Saturday, March 7, 2026
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बिहार की सियासत में ‘नीतीश युग’ का नया अध्याय, चारों सदनों की सदस्यता का स्वप्न हुआ साकार

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“बिहार की सेवा और विकास का संकल्प रहेगा पूर्ववत” – नामांकन के बाद बोले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

पटना | बिहार की समकालीन राजनीति में 5 मार्च 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जिन्होंने पिछले दो दशकों से बिहार की विकास यात्रा का नेतृत्व किया है, उन्होंने आज बिहार विधानसभा कार्यालय प्रकोष्ठ में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। यह केवल एक चुनावी प्रक्रिया भर नहीं थी, बल्कि एक अनुभवी राजनेता के उस व्यक्तिगत और संसदीय संकल्प की पूर्णता थी, जो उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन के शुरुआती दिनों में देखा था।

राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करते नीतीश कुमार

सत्ता के शीर्ष दिग्गजों का जमावड़ा: NDA की एकजुटता का संदेश

नामांकन के अवसर पर उमड़ी भीड़ और उपस्थित चेहरों ने स्पष्ट कर दिया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) पूरी तरह एकजुट है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने इस नामांकन को राष्ट्रीय महत्व प्रदान किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा की मौजूदगी बिहार में भाजपा और जदयू के मजबूत समन्वय को रेखांकित कर रही थी।

इसके अतिरिक्त, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा, वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा और मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह गांधी जी जैसे दिग्गजों ने नीतीश कुमार के इस नए सफर में उनके साथ खड़े होकर अपनी शुभकामनाएं दीं।

चार सदनों का दुर्लभ कीर्तिमान: एक ऐतिहासिक उपलब्धि

नीतीश कुमार ने नामांकन के बाद अपने संबोधन में एक बेहद महत्वपूर्ण और व्यक्तिगत तथ्य साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके मन में शुरू से ही एक इच्छा थी कि वे अपने संसदीय जीवन के दौरान लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद—इन चारों गौरवशाली सदनों के सदस्य बनें। आज राज्यसभा के लिए नामांकन के साथ ही उनका यह दुर्लभ कीर्तिमान स्थापित होने जा रहा है। भारतीय राजनीति में बहुत कम ऐसे नेता हुए हैं जिन्हें इन चारों प्रतिष्ठित सदनों में जनता का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हुआ है।

जनता के प्रति आभार और भविष्य का रोडमैप

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए बिहार की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास और समर्थन मेरे साथ बनाए रखा है। आपके इसी भरोसे की ताकत है कि आज बिहार विकास और सम्मान के नए आयाम स्थापित कर रहा है।”

नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि भले ही वे अब उच्च सदन (राज्यसभा) की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, लेकिन बिहार के विकास के प्रति उनका संकल्प और प्रदेश की जनता से उनका जुड़ाव भविष्य में भी वैसा ही बना रहेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य में आने वाली नई सरकार को उनका निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त होता रहेगा, जिससे ‘विकसित बिहार’ का सपना अधूरा न रहे।

NDA के अन्य दिग्गजों का नामांकन और शक्ति प्रदर्शन

राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए आज का दिन नामांकन के लिहाज से काफी गहमागहमी वाला रहा। मुख्यमंत्री के साथ-साथ एनडीए के अन्य प्रमुख घटक दलों के प्रत्याशियों ने भी अपनी दावेदारी पेश की:

राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करते उपेन्द्र कुशवाहा
  1. उपेन्द्र कुशवाहा (राष्ट्रीय लोक मोर्चा): एनडीए समर्थित उम्मीदवार के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने अपना पर्चा दाखिल किया। उनकी उम्मीदवारी बिहार के सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
  2. नितिन नवीन (भाजपा): भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए इसे अपना सौभाग्य बताया।

सम्मान और शिष्टाचार की परंपरा

राज्यसभा के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करते नितिन नवीन

नामांकन के पश्चात बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से विशेष भेंट की। विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। यह दृश्य बिहार की उस स्वस्थ राजनीतिक परंपरा का परिचायक था, जहाँ वैचारिक मतभेदों के बावजूद वरिष्ठता और उपलब्धियों का सम्मान सर्वोपरि रखा जाता है।

नामांकन के पश्चात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को  अंगवस्त्र और प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित करते बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार  

राजनीतिक विश्लेषण: क्या बदलेंगे बिहार के समीकरण?

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका राज्यसभा जाना केंद्र की राजनीति में उनकी भूमिका को और अधिक प्रभावी बना सकता है, जबकि राज्य की कमान और आगामी ‘नई सरकार’ के स्वरूप पर अब सबकी निगाहें टिकी रहेंगी। उनके द्वारा ‘मार्गदर्शन’ की बात कहना इस ओर इशारा करता है कि वे सक्रिय राजनीति से ओझल नहीं होंगे, बल्कि एक ‘संरक्षक’ की भूमिका में बिहार की प्रगति की निगरानी करते रहेंगे।

कुल मिलाकर, आज का घटनाक्रम बिहार की राजनीति में एक युग के परिवर्तन जैसा है। नीतीश कुमार ने अपने दो दशकों के कार्यकाल में जिस तरह से शासन की संरचना को बदला, अब वे उसी अनुभव को देश के उच्च सदन में ले जाने की तैयारी में हैं। एनडीए के लिए यह नामांकन न केवल संख्या बल का प्रदर्शन है, बल्कि आगामी चुनावों से पहले एक मनोवैज्ञानिक बढ़त भी है।

खाड़ी देशों में युद्ध के संकट के बीच नीतीश सरकार अलर्ट, प्रवासी बिहारियों के लिए जारी किया विशेष हेल्पलाइन नंबर

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पटना। पश्चिम एशिया और खाड़ी देशों (Gulf Countries) में गहराते युद्ध के संकट को देखते हुए बिहार सरकार पूरी तरह सतर्क मोड में आ गई है। वहां रह रहे हजारों प्रवासी बिहारियों की सुरक्षा और उनके परिजनों की चिंता को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।

परिजनों की बढ़ी चिंता, सरकार ने संभाला मोर्चा

विदेशी धरती पर युद्ध जैसी परिस्थितियों के बीच प्रवासी बिहारियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर: 721 778 8114 सार्वजनिक किया है। सरकार का उद्देश्य है कि संकट की इस घड़ी में हर बिहारी तक मदद पहुँचाई जा सके।

इस नंबर पर क्या मिलेगी सुविधा?

