Saturday, March 7, 2026
No menu items!

समस्तीपुर की बंद चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की उठी मांग, शहर में निकला विरोध जुलूस

0

समस्तीपुर | 18 फरवरी, 2026

शहर की ऐतिहासिक समस्तीपुर चीनी मिल को पुनः चालू करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। मंगलवार की शाम रेल विकास-विस्तार मंच एवं जिला विकास मंच के संयुक्त तत्वावधान में कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। माधुरी चौक से जोरदार नारों के साथ जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

हुंकार: “रोजी-रोटी का आधार थी यह मिल”

जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों का भ्रमण करने के पश्चात पुनः माधुरी चौक पहुंचकर एक सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने की।

सभा को संबोधित करते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक और मंच के वरीय सदस्य शंकर साह ने भावुक होते हुए कहा:

“अंग्रेजों के जमाने की यह मिल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों के भरण-पोषण का साधन थी। मिल के पास आज भी पर्याप्त जमीन और आवागमन के बेहतर साधन उपलब्ध हैं। अगर सरकार की इच्छाशक्ति हो, तो इसे आसानी से शुरू कर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बदला जा सकता है।”

राजनीतिक दलों ने दिया समर्थन

आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिल रहा है। राजद नेता राकेश ठाकुर और भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने साझा बयान में कहा कि अब समय आ गया है जब सभी राजनीतिक दलों, बुद्धिजीवियों, छात्रों और किसानों को एक मंच पर आकर संघर्ष तेज करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक मिल चालू नहीं होती, यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।

1995 से बंद है समस्तीपुर की लाइफलाइन

विदित हो कि इस चीनी मिल की स्थापना 1917 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। दशकों तक यह मिल जिले की आर्थिक रीढ़ बनी रही, लेकिन 1995 में अचानक आई रुकावटों के कारण इसे बंद कर दिया गया। तब से लेकर आज तक कई चुनाव हुए और कई वादे किए गए, लेकिन मिल की चिमनियों से धुआं नहीं निकला।

सभा में ये रहे मौजूद: कार्यक्रम में मुख्य रूप से राम विनोद ,जीबछ पासवान, अरुण कुमार राय, राजेंद्र राय, पिंकू पासवान, रामलाल राम, संतोष कुमार निराला, डोमन राय, विश्वनाथ सिंह हजारी, रंभू राय, नंदू महतो, शाहीद हुसैन, मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता और रामदयालू महतो सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

महिला सहकारी समितियों की ताकत और भविष्य पर वेबिनार का आयोजन कल

0

मुजफ्फरपुर : महिला सशक्तिकरण और सहकारी समितियों की भूमिका पर चर्चा करने के लिए आगामी शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को एक विशेष वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। ‘जब महिला श्रमिक कमान संभालती हैं: महिला सहकारी समितियों की आवाज़ें’ विषय पर आधारित यह ऑनलाइन सत्र शाम 6:00 बजे से 8:00 बजे तक चलेगा।

यह वेबिनार 24 अक्टूबर 2025 को श्रमिक सहकारी समितियों और लोकतांत्रिक आर्थिक व्यवस्था पर आयोजित सफल सत्र की अगली कड़ी है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम कर रही महिला कामगारों के अनुभवों और चुनौतियों को साझा करना है।

प्रमुख वक्ता और विशेषज्ञ

सत्र में देश के विभिन्न हिस्सों से महिला नेतृत्व भाग लेंगी:

  • गीता खाँट: पनम महिला क्रेडिट सहकारी समिति (गुजरात)
  • एम. नूकम्मा: एसएसएफ फिश प्रोड्यूसर को-ऑप लिमिटेड (आंध्र प्रदेश)
  • कोनिका धनवार: मधु चाय बागान (पश्चिम बंगाल)
  • शीबा संजेश: करी पाउडर कंसोर्टियम (केरल)

कार्यक्रम का संचालन कृष्णा प्रिया चोरागुड़ी द्वारा किया जाएगा। चर्चा को समृद्ध बनाने के लिए प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज़, शोधकर्ता शुभश्री घटक और एम.के. श्रवण, आनंदी इंडिया से तारुलता सोलंकी और फिशकॉन से अर्जिली दासू भी शामिल होंगे।

