉ. हेमंत कुमार, डॉ. मुनचुन कुमार, संगीता कुमारी और डॉ. रितिक कुमार उपस्थित रहे।

आगामी रणनीति: गाँव-गाँव लगेंगे मुफ्त जांच शिविर

बैठक के समापन पर एसोसिएशन ने घोषणा की कि आने वाले दिनों में प्रखंड के विभिन्न दूरदराज के गांवों में मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान करना और लोगों को स्वच्छता व बचाव के प्रति जागरूक करना है। सभी चिकित्सकों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर समाज सेवा को अपने पेशे का मूल मंत्र बनाने की शपथ ली।

गंगा-कोसी संगम पर गूंजा ‘गांधी अमर रहे’, अस्थि विसर्जन की 78वीं वर्षगांठ पर उमड़ा जनसैलाब

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कुर्सेला (कटिहार) | 12 फरवरी, 2026

बिहार के कटिहार जिले के कुर्सेला में आज श्रद्धा, संकल्प और गांधीवादी विचारधारा का एक अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिला। अवसर था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अस्थि भस्म विसर्जन के 78वें पुण्य स्मृति दिवस का। गंगा-कोसी के मिलन स्थल पर आयोजित इस समारोह ने न केवल बापू की शहादत को नमन किया, बल्कि उनके ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को वर्तमान संदर्भ में फिर से परिभाषित करने का प्रयास भी किया।

प्रभात फेरी: जन-जन तक पहुँचा गांधी का संदेश

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह अत्यंत गरिमामयी ढंग से हुई। कुर्सेला स्थित ऐतिहासिक गांधी आश्रम से एक भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। इसमें सैकड़ों की संख्या में गांधीवादी कार्यकर्ता, स्थानीय ग्रामीण और युवा शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए और ‘गांधी अमर रहे’ के नारों के साथ यह पदयात्रा तीनघरिया गांव के मुख्य मार्गों से गुजरी। गांव की गलियां ‘रघुपति राघव राजा राम’ के मधुर भजनों से गूंज उठीं। प्रभात फेरी का समापन गंगा के तट पर हुआ, जहाँ से सभी नावों के माध्यम से पवित्र गंगा-कोसी संगम के बीचों-बीच पहुंचे। वहां प्रवाहित जलधारा के बीच बापू के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया और उन्हें कोटि-कोटि नमन किया गया।

श्रद्धांजलि सभा: “गांधी का ग्राम स्वराज ही बचाएगा संविधान”

संगम पर जल तर्पण के पश्चात गांधी आश्रम परिसर में एक विशाल श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शंकर सन्याल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक शाश्वत विचार हैं।

स्वागत संबोधन और वैचारिक विमर्श: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कुर्सेला की इस धरती के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार मंडल ने प्रस्तुत की। उन्होंने गांधीजी के सिद्धांत और दर्शन को आज की अराजकता के दौर में एकमात्र विकल्प बताया। मंच का कुशल संचालन संजय भाई द्वारा किया गया।

प्रमुख वक्ताओं के विचार: जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की कार्यकारिणी सदस्य ललिता कुमारी और राष्ट्र सेवा दल के जिला कार्याध्यक्ष रविन्द्र पासवान ने संयुक्त रूप से वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि:

“आज जब दुनिया कट्टरता और हिंसा की ओर बढ़ रही है, तब गांधी का ग्राम स्वराज और कुटीर उद्योग ही भारतीय संविधान की मूल भावना की रक्षा करेगा। गैर-बराबरी, अशिक्षा, बेरोजगारी और सामाजिक अराजकता को दूर कर न्याय व समता पर आधारित समाज का निर्माण गांधीवादी रास्ते से ही संभव है।”

समाज के हर वर्ग की भागीदारी (प्रमुख उपस्थित जन)

इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इसे एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित लोगों ने भाग लेकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की:

  • प्रमुख नेतृत्व: गांधी आश्रम के अध्यक्ष महेश राय, मुखिया ललन राम, पंच सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष किरण देव यादव, विकास पथ बिक्रम के सचिव सत्येंद्र शांडिल्य।
  • सक्रिय भागीदारी: अतुल भाई, सुजान भाई, विजय भाई (जिनका तिरंगा झंडा के साथ विशेष आउटलुक चर्चा का विषय रहा), आशुतोष कुमार और श्याम भाई (जिन्होंने स्वच्छता का संदेश दिया)।
  • महिला शक्ति की अभूतपूर्व उपस्थिति: कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी विशेष रही, जिनमें रुक्मिणी साहा, राजो देवी, इसरत खातून, रातो देवी, मिर्जा देवी, मंजू वर्मा, रुक्मिणी देवी, मंजू देवी, प्रियंका देवी, हीरा देवी, कंचन देवी, नीरा देवी, रेखा देवी, रीता देवी और गायत्री कुमारी प्रमुख थीं।

गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बापू को नमन

कार्यक्रम केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोक कलाओं के माध्यम से भी बापू के प्रति प्रेम प्रदर्शित किया गया। सुनील कुमार ने जब जनगीत वक्त की आवाज है मिलके चलो, मिलकर बढ़ो” प्रस्तुत किया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं श्याम भाई ने अपने गांधीवादी पहनावे और अंदाज से बापू के स्वच्छता अभियान को जीवंत कर दिया।

सांस्कृतिक संध्या: देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा बिखेरी। चांदनी कुमारी, चंदा कुमारी, संदीप कुमार, आशीष कुमार, मुस्कान कुमारी, संगीता कुमारी, बबीता कुमारी, नीतू कुमारी, जिन्नत परवीन, गायत्री कुमारी, रितु कुमारी और नेहा कुमारी ने लोकगीत, संगीत और नृत्य की ऐसी त्रिवेणी बहाई कि श्रोता उसमें गोते लगाते नजर आए। इन गीतों में शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश छिपा था। कुर्सेला की मिट्टी में आज भी बापू के विचार रचे-बसे हैं और नई पीढ़ी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है।

शांति और सद्भाव की प्रासंगिकता :कार्यक्रम के समापन पर रविन्द्र पासवान ने पुनः दोहराया कि गांधीजी का दर्शन—सत्य, अहिंसा, सेवा, करुणा, दया, प्रेम, भाईचारा, शांति और सद्भाव—आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। जब तक समाज में अंतिम व्यक्ति का उदय नहीं होगा, तब तक गांधी का सपना अधूरा है।

ताजपुर में राष्ट्रीय आम हड़ताल का व्यापक असर, सड़कों पर उतरे किसान-मजदूर

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ताजपुर/समस्तीपुर | 12 फरवरी 2026

संयुक्त श्रम-किसान-मजदूर संगठनों के आह्वान पर गुरुवार को देशव्यापी आम हड़ताल का ताजपुर प्रखंड में व्यापक असर देखा गया। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में ताजपुर के  किसान, मजदूर और कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कार्यकर्ताओं ने ताजपुर गांधी चौक से एक जुलूस निकालकर पूरे बाजार क्षेत्र का भ्रमण किया और अंत में प्रखंड मुख्यालय चौक पर जोरदार प्रदर्शन व सभा की।