विभाग द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस नंबर का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जा सकता है:

  • सूचना का आदान-प्रदान: खाड़ी देशों में फंसे प्रवासी अपनी स्थिति की जानकारी दे सकते हैं।
  • सहायता: किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता की आवश्यकता होने पर संपर्क किया जा सकता है।
  • परिजनों के लिए राहत: बिहार में रह रहे परिवार के सदस्य अपने सगे-संबंधियों की कुशलता जानने या उनसे संपर्क साधने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।

नोट: सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रवासी बिहारी और उनके परिजन किसी भी प्रकार की जानकारी, सहायता या समस्या के समाधान के लिए इस नंबर पर बेझिझक संपर्क कर सकते हैं।

विभाग की अपील

श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने सोशल मीडिया हैंडल  के माध्यम से भी लोगों को जागरूक रहने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। सरकार केंद्र सरकार और संबंधित दूतावासों के साथ भी निरंतर संपर्क बनाए हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।

फाग के गीतों से गूंजा माधुरी चौक, रेल विकास मंच ने मनाया पारंपरिक होली मिलन समारोह

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समस्तीपुर। रंगों के त्योहार होली की पूर्व संध्या पर सोमवार को शहर के माधुरी चौक पर उत्साह और उमंग का माहौल रहा। रेल विकास-विस्तार मंच एवं समस्तीपुर जिला विकास संघर्ष मोर्चा के संयुक्त तत्वावधान में एक भव्य ‘होली मिलन समारोह’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की खास बात इसका पारंपरिक स्वरूप रहा, जहाँ आधुनिक शोर-शराबे के बजाय मिथिला की पारंपरिक फगुआ गायकी ने लोगों का मन मोह लिया।

पारंपरिक होली गायन का आकर्षण

समारोह के दौरान स्थानीय कलाकारों और कार्यकर्ताओं ने ढोल-मजीरों की थाप पर होली है, बरजखोरी है रे रसिया…” और आज बिरज में होली है रसिया…” जैसे सुप्रसिद्ध फाग गीतों की प्रस्तुति दी। माधुरी चौक पर गूंजते इन गीतों ने पूरे वातावरण को भक्ति और हर्षोल्लास से भर दिया। कृष्ण और राधा के प्रेम और ब्रज की होली के प्रसंगों वाले इन गीतों ने राहगीरों को भी रुकने पर मजबूर कर दिया।

सामाजिक सौहार्द का संदेश

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी कटुता को मिटाकर प्रेम और भाईचारे को गले लगाने का पर्व है। रेल विकास-विस्तार मंच ने इस माध्यम से शहर के विकास के संकल्प के साथ-साथ अपनी लोक संस्कृति को जीवित रखने का संदेश भी दिया।

मुख्य रूप से उपस्थित गणमान्य

कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने शिरकत की। उपस्थित रहने वाले मुख्य व्यक्तियों में शामिल थे:

  • राम विनोद
  • जीबछ पासवान
  • अरुण कुमार राय एवं राजेंद्र राय
  • पिंकू पासवान एवं रामलाल राम
  • संतोष कुमार निराला, डोमन राय एवं विश्वनाथ सिंह हजारी
  • रंभू राय, नंदू महतो, शाहीद हुसैन
  • मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता और रामदयालू महतो

कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं और क्षेत्र के विकास के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प दोहराया।

पूर्व मुख्य सचेतक स्व. फकीरचंद राम की 83वीं जयंती: सकरा के शैक्षणिक व सर्वांगीण विकास के नायक को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

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सकरा (मुजफ्फरपुर)। सकरा बाजिद स्थित स्मारक स्थल कार्यालय पर सोमवार को पूर्व विधायक व बिहार विधानसभा के पूर्व मुख्य सचेतक स्व० फकीरचंद राम की 83वीं जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर अखिल भारत अनुसूचित जाति परिषद के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी (AICC) के सदस्य उमेश कुमार राम सहित दर्जनों गणमान्य व्यक्तियों ने उनके स्मारक और चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।

नौकरी छोड़ समाज सेवा को चुना: एक प्रेरणादायी सफर

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए उमेश कुमार राम ने स्व. फकीरचंद राम के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे त्याग और सादगी की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने कहा, फकीरचंद जी छात्र जीवन से ही राजनीति और समाज के प्रति सजग थे। जनसेवा के प्रति उनका जुनून इतना प्रबल था कि उन्होंने अपनी सुरक्षित सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया और सकरा (सु.) विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर विधायक बनकर जनता की सेवा की।”

शिक्षा और विकास के लिए आजीवन संघर्ष

वक्ताओं ने याद किया कि सकरा कॉलेज के सरकारीकरण का श्रेय फकीरचंद राम जी को ही जाता है। उन्होंने ढोली फिशरी कॉलेज की स्थापना और पूरे सकरा व मुरौल प्रखंड के चौतरफा विकास के लिए जो बुनियादी ढांचा तैयार किया, वह आज भी क्षेत्र के लिए मील का पत्थर है। वे ताउम्र गरीबों और पिछड़ों के हक के लिए संघर्षरत रहे।

सामाजिक सरोकार: बच्चों के बीच बांटी गई पठन सामग्री

जयंती के पावन अवसर पर उमेश कुमार राम ने उपस्थित लोगों और कार्यकर्ताओं के बीच मिठाई वितरण किया। शिक्षा के प्रति उनके लगाव को देखते हुए बड़ी संख्या में आए स्कूली बच्चों के बीच कॉपी और कलम का वितरण किया गया, ताकि नई पीढ़ी उनके पदचिह्नों पर चल सके।

इनकी रही गरिमामय उपस्थिति

कार्यक्रम में मुख्य रूप से सकरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम, कांग्रेस नेता व प्रखर अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी की प्रदेश प्रतिनिधि अनीता देवी, राजद मीडिया के चेयरमैन प्रशांत राज, युवा कांग्रेस अध्यक्ष मो० गुलाम मैनुद्दीन, कांग्रेस नेता डा० मनीष यादव, मो० हैदर रजक, शशी भूषण राय, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, राहुल कुमार, राजू राम, पॄथवी पासवान, और नुनू राय उपस्थित थे।

इनके साथ ही शिवम कुमार, श्रद्धा खुशी, सिद्धार्थ कुमार सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

क्‍या हम स्वयं के प्रोग्रामर हैं? : क्या एक नन्हे बीज की ‘कोडिंग’ में छिपा है ब्रह्मांड का स्व-संचालन?