आयोजन का उद्देश्य

जन स्वास्थ्य अभियान (JSA) और ‘रिसर्च फॉर एक्शन’ के सहयोग से आयोजित इस चर्चा का केंद्र यह है कि कैसे सहकारी समितियां महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। यह सत्र स्वास्थ्य समानता और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

शामिल होने का माध्यम

इच्छुक प्रतिभागी ज़ूम (Zoom) लिंक https://shorturl.at/GhEnP के माध्यम से या पोस्टर पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करके इस वेबिनार का हिस्सा बन सकते हैं। यह डिस्कशन देखने के लिए, https://groups.google.com/d/msgid/jsadiscuss/010e5445-6049-4e58-b387-6f278b59d866%40riseup.net पर जाएं।

सकरा में दहेजमुक्त और आडंबररहित बौद्ध रीति-रिवाज से संपन्न हुआ नंदिनी और राजीव का विवाह

0

विजन वैली हॉल में गूंजे नमो बुद्धायके जयकारे, भंते मणिकीर्ति पासवान ने कराया विवाह संपन्न

सकरा (मुजफ्फरपुर): समाज में फैली कुरीतियों और फिजूलखर्ची पर प्रहार करते हुए, सकरा प्रखंड के विजन वैली हॉल में एक आदर्श विवाह का आयोजन किया गया। यह विवाह पूरी तरह से बौद्ध रीति-रिवाज (बौद्ध विधि) से संपन्न हुआ, जिसमें न तो दहेज की मांग थी और न ही कोई दिखावा या आडंबर। राजीव कुमार बौद्ध और नंदिनी कुमारी बौद्ध के परिणय सूत्र में बंधने के इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने सैकड़ों मेहमानों ने इस अनूठी पहल की जमकर सराहना की।

आडंबरमुक्त और सादगीपूर्ण समारोह : शादी का माहौल पारंपरिक शोर-शराबे से कोसों दूर था। आमतौर पर शादियों में होने वाला डीजे का शोर, फिजूलखर्ची और दिखावा यहाँ पूरी तरह नदारद था। कार्यक्रम की शुरुआत तथागत बुद्ध की वंदना के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने बुद्ध और डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों का पालन करते हुए सादगी के साथ वर-वधू को आशीर्वाद दिया।

भंते मणिकीर्ति पासवान ने दिलाई शपथ : इस विवाह को संपन्न कराने के लिए विशेष रूप से भंते मणिकीर्ति पासवान एवं पवन शर्मा  उपस्थित थे। उन्होंने बौद्ध विधियों का पालन करते हुए वर-वधू को अष्टशील और पंचशील का पाठ पढ़ाया। भंते जी ने अपने संबोधन में कहा कि बौद्ध विवाह का उद्देश्य केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों को बुद्ध के धम्म और तर्कसंगत विचारधारा से जोड़ना है। उन्होंने वर-वधू को जीवन भर एक-दूसरे का सम्मान करने और विपत्ति में भी धम्म के मार्ग पर चलने की शपथ दिलाई।

दहेजमुक्त समाज का संदेश : आयोजकों का मुख्य उद्देश्य समाज को दहेजमुक्त बनाना था। इस विवाह में वर पक्ष ने कन्या पक्ष से किसी भी प्रकार के लेनदेन से साफ इनकार कर दिया, जो आज के समय में एक मिसाल है। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथि एवं भन्‍ते पवन शर्मा ने कहा कि “यह शादी सामाजिक बदलाव का एक बड़ा प्रतीक है। युवा पीढ़ी को ऐसी सादी शादियों से प्रेरणा लेनी चाहिए।”

प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति : कार्यक्रम में वर-वधू को आशीर्वाद देने के लिए क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। बैनर पर महात्मा बुद्ध, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, संत रविदास सहित अन्य महापुरुषों की तस्वीरें इस बात की गवाह थीं कि यह विवाह सामाजिक समानता और तर्कवादी सोच पर आधारित था।

मिशन सिंगरने बिखेरा धम्म का रंग : कार्यक्रम को संगीतमय बनाने के लिए प्रसिद्ध ‘मिशन सिंगर’ राजेश कुमार बौद्ध, संगीता बौद्ध, महेश्वरी बौद्ध और निम्ति बौद्ध ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने बुद्ध और अंबेडकर के गीतों के माध्यम से माहौल को भक्तिमय और बौद्धमय बना दिया।