विशाल जुलूस और प्रदर्शन

गुरुवार की सुबह भाकपा माले, भाकपा और एसयूसीआई (C) से जुड़े कार्यकर्ताओं का जुटान स्थानीय गांधी चौक पर हुआ। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में पार्टी के झंडे, बैनर और सरकार विरोधी नारों लिखी तख्तियां लिए हुए थे। जुलूस में ‘ट्रेड डील रद्द करो’, ‘चारों श्रम कोड वापस लो’ और ‘किसानों को एमएसपी (MSP) दो’ जैसे नारे गूंज रहे थे। बाजार भ्रमण करते हुए जुलूस प्रखंड मुख्यालय के राजधानी चौक पहुंचा, जहां केंद्र व राज्य सरकार के किसान-मजदूर विरोधी रवैये के खिलाफ जमकर आक्रोश प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ता सड़क किनारे धरने पर बैठ गए।

सभा की अध्यक्षता और संचालन

सभा की अध्यक्षता भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, भाकपा अंचल सचिव रामप्रीत पासवान और एसयूसीआई के जिला संयोजक चंद्रशेखर राय ने संयुक्त रूप से की। वहीं, सभा का सफल संचालन भाकपा के रामबृक्ष राय, किसान महासभा के ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह एवं खेग्रामस के प्रभात रंजन गुप्ता ने किया।

नेताओं ने बुलंद की मांगें

अपने अध्यक्षीय संबोधन में माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि आंदोलनकारी पुरानी पेंशन योजना बहाली, निजीकरण पर रोक, श्रमिकों की योजनाओं में धांधली बंद करने, दैनिक मजदूरी 700 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, तिरहुत नहर परियोजना में अधिग्रहित जमीन एवं मकान का वर्तमान सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा, आशा-रसोईया, सेविका-सहायिका और आपदा मित्रों को राज्य कर्मचारी घोषित करने एवं मानदेय 21,000 रुपये करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

भाकपा के रामप्रीत पासवान ने कहा कि काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 करने वाले और यूनियन बनाने का अधिकार खत्म करने वाले मजदूर विरोधी चार श्रम कोड स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

एसयूसीआई के चंद्रशेखर राय ने इस ऐतिहासिक हड़ताल को सफल बनाने के लिए ताजपुर वासियों का आभार व्यक्त किया।

इन्होंने किया संबोधित और दी उपस्थिति : सभा को संबोधित करने वालों में भाकपा के मो० अलाउद्दीन, मनोज राय, राजेश कुमार, गीता देवी, नगीना राम, एसयूसीआई के पलटन साह, लाल बाबू राय, उपेंद्र राय, फूलो राय, रौशन कुमार, परमेश्वर राय, लाल बहादुर राय, रामेश्वर राय, मो० फूलहसन शामिल थे।

भाकपा माले की ओर से आसिफ होदा, शंकर महतो, मो० एजाज, राजदेव प्रसाद सिंह, मुंशीलाल राय, मुकेश कुमार गुप्ता, मो० गुलाब, मोतीलाल सिंह, महावीर सिंह, मो० अबुबकर, अरविंद कुमार, संजय कुमार सिंह, शत्रुघन सिंह ने सभा को संबोधित किया।

इसके अतिरिक्त, बिहार राज्य आशा संघ की सविता सिंह, रंजू कुमारी, शोभा कुमारी, गीता देवी, मंजू देवी, अनीता कुमारी, सविता कुमारी, विंदू कुमारी और बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ की शिव कुमारी देवी, गिरजा देवी ने भी अपनी मांगों के समर्थन में सभा को संबोधित किया।

विधि का विधान: “जब मुहूर्त भी न बदल सके राम का वनवास, तो आपका भाग्य कैसे बदलेंगे अनुष्ठान?”

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धर्म के नाम पर फैले डर से मुक्ति ही सच्ची साधना है: सहजता में ही ईश्वर है”

आध्यात्मिक डेस्क (न्यूज़ भारत टीवी): आज का मनुष्य तकनीक के शिखर पर बैठकर भी आंतरिक रूप से उतना ही भयभीत और असुरक्षित है। इसी असुरक्षा की कोख से जन्म लेता है—’पाखंड’। आज धर्म के नाम पर बाहरी आडंबरों, ज्योतिषीय गणनाओं और तथाकथित चमत्कारों का एक ऐसा मायाजाल बुना जा चुका है, जिसमें फंसा सामान्य व्यक्ति अपने विवेक की शक्ति खो बैठा है। लेकिन सनातन दर्शन का एक शाश्वत सत्य हमें झकझोरता है—विधि का विधान। क्या हम वास्तव में अनुष्ठानों से उस नियति को बदल सकते हैं, जिसे स्वयं ईश्वर के अवतारों ने स्वीकार किया?

मुहूर्त की मर्यादा और अवतारों का मौन

भारतीय संस्कृति में काल गणना का अपना महत्त्व है, किंतु क्या कोई मुहूर्त ईश्वरीय इच्छा से ऊपर हो सकता है? मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन की दो सबसे बड़ी घटनाएं—विवाह और राज्याभिषेक—इसका जीवंत प्रमाण हैं। कुलगुरु वशिष्ठ जैसे त्रिकालदर्शी ऋषि ने राज्याभिषेक का ‘सर्वश्रेष्ठ’ मुहूर्त निकाला था, किंतु उस मुहूर्त ने राम को सिंहासन नहीं, बल्कि 14 वर्ष का वनवास दिया। माता सीता के साथ विवाह भी शुभ लग्न में हुआ, किंतु नियति ने उन्हें वियोग की अग्नि में झोंक दिया।

जब भरत अत्यंत शोकाकुल होकर गुरुदेव के पास पहुंचे, तब वशिष्ठ जी ने एक कालजयी सत्य कहा था:

सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहु मुनिनाथ। लाभ हानि जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ॥”

अर्थात, जो नियति ने निर्धारित कर दिया है, उसे टालना असंभव है। जब साक्षात ब्रह्म (राम) की नियति उनके द्वारा तय मुहूर्त के अनुसार नहीं चली, तो हम साधारण मनुष्य बाहरी कर्मकांडों के पीछे भागकर किसे चुनौती दे रहे हैं?

महाशक्तियों की विवशता या प्रकृति का अनुशासन?

इतिहास साक्षी है कि संसार की महानतम विभूतियों ने भी प्रकृति के नियमों में हस्तक्षेप नहीं किया। भगवान शिव, जो स्वयं ‘महामृत्युंजय’ हैं, माता सती की मृत्यु को नहीं टाल सके। योगेश्वर श्रीकृष्ण ने सब कुछ जानते हुए भी गांधारी के श्राप को स्वीकार किया और अपने कुल का विनाश तथा स्वयं का अंत भी उसी सहजता से स्वीकार किया।

सिख गुरुओं—गुरु अर्जुन देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक—ने भीषण कष्ट झेले, बलिदान दिए, पर ‘हुकुम’ (ईश्वरीय आदेश) को सिर माथे रखा। आधुनिक युग में रामकृष्ण परमहंस ने कैंसर जैसी व्याधि को शरीर का प्रारब्ध मानकर सहा। विचारणीय है कि जब ये महाशक्तियां अपनी नियति के आगे मौन रहीं, तो आज का ‘बाजारू धर्म’ कुछ रुपयों के दान या पत्थरों को पहनने से भाग्य बदलने का दावा कैसे कर सकता है?