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एक नन्हा सा बीज, जो हफ्तों तक मिट्टी के अंधकार में मौन पड़ा रहता है, अचानक कैसे जान जाता है कि उसे एक विशाल वटवृक्ष की यात्रा शुरू करनी है? क्या यह केवल एक जैविक प्रक्रिया है या किसी ‘कॉस्मिक सुपर-कंप्यूटर’ द्वारा लिखा गया कोई अनंत ‘सॉफ्टवेयर कोड’? आधुनिक विज्ञान और प्राचीन दर्शन अब एक ऐसे क्रांतिकारी मोड़ पर खड़े हैं, जहाँ यह माना जा रहा है कि बीज के भीतर छिपा डी.एन.ए. (DNA) वास्तव में पूरे ब्रह्मांड के स्व-संचालन का एक सूक्ष्म डिजिटल ब्लूप्रिंट है। जहाँ एक ओर निकोला टेस्ला की ‘3-6-9’ की गणितीय आवृत्ति और ब्रूस लिप्टन के ‘एपिजेनेटिक्स’ ने यह सिद्ध किया है कि हमारी चेतना हमारी कोडिंग बदल सकती है, वहीं दूसरी ओर ‘जीन एडिटिंग’ जैसी तकनीकें अब प्रकृति के उस ‘सोर्स कोड’ को सीधे हैक करने का साहस दिखा रही हैं। यह खबर केवल खेती या विज्ञान की नहीं है; यह उस अदृश्य तार की पड़ताल है जो एक नन्हे अंकुर को सितारों की धूल से जोड़ता है।

“जीन एडिटिंग: क्‍या प्रकृति के ‘सोर्स कोड’ को हैक कर रहा है आधुनिक विज्ञान”

शून्य से अनंत की यात्रा : प्रकृति के रहस्यों को यदि एक बिंदु पर समेटना हो, तो वह बिंदु एक ‘बीज’ होगा। एक नन्हा सा, निर्जीव सा दिखने वाला बीज जब मिट्टी के अंधकार में जाता है, तो वहां एक ऐसी ‘अलौकिक प्रक्रिया’ शुरू होती है जिसे आधुनिक विज्ञान आज भी पूरी तरह समझने का प्रयास कर रहा है। प्रश्न यह नहीं है कि बीज कैसे उगता है, प्रश्न यह है कि बीज को यह ‘पता’ कैसे है कि उसे क्या बनना है?

एक आम के बीज को यह निर्देश किसने दिया कि उसे नीम नहीं बनना है? कोशिका विभाजन (सेल डिवीजन) की प्रक्रिया इतनी सटीक कैसे है कि पत्तों का आकार, फूलों की सुगंध और फलों का स्वाद पीढ़ी-दर-पीढ़ी वही बना रहता है? यह केवल रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) नहीं है, बल्कि यह सूचना (इंफॉर्मेशन) और ऊर्जा (एनर्जी) का वह सटीक मिलन है, जिसे हम ‘सृष्टि का ब्लूप्रिंट’ कह सकते हैं।


बीज की कोडिंगब्रह्मांड का अदृश्य सॉफ्टवेयर

जिस प्रकार एक कंप्यूटर सॉफ्टवेयर को चलाने के लिए पीछे हजारों लाइनों का कोड होता है, जिसे यूजर देख नहीं सकता पर उसके परिणाम स्क्रीन पर देखता है; ठीक उसी तरह प्रकृति का भी अपना एक ‘सॉफ्टवेयर’ है।

1. आधुनिक विज्ञान का दृष्टिकोण: डी.एन.ए. और डिजिटल भाषा

विज्ञान के लिए यह कोडिंग डी.एन.ए. (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) है।

  • सूचना का भंडार: डी.एन.ए. वास्तव में एक ‘डिजिटल भाषा’ है। इसमें केवल चार अक्षर होते हैं— , टी, जी, सी (एडेनिन, थाइमिन, गुआनिन, साइटोसिन)। इन चार अक्षरों के क्रम (सीक्वेंस) में ही यह तय होता है कि एक जीव कैसा दिखेगा।
  • एन्ट्रॉपी और नेगेंट्रॉपी: भौतिक विज्ञान का नियम कहता है कि ब्रह्मांड अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) की ओर बढ़ता है, लेकिन जीवन इस नियम को चुनौती देता है। जीवन ‘नेगेंट्रॉपी’ का उपयोग कर व्यवस्था बनाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ब्रह्मांड के भौतिक नियम (जैसे गुरुत्वाकर्षण और क्वांटम फील्ड्स) स्वयं में एक कोडिंग हैं।
  • फ्रैक्टल ज्यामिति : प्रकृति में ‘सेल्फ-सिमिलैरिटी’ का गुण है। जिस फिबोनाची सीक्वेंस के गणितीय पैटर्न पर एक बीज की पंखुड़ियां विकसित होती हैं, उसी पैटर्न पर अंतरिक्ष की आकाशगंगाएं (गैलेक्सी) और समुद्र के चक्रवात भी घूमते हैं। यह सिद्ध करता है कि कोडिंग का ‘सोर्स कोड’ एक ही है।

वैश्विक धर्मों का मतअंश में पूर्ण का वास

दुनिया के प्रमुख धर्मों ने इस जैविक कोडिंग को ‘ईश्वरीय विधान’ या ‘प्राकृतिक न्याय’ के रूप में देखा है।

धर्ममूल विचार (विस्तार)
हिंदू धर्मयथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे: जो सूक्ष्म (पिण्ड/बीज) में है, वही विशाल (ब्रह्मांड) में है। बीज को ‘ब्रह्म’ का सूक्ष्म रूप माना गया है, जिसमें संपूर्ण संसार सुप्त अवस्था में है।
बौद्ध धर्मप्रतीत्यसमुत्पाद: यह ‘कारण और प्रभाव’ (कॉज एंड इफेक्ट) का सिद्धांत है। बुद्ध कहते थे कि कोई बाहरी प्रोग्रामर नहीं है, बल्कि कर्म और प्रकृति की एक अनंत कोडिंग ही संसार को चला रही है।
ईसाई धर्ममस्टर्ड सीड‘ (राई का दाना): जीसस ने कहा था कि ईश्वर का राज्य एक छोटे बीज जैसा है। यह कोडिंग के उस गुण को दर्शाता है जहाँ एक छोटी सी सूचना विशाल साम्राज्य खड़ा कर सकती है।
इस्लामकुदरतका डिजाइन: कुरान के अनुसार, अल्लाह ही वह शक्ति है जो दाने को फाड़कर जीवन निकालता है। यह इस बात का प्रमाण है कि हर बीज के भीतर एक ‘डिवाइन सिग्नेचर’ है।
सिख धर्महुकमका सिद्धांत: गुरु नानक देव जी ने कहा “हुकमै अंदरि सभु को”। यानी कण-कण उस परमात्मा के ‘आदेश’ (कोडिंग) में बंधा है। उसी के हुकम में बीज अंकुरित होता है।

