महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) के शिक्षाशास्त्र विभाग (B.Ed.) में शनिवार को ‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस’ के अवसर पर भव्य विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय “वूमेन इन साइंस: कैटेलाइजिंग विकसित भारत” रखा गया, जिसके माध्यम से छात्राओं ने विज्ञान के क्षेत्र में नारी शक्ति और उनके योगदान को प्रदर्शित किया।
नवाचार और प्रतिभा का संगम
प्रदर्शनी का उद्घाटन महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने किया। छात्राओं ने विभिन्न वैज्ञानिक मॉडलों और पोस्टरों के माध्यम से अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। कार्यक्रम में बर्सर डॉ. अनुराधा सिंह, विभागाध्यक्ष डॉ. हरि शंकर कुमार सहित जूलॉजी, होम साइंस और अन्य विभागों के शिक्षक मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने छात्राओं के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके मॉडलों का सूक्ष्म अवलोकन किया।
विजेता प्रतिभागी
प्रदर्शनी में छात्राओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसमें सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियों को चयनित किया गया:
प्रथम स्थान: मानसी ऋतु (विषय: “लाइट टू लीडरशिप: वूमेन पावरिंग विकसित भारत”)
द्वितीय स्थान: सुरभि कुमारी (विषय: “साइंस एंड जेंडर रोल”)
तृतीय स्थान: सोनाक्षी कुमारी एवं मनीषा कुमारी (विषय: “चाइल्ड टू रिड्यूस फोन यूसेज”)
इसके अलावा सगुन भारती, पूजा, सोनी, शाहीन नाज़, संध्या और नाज़नीन उमर सहित कई अन्य छात्राओं ने भी सक्रिय रूप से अपने प्रोजेक्ट्स साझा किए।
वैज्ञानिक चेतना पर जोर
प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने कहा कि इस तरह के आयोजनों का उद्देश्य छात्राओं में साइंटिफिक टेम्परामेंट (वैज्ञानिक चेतना), इन्नोवेशन (नवाचार) और नेतृत्व क्षमता का विकास करना है। निर्णायक मंडल में डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. स्मिता गौतम, डॉ. रवि कुमार, डॉ. सुमन्त कुमार सहित कई वरिष्ठ शिक्षक शामिल थे। कार्यक्रम का समापन प्रतिभागियों के उत्साहवर्धन और बधाई संदेश के साथ हुआ।
मुजफ्फरपुर। भारतीय डाक विभाग के मुजफ्फरपुर प्रमंडल के अंतर्गत तीन उप डाकघरों को नए और बेहतर भवनों में स्थानांतरित करने की योजना है। इसके लिए डाक विभाग ने कतैया, गौरैया और ढोली कृषि महाविद्यालय उप डाकघर के लिए निजी मकान मालिकों से आवेदन आमंत्रित किए हैं।
डाकघर का काल्पनिक चित्र
वरिष्ठ डाक अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार, विभाग को इन क्षेत्रों में पक्के छतदार मकानों की आवश्यकता है। इच्छुक मकान मालिक अपना आवेदन 20 मार्च 2026 की शाम 5:00 बजे तक स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज सकते हैं।
इन स्थानों के लिए चाहिए भवन:
विभाग ने मुख्य सड़क पर स्थित निम्नलिखित क्षेत्रों में मकानों की मांग की है:
क्रम संख्या
उप डाकघर का नाम
प्रस्तावित क्षेत्र
आवश्यक क्षेत्रफल (वर्ग फीट)
1.
ढोली कृषि महाविद्यालय
महाविद्यालय के मुख्य द्वार के आसपास
690
2.
कतैया उप डाकघर
वर्तमान भवन के आसपास
690
3.