प्रारब्ध का गणित: क्या है पूर्व-निर्धारित?

सनातन धर्म के अनुसार, मनुष्य का वर्तमान जीवन उसके पूर्व जन्मों के संचित कर्मों का परिणाम है। इसे ‘प्रारब्ध’ कहा जाता है। मान्यता है कि जन्म के साथ ही पांच चीजें निश्चित हो जाती हैं: आयु, कर्म, धन, विद्या और मृत्यु। जब यह ढांचा पूर्व-निर्धारित है, तो मनुष्य का डर और उसके पीछे का आडंबर उसकी अज्ञानता को ही दर्शाता है। असली आध्यात्मिकता हमें निर्भय बनाती है, जबकि पाखंड हमें मानसिक रूप से अपाहिज बनाता है।

कर्म ही एकमात्र विकल्प: फल की चिंता क्यों?

श्रीमद्भगवद्गीता का मर्म ‘कर्म’ है। श्रीकृष्ण कहते हैं—कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”। इसका गहरा अर्थ यह है कि परिणाम तुम्हारे नियंत्रण में नहीं है, केवल ‘कर्म’ ही तुम्हारे अधिकार क्षेत्र में है। जो बीत गया वह प्रारब्ध था, जो हो रहा है वह नियति है, लेकिन आप जो ‘कर रहे हैं’, वही आपका भविष्य है।

कर्म ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाता है। एक व्यक्ति जो दीन-दुखियों की सेवा करता है, वह उस व्यक्ति से कहीं श्रेष्ठ है जो भय के कारण घंटों मंदिर में बैठकर कर्मकांडों में उलझा रहता है। मानवता का कल्याण बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धता में है।

सहजता ही सच्ची साधना है : जीवन का अर्थ कर्मकांडों की जटिलता में नहीं, बल्कि सहजता में है। जब न जन्म हमारे हाथ में था और न मृत्यु का समय हमारे वश में है, तो बीच के इस छोटे से जीवन को पाखंड के बोझ तले क्यों दबाना ? संदेश स्पष्ट है,  सरल बनें, सहज रहें। भय को त्यागकर ‘सत्कर्म’ को अपनाएं। आडंबरों के जाल से निकलकर विवेक की मशाल जलाएं। क्योंकि अंततः, नियति के पन्ने पर आपकी ईमानदारी और सेवाभाव ही स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। शेष सब कुछ तो समय के प्रवाह में विलीन हो जाना है।

MLC वंशीधर ब्रजवासी ने गृह मंत्री को लिखा पत्र : सरपंच को अधमरा करने वाले ‘दागी थानेदार’ की बर्खास्तगी की मांग

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बिहार में खाकी का तालिबानीचेहरा: अवैध वसूली का वीडियो बनाने पर सरपंच का पैर तोड़ा, पत्नी को भी पीटा; SKMCH में जिंदगी की जंग लड़ रहे जनप्रतिनिधि

रिपोर्ट: मुजफ्फरपुर/पटना 10 फरवरी, 2026

बिहार में सुशासन के दावों और ‘फ्रेंडली पुलिसिंग’ के नारों के बीच मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने लोकतंत्र के स्तंभ और जन-प्रतिनिधित्व की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। बांद्रा प्रखंड के बड़गांव पंचायत के सरपंच लालबाबू सहनी पर पुलिस द्वारा किए गए जानलेवा हमले ने अब एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक आंदोलन का रूप ले लिया है। इस मामले में बिहार विधान परिषद के सदस्य (MLC) वंशीधर ब्रजवासी ने सीधे राज्य के गृह मंत्री को पत्र लिखकर व्यवस्था की चूलें हिला दी हैं।


MLC वंशीधर ब्रजवासी का कड़ा रुख: सीधे गृह मंत्री को पत्र लिखकर किया सुलगते सवाल

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के एमएलसी वंशीधर ब्रजवासी ने इस घटना को मात्र एक ‘मारपीट’ नहीं, बल्कि सत्ता के नशे में चूर खाकी द्वारा लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। उन्होंने गृह मंत्री को भेजे गए अपने पत्र में सीधे तौर पर पुलिस की कार्यशैली को कठघरे में खड़ा किया है।

एमएलसी ने पत्र में पुलिसिया बर्बरता को रेखांकित किया है — क्या बिहार में पुलिस अब रक्षक से भक्षक बन चुकी है?” उन्होंने पत्र के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी है कि यदि एक निर्वाचित सरपंच के साथ सरेआम ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है। ब्रजवासी ने अपने पत्र में पीयर थानाध्यक्ष रजनीकांत को सनकी और आदतन अपराधी स्वभाव का व्यक्ति बताते हुए उनकी तत्काल बर्खास्तगी और संपत्ति की जांच की मांग की है।


क्या है पूरी घटना? भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बनी सजा

घटना की शुरुआत 6 फरवरी 2026 को मुजफ्फरपुर के बांद्रा प्रखंड स्थित बड़गांव चौक पर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित परिवार के अनुसार, उस दिन स्थानीय पुलिस बल सड़क पर वाहनों से ‘अवैध वसूली’ में व्यस्त था। बड़गांव पंचायत के सरपंच लालबाबू सहनी, जो क्षेत्र में अपनी ईमानदारी और जुझारूपन के लिए जाने जाते हैं, वहां से गुजर रहे थे।

जब उन्होंने पुलिस को खुलेआम वसूली करते देखा, तो उन्होंने एक जागरूक नागरिक और जनप्रतिनिधि होने का कर्तव्य निभाते हुए अपने मोबाइल फोन से इस ‘काली कमाई’ का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। यही वह पल था जब खाकी का अहंकार जाग गया। आरोप है कि पीयर थानाध्यक्ष रजनीकांत ने आव देखा न ताव, अपने चालक और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर सरपंच पर भेड़ियों की तरह हमला कर दिया।


अमानवीयता की पराकाष्ठा: सरपंच का पैर तोड़ा, पत्नी पर भी बरसी लाठियां

पुलिस की बर्बरता यहीं नहीं रुकी। सरपंच को सड़क पर घसीटकर पीटा गया। एमएलसी के पत्र के अनुसार, थानाध्यक्ष ने कानून की धज्जियां उड़ाते हुए लालबाबू सहनी का पैर तोड़ दिया। उनके पूरे शरीर पर गहरे जख्म के निशान पुलिसिया वहशियत की गवाही दे रहे हैं।

जब सरपंच की पत्नी अपने पति को मौत के मुंह से खींचने के लिए गुहार लगाती हुई बीच-बचाव करने पहुंची, तो वर्दीधारियों ने अपनी मर्यादा को ताक पर रख दिया। उन पर भी लाठियों और डंडों से हमला किया गया, जिससे वह भी गंभीर रूप से चोटिल हो गईं। एक महिला और जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा व्यवहार समाज के माथे पर कलंक की तरह है।


अस्पताल में मौत से जंग: SKMCH में पसरा सन्नाटा

वर्तमान में सरपंच लालबाबू सहनी मुजफ्फरपुर के श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (SKMCH) में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अधिक खून बहने और गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण वह आईसीयू में जीवन और मौत के बीच झूल रहे हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद से ही स्थानीय पुलिस प्रशासन मामले को दबाने और समझौते का दबाव बना रहा है।


थानाध्यक्ष रजनीकांत: विवादोंसे पुराना नाता

एमएलसी वंशीधर ब्रजवासी ने अपने पत्र में इस बात का विशेष उल्लेख किया है कि थानाध्यक्ष रजनीकांत कोई नए विवाद में नहीं फंसे हैं। उनका इतिहास रहा है कि वे जहां भी तैनात रहे, वहां उन पर भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और आम नागरिकों के साथ अमानवीय व्यवहार के आरोप लगते रहे हैं। ब्रजवासी ने सवाल उठाया कि ऐसे ‘दागी’ और ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ अधिकारी को थाने की कमान सौंपकर सरकार आखिर क्या हासिल करना चाहती है?