महान दार्शनिकों की दृष्टिचेतना का विज्ञान

दर्शनशास्त्र ने बीज और ब्रह्मांड के संबंध को ‘चेतना’ (कॉन्शियसनेस) के चश्मे से देखा है।

  1. अद्वैत वेदांत (भारत): शंकराचार्य के अनुसार, बीज और वृक्ष में कोई भेद नहीं है। कारण (बीज) ही कार्य (वृक्ष) के रूप में प्रकट होता है। यह ‘अन्तर्यामी’ शक्ति है जो भीतर से संचालित करती है।
  2. स्टोइकवाद (यूनान): इनका मानना था कि ब्रह्मांड में एक लोगोस  है। यह ‘लोगोस’ ही वह तर्क या गणितीय कोडिंग है जो सितारों से लेकर बीजों तक सबको अनुशासन में रखती है।
  3. ताओवाद (चीन): ‘ताओ’ वह मार्ग है जो बिना कुछ किए सब कुछ कर देता है। जैसे बीज ‘प्रयास’ (Effort) नहीं करता, वह बस ‘होता’ है। अस्तित्व स्वतः स्फूर्त (स्पोंटेनियस) है।
  4. सर्वेश्वरवाद : स्पिनोजा के अनुसार, ईश्वर कोई व्यक्ति नहीं जो बादलों पर बैठा है, बल्कि प्रकृति के नियम ही ईश्वर हैं। ब्रह्मांड की कोडिंग ही स्वयं ईश्वर है।

महान वैज्ञानिकों के क्रांतिकारी शोध

विज्ञान अब ‘मैटर’ (पदार्थ) से आगे बढ़कर ‘एनर्जी’ (ऊर्जा) की बात कर रहा है।

 डॉ. पीटर गरजाएव: फैंटम डी.एन.ए. प्रभाव : रूसी वैज्ञानिक डॉ. पीटर गरजाएव ने एक विस्मयकारी प्रयोग किया। उन्होंने एक निर्वात (वैक्यूम) में डी.एन.ए. का नमूना रखा और उस पर लेजर लाइट डाली। जब डी.एन.ए. को वहां से हटा दिया गया, तब भी प्रकाश के फोटोन उसी आकार में घूमते रहे।

  • तात्पर्य: यह सिद्ध करता है कि डी.एन.ए. केवल रासायनिक अणु नहीं है, बल्कि वह अंतरिक्ष के ताने-बाने (फैब्रिक ऑफ स्पेस) में अपनी छाप छोड़ता है। वह ‘शून्य ऊर्जा क्षेत्र’ (जीरो पॉइंट फील्ड) से जुड़ा है।

डी.एन.ए. एक बायोलॉजिकल इंटरनेटके रूप में : क्वांटम बायोलॉजी के अनुसार, डी.एन.ए. एक हारमोनिक एंटीना की तरह काम करता है। यह ब्रह्मांडीय विकिरण (कॉस्मिक रेडिएशन) और चुंबकीय क्षेत्रों से सूचनाएं प्राप्त करता है। यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा को ‘जैविक भाषा’ में अनुवादित करता है, जिससे शरीर की खरबों कोशिकाएं एक साथ तालमेल में काम करती हैं।

डॉ. ब्रूस लिप्टन: एपिजेनेटिक्स का चमत्कार : डॉ. लिप्टन ने सिद्ध किया कि जीन ही हमारा भाग्य नहीं हैं। उनकी पुस्तक द बायोलॉजी ऑफ बिलीफ बताती है कि कोशिका के बाहर का वातावरण (विचार, भावनाएं, भोजन) यह तय करता है कि कौन सा जीन ‘ऑन’ होगा और कौन सा ‘ऑफ’।

  • इसका अर्थ है कि बीज की कोडिंग ‘फिक्स’ नहीं है, बल्कि वह ब्रह्मांड के ‘एनर्जी सिग्नल’ के प्रति संवेदनशील है।

निकोला टेस्ला और ब्रह्मांडीय फ्रीक्वेंसी

निकोला टेस्ला ने कहा था, “यदि आप 3, 6, और 9 की भव्यता को जानते, तो आपके पास ब्रह्मांड की कुंजी होती।”

  • कंपन और आवृत्ति : बीज के भीतर की कोडिंग वास्तव में एक विशिष्ट फ्रीक्वेंसी है। जब बीज मिट्टी में दबता है, तो वह पृथ्वी की आवृत्ति (शूमैन रेजोनेंस) के साथ तालमेल (सिंक्रोनाइज़) करता है।
  • ईथर ऊर्जा: टेस्ला का मानना था कि अंतरिक्ष ऊर्जा से भरा है। बीज एक ‘रिसीवर’ की तरह इस शून्य-बिंदु ऊर्जा को खींचता है और उसे भौतिक पदार्थ (वृक्ष) में बदल देता है।

कैसे बदलें अपनी कोडिंग‘?

यदि बीज की कोडिंग को पर्यावरण प्रभावित कर सकता है, तो हम भी अपने जीवन की ‘री-प्रोग्रामिंग’ कर सकते हैं।

 स्वास्थ्य और विचार (थॉट केमिस्ट्री) : डॉ. लिप्टन के अनुसार, हमारे विचार रसायनों में बदल जाते हैं।

  • सकारात्मक प्रतिज्ञान (Affirmations): जब हम विश्वास के साथ सकारात्मक शब्द बोलते हैं, तो हम अपने डी.एन.ए. को नए निर्देश (इंस्ट्रक्शंस) देते हैं। इससे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

ध्वनि और 528 हर्ट्ज (Hz) की शक्ति: 528 हर्ट्ज को ‘सृजन की आवृत्ति’ या डी.एन.ए. रिपेयर फ्रीक्वेंसी कहा जाता है।

  • ध्वनि चिकित्सा: संगीत और मंत्रों का उच्चारण (जैसे ) हमारे शरीर के जल अणुओं को एक ज्यामितीय क्रम में व्यवस्थित करता है। यह हमारे आंतरिक ‘सॉफ्टवेयर’ को ‘अपडेट’ करने जैसा है।

टेस्ला की 3-6-9 तकनीक : अपने किसी लक्ष्य को सुबह 3 बार, दोपहर 6 बार और रात को 9 बार लिखना केवल एक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह अपने अवचेतन मन (सबकॉन्शियस माइंड) की कोडिंग को ब्रह्मांडीय गणित के साथ जोड़ने का तरीका है।