गौरैया उप डाकघर
गौरैया चौक के आसपास
690
भवन में अनिवार्य सुविधाएं:
डाक विभाग ने स्पष्ट किया है कि किराए पर लिए जाने वाले भवन में निम्नलिखित सुविधाएं होना आवश्यक है:
शौचालय एवं स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था।
चार पहिया वाहन के आने-जाने की सुगम सुविधा।
कर्मचारियों और ग्राहकों के वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह।
आवेदन की प्रक्रिया:
इच्छुक मकान मालिक अपने आवेदन के साथ मालिकाना हक का प्रमाण पत्र संलग्न करें। आवेदन “वरिष्ठ अधीक्षक डाकघर, मुजफ्फरपुर प्रमंडल, मुजफ्फरपुर-842002” के पते पर भेजना होगा। किराए का निर्धारण विभाग के नियमों के अनुसार किया जाएगा।
नोट: आवेदन का प्रारूप और विस्तृत जानकारी के लिए किसी भी कार्यदिवस में प्रमंडलीय कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। निर्धारित समय (20 मार्च) के बाद प्राप्त आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
समस्तीपुर | 26 फरवरी, 2026 विभूतिपुर प्रखंड में बाल विवाह मुक्ति रथ के संदेश और जिला प्रशासन की मुस्तैदी ने एक बार फिर मानवता की जीत सुनिश्चित की है। चाइल्ड हेल्पलाइन और जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के साझा प्रयासों से एक नाबालिग किशोरी को ‘बालिका वधू’ बनने से बचा लिया गया।
त्वरित कार्रवाई से रुका विवाह
जानकारी के अनुसार, चाइल्ड हेल्पलाइन समस्तीपुर को सूचना मिली थी कि विभूतिपुर प्रखंड के आलमपुर कोदरिया पंचायत (वार्ड 14, आलमपुर मुसहरी) में श्वेता कुमारी, पिता: गौरव दास (दोनों काल्पनिक नाम ) का बाल विवाह होने वाला है। सूचना मिलते ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सह सहायक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, विभूतिपुर, सुनील कुमार के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया।
मौके पर दी गई कानूनी चेतावनी
प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़िता के घर पहुँचकर गृह भ्रमण किया। मौके पर उपस्थित मुखिया, वार्ड सदस्य और पंचायत सचिव के साथ एक सामूहिक बैठक की गई, जिसमें परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम की कठोर कानूनी धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया। काफी समझाने-बुझाने के बाद बालिका के माता-पिता ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में बाल विवाह न करने का लिखित वचन पत्र सौंपा।
इनकी रही मुख्य भूमिका
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में मुख्य रूप से निम्नलिखित सदस्यों का योगदान रहा:
प्रशासनिक नेतृत्व: सुनील कुमार (BDO, विभूतिपुर)
जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र: रवि कुमार एवं दीप्ति कुमारी (परियोजना समन्वयक)
चाइल्ड हेल्पलाइन: मुन्ना कुमार (पर्यवेक्षक)
प्रयास संस्था: कमलेश कुमार (सामाजिक कार्यकर्ता)
जागरूकता का प्रसार
घटना के बाद गांव में बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया गया। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के ‘एक्सेस टू जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को संकल्प दिलाया गया कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी बच्चे का भविष्य अंधकार में नहीं झोंकने देंगे।
अधिकारी का संदेश: “बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप और कानूनी अपराध है। हम सजग हैं और किसी भी सूरत में प्रखंड में नाबालिगों का विवाह नहीं होने देंगे।” — प्रखंड विकास पदाधिकारी, विभूतिपुर
पटना। बिहार विधान परिषद के बजट सत्र के दौरान सामाजिक और शैक्षणिक असमानता का मुद्दा पूरी प्रखरता के साथ गरमाया। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से आने वाले माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी ने सदन में एक संकल्प पेश करते हुए राज्य में ‘समान शिक्षा और समान परवरिश‘ की नीति लागू करने की जोरदार वकालत की। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक देश में ‘नमक-रोटी’ और ‘हलवा-पूरी’ खाने वाले बच्चों के बीच की खाई नहीं भरेगी, तब तक वास्तविक विकास की कल्पना बेमानी है।