परिजनों और स्वागतकर्ता का सहयोग : शादी के आयोजन में स्वागतकर्ता जलेंद्र राम (ग्राम: चंदपुर फतेह, पोस्ट: राजापाकर, थाना: पातेपुर, जिला: वैशाली) और वर-वधू के परिजनों ने मेहमानों के स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी। कार्यक्रम को सफल बनाने में ऋषि कुमार, सोनू कुमार, वकील कुमार और समस्त बौद्ध परिवार ने अहम भूमिका निभाई। यह विवाह न केवल राजीव और नंदिनी के जीवन की नई शुरुआत है, बल्कि यह सकरा क्षेत्र में एक नए, शिक्षित और आडंबरमुक्त समाज की दिशा में एक बड़ा कदम है।

शिलान्यास के बाद भी ठप है मुक्तापुर ओवरब्रिज का काम, रेल विकास मंच ने दी प्रशासन को चेतावनी— ‘अब होगा आर-पार का संघर्ष’

0

डीआरएम और डीएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन; होली के बाद समस्तीपुर में बड़े जनांदोलन का शंखनाद


समस्तीपुर, 17 फरवरी 2026

बिहार के समस्तीपुर जिले में विकास की सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ जन-आक्रोश उबलने लगा है। जिले की लाइफलाइन मानी जाने वाली मुक्तापुर रेल गुमटी पर ओवरब्रिज निर्माण कार्य में हो रही देरी ने स्थानीय नागरिकों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। मंगलवार को माधुरी चौक स्थित ऐतिहासिक राधे-कृष्ण मंदिर के प्रांगण में रेल विकास-विस्तार मंच एवं जिला विकास मंच की एक अति-महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार और रेल प्रशासन ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं त्यागी, तो समस्तीपुर की सड़कों पर एक ऐसा आंदोलन खड़ा होगा जिसे रोकना प्रशासन के वश में नहीं होगा।

शिलान्यास की औपचारिकता और धरातल की कड़वी सच्चाई

बैठक के दौरान सबसे तीखा प्रहार मुक्तापुर रेल गुमटी पर बन रहे ओवरब्रिज को लेकर किया गया। मंच के सदस्यों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण पुल का शिलान्यास स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। शिलान्यास के समय समस्तीपुर और दरभंगा को जोड़ने वाली इस मुख्य सड़क पर यात्रा करने वाले लाखों लोगों में एक उम्मीद जगी थी कि अब घंटों लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी।

परंतु, विडंबना यह है कि शिलान्यास के महीनों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। रेल विकास-विस्तार मंच के सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कार्य शुरू न होने से जनता में भारी निराशा है। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि उन हजारों दैनिक यात्रियों के साथ विश्वासघात भी है जो प्रतिदिन इस गुमटी पर अपना कीमती समय और ईंधन बर्बाद करते हैं।

अटेरन चौक और हवाई अड्डे की उपेक्षा पर गहरा रोष

बैठक में केवल मुक्तापुर ही नहीं, बल्कि समस्तीपुर शहर की अन्य ज्वलंत समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अटेरन चौक स्थित रेल गुमटी शहर का एक और ‘डेथ ट्रैप’ और ‘ट्रैफिक चोक पॉइंट’ बन चुका है। यहाँ हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे आपातकालीन सेवाओं और स्कूली बच्चों को भारी कठिनाई होती है। मंच ने मांग की है कि इस गुमटी पर भी ओवरब्रिज निर्माण को तत्काल मंजूरी दी जाए।

इसके अतिरिक्त, दूधपूरा स्थित हवाई अड्डा और माधुरी चौक का चिल्ड्रेन पार्क भी चर्चा के केंद्र में रहे। वक्ताओं ने कहा कि दूधपूरा हवाई अड्डे का जीर्णोद्धार कर इसे चालू करना जिले के व्यावसायिक और सामरिक विकास के लिए अनिवार्य है। वहीं, अंग्रेजों के जमाने से स्थापित ऐतिहासिक चिल्ड्रेन पार्क, जो कभी बच्चों के मनोरंजन का केंद्र था, आज उपेक्षा के कारण अपनी पहचान खो रहा है। मंच ने इसके जीर्णोद्धार और इसे पुनः जनता के लिए खोलने की पुरजोर मांग की है।