एमएलसी की 4 सूत्रीय धारदारमांगें:

वंशीधर ब्रजवासी ने अपने पत्र में सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं, जिन पर वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं:

  1. बर्खास्तगी और FIR: थानाध्यक्ष रजनीकांत और उनके सभी सहयोगी पुलिसकर्मियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त किया जाए और उन पर ‘हत्या के प्रयास’ के तहत प्राथमिकी दर्ज हो।
  2. संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच: अवैध वसूली के आरोपों की पुष्टि के लिए इन पुलिसकर्मियों की आय से अधिक संपत्ति की जांच राज्य की विजिलेंस टीम से कराई जाए।
  3. स्पीडी ट्रायल: इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए।
  4. मुआवजा और सुरक्षा: पीड़ित सरपंच के परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

राजनीतिक गलियारे में उबाल: क्या गिरेगी गाज?

इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक हड़कंप मच गया है। विपक्षी दलों ने भी इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस मामले में त्वरित कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सरकार के ‘सुशासन’ के चेहरे पर एक गहरा दाग साबित होगा।

एमएलसी ब्रजवासी ने साफ कर दिया है कि यह केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र के खिलाफ जंग है जो वर्दी की आड़ में गुंडागर्दी करता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही  संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेंगे।


साख की कसौटी पर बिहार पुलिस

मुजफ्फरपुर की यह घटना बिहार पुलिस की साख के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। क्या एक सरपंच को सिर्फ इसलिए लहूलुहान कर दिया जाएगा क्योंकि उसने भ्रष्टाचार का वीडियो बनाया? क्या वर्दी का मतलब किसी की भी हड्डियां तोड़ने का लाइसेंस है?

अब पूरी जनता की नजरें बिहार के गृह मंत्रालय पर टिकी हैं। क्या ‘दागी’ थानेदार पर गाज गिरेगी या खाकी अपने ही भ्रष्ट तंत्र को बचाने के लिए ढाल बनेगी? यह मामला आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति और प्रशासनिक सुधारों की दिशा तय करेगा।

शिक्षा की नई किरण: सरायरंजन की दलित बस्ती में सामुदायिक बालिका शिक्षा केंद्र का आगाज

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नगर पार्षद ने कहा- हाशिए पर खड़े परिवारों के लिए वरदान साबित होगा नि:शुल्क केंद्र

सरायरंजन, समस्तीपुर। 9 फरवरी, 2026 संवाददाता

सरायरंजन प्रखंड के किसनपुर यूसुफ पंचायत स्थित वार्ड संख्या 14 की दलित बस्ती में सोमवार को उम्मीदों का नया सवेरा हुआ। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र (अख्तियारपुर) और अंतर्राष्ट्रीय संस्था क्राई-चाइल्ड राइट्स एंड यू (CRY) के साझा प्रयासों से यहाँ एक नि:शुल्क सामुदायिक बालिका शिक्षा केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र विशेष रूप से उन बालिकाओं को समर्पित है, जो किन्हीं कारणों से मुख्यधारा की शिक्षा से दूर रह गई हैं।

भव्य उद्घाटन और दीप प्रज्वलन

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ सरायरंजन नगर पंचायत की मुख्य पार्षद पूजा कुमारी, वार्ड सदस्य गौतम कुमार पासवान, उप सरपंच पवन कुमार झा, ‘पैरवी’ नई दिल्ली की जिला संयोजक विभा कुमारी और अवकाश प्राप्त शिक्षक कमल पासवान द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि से इस पहल का स्वागत किया।

नगर पंचायत में विस्तार की मांग

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य पार्षद पूजा कुमारी ने संस्था के कार्यों की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज भी समाज का एक बड़ा हिस्सा संसाधनों के अभाव में शिक्षा से कोसों दूर है। उन्होंने संस्था के प्रतिनिधियों से आग्रह करते हुए कहा, “नगर पंचायत सरायरंजन के अंतर्गत ऐसे कई टोले हैं, जहाँ दलित और महादलित समुदाय के गरीब बच्चे, विशेषकर बालिकाएं शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। मेरी मांग है कि संस्था अपनी सेवाओं का विस्तार करें और उन चिन्हित टोलों में भी शिक्षा केंद्र खोले ताकि कोई भी बेटी निरक्षर न रहे।”

शिक्षा: सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम

विशिष्ट अतिथि और नई दिल्ली से आईं जिला संयोजक विभा कुमारी ने कहा कि शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि आत्मसम्मान से जीने का जरिया है। जीविका की अजीना प्रवीण और प्रधानाचार्य मोहम्मद गुफरान ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को घरेलू कामों के बोझ से मुक्त कर प्रतिदिन केंद्र भेजें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब एक बेटी पढ़ती है, तो दो परिवारों का भविष्य संवरता है।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

कार्यक्रम की अध्यक्षता अवकाश प्राप्त शिक्षक कमल पासवान ने की, जबकि मंच संचालन दिनेश प्रसाद चौरसिया ने कुशलतापूर्वक किया। इस अवसर पर संस्था की सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट किरण कुमारी, ललिता कुमारी, रविंद्र पासवान और बलराम चौरसिया ने केंद्र की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला।

समारोह में रामप्रीत चौरसिया, पंच सदस्य शांति देवी, अर्जुन पासवान, पंच सदस्य माया कुमारी, सामुदायिक शिक्षक अमित कुमार राम और शिक्षक विनोद कुमार ने भी अपने विचार रखे। स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अंजू गुप्ता, सेविका मीना कुमारी और महेसरी पासवान सहित दर्जनों ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

बस्ती में उत्साह का माहौल

केंद्र के खुलने से दलित बस्ती के परिवारों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सामुदायिक शिक्षक अमित कुमार राम ने बताया कि यह केंद्र केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहाँ बालिकाओं के सर्वांगीण विकास, उनके स्वास्थ्य और अधिकारों के प्रति जागरूकता पर भी काम किया जाएगा।

‘मेरा युवा भारत’: नैनीताल में बिहार के युवाओं ने बिखेरी चमक, सीख रहे कुमाऊँनी ‘ऐपण’ कला