“गरीबी संयोग है, चुनाव नहीं”: ब्रजवासी का भावुक संबोधन
सदन को संबोधित करते हुए श्री ब्रजवासी ने अपने जीवन के संघर्षों का हवाला देते हुए कहा, “मैं गरीब के घर पैदा हुआ और आज संघर्षों की बदौलत यहाँ खड़ा हूँ। किसी का गरीब के घर जन्म लेना ‘बाय चांस‘ होता है, ‘बाय चॉइस‘ नहीं। यह प्रकृति का संयोग है।”
उन्होंने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की सुप्रसिद्ध पंक्तियों—‘श्वानों को मिलते दूध-भात, भूखे बालक अकुलाते हैं’—के जरिए कुपोषण और अभाव की मार झेल रहे बच्चों की मर्मस्पर्शी तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के रूप में जब वह स्कूल में भूखे और बासी रोटी खाकर आने वाले बच्चों को देखते हैं, तो उनका ‘लर्निंग आउटकम’ (सीखने की क्षमता) संपन्न बच्चों के बराबर कभी नहीं हो सकता।
सामाजिक समरसता केवलसमान शिक्षा प्रणालीसे ही संभव
शिक्षा सुधार और सामाजिक समानता की मांग को लेकर सदन में एक अत्यंत भावुक और वैचारिक पक्ष रखते हुए माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी ने ‘सुदामा चरित‘ का मार्मिक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि जब सांदीपनि मुनि के आश्रम में एक राजकुमार कृष्ण और एक निर्धन सुदामा साथ बैठकर शिक्षा ग्रहण करते हैं, तभी वह आत्मीयता जन्म लेती है जो बाद में द्वारकाधीश कृष्ण को अपने सखा की दीन दशा देख अश्रुधारा से पैर धोने को विवश कर देती है। सदस्य ने जोर देकर कहा कि ऐसी संवेदनशीलता और सामाजिक समरसता केवल समान शिक्षा प्रणाली से ही संभव है।
‘बहुरंगी‘ शिक्षा व्यवस्था पर तीखा प्रहार
ब्रजवासी ने देश में व्याप्त दोहरी शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा:
“आज अमीरों के बच्चे सीबीएसई (CBSE) में पढ़ते हैं और गरीबों के बच्चे राज्य बोर्ड में। यह शैक्षणिक असमानता केवल बौद्धिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दूरी भी बढ़ा रही है। मेरी माँग है कि पूरे देश में ‘एक बोर्ड, एक सिलेबस, एक किताब और एक परीक्षा‘ की नीति लागू हो। ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ की चर्चा तो बहुत है, लेकिन उससे पहले ‘वन नेशन-वन एजुकेशन‘ लागू होना चाहिए।” ताकि गरीब और अमीर के बीच की शैक्षणिक खाई को पाटा जा सके।
उन्होंने वर्ष 2006 में गठित मुचकुंद दुबे आयोग की ‘समान स्कूल प्रणाली’ रिपोर्ट का जिक्र करते हुए सरकार को याद दिलाया कि 2007 में रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद आज तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का पक्ष: बजट और योजनाओं का दिया हवाला
सदस्य के संकल्प और उनके द्वारा उठाए गए गंभीर सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि बिहार सरकार शिक्षा को सर्वांगीण विकास का आधार मानती है और इसी प्रतिबद्धता के कारण राज्य के वार्षिक बजट का 20% हिस्सा अकेले शिक्षा क्षेत्र को आवंटित किया गया है, जो पूरे देश में एक मिसाल है।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन के समक्ष निम्नलिखित तथ्य रखे:
RTE के तहत आरक्षण: ‘निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ के तहत निजी स्कूलों में 25% सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभाग लगातार निजी स्कूलों के साथ बैठकें कर रहा है।
आवेदन के आँकड़े: मंत्री ने बताया कि अब तक 84,806 आवेदन प्राप्त हुए हैं और अधिकांश बच्चों को स्कूल आवंटित कर दिए गए हैं।
कल्याणकारी योजनाओं का जाल: राज्य के 1 करोड़ 9 लाख बच्चों को ‘मिड-डे मील’ दिया जा रहा है। इसके अलावा साइकिल, पोशाक, छात्रवृत्ति और प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से ड्रॉप-आउट रेट कम किया गया है।
बुनियादी ढांचा: हर पंचायत में प्लस-टू स्कूल खोल दिए गए हैं और वर्तमान में शिक्षकों की संख्या 5 लाख 87 हजार से अधिक हो चुकी है।
महत्वपूर्ण अवलोकन: सदन में माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी की असंतुष्टि का मुख्य कारण यही था कि सरकार 20% बजट तो खर्च कर रही है, लेकिन वह पैसा ‘समान स्कूल प्रणाली’ के ढांचे को खड़ा करने के बजाय ‘कल्याणकारी योजनाओं’ (साइकिल, भोजन आदि) में अधिक जा रहा है.