प्रकृति और ग्राउंडिंग : नंगे पैर जमीन पर चलने (Earthing) से पृथ्वी के इलेक्ट्रॉन हमारे डी.एन.ए. के साथ संवाद करते हैं, जिससे शरीर की सूजन (इन्फ्लेमेशन) कम होती है और हमारी जैविक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) संतुलित होती है।


क्‍या हम स्वयं के प्रोग्रामर हैं

इस पूरी चर्चा का सार यह है कि बीज की कोडिंग वास्तव में उस कॉस्मिक इंटेलिजेंस का हिस्सा है, जहाँ बनाने वाला और बनी हुई वस्तु अलग-अलग नहीं हैं। ईश्वर कोई ‘बाहरी प्रोग्रामर’ नहीं है जो बटन दबाकर दुनिया चला रहा है, बल्कि वह स्वयं उस ‘प्रोग्राम’ की भाषा है जो हर कोशिका में स्पंदित हो रही है।

विज्ञान अब इस बात को स्वीकार कर रहा है कि बीज की कोडिंग कोई ‘स्थिर’ वस्तु नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ निरंतर संवाद करने वाला एक लाइव सॉफ्टवेयर है। हम अपने विचारों, भोजन, ध्यान और वातावरण को बदलकर अपने जीवन की कोडिंग को बदल सकते हैं।

जैसे एक किसान बीज को सही वातावरण देकर उसका भविष्य बदल देता है, वैसे ही हम भी अपनी ‘चेतना’ को जागृत कर अपने जीवन के ‘वृक्ष’ को मनचाहा आकार दे सकते हैं।


जब हम बीज की कोडिंग को देखते हैं, तो हमें समझ आता है कि प्रकृति ने हमें केवल एक ‘बना-बनाया उत्पाद’  नहीं बनाया है, बल्कि एक ओपन सोर्स कोड दिया है।

यहाँ इसका गहरा अर्थ और व्यावहारिक महत्व दिया गया है:

 डी.एन.ए.  भाग्य नहीं, केवल एक हार्डवेयरहै

पहले माना जाता था कि हमारे जीन ही हमारा भविष्य तय करते हैं। लेकिन एपिजेनेटिक्स  ने यह साबित कर दिया कि हमारे विचार, भावनाएं और हमारा पर्यावरण उस ‘हार्डवेयर’ को चलाने वाले सॉफ्टवेयर हैं।

  • आप जैसा सोचते हैं, आपका मस्तिष्क वैसा ही ‘केमिकल सिग्नल’ भेजता है।
  • यह सिग्नल डी.एन.ए. की कुछ कोडिंग को ‘ऑन’ (सक्रिय) करता है और कुछ को ‘ऑफ’।
  • निष्कर्ष: अपनी सोच बदलकर आप अपनी जैविक कोडिंग  बदल सकते हैं।

 विश्वास की शक्ति

डॉ. ब्रूस लिप्टन के अनुसार, हमारी कोशिकाएं हमारे ‘विश्वास’  के प्रति प्रतिक्रिया देती हैं। यदि आप खुद को बीमार या असफल ‘प्रोग्राम’ करते हैं, तो आपकी कोशिकाएं उसी निर्देश का पालन करती हैं। इसके विपरीत, पॉजिटिव अफर्मेशंस  के जरिए आप अपने अवचेतन मन  में नया डेटा फीड कर सकते हैं।

 टेस्ला की फ्रीक्वेंसी और वाइब्रेशन

जैसे एक प्रोग्रामर सही ‘की-बोर्ड’ का इस्तेमाल करता है, वैसे ही आपके लिए कंपन  वह की-बोर्ड है। निकोला टेस्ला के अनुसार, यदि आप अपनी ऊर्जा की फ्रीक्वेंसी को ब्रह्मांड की फ्रीक्वेंसी (जैसे 528 Hz या ‘ॐ’ का नाद) के साथ मिला दें, तो आप अपने जीवन की घटनाओं को ‘री-प्रोग्राम’ करना शुरू कर देते हैं।

ध्यान: कोडिंग मोडमें प्रवेश करना

ध्यान (Meditation) वह स्थिति है जहाँ आप सक्रिय रूप से ‘प्रोग्रामिंग मोड’ में होते हैं। बाहरी दुनिया के शोर को शांत करके, आप अपने ‘सोर्स कोड’ तक पहुँचते हैं और वहां पुराने, हानिकारक पैटर्न को हटाकर नए, रचनात्मक संकल्प डाल सकते हैं।

संक्षेप में: एक बीज के भीतर जैसे एक विशाल वृक्ष बनने की पूरी क्षमता छिपी होती है, वैसे ही आपके भीतर वह कॉस्मिक इंटेलिजेंस मौजूद है। आप केवल एक मशीन नहीं हैं जो नियमों से बंधी है; आप वह प्रोग्रामर हैं जो अपनी जागरूकता और संकल्प के माध्यम से अपने जीवन का नया संस्करण लिख सकते हैं।


आज का विज्ञान न केवल बीज के कोड को समझ चुका है, बल्कि उसे री-प्रोग्राम  करने की क्षमता भी हासिल कर चुका है। इसे आधुनिक विज्ञान की भाषा में जेनेटिक इंजीनियरिंग या जीन एडिटिंगकहा जाता है।

विज्ञान यह कोडिंगकैसे बदल रहा है:

1. क्रिस्पर -Cas9: आणविक कैंची: यह आज के समय की सबसे क्रांतिकारी तकनीक है। जैसे एक प्रोग्रामर कंप्यूटर कोड की किसी लाइन को ‘कट’ (Cut) करके वहां नई लाइन ‘पेस्ट’ (Paste) कर देता है, वैसे ही CRISPR तकनीक वैज्ञानिकों को डी.एन.ए. के किसी खास हिस्से को काटकर उसे बदलने की अनुमति देती है।

  • उपयोग: इसके माध्यम से बीज की ऐसी कोडिंग की जा रही है कि पौधा कम पानी में भी जीवित रहे या उसमें कीड़े न लगें।

2. जी.एम.ओ. (Genetically Modified Organisms):वैज्ञानिक एक प्रजाति के बीज की कोडिंग में दूसरी प्रजाति के ‘गुण’ (Genes) डाल देते हैं।

  • उदाहरण: ‘गोल्डन राइस’ (Golden Rice) एक ऐसा चावल है जिसकी कोडिंग को विटामिन-A बनाने के लिए री-प्रोग्राम किया गया है। इसी तरह ‘बी.टी. कॉटन’ (BT Cotton) की कोडिंग में ऐसे बैक्टीरिया के जीन डाले गए हैं जो कीड़ों को मार देते हैं।