संघर्ष की बनी रणनीति: पहले संवाद, फिर संघर्ष

बैठक की अध्यक्षता मंच के वरीय सदस्य शंकर प्रसाद साह ने की और संचालन संयोजक शत्रुघ्न राय पंजी ने किया। शत्रुघ्न पंजी ने अपने संबोधन में मंच के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि रेल विकास-विस्तार मंच और जिला विकास मंच हमेशा से जिला हित में संघर्षरत रहा  हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंच ने पहले भी अपने आंदोलनों के माध्यम से सरकार और अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कर कई विकास कार्य संपन्न करवाए हैं।

आगामी कार्ययोजना:

  1. प्रशासनिक दस्तक: इसी सप्ताह के अंत में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंडल रेल प्रबंधक (DRM) और जिलाधिकारी (DM) से मुलाकात करेगा। उन्हें एक विस्तृत ‘स्मारक पत्र’ (ज्ञापन) सौंपा जाएगा, जिसमें सभी लंबित मांगों का समयबद्ध समाधान करने का आग्रह होगा।
  2. निर्णायक आंदोलन: यदि ज्ञापन सौंपने के बाद भी प्रशासन का रवैया ढुलमुल रहता है, तो होली के त्यौहार के तुरंत बाद एक निर्णायक और उग्र आंदोलन की शुरुआत की जाएगी। यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि मुक्तापुर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य भौतिक रूप से शुरू नहीं हो जाता।

एकजुट हुए जिले के प्रबुद्ध नागरिक

इस बैठक में जिले के कोने-कोने से आए प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इनमें अरूण कुमार राय, जीबछ पासवान, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राजेंद्र राय, पिंकू पासवान, रामलाल राम, रामदयालू महतो, राम विनोद पासवान, राकेश कुमार ठाकुर, शाहीद हुसैन, मनोज कुमार राय, सुधीर प्रसाद गुप्ता, विश्वनाथ सिंह हजारी, नंदू महतो, रंभू राय, डोमन राय और संतोष कुमार निराला प्रमुख थे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे अपनी मिट्टी और अपने जिले के हक के लिए किसी भी बड़ी कुर्बानी को तैयार हैं।

समस्तीपुर आज विकास की दोहरी मार झेल रहा है—एक तरफ परियोजनाओं की फाइलें दफ्तरों में धूल फांक रही हैं, तो दूसरी तरफ जनता जाम और अव्यवस्था के बोझ तले दब रही है। रेल विकास-विस्तार मंच की यह बैठक महज एक औपचारिक सभा नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए आखिरी चेतावनी है। मुक्तापुर से लेकर दूधपूरा तक की समस्याओं पर अब जनता चुप बैठने वाली नहीं है।

भाकपा माले ने समस्तीपुर में कॉ.जितेंद्र पासवान की रिहाई के लिए निकाला प्रतिरोध मार्च

0

झूठे मुकदमे में फंसाने के खिलाफ समस्तीपुर में प्रदर्शन

समस्तीपुर, 16 फरवरी 2026 बिहार के गोपालगंज (भोरे) से भाकपा माले के जुझारू नेता और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के बिहार राज्य अध्यक्ष, कॉ. जितेंद्र पासवान को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के खिलाफ आज समस्तीपुर की सड़कों पर प्रतिरोध मार्च निकाला गया । भाकपा माले और RYA के कार्यकर्ताओं ने इस अदालती फैसले को ‘अन्यायपूर्ण’ और ‘राजनीतिक साजिश’ करार देते हुए प्रतिरोध दिवस” के रूप में मनाया।

मालगोदाम चौक से गूंजा इंकलाब का नारा

प्रतिरोध मार्च की शुरुआत समस्तीपुर शहर के व्यस्त मालगोदाम चौक से हुई। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में लाल झंडे और बड़े बैनर थामे हुए थे, जिन पर साफ तौर पर लिखा था— कॉ. जितेंद्र पासवान और अन्य साथियों को उम्रकैद की सजा के अन्यायपूर्ण फैसले के खिलाफ प्रतिरोध दिवस।” मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। “इंकलाब जिंदाबाद”, “कॉ. जितेंद्र पासवान को रिहा करो” और “नितीश कुमार जवाब दो” जैसे नारों से पूरा सड़क गूंज उठा।

साजिश के तहत फंसाने का आरोप

प्रदर्शन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जितेंद्र पासवान गरीबों, दलितों