वो सिफारिशें जो अभी भी चुनौती बनी हुई हैं
समान स्कूल प्रणाली (CSS):मुचकुंद दुबे आयोग की मुख्य सिफारिश थी कि ‘पड़ोस के स्कूल’ की ऐसी व्यवस्था हो जहाँ अमीर और गरीब का बच्चा एक ही छत के नीचे पढ़े। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि कक्षा 9 से 12 तक अभी समान परिवेश की नीति लागू नहीं है।
मुचकुंद दुबे आयोग की रिपोर्ट पर सीधा क्रियान्वयन: सदन में माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी की मुख्य शिकायत यही थी कि सरकार अपनी मौजूदा योजनाओं को तो गिना रही है, लेकिन आयोग द्वारा सुझाए गए बुनियादी ढांचागत बदलावों और विशिष्ट रिपोर्ट पर कोई नया आश्वासन नहीं मिला है।
आश्वासन के बाद संकल्प वापसी
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट किया कि कक्षा 1 से 8 तक समान शिक्षा नीति लागू है, हालांकि उच्च माध्यमिक (9वीं से 12वीं) के लिए ‘समान परवरिश’ जैसी कोई विशिष्ट नीति वर्तमान में सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।
विपक्ष और प्रस्तावक सदस्य ने सरकार के जवाब को ‘पुरानी योजनाओं का दोहराव’ बताया और मुचकुंद दुबे आयोग की रिपोर्ट पर ठोस आश्वासन न मिलने पर असंतोष जताया। हालांकि, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार के विनम्र अनुरोध और सभापति के निर्देश के बाद, सदन की सहमति से माननीय सदस्य बंशीधर ब्रजवासी ने अपना संकल्प वापस ले लिया।
सकरा, मुजफ्फरपुर। रंगों के महापर्व होली के शुभ अवसर पर सकरा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में आपसी प्रेम, भाईचारे और राजनीतिक एकजुटता की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली। सकरा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य उमेश कुमार राम के सौजन्य से एक भव्य ‘होली मिलन समारोह‘ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में महागठबंधन के विभिन्न घटकों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शिरकत कर आगामी चुनौतियों के लिए एकजुट रहने का संकल्प लिया।
रंग-गुलाल के साथ हुआ स्वागत
समारोह की शुरुआत उपस्थित अतिथियों को अबीर-गुलाल लगाकर और गले मिलकर होली की बधाई देने के साथ हुई। कार्यक्रम के आयोजक उमेश कुमार राम ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोने और गिले-शिकवे मिटाकर आगे बढ़ने का प्रतीक है।
स्थानीय दिग्गज नेताओं की रही मौजूदगी
इस मिलन समारोह में महागठबंधन की मजबूती साफ तौर पर नजर आई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से उपस्थित होने वालों में शामिल थे:
अनीता देवी: बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश प्रतिनिधि।
राजेश रंजन: सी.पी.आई. माले के नेता।
प्रशांत राज: राजद नेता।
शशि भूषण राय, शत्रुघ्न राय और चन्दन राय, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव और नुनू राय: क्षेत्र के वरिष्ठ सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता।
विनोद पाण्डेय सहित महागठबंधन के अन्य सक्रिय सदस्य।
एकजुटता और विकास पर चर्चा
समारोह के दौरान नेताओं ने अनौपचारिक बातचीत में क्षेत्र की समस्याओं और विकास की गति पर भी चर्चा की। उमेश कुमार राम ने कहा, “सकरा की जनता का प्रेम और महागठबंधन के साथियों का सहयोग ही हमारी असली शक्ति है। हम होली के इन रंगों की तरह ही समाज के हर तबके को एक साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
वहीं, सी.पी.आई. माले के नेता राजेश रंजन और राजद नेता प्रशांत राज ने संयुक्त रूप से कहा कि इस तरह के आयोजनों से न केवल आपसी संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार होता है। नेताओं ने जोर देकर कहा कि महागठबंधन पूरी तरह एकजुट है और जनता के हक की लड़ाई मिलकर लड़ेगा।
सकरा में आयोजित यह होली मिलन समारोह न केवल रंगों का उत्सव रहा, बल्कि इसने क्षेत्र में महागठबंधन की जमीनी पकड़ और आपसी सामंजस्य को भी मजबूती से प्रदर्शित करने का बहाना सिद्ध हुआ ।
सकरा (मुजफ्फरपुर): सकरा ब्लॉक में बुधवार को ‘संगठन सृजन अभियान’ के तहत आयोजित कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बैठक एक विशाल हुजूम में तब्दील हो गई। सकरा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संगठन को पंचायत और बूथ स्तर पर इतना मजबूत बनाना है कि आम जनता की आवाज शासन के गलियारों तक प्रभावी ढंग से पहुँच सके। यह बैठक सकरा प्रखण्ड कांग्रेस कमिटी के कार्यालय पर आयेजित किया गया । कार्यकर्ताओं के भारी हुजूम और गगनभेदी नारों के बीच पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने साफ कर दिया कि अब कांग्रेस केवल ड्राइंग रूम की राजनीति नहीं, बल्कि पंचायत और बूथ स्तर पर ‘फौलादी’ संगठन खड़ा कर शासन की ईंट से ईंट बजाने को तैयार है।