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नैनीताल/मुजफ्फरपुर। ‘मेरा युवा भारत’ कार्यक्रम के तहत उत्तराखंड के नैनीताल में 9 से 13 फरवरी तक आयोजित पांच दिवसीय अंतर्राज्यीय युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम का भव्य आगाज हुआ। इस कार्यक्रम में बिहार की समृद्ध संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य भर से कुल 37 प्रतिभागियों का चयन किया गया है, जिसमें मुजफ्फरपुर जिले के 7 प्रतिभागी और 1 एस्कॉर्ट शामिल हैं।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ भव्य शुभारंभ

कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि नैनीताल नगर पालिका की चेयरमैन सरस्वती खेतवाल, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति दीवान सिंह रावत और जिला युवा अधिकारी डॉलवी तेवतिया ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। उद्घाटन सत्र में अतिथियों ने बिहार से आए युवाओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और बताया कि कैसे ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हैं।

पारंपरिक ऐपणकला बनी आकर्षण का केंद्र

उद्घाटन के बाद आयोजित दूसरे सत्र में प्रतिभागियों ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध पारंपरिक कला ऐपण‘ (कुमाऊनी पेंटिंग) के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों ने युवाओं को ऐपण की उत्पत्ति, इसकी बारीकियों और सांस्कृतिक महत्व से रूबरू कराया। मुजफ्फरपुर सहित बिहार के अन्य जिलों से आए युवाओं ने न केवल इस कला को करीब से देखा, बल्कि कलाकारों से संवाद कर इसकी बारीकियां भी सीखीं।

सांस्कृतिक मेलजोल से बढ़ेगा अनुभव

प्रतिभागियों ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उत्तराखंड की कला और संस्कृति को इतने करीब से समझना उनके लिए एक प्रेरणादायक अनुभव है।

  • उद्देश्य: बिहार और उत्तराखंड के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान।
  • आगामी गतिविधियाँ: अगले तीन दिनों में प्रतिभागियों को उत्तराखंड के अन्य पारंपरिक कौशल, हस्तशिल्प और लोक विधाओं से परिचित कराया जाएगा।

इस कार्यक्रम के माध्यम से युवा न केवल एक-दूसरे की परंपराओं को जान रहे हैं, बल्कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को भी साकार कर रहे हैं।

भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी सकरा नगर पंचायत; अपने ही खोल रहे अध्यक्ष की पोल, ‘हमाम में सब नंगे’ होने की चर्चा

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सकरा नगर पंचायत में ‘अंधेर नगरी-चौपट राजा’; भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ीं स्ट्रीट लाइटें दिन में उगल रही हैं रोशनी, डस्टबिन हुए बदहाल

रिपोर्ट : एस.एस. कुमार ‘पंकज’

सकरा (मुजफ्फरपुर) : कहते हैं कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? मुजफ्फरपुर जिले की सकरा नगर पंचायत वर्तमान में इसी विडंबना से जूझ रही है। यहाँ विकास की गंगा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का गंदा नाला बह रहा है। नगर पंचायत की सत्ता के गलियारों से लेकर गलियों के मोड़ तक, हर तरफ घोटाले की गूँज है। हालत यह है कि खुद नगर पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधि (पार्षद) ही चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यहाँ सबकुछ ‘लूट’ की भेंट चढ़ चुका है। पिछले कुछ महीनों में जारी हुए पत्रांकों ने इस नगर पंचायत की उस काली हकीकत को उजागर कर दिया है, जिसे अब तक सरकारी फाइलों के अंबार के नीचे दबा कर रखा गया था।


दिनदहाड़े उजाले का अंधेर: हाई मास्ट लाइट घोटाला

सकरा की सड़कों पर भ्रष्टाचार का सबसे जीवंत और शर्मनाक सबूत देखना हो, तो दोपहर के समय यहाँ की सड़कों पर नजर डालिए। जहाँ सूरज अपनी पूरी रोशनी बिखेर रहा होता है, वहीं लाखों की लागत से लगी हाई मास्ट लाइटें दिन के उजाले में जल रही होती हैं। पत्रांक 126 (दिनांक 26.09.2025) के अनुसार, नगर पंचायत में हाई मास्ट लाइट की खरीद और स्थापना में भारी अनियमितता बरती गई है। पार्षदों का आरोप है कि प्रति यूनिट लाइट पर 8 से 9 लाख रुपये का भुगतान दिखाया गया है, लेकिन धरातल पर लगी लाइटें बेहद घटिया दर्जे की हैं। तकनीकी खराबी और सेंसर की अनुपलब्धता के कारण ये लाइटें रात के बजाय दिन में जलती हैं। यह न केवल सरकारी राजस्व और बिजली की भीषण बर्बादी है, बल्कि उस सिंडिकेट की पोल खोलता है जिसने ‘कमीशन’ के चक्कर में जनता के पैसे से खिलवाड़ किया है। सकरा की जनता पूछ रही है—क्या यह विकास है या दिनदहाड़े डकैती?

दिन के उजाले में जलती हाई मास्ट लाइट: बिजली की बचत और संरक्षण के दावों के बीच, सकरा बाजार की हाई मास्ट लाइटें दिन में भी जलती पाई गईं। यह न केवल ऊर्जा की बर्बादी है, बल्कि राजस्व का भी नुकसान है। दायें की तस्‍वीर में
डस्टबिन बना ‘खूँटा’: वार्ड संख्या 8 में वीरेंद्र राय के मकान के पास मुख्य सड़क पर स्थिति और भी चौंकाने वाली है। स्वच्छता अभियान के तहत लाखों खर्च कर लगाए गए डस्टबिन का उपयोग अब कूड़ा डालने के बजाय गायों को बांधने के लिए किया जा रहा है।

डस्टबिन का कचराऔर कागजों पर सफाई

स्वच्छता के नाम पर सकरा नगर पंचायत ने जो ‘खेल’ खेला है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। पत्रांक 126 में ही इस बात का साक्ष्यों के साथ उल्लेख है कि स्वच्छता अभियान के तहत खरीदी गई सामग्री में बंदरबांट की गई है।

  • बाल्टी घोटाला: आरोप है कि जो बाल्टियाँ कागजों पर 164 रुपये प्रति नग की दर से खरीदी दिखाई गई हैं, उनकी वास्तविक बाजार कीमत महज 40 रुपये है।
  • बदहाल डस्टबिन: आज सकरा की गलियों में लगे डस्टबिन खुद कचरा बन चुके हैं। घटिया प्लास्टिक और कमजोर बनावट के कारण ये कुछ ही महीनों में टूटकर बिखर गए हैं।

जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये नाली की गंदगी की तरह बहा दिए गए और बदले में मिला तो सिर्फ टूटा हुआ प्लास्टिक और बजबजाते सड़को पर कूड़े का अम्‍बार ।