3. एपिजेनेटिक री-प्रोग्रामिंग (Epigenetic Reprogramming):बिना डी.एन.ए. की मूल संरचना बदले, वैज्ञानिक अब यह सीख रहे हैं कि बाहरी वातावरण (तापमान, प्रकाश, रसायन) के जरिए बीज की कोडिंग को कैसे ‘ट्रिगर’ किया जाए। इसे प्राइमिंग‘ (Priming) कहते हैं।

  • इसमें बीज को एक विशेष ‘तनाव’ (Stress) से गुजारा जाता है ताकि उसका ‘इम्यून सिस्टम’ पहले से ही मजबूत हो जाए। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे किसी सॉफ्टवेयर को ‘अपडेट’ करना ताकि वह वायरस से लड़ सके।

4. सिंथेटिक बायोलॉजी: यह विज्ञान का वह स्तर है जहाँ वैज्ञानिक केवल मौजूदा कोड को सुधारते नहीं, बल्कि नया कोड लिख रहे हैं। वे प्रयोगशाला में कृत्रिम डी.एन.ए. (Synthetic DNA) तैयार कर रहे हैं जो प्रकृति में पहले कभी मौजूद नहीं था। इसका उद्देश्य ऐसे पौधे बनाना है जो हवा से अधिक कार्बन सोख सकें या बायो-फ्यूल (Bio-fuel) बना सकें।


चुनौतियां और नैतिकता : हालांकि विज्ञान बीज को री-प्रोग्राम कर सकता है, लेकिन इसके कुछ बड़े सवाल भी हैं:

  • प्राकृतिक संतुलन: क्या कृत्रिम कोडिंग प्रकृति के करोड़ों वर्षों के ‘स्व-संचालन’ के नियम को बिगाड़ सकती है?
  • अनपेक्षित परिणाम: एक जीन बदलने से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) पर क्या असर होगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना अभी भी कठिन है।

आज का वैज्ञानिक एक बायोलॉजिकल प्रोग्रामर बन चुका है। वह बीज की उस पुरानी कोडिंग को ‘हैक’ कर रहा है जो विकासवाद (Evolution) ने बनाई थी। विज्ञान का मानना है कि यदि हम बीज की कोडिंग को पूरी तरह नियंत्रित कर लें, तो हम दुनिया से भूख और बीमारियों को मिटा सकते हैं।

जीन एडिटिंग: प्रकृति के सोर्स कोडको हैक कर रहा है आधुनिक विज्ञान

जिस तरह एक कंप्यूटर प्रोग्राम की किसी गलत लाइन को सुधारने के लिए प्रोग्रामर ‘बैकस्पेस’ दबाता है और नया कोड लिख देता है, ठीक वैसा ही करिश्मा आज का विज्ञान बीजों के साथ कर रहा है। इसे जीन एडिटिंग कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो, यह जीवन की उस ‘पटकथा’ को फिर से लिखने की तकनीक है, जिसे प्रकृति ने करोड़ों साल पहले डी.एन.ए. (DNA) के रूप में तैयार किया था।

आणविक कैंची: क्रिस्पर (CRISPR) इस तकनीक का सबसे बड़ा हथियार है क्रिस्पर-कैस9′ । यह एक ऐसी ‘आणविक कैंची’ है जो कोशिका के भीतर जाकर डी.एन.ए. के उस खास हिस्से को सटीकता से काट सकती है, जो बीज की किसी कमजोरी (जैसे बीमारी या कम उपज) के लिए जिम्मेदार है। एक बार वह हिस्सा कट जाए, तो वैज्ञानिक वहां नया और मजबूत ‘जेनेटिक कोड’ डाल देते हैं।

क्यों पड़ रही है इसकी जरूरत?

  1. जलवायु परिवर्तन: ऐसे बीज तैयार करना जो भीषण गर्मी या सूखे में भी न सूखें।
  2. कुपोषण का अंत: चावल या गेहूं की कोडिंग बदलकर उनमें आयरन और विटामिन की मात्रा बढ़ाना।
  3. कीटनाशकों से मुक्ति: ऐसे पौधे विकसित करना जिनमें अपनी सुरक्षा करने की ‘इन-बिल्ट’ क्षमता हो।

हैक या विकास?:  हालांकि इसे ‘प्रकृति के कोड को हैक करना’ कहा जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक इसे सृजनात्मक हस्तक्षेप मानते हैं। जहाँ प्रकृति को एक छोटा सा बदलाव करने में हजारों साल लगते थे, जीन एडिटिंग वही काम कुछ हफ्तों में कर देती है। विज्ञान अब केवल बीजों का अध्ययन नहीं कर रहा, बल्कि वह खुद एक ‘बायोलॉजिकल प्रोग्रामर’ की भूमिका में आ गया है, जो भविष्य की खेती का नया सॉफ्टवेयर लिख रहा है।

विशेषतापारंपरिक खेती (Traditional)जीन-एडिटेड खेती (Gene-Edited)
प्रक्रिया (Process)बीजों के प्राकृतिक चयन और संकरण (Cross-breeding) पर आधारित।डी.एन.ए. के ‘सॉफ्टवेयर’ को प्रयोगशाला में सीधे बदलने पर आधारित।
समय (Time)एक नया गुण (जैसे मिठास या मजबूती) विकसित करने में 10 से 15 साल लग सकते हैं।वांछित बदलाव मात्र कुछ हफ्तों या महीनों में किया जा सकता है।
सटीकता (Precision)इसमें हजारों जीन अनियंत्रित रूप से मिल जाते हैं, जिससे परिणाम अनिश्चित हो सकते हैं।इसमें आणविक कैंची‘ (CRISPR) का उपयोग कर केवल एक विशिष्ट जीन को ही बदला जाता है।
बाहरी हस्तक्षेपप्रकृति और मौसम पर पूरी तरह निर्भर।वैज्ञानिक हस्तक्षेप के माध्यम से प्रतिकूल मौसम (सूखा/बाढ़) के लिए ‘इन-बिल्ट’ सुरक्षा।
कीटनाशक का प्रयोगकीटों से बचाने के लिए भारी मात्रा में बाहरी रसायनों का छिड़काव आवश्यक है।पौधे की कोडिंग ऐसी की जाती है कि वह स्वयं जहरीले कीटों के प्रति प्रतिरोधक बन जाए।
पोषण (Nutrition)अनाज में मौजूद प्राकृतिक पोषण तक ही सीमित।कोडिंग बदलकर विटामिन, प्रोटीन और मिनरल्स की मात्रा को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