जमीनी फीडबैक पर होगा नेतृत्व का फैसला
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और ए.आई.सी.सी. पर्यवेक्षक मानस चौधरी ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का स्पष्ट निर्देश है कि संगठन में थोपे हुए नेता नहीं, बल्कि कार्यकर्ताओं की पसंद के लोग आगे आएं। मैं हर प्रखंड का भ्रमण कर एक-एक कार्यकर्ता का विचार जान रहा हूं। आपके सुझाव ही जिला और प्रखंड अध्यक्षों की नियुक्ति का आधार बनेंगे।”
पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम का शक्ति प्रदर्शन
सकरा सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने स्थानीय राजनीति में हलचल तेज कर दी है। उमेश राम ने कहा कि यह अभियान जनता की उस आवाज को बुलंद करने के लिए है, जिसे वर्तमान शासन व्यवस्था में दबाया जा रहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे हर घर तक पहुंचें और कांग्रेस की विचारधारा को अंतिम व्यक्ति तक ले जाएं।
दिग्गजों का जमावड़ा: एकजुट दिखी कांग्रेस
बैठक में पी.सी.सी. ऑब्जर्वर कमलदेव नारायण शुक्ला और जयेश सिंह ने कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरते हुए कहा कि संगठन की मजबूती ही सत्ता के गलियारों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता है। जिला अध्यक्ष अरविन्द कुमार मुकुल ने संगठन की आगामी रूपरेखा प्रस्तुत की।
महिला शक्ति की बढ़ी भागीदारी: बैठक में ब्लॉक महिला कांग्रेस अध्यक्ष सीमा सरोज और बिहार प्रदेश प्रतिनिधि अनीता देवी की सक्रियता ने यह संदेश दिया कि आगामी सांगठनिक ढांचे में महिलाओं को प्रमुख स्थान दिया जाएगा।
इन दिग्गजों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में प्रदेश और जिला स्तर के कई वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
वरिष्ठ नेता: मयंक कुमार मुन्ना, कृपा शंकर शाही, धर्मवीर शुक्ला।
महिला नेतृत्व: ब्लॉक महिला कांग्रेस अध्यक्ष सीमा सरोज एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि अनीता देवी।
प्रमुख कार्यकर्ता: मनोज कुमार सिंह, राजीव कुमार, मुकेश त्रिपाठी, डॉ. मनीष यादव, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, मो. निसार अंसारी, रामचंद्र राम, मो. हैदर रजक, विजय यादव, शम्स तबरेज, विजय पाण्डेय, मो. मुबारक हुसैन, अशोक कुमार एवं पृथ्वी पासवान।
राजनीतिक मायने
जानकारों का मानना है कि सकरा में हुआ यह जुटान आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। महागठबंधन के भीतर अपनी दावेदारी मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए ‘संगठन सृजन अभियान’ को एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।
पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज अपनी धर्मपत्नी और प्रखर समाजसेवी स्व० मंजू सिन्हा की जयंती के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण नमन किया। राजधानी के कंकड़बाग स्थित स्व० मंजू सिन्हा स्मृति पार्क पहुंचकर मुख्यमंत्री ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला जब मुख्यमंत्री कुछ क्षणों के लिए मौन खड़े रहे और अपनी जीवनसंगिनी की स्मृतियों में खोए नजर आए। उनके साथ जदयू के वरिष्ठ नेता, कई प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस गौरवपूर्ण पल के साक्षी बने।
सादगीपूर्ण वैवाहिक जीवन और संबल की भूमिका
नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा का विवाह एक सादे पारिवारिक परिवेश में संपन्न हुआ था। उनका दांपत्य जीवन हमेशा से सादगी की मिसाल रहा। जहाँ एक ओर नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के केंद्र में थे, वहीं मंजू सिन्हा ने खुद को प्रचार-प्रसार से दूर रखा। हालांकि, वह पर्दे के पीछे रहकर हमेशा सक्रिय रहीं:
मौन समाजसेवा: उन्होंने शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में चुपचाप लेकिन प्रभावी कार्य किए।
राजनीतिक संबल: मुख्यमंत्री के कठिन राजनीतिक सफर में उन्होंने हमेशा एक मजबूत स्तंभ और प्रेरणा की भूमिका निभाई।
पुत्र निशांत कुमार और पारिवारिक मूल्य