अरुण गुप्ता पार्षद (वार्ड संख्या 01) के घर के सामने लत्‍तर में लिपटा डस्‍टबीन, तस्‍वीर में साफ स्‍पष्‍ट है कि यहां सफाई की हालत ऐसी है की महीनों से उपयोग में नहीं आ रहा है डस्‍टबीन
 वार्ड 1 की ज़मीनी हकीकत: पार्षद के द्वार पर ‘लावारिस’ हुआ डस्टबिन
नगर पंचायत सकराके वार्ड संख्या 01 से आई यह तस्वीर प्रशासन के दावों की पोल खोलती है। हैरानी की बात यह है कि यह नज़ारा कहीं और नहीं, बल्कि खुद पार्षद अरुण गुप्ताके आवास के ठीक सामने का है।
मुख्य बातें जो सवाल खड़े करती हैं:
प्रकृति का कब्ज़ा:डस्टबिन का लताओं और झाड़ियों से लिपटा होना यह बताता है कि यहाँ महीनों से न तो सफाई कर्मी पहुँचे हैं और न ही किसी ने इसे खाली करने की ज़हमत उठाई है।
पार्षद की उदासीनता:जब जनप्रतिनिधि के अपने घर के सामने सफाई का यह आलम है, तो आम जनता की गलियों की स्थिति क्या होगी?
लाखों की बर्बादी:जनता के टैक्स के पैसों से खरीदे गए ये डस्टबिन अब केवल शो-पीस बनकर रह गए हैं।
जनता का सवाल:
“क्या डस्टबिन केवल फोटो खिंचवाने और कागजों पर सफाई दिखाने के लिए लगाए गए थे? अगर पार्षद के घर के सामने ही सफाई नहीं है, तो पूरे वार्ड की जिम्मेदारी किसके भरोसे है?”

अविश्वास की आग: जब अपनों ने ही दिखाया आईना

नगर पंचायत की राजनीति में ‘हमाम में सब नंगे’ होने की चर्चा तब आम हो गई, जब खुद उपाध्यक्ष और पार्षदों ने मुख्य पार्षद (अध्यक्ष) के खिलाफ बगावत कर दी। पत्रांक 104 (दिनांक 05.08.2025) के माध्यम से मुख्य पार्षद मोहम्मद हैदर अली के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।

इस पत्र में पार्षदों ने जो आरोप लगाए हैं, वे किसी भी लोकतांत्रिक संस्था के लिए शर्मनाक हैं:

  1. तानाशाही रवैया: अध्यक्ष द्वारा निर्वाचित सदस्यों की अवहेलना और मनमानी।
  2. भ्रष्टाचार में संलिप्तता: विकास योजनाओं में पारदर्शिता का पूर्ण अभाव।
  3. वित्तीय गबन: सरकारी फंड का निजी लाभ के लिए बंदरबांट।

यह अविश्वास प्रस्ताव साबित करता है कि सकरा नगर पंचायत के भीतर ‘ऑल इज वेल’ नहीं है, बल्कि लूट की मलाई के बंटवारे को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं।


बिना वर्क ऑर्डर के जेसीबी: गुंडाराजका ट्रेलर

प्रशासनिक अराजकता का इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा कि वार्ड संख्या 05 में बिना किसी आधिकारिक आदेश के ही सरकारी संपत्ति को तहस-नहस कर दिया गया। पत्रांक 494/2025 (दिनांक 19.08.2025) में उपाध्यक्ष रणवीर कुमार सिंह ने गंभीर शिकायत की है कि चुलाही राय के घर से बच्चू बाबू के घर तक बनी-बनाई पीसीसी सड़क को जेसीबी लगाकर उखाड़ दिया गया।

हैरानी की बात यह है कि इस कार्य के लिए कोई वर्क ऑर्डर (कार्य आदेश) जारी नहीं किया गया था। बिना किसी टेंडर या आदेश के सड़क तोड़ना न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि यह दर्शाता है कि यहाँ कुछ लोग खुद को कानून से ऊपर समझते हैं। क्या यह केवल सड़क तोड़ना था या पुराने काम को नया दिखाकर फिर से पैसा हड़पने की साजिश?


अवैध नियुक्तियों का भर्ती मेलाऔर गबन का खेल

सकरा नगर पंचायत अब ‘नौकरी की मंडी’ बन चुकी है। पत्रांक 126 और 127 (दिनांक 26.09.2025) में पार्षदों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक को सूचित किया है कि यहाँ समूह ‘ग’ और ‘घ’ के पदों पर अवैध तरीके से नियुक्तियाँ की गई हैं।

  • भाई-भतीजावाद: बिना किसी सार्वजनिक विज्ञापन या चयन प्रक्रिया के, मुख्य पार्षद और उनके करीबियों ने अपने सगे-संबंधियों को नौकरी पर रख लिया।
  • सांप्रदायिक समीकरण का आरोप: पत्रों में स्पष्ट आरोप है कि नियुक्तियों में एक विशेष ‘MY’ (मुस्लिम-यादव) समीकरण का पालन कर अन्य वर्गों की अनदेखी की गई है, जिससे सामाजिक वैमनस्य का खतरा बढ़ गया है।
  • फर्जी मजदूर: कागजों पर सफाई मजदूरों की एक लंबी फौज दिखाई जाती है, जिनका भुगतान हर महीने संवेदक और अधिकारियों की जेब में जाता है। धरातल पर सफाई करने वाला कोई नहीं है, लेकिन सरकारी खजाने से ‘वेतन’ नियमित रूप से निकल रहा है।

पत्रांकों के आईने में प्रशासनिक अवहेलना

सकरा नगर पंचायत में जो पत्र विगत महीनों में जारी हुए, वे भ्रष्टाचार की पूरी कहानी क्रमवार बयां करते हैं:

  1. पत्रांक 126: भ्रष्टाचार के पांच बिंदुओं का कच्चा चिट्ठा (हाई मास्ट, डस्टबिन, अवैध बहाली, आचार संहिता उल्लंघन)।
  2. पत्रांक 127: पार्षद अरुण गुप्ता द्वारा स्वच्छता प्रबंधक और संवेदक की मिलीभगत से लाखों के गबन का खुलासा।
  3. पत्रांक 104: अविश्वास प्रस्ताव, जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति की ईमानदारी पर बड़ा सवालिया निशान है।

स्व-प्रचार और आचार संहिता की धज्जियां

विकास कार्यों के साइन बोर्ड और स्वागत द्वारों पर सरकारी राशि का उपयोग कर मुख्य पार्षद द्वारा अपनी तस्वीरें लगवाना नियमों का खुला उल्लंघन है। पार्षदों का आरोप है कि सरकारी मंचों और संपत्तियों का उपयोग निजी राजनीतिक विज्ञापन के लिए किया जा रहा है, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।

निष्कर्ष: क्या जांच होगी या फाइलों में दबेगा सच?

सकरा नगर पंचायत की वर्तमान स्थिति ‘भ्रष्टाचार के दलदल’ जैसी है, जहाँ जितना गहरा खोदा जाए, उतना ही कीचड़ निकल रहा है। जिलाधिकारी, विभागीय मंत्री और माननीय मुख्यमंत्री तक इन पत्रों का पहुँचना यह दर्शाता है कि मामला अब स्थानीय स्तर से बाहर निकल चुका है।

जनता देख रही है कि कैसे उसकी गाढ़ी कमाई के पैसे से दिन में लाइटें जलाई जा रही हैं और कैसे भ्रष्टाचार के डस्टबिन में उनके हकों को फेंका जा रहा है। अब सवाल प्रशासन से है—क्या इन पत्रांकों पर संज्ञान लेकर दोषियों को जेल भेजा जाएगा, या फिर ‘हमाम में सब नंगे’ वाली बात सच साबित होगी और जांच की फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाएंगी?