बीज की कोडिंग वास्तव में उस ‘कॉस्मिक इंटेलिजेंस’ का प्रमाण है, जहाँ सृजनकर्ता और सृजन अलग-अलग नहीं हैं। ईश्वर कोई ‘बाहरी प्रोग्रामर’ नहीं है, बल्कि वह स्वयं उस ‘प्रोग्राम’ की भाषा है जो हर परमाणु और कोशिका में स्पंदित हो रही है। हम अपने विचारों, भोजन और वातावरण को बदलकर अपने जीवन की ‘कोडिंग’ को स्वयं लिख सकते हैं।

बिहार: वित्त विभाग ने वेतन-पेंशन से जुड़ा पिछला आदेश किया रद्द, अब पुराने दिशा-निर्देशों पर ही होगी निकासी

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पटना। मुख्य संवाददाता

बिहार सरकार के वित्त विभाग ने वित्तीय वर्ष की समाप्ति से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। विभाग ने 27 फरवरी 2026 को जारी अपने उस आदेश (पत्रांक-2182) को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) कर दिया है, जिसमें वेतन और पेंशन के बिलों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए थे।

विशेष सचिव मुकेश कुमार लाल द्वारा हस्ताक्षरित इस नए पत्र के अनुसार, अब राज्य के सभी कोषागारों (Treasuries) में निकासी के लिए 6 फरवरी 2026 को जारी मूल दिशा-निर्देश ही प्रभावी रहेंगे।

क्यों वापस लेना पड़ा फैसला?

सरकारी पत्र के अनुसार, होली के त्योहार को देखते हुए फरवरी माह का वेतन 24 फरवरी से ही बांटने का निर्णय लिया गया था। इस दौरान बिलों की भारी संख्या को देखते हुए विभाग ने 27 फरवरी को एक नया आदेश जारी किया था ताकि वेतन और पेंशन बिलों का भुगतान सुगम हो सके।

हालांकि, इस आदेश के बाद विभिन्न विभागों और कोषागारों में अन्य प्रकार के बिलों के भुगतान को लेकर भ्रम और संशय की स्थिति पैदा हो गई थी। इसी तकनीकी उलझन और वित्तीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए सरकार ने 24 घंटे के भीतर ही इस आदेश को रद्द करने का फैसला लिया।

अब क्या होगा असर?

  • पुराना नियम लागू: अब वित्तीय अनुशासन और फंड निकासी के लिए पत्रांक-1354 (दिनांक 06.02.2026) का ही कड़ाई से पालन किया जाएगा।
  • बिलों की जाँच: वित्तीय वर्ष (Financial Year) के अंतिम माह में आकस्मिक बिलों और अन्य स्कीमों के बिलों की भीड़ बढ़ जाती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी निकासी नियमों के दायरे में रहकर ही की जाएंगी।
  • अधिकारियों को निर्देश: राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे पुराने दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही निकासी एवं व्यय नियंत्रण सुनिश्चित करें। वित्त विभाग ने साफ किया है कि यह कदम केवल भ्रम की स्थिति को दूर करने और वित्तीय अनुशासन को अधिक मजबूती से लागू करने के लिए उठाया गया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने देशरत्न डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को दी भावभीनी श्रद्धांजलि; बाँस घाट और मंदिरी नाला परियोजना का किया निरीक्षण

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पटना। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने आज भारत के प्रथम राष्ट्रपति, ‘देशरत्न’ डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के 63वें निर्वाण दिवस के अवसर पर महाप्रयाण घाट स्थित उनकी समाधि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने देश के निर्माण में डॉ. प्रसाद के अतुलनीय योगदान को याद किया।

श्रद्धांजलि सभा के उपरांत मुख्यमंत्री ने शहर की महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं और जनसुविधाओं का जायजा लेने के लिए क्षेत्र का सघन दौरा किया।

बाँस घाट: अत्याधुनिक शवदाह गृह का निरीक्षण

मुख्यमंत्री बाँस घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह पहुँचे, जहाँ उन्होंने वर्तमान व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही उन्होंने वहां निर्माणाधीन अत्याधुनिक शवदाह परिसर के कार्यों का भी निरीक्षण किया।

  • समय-सीमा का निर्देश: मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि शवदाह गृह परिसर का निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए।
  • गुणवत्ता पर जोर: उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए ताकि आमजनों को भविष्य में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

मंदिरी नाला परियोजना: यातायात होगा सुगम

बाँस घाट के निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिरी नाला परियोजना के अंतर्गत निर्माणाधीन दो-लेन संपर्क सड़क (Link Road) के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। इस परियोजना को शहर की यातायात व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • सीधा संपर्क: मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सड़क के बन जाने से नेहरू पथ (बेली रोड) और जे.पी. गंगा पथ के बीच सीधा संपर्क स्थापित हो जाएगा।
  • जनता को राहत: इस नए मार्ग से शहरवासियों को आवागमन में काफी सहूलियत होगी और मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा।

इस निरीक्षण के दौरान राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और संबंधित विभागों के अभियंता भी उपस्थित रहे, जिन्हें मुख्यमंत्री ने कार्यों में तेजी लाने के आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

सरायरंजन: बाल विवाह मुक्त समाज के लिए ‘मुक्ति रथ’ रवाना, सामाजिक बुराई के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

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“सावधान! बाल विवाह में गए तो होगी जेल; सरायरंजन में जागरूकता रथ के जरिए दी गई कड़ी चेतावनी”

सरायरंजन | 28 फरवरी, 2026 प्रखंड क्षेत्र में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से मिटाने के लिए शनिवार को एक प्रभावी पहल की गई। जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र (अख्तियारपुर) और क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को प्रखंड प्रमुख वीणा कुमारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

शिक्षा और विकास में बाधक है बाल विवाह: प्रमुख

रथ को रवाना करते हुए प्रमुख वीणा कुमारी ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक बुराई है, जिसे खत्म करने के लिए सामूहिक सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने जोर देकर कहा, “समुदाय में जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई बालिकाएं शिक्षा से वंचित रह जाती हैं, जिससे उनका सर्वांगीण विकास बाधित होता है।”

विशेषज्ञों और शिक्षकों ने साझा किए विचार

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने बाल विवाह के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला:

  • राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय (नरघोघी) के प्राचार्य दीपक कुमार मंडल ने कहा कि बाल विवाह सामाजिक विकास की सबसे बड़ी चुनौती है। इसे मिटाए बिना विकसित राष्ट्र की कल्पना संभव नहीं है।
  • शिक्षक शकील अहमद ने स्वास्थ्य संबंधी चिंता जताते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह के कारण कुपोषित बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
  • शिक्षक मनोज कुमार साह एवं पंकज कुमार झा ने सुझाव दिया कि दलित समुदायों के बीच विशेष जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि वहां व्याप्त इस समस्या को कम किया जा सके।

कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

अधिवक्ता रामलाल पासवान ने इस अवसर पर बाल विवाह से जुड़े कड़े कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल विवाह में शामिल होने वाले केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि नाई, कुम्हार, माली, पंडित, टेंट और बाजा वाले सहित बारात जाने वाले सभी लोगों पर सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये के दंड का कानून है।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अभियान को सफल बनाने में बलराम चौरसिया, ललिता कुमारी, दिनेश प्रसाद चौरसिया, रविन्द्र पासवान, किरण कुमारी, मयंक कुमार सिन्हा, विभा कुमारी सहित दर्जनों लोगों ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन व धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक तेज नारायण महतो ने किया।

भोजन की व्यवस्था और आगे का सफर: मेयारी गांव के समाजसेवी सह समाजवादी नेता अजय राय ने रथ के यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था की, जिसके बाद जत्थे को गंगापुर झखड़ा के लिए रवाना किया गया। मौके पर भारी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

एमडीडीएम कॉलेज में उल्लास के साथ मना ‘रंगोत्सव’, गीतों और कविताओं से सजी होली मिलन की महफिल

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मुजफ्फरपुर | 28 फरवरी, 2026 महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के परिसर में शनिवार को होली मिलन समारोहका शानदार आयोजन किया गया। प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में कॉलेज की शिक्षिकाओं और छात्राओं ने रंगों के इस पावन त्योहार को आपसी भाईचारे और सौहार्द के प्रतीक के रूप में मनाया।

भाईचारे का रंग है होली: प्राचार्य

समारोह का उद्घाटन करते हुए प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि यह समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर एक-दूसरे को गले लगाने का पर्व है। उन्होंने कहा, “होली के रंग भाईचारे के रंग हैं, जिसकी मस्ती और सकारात्मकता हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है।”

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां

कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. प्रियम फ्रांसिस ने किया। समारोह में संगीत और साहित्य की त्रिवेणी देखने को मिली:

  • गायन: डॉ. सुधांशु और डॉ. सुनीता ने अपनी मधुर गीतमय प्रस्तुतियों से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं संगीत विभाग की छात्राएं अंकिता, शिवांशी और तनीषा के गीतों ने उत्सव के जोश को दोगुना कर दिया।
  • नृत्य: अंग्रेजी विभाग की छात्राएं अनन्या और कशिश के साथ संगीत विभाग की छात्रा चंचल ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

कविताओं में झलका सामाजिक संदेश

साहित्यिक सत्र में डॉ. सुरबाला वर्मा ने अपनी कविता नदियां चुप रहने लगी हैं आजकल” के माध्यम से गंभीर संवेदनाओं को उकेरा। वहीं, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. मुबशरा सदफ ने क्या कहती है होली?” शीर्षक वाली अपनी रचना से सामाजिक सद्भाव का संदेश दिया:

सब रंगों को एक बनाकर, ऊंच नीच का भेद मिटाकर , लाल हरा भगवा या नीला, सब मिल जाते हैं होली में”

खास आकर्षण: गंगा-जमुनी तहजीब की झलक समारोह का मुख्य आकर्षण उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. एम. सदफ की पंक्तियाँ रहीं, जिन्होंने लाल, हरे, भगवा और नीले रंगों के एक हो जाने की बात कहकर समाज में एकता का संदेश दिया। वहीं डॉ. सुरबाला की पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं पर आधारित कविता ने सभी को सोचने पर मजबूर किया।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति

इस अवसर पर महाविद्यालय की वरिष्ठ शिक्षिका डॉ. कुमारी सरोज, डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. प्रांजलि, डॉ. देवश्रुति घोष, डॉ. वर्षा तिवारी, डॉ. अर्चना गुप्ता सहित कॉलेज के अन्य कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। पूरे परिसर में गुलाल और खुशियों की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

आलू की बेकद्री: लागत 15 रुपये, बिक्री मात्र 5-6 रुपये; बर्बादी की कगार पर बिहार के किसान

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“सरकार मौन, किसान परेशान: क्या बंगाल की तर्ज पर बिहार में भी होगी आलू की सरकारी खरीद?”

ताजपुर/समस्तीपुर | 28 फरवरी 2026

आलू उत्पादन का गढ़ माने जाने वाले समस्तीपुर जिले के ताजपुर, पूसा, मोरबा और सरायरंजन प्रखंडों के किसानों के चेहरे पर इन दिनों मायूसी छाई है। कभी ‘सफेद सोना’ कहा जाने वाला आलू आज किसानों के लिए गले की फांस बन गया है। मंडियों में आलू की कीमत गिरकर महज 5 से 6 रुपये प्रति किलो रह गई है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक चोट पहुँच रही है।

लागत भी नहीं निकल पा रही

अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता सह आलू उत्पादक किसान ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने बताया कि बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर आलू की उत्पादन लागत करीब 15 रुपये प्रति किलो आती है। ऐसे में 5-6 रुपये में फसल बेचना घाटे का सौदा साबित हो रहा है। 25 वर्षों से खेती कर रहे किसान दिनेश प्रसाद सिंह कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में आलू की इतनी कम कीमत कभी नहीं देखी।

कम पैदावार के बावजूद कीमतों में गिरावट ने चौंकाया

हैरानी की बात यह है कि इस बार जिले में आलू की पैदावार भी उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई है। कम उत्पादन के बावजूद कीमतों का इतना गिरना कृषि विशेषज्ञों और व्यापारियों की समझ से परे है। मंडी के गद्दीदार मंजीत कुमार सिंह और श्यामबाबू सिंह के अनुसार, बाजार में मांग की कमी और बाहरी राज्यों से आलू की भारी आवक कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण है।

कोल्ड स्टोरेज की समस्या और मजबूरी की बिक्री

किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज की क्षमता सीमित है और भंडारण शुल्क का अतिरिक्त बोझ वहन करना उनके बस की बात नहीं है। मोतीपुर, फतेहपुर और रहीमाबाद के किसानों ने बताया कि नकदी की तत्काल जरूरत के कारण छोटे और सीमांत किसान औने-पौने दाम पर फसल बेचने को मजबूर हैं।

किसानों की प्रमुख मांगें:

आंदोलन की चेतावनी

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई, तो किसान भविष्य में आलू की खेती से मुंह मोड़ लेंगे। किसान महासभा और भाकपा माले ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।