उनके परिवार में एक पुत्र, निशांत कुमार हैं, जो अपनी मां की तरह ही प्रचार और राजनीति की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं। हालांकि, पारिवारिक और सामाजिक अवसरों पर वे अक्सर अपने पिता के साथ खड़े नजर आते हैं। मुख्यमंत्री ने कई बार सार्वजनिक मंचों पर इस बात का जिक्र किया है कि उनके परिवार ने उन्हें निजी जीवन में संतुलन और धैर्य बनाए रखने की महत्वपूर्ण सीख दी है।
2007 का वह आघात और स्थायी स्मृति
वर्ष 2007 में मंजू सिन्हा के असामयिक निधन ने मुख्यमंत्री को गहरा व्यक्तिगत आघात पहुँचाया था। उस कठिन समय में भी उन्होंने बिहार की सेवा के अपने संकल्प को डगमगाने नहीं दिया, लेकिन उनकी कमी आज भी उनके जीवन में खलती है।
कंकड़बाग स्थित स्व० मंजू सिन्हा स्मृति पार्क आज केवल पत्थर और पौधों का समूह मात्र नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अपनी जीवनसंगिनी के प्रति अगाध प्रेम और उनकी सेवाभावी स्मृतियों का एक जीवंत प्रतीक बन चुका है। कंकड़बाग की घनी आबादी के बीच स्थित यह पार्क शहर के फेफड़ों की तरह काम करता है, जहाँ की हरियाली और शांति लोगों को सुकून का अहसास कराती है। यह स्थान आज सामाजिक सरोकारों का एक प्रमुख केंद्र है, जहाँ की शांति में मंजू सिन्हा के उस सादगीपूर्ण व्यक्तित्व की झलक मिलती है, जिन्होंने हमेशा निस्वार्थ भाव से समाज की बेहतरी के लिए कार्य किया।
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, अख्तियारपुर के तत्वावधान में बुधवार को ग्राम पंचायत राज अख्तियारपुर के दो वार्डों में बाल कल्याण और संरक्षण समिति का गठन किया गया। ग्राम भोजपुर (वार्ड 12) और उदयपुर (वार्ड 9) में आयोजित आम सभा के दौरान न केवल समितियों का चुनाव हुआ, बल्कि चयनित सदस्यों के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का भी आयोजन किया गया।
समिति का नेतृत्व: किन्हें मिली जिम्मेदारी?
आम सभा में सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चयन किया गया:
वार्ड 12 (भोजपुर): वार्ड सदस्य बेचनी देवी को अध्यक्ष, पंच रेणु देवी को उपाध्यक्ष और आंगनबाड़ी सेविका मधुबाला को सचिव चुना गया।
वार्ड 9 (उदयपुर): वार्ड सदस्य उमेष राम को अध्यक्ष, पंच गुरु दयाल दास को उपाध्यक्ष और आंगनबाड़ी सेविका मीना देवी को सचिव बनाया गया।
सुरक्षा और संरक्षण ही मुख्य उद्देश्य
कार्यशाला को संबोधित करते हुए संस्था के सीनियर रिसर्च कंसल्टेंट बलराम चौरसिया और दिनेश प्रसाद चौरसिया ने कहा कि बिहार सरकार के निर्देशानुसार इन समितियों का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि इस समिति में वार्ड सदस्य, आंगनबाड़ी कर्मी, आशा, शिक्षक, जीविका दीदी, बाल संसद के बच्चे और स्थानीय चौकीदार सहित समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
बाल विवाह और बाल श्रम पर लगेगी लगाम
संस्था की प्रतिनिधि किरण कुमारी, ललिता कुमारी और वीणा कुमारी ने संयुक्त रूप से बताया कि समिति का प्राथमिक कार्य बच्चों को स्कूल और आंगनबाड़ी से जोड़ना है। साथ ही, यह टीम गांव में बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए ढाल के रूप में कार्य करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “समाज के हर बच्चे को अपना बच्चा मानकर सहयोग करना ही सबसे बड़ा मानव धर्म है।”
कार्यक्रम में उपस्थिति
कार्यक्रम के अंत में भोजपुर में शिक्षिका उषा प्रियंबदा और उदयपुर में शिक्षक गणेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर रामउमेद राम, संदीप कुमार, आशा कार्यकर्ता पिंकी कुमारी, सुनीता देवी, रिंकू देवी, रुणा देवी, निर्मला देवी, बनारसी देवी, रविन्द्र पासवान और कृष्णा देवी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
अरुणोदय प्रेप हाई स्कूल के वार्षिकोत्सव में सांस्कृतिक छटा, मेधावी छात्र और अभिभावक सम्मानित
मुजफ्फरपुर | रामदयालु स्थित अरुणोदय प्रेप हाई स्कूल का वार्षिकोत्सव रविवार को विद्यालय परिसर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में शिक्षा, समाज और तकनीक के बदलते स्वरूप पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि बिहार विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी, पूर्व पार्षद डॉ. नरेंद्र सिंह, समाजसेवी अमर बाबू, सेवानिवृत्त सैनिक प्रशांत कुमार, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक प्रेम कुमार सिंह, एमडीडीएम कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश रंजन, शिक्षक भाग्यनारायण, शिक्षिका रचना द्विवेदी एवं विद्यालय के निदेशक पंकज कुमार त्रिवेदी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