घटनाक्रम एवं  प्रमुख आरोप

तिथिपत्रांक संख्याघटनाक्रम / प्रमुख आरोप
05 अगस्त, 2025पत्रांक- 104अविश्वास प्रस्ताव: मुख्य पार्षद मोहम्मद हैदर अली के खिलाफ उपाध्यक्ष और पार्षदों ने मोर्चा खोला। शक्तियों के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का पहला औपचारिक दस्तावेज सामने आया।
19 अगस्त, 2025पत्रांक- 494प्रशासनिक अराजकता: वार्ड संख्या 05 में बिना किसी ‘वर्क ऑर्डर’ के जेसीबी चलाकर सरकारी सड़क को ध्वस्त करने का मामला। उपाध्यक्ष ने FIR दर्ज करने की मांग की।
26 सितम्बर, 2025पत्रांक- 126महा-खुलासा (5 आरोप): मुख्यमंत्री और डीएम को भेजी गई चिट्ठी। इसमें हाई मास्ट लाइट, ₹164 वाली बाल्टी को ₹40 में खरीदने, अवैध बहाली और विज्ञापन में फोटो चमकाने जैसे 5 गंभीर आरोप लगे।
26 सितम्बर, 2025पत्रांक- 127गबन का आरोप: पार्षद अरुण गुप्ता द्वारा स्वच्छता प्रबंधक और संवेदक की मिलीभगत से लाखों रुपये के वित्तीय गबन और ‘फर्जी मजदूरों’ के नाम पर पैसे निकालने का सनसनीखेज खुलासा।

सकरा की जनता जाग चुकी है : जवाब तो देना होगा

जवाब कब देंगे : सकरा नगर पंचायत की जनता जानना चाहती है इन सवालों के जवाब ?

1. कार्यपालक पदाधिकारी (EO) से तीखे सवाल

  1. पत्रांक 126 में उल्लेखित हाई मास्ट लाइटों के दिन में जलने और तकनीकी रूप से खराब होने के बावजूद, संवेदक को पूर्ण भुगतान किस आधार पर किया गया? क्या आपने भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया था?
  2. पार्षदों ने पत्रांक 127 में फर्जी मजदूरों के नाम पर लाखों के गबन का आरोप लगाया है। क्या कार्यालय के पास उन मजदूरों का मस्टर रोल और आधार लिंकिंग डेटा उपलब्ध है? यदि नहीं, तो भुगतान कैसे हो रहा है?
  3. पत्रांक 494 के अनुसार, वार्ड 05 में बिना किसी ‘वर्क ऑर्डर’ के सरकारी सड़क तोड़ी गई। एक जिम्मेदार अधिकारी के नाते आपने अब तक दोषी व्यक्ति या संवेदक पर FIR दर्ज क्यों नहीं की?
  4. पत्रों में आरोप है कि पिछले कई महीनों से बोर्ड की बैठक नहीं हुई है। नियमतः बैठक बुलाना आपकी जिम्मेदारी है; क्या आप किसी दबाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित कर रहे हैं?
  5. अवैध नियुक्तियों के आरोपों पर आपकी क्या सफाई है? क्या इन नियुक्तियों के लिए बिहार नगरपालिका चयन बोर्ड के नियमों का पालन किया गया या यह पूरी तरह ‘बैकडोर एंट्री’ है?

2. मुख्य पार्षद (अध्यक्ष) से तीखे सवाल

  1. आपके विरुद्ध पत्रांक 104 के तहत अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है और आपके अपने ही साथी भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं। क्या आप अब भी मानते हैं कि आपको सदन का विश्वास प्राप्त है?
  2. सरकारी पैसे से बने स्वागत द्वारों और बोर्डों पर आपकी व्यक्तिगत तस्वीर का क्या औचित्य है? क्या यह सरकारी धन का उपयोग निजी ब्रांडिंग और राजनीतिक लाभ के लिए करना नहीं है?
  3. ₹164 वाली डस्टबिन बाल्टियों की जगह ₹40 की घटिया सामग्री बांटने के आरोपों पर आपका क्या कहना है? क्या इस खरीद में आपकी मौन सहमति शामिल थी?
  4. नियुक्तियों में ‘MY’ समीकरण और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप लग रहे हैं। क्या आप उन कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक करने की चुनौती स्वीकार करेंगे ताकि पारदर्शिता सिद्ध हो सके?
  5. विकास कार्यों में पार्षदों की अनदेखी क्यों की जा रही है? क्या नगर पंचायत का विकास केवल आपकी पसंद के कुछ चहेते वार्डों और संवेदकों तक सीमित है?

3. उप मुख्य पार्षद (उपाध्यक्ष) से तीखे सवाल

  1. आपने पत्रांक 494 में सड़क तोड़ने के गंभीर आरोप लगाए हैं। क्या आपके पास इस बात के ठोस प्रमाण हैं कि इसमें मुख्य पार्षद या किसी विशेष अधिकारी की मिलीभगत थी?
  2. आप स्वयं व्यवस्था का हिस्सा हैं, फिर भी आपको मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तक पत्र भेजने की नौबत क्यों आई? क्या नगर पंचायत के भीतर शिकायत निवारण का तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है?
  3. अविश्वास प्रस्ताव लाने में हुई देरी क्या यह संकेत नहीं देती कि पहले ‘तालमेल’ बिठाने की कोशिश हुई और बात न बनने पर बगावत की गई? ‘हमाम में सब नंगे’ वाली चर्चा पर आपका क्या कहना है?
  4. क्या आप उन ‘फर्जी मजदूरों’ और ‘घटिया लाइटों’ की सूची जनता के सामने लाएंगे, जिनका जिक्र आपने अपने पत्रों में किया है?
  5. यदि प्रशासन इन पत्रों पर कार्रवाई नहीं करता है, तो आपका अगला कदम क्या होगा? क्या आप केवल पत्र तक सीमित रहेंगे या इस भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे?

शिकायतकर्ता पार्षदों से सीधे सवाल: अब तक चुप क्यों थे?

नगर पंचायत के भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले वार्ड पार्षदों की भूमिका पर भी जनता सवाल उठा रही है। इन 5 सवालों का जवाब शिकायतकर्ता पार्षदों को भी देना चाहिए:

भ्रष्टाचार के विरुद्ध बिगुल फूंकने वाले वार्ड पार्षदों का नाम

क्र.सं.नामपदमुख्य भूमिका / पत्रांक
1रणवीर कुमार सिंहउप मुख्य पार्षदअविश्वास प्रस्ताव (105) और सड़क तोड़ने की शिकायत (494) के मुख्य हस्ताक्षरकर्ता।
2अरुण गुप्तापार्षद, वार्ड संख्या 01गबन (127) और सामग्री खरीद में घोटाले (126) के मुख्य शिकायतकर्ता।
3इन्‍दु देवीपार्षद, वार्ड संख्या 11अविश्वास प्रस्ताव और सामूहिक शिकायत पत्रों पर हस्ताक्षर।
4अमित कुमारपार्षद, वार्ड संख्या 10अविश्वास प्रस्ताव और भ्रष्टाचार विरोधी पत्रों पर हस्ताक्षर।
5उदय कुमारपार्षद, वार्ड संख्या 09अविश्वास प्रस्ताव और बोर्ड बैठक न बुलाने संबंधी विरोध पत्र पर हस्ताक्षर।
6मो. सेराजुद्दीनपार्षद, वार्ड संख्या 08अविश्वास प्रस्ताव एवं नगर पंचायत की कार्यप्रणाली के विरोध में हस्ताक्षर।
7सुशीला देवीपार्षद, वार्ड संख्या 07अविश्वास प्रस्ताव और अवैध बहाली के विरोध में हस्ताक्षर।
8रीता कुमारीपार्षद, वार्ड संख्या 06अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर।
  1. देर से क्यों जागी चेतना? भ्रष्टाचार के जिन मामलों (हाई मास्ट लाइट, डस्टबिन खरीद) का जिक्र आप आज कर रहे हैं, ये प्रक्रियाएं महीनों से चल रही थीं। जब तक टेंडर पास हो रहे थे और काम शुरू हुआ, तब तक आपने बोर्ड की बैठकों में लिखित विरोध क्यों दर्ज नहीं कराया?
  2. हिस्सेदारी” का टकराव या जनहित? स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, यह लड़ाई तब शुरू हुई जब मलाई की बंदरबांट में “तालमेल” नहीं बैठ पाया। क्या आप यह गारंटी दे सकते हैं कि आपकी नाराजगी व्यक्तिगत हितों के बजाय पूरी तरह जनहित में है?
  3. गबन का हिस्सा: पार्षदों का आरोप है कि सामानों की खरीद में भारी कमीशन खोरी हुई है। क्या आपके अपने वार्डों में वितरित हुए सामानों की गुणवत्ता पर आपने उसी समय सवाल उठाए थे, या आप भी उस समय “मौन सहमति” का हिस्सा थे?
  4. अविश्वास प्रस्ताव की टाइमिंग: अविश्वास प्रस्ताव लाने का समय तब क्यों चुना गया जब भ्रष्टाचार के पत्र सार्वजनिक हुए? क्या यह केवल मुख्य पार्षद पर दबाव बनाकर अपनी शर्तें मनवाने की एक रणनीति है?
  5. सबूतों की जिम्मेदारी: आपने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र तो लिख दिए, लेकिन क्या आपके पास इन घपलों के ऐसे ठोस तकनीकी सबूत (जैसे लैब टेस्ट रिपोर्ट या वित्तीय अनियमितता के पक्के दस्तावेज) हैं जो कोर्ट में टिक सकें, या ये केवल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने की राजनीति है?

पर्दे के पीछे का ‘सियासी खेल’: जुबान खोलने पर पाबंदी और रसूखदारों का संरक्षण

सकरा नगर पंचायत में भ्रष्टाचार की आग को दबाने के लिए अब डराओ और राज करो’ की नीति अपनाई जा रही है। स्थानीय गलियारों में दबी जुबान से चर्चा है कि इस पूरे खेल को एक कद्दावर राजनेता’ का संरक्षण प्राप्त है, जिसके इशारे पर शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डालने का दबाव बनाया जा रहा है। आलम यह है कि जो पार्षद कल तक पत्रों पर हस्ताक्षर कर रहे थे, आज वे मीडिया के कैमरों के सामने आने से कतरा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो बागी पार्षदों को परोक्ष रूप से धमकाया जा रहा है और यह संदेश दिया जा रहा है कि—जो हुआ सो हुआ, अब आगे बढ़े तो खैर नहीं।” पत्रकारों के सवालों पर पार्षदों का बगलें झांकना या बहाने बनाना इस बात का पुख्ता संकेत है कि ‘सिस्टम’ के खिलाड़ियों ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। यह डरावनी खामोशी सवाल उठाती है कि क्या सकरा के इन जनप्रतिनिधियों की जुबान किसी राजनीतिक दबाव में सिली गई है या फिर वे खुद किसी बड़े समझौते के इंतजार में अपनी ही शिकायतों से कदम पीछे खींच रहे हैं? यह ‘मैनेजमेंट’ का खेल भ्रष्टाचार से भी ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुँच चुका है।

प्रशासनिक शिथिलता या मौन सहमति? सवालों के घेरे में कार्यपालक पदाधिकारी

सकरा नगर पंचायत में मचे इस महा-संग्राम में सबसे गंभीर उंगली कार्यपालक पदाधिकारी (EO) की कार्यशैली पर उठ रही है। एक प्रशासनिक अधिकारी का मूल दायित्व सरकारी धन की सुरक्षा और नियमों का पालन सुनिश्चित करना होता है, लेकिन यहाँ EO अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह फेल्योर’ साबित हुए हैं। हाई मास्ट लाइटों का दिन में जलना और बिना वर्क ऑर्डर के सड़कों का तोड़ा जाना जैसी घटनाएं उनके नाक के नीचे होती रहीं, लेकिन उन्होंने कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की। पार्षदों का आरोप है कि EO केवल रबर स्टैंप बनकर रह गए हैं और मुख्य पार्षद की मनमानियों को रोकने के बजाय उन्हें मूक सहमति दे रहे हैं। वित्तीय गबन की शिकायतों के बाद भी संवेदकों के भुगतानों पर रोक न लगाना और भ्रष्टाचार की फाइलों पर कुंडली मारकर बैठना यह दर्शाता है कि प्रशासन की पारदर्शिता शून्य हो चुकी है। यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि पद की गरिमा के साथ भी बड़ा खिलवाड़ है, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाड़ियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

लोकतंत्र की शुचिता पर ‘अविश्वास’ का दाग

सकरा नगर पंचायत का वर्तमान परिदृश्य यह स्पष्ट करता है कि यहाँ विकास की योजनाएँ केवल कागजों और कमीशनों तक सीमित रह गई हैं। एक ओर जहाँ हाई मास्ट लाइटों का दिन में जलना और डस्टबिनों की बदहाली वित्तीय गबन का प्रत्यक्ष प्रमाण दे रही है, वहीं दूसरी ओर बिना वर्क ऑर्डर के सड़कों का ध्वस्तीकरण और अवैध बहाली के आरोप प्रशासनिक अराजकता की पराकाष्ठा है।

मुख्य पार्षद के विरुद्ध पार्षदों का एकजुट होना और ‘हमाम में सब नंगे’ जैसी चर्चाएं यह संकेत देती हैं कि संस्था के भीतर पारदर्शिता और आपसी विश्वास पूरी तरह खत्म हो चुका है। मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी तक पहुँचे ये पत्रांक महज शिकायतें नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक संस्था के विफल होने की चेतावनी हैं। यदि इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच नहीं की गई और दोषियों पर सख्त कार्रवाई (FIR) नहीं हुई, तो सरकारी खजाने की लूट का यह सकरा मॉडल’ अन्य निकायों के लिए एक गलत नजीर बन जाएगा। अंततः, इस सत्ता संघर्ष और भ्रष्टाचार के खेल में सबसे बड़ा नुकसान सकरा की आम जनता का हो रहा है, जो टैक्स देने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं और ईमानदारी के शासन के लिए तरस रही है।

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