तकनीक के खतरों पर प्रहार
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बंशीधर ब्रजवासी ने आधुनिक जीवनशैली पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दो टूक कहा, “आज के दौर में बच्चों के हाथ में थमाया गया मोबाइल किसी एटम बम से कम खतरनाक नहीं है।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को डिजिटल दुनिया के बजाय वास्तविक दुनिया और किताबों से जोड़ें।
वहीँ, पूर्व पार्षद डॉ. नरेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा का आलोक केवल व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि परिवार और संपूर्ण समाज को प्रकाशित करता है। विद्यालय के निदेशक पंकज कुमार त्रिवेदी ने भावुक होते हुए कहा कि “बच्चे हैं तो हम हैं”, इसलिए उनकी नींव मजबूत करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है।
रंगारंग कार्यक्रमों से दिया सामाजिक संदेश
कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। बच्चों द्वारा तीन दर्जन से अधिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इन प्रस्तुतियों की विशेषता यह रही कि इनमें केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि गहरा सामाजिक संदेश छिपा था:
सोशल मीडिया का मायाजाल: एक लघु नाटिका के माध्यम से बच्चों ने दिखाया कि कैसे सोशल मीडिया युवाओं की ऊर्जा को नष्ट कर रहा है।
कुरीतियों पर चोट: बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ बच्चों के अभिनय ने उपस्थित दर्शकों की आँखें नम कर दीं।
शिक्षा का महत्व: गीतों और नृत्यों के जरिए ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और साक्षरता का संदेश प्रसारित किया गया।
खास बातें:
लक्ष्य: ज्ञान-विज्ञान के जरिए ही सफलता संभव: डॉ. राकेश रंजन।
सम्मान: 80 छात्र मेडल से तो माता-पिता प्रशस्ति पत्र से नवाजे गए।
विषय: बाल विवाह और सोशल मीडिया के प्रभावों पर केंद्रित रहा मंच।
अभिभावकों का भी बढ़ा मान
शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालय ने एक नई पहल करते हुए न केवल 80 मेधावी छात्र-छात्राओं को मेडल देकर सम्मानित किया, बल्कि उनके अभिभावकों को भी विशेष प्रशस्ति पत्र भेंट किया। डॉ. सतीश कुमार साथी ने कहा कि बच्चे का विकास शिक्षक और अभिभावक के साझा प्रयासों का परिणाम होता है।
इनकी रही गरिमामय उपस्थिति
मंच का सफल संचालन शिक्षक डॉ. सतीश कुमार साथी ने अपनी चिर-परिचित अंदाज में किया। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी, बड़ी संख्या में अभिभावक और स्थानीय ग्रामीण मौजूद थे। अंत में निदेशक ने आगत अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कार्यक्रम के समापन की घोषणा की।
मुजफ्फरपुर (बिहार): बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की अलख जगाने वाले, शोषितों के मसीहा और ‘बिहार के लेनिन’ के नाम से विख्यात अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद की जयंती मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड में पूरे उत्साह और संकल्प के साथ मनाई गई। सुजावलपुर चौक पर आयोजित इस ‘जयंती समारोह’ ने न केवल जगदेव बाबू के संघर्षों को याद किया, बल्कि वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में उनके विचारों की प्रासंगिकता पर एक गंभीर विमर्श भी छेड़ दिया।
समारोह के दौरान एक ही गूँज सुनाई दे रही थी— “सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है।” यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि उस हक की आवाज थी जिसे जगदेव बाबू ने अपने खून से सींचा था।
गरिमामय आयोजन और पुष्पांजलि अर्पण
इस अवसर पर क्षेत्र के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों और समाजसेवियों ने भाग लेकर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।कार्यक्रम की गरिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि इसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका और सामाजिक संगठनों से जुड़े दिग्गजों ने शिरकत की। समारोह की अध्यक्षता संतोष कुशवाहा ने की, जबकि मंच का कुशल संचालन सुनील कुमार राम के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि अरुण कुशवाहा (अधिवक्ता, उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय पटना) और विशिष्ट अतिथि जस्टिस दामोदर प्रसाद (पूर्व जिला न्यायाधीश, पटना) ने किया। इसके पश्चात, उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों ने शहीद जगदेव बाबू के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
वक्ताओं का ओजस्वी संबोधन: विचारों की मशाल
“जगदेव बाबू एक व्यक्ति नहीं, एक मुकम्मल विचार थे” – अरुण कुशवाहा
मुख्य अतिथि अरुण कुशवाहा ने अपने संबोधन में जगदेव बाबू के क्रांतिकारी जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “जगदेव बाबू ने उस दौर में शोषितों को जगाने का काम किया था जब बोलना भी गुनाह माना जाता था। उन्होंने नारा दिया था कि दस का शासन नब्बे पर नहीं चलेगा। आज ‘जगदेव विचार मंच‘ उसी मशाल को आगे लेकर बढ़ रहा है। हमें एकजुट होकर उनके उस अधूरे सपने को पूरा करना होगा जहाँ समाज के अंतिम व्यक्ति को उसका वाजिब हक मिले।”
“न्याय की अवधारणा जगदेव बाबू के बिना अधूरी” – जस्टिस दामोदर प्रसाद
पूर्व जिला न्यायाधीश जस्टिस दामोदर प्रसाद ने कानूनी और सामाजिक दृष्टिकोण से जगदेव बाबू के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब भी पिछड़ों, दलितों और वंचितों के हक की बात होती है, तो जगदेव बाबू का नाम स्वतः ही शीर्ष पर आता है। उन्होंने सत्ता और संसाधनों में पिछड़ों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपनी शहादत दी थी। उनके विचारों को जन-जन तक पहुँचाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
“इतिहास के पन्नों में मिले उचित स्थान” – शशि गुप्ता व संतोष कुशवाहा
समारोह में प्रमुख मांग उठाते हुए शशि गुप्ता ने कहा कि जगदेव विचार मंच अब केवल आयोजनों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने सरकार से दो टूक शब्दों में मांग की:
अमर शहीद जगदेव प्रसाद को ‘भारत रत्न‘ से सम्मानित किया जाए।
विद्यालयों और महाविद्यालयों की पाठ्य पुस्तकों में उनकी जीवनी शामिल की जाए।
अध्यक्षता कर रहे संतोष कुशवाहा ने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल नारों तक सीमित न रहें, बल्कि जगदेव बाबू के साहित्य और उनके द्वारा लिखे गए क्रांतिकारी लेखों का अध्ययन करें।
गाँव-गाँव तक पहुँचेगी विचारधारा: सुनील कुमार राम
मंच संचालन करते हुए सुनील कुमार राम ने कहा कि जगदेव बाबू ने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को आवाज दी थी। उन्होंने संकल्प लिया कि जगदेव विचार मंच की टीम गाँव-गाँव जाकर युवाओं को संगठित करेगी और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेगी।
गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में क्षेत्र के कई प्रतिष्ठित चेहरों ने अपनी भागीदारी दर्ज कराई, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
दिनेश पुष्पम (मुखिया, केशोपुर)
रमेश कुमार (मुखिया, सरमस्तपुर)
हरीराम कुशवाहा (पूर्व जिला अध्यक्ष, जेडीयू)
अनिल कुमार (जिला परिषद सदस्य – 53)
इसके साथ ही अनिल कुमार अकेला, डॉ. राम बाबू, मिन्ती बौद्ध, महेश्वरी बौद्ध, सुनीता देवी, राजेश कुमार बौद्ध, दीपन कुमार, कुन्दन पासवान, मुकेश कुशवाहा, श्यामनन्दन महतो और शशि गुप्ता जैसे समाजसेवियों ने भी अपने विचार रखे।
भविष्य की रणनीति: ‘सड़क से सदन तक‘ की लड़ाई
समारोह केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ‘जगदेव विचार मंच’ ने अपनी आगामी रणनीतियों का खाका भी पेश किया। मंच ने घोषणा की कि वे तीन स्तरों पर कार्य करेंगे:
डिजिटल क्रांति: आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का उपयोग कर जगदेव बाबू के भाषणों और विचारों को देश-दुनिया तक पहुँचाना।
राज्यव्यापी संवाद: बिहार के प्रत्येक जिले और प्रखंड में संवाद कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित करना ताकि शोषित समाज को संगठित किया जा सके।
युवा शक्ति का जुड़ाव: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ‘छात्र युवा सम्मेलन’ का आयोजन कर युवाओं को सामाजिक न्याय की लड़ाई से जोड़ना।
एक नए युग की आहट – सकरा के सुजावलपुर चौक पर आयोजित इस जयंती समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जगदेव बाबू के विचार आज भी बिहार की मिट्टी में रचे-बसे हैं। उपस्थित जनसमूह ने संकल्प लिया कि जब तक जगदेव बाबू को ‘भारत रत्न’ नहीं मिल जाता और उनकी जीवनी पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बन जाती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
‘जगदेव बाबू अमर रहें’ के गगनभेदी नारों के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, लेकिन वहाँ से निकलने वाला हर व्यक्ति अपने साथ एक नया संकल्प लेकर गया—एक ऐसे समाज के निर्माण का संकल्प, जहाँ ‘नब्बे भाग’ शोषितों का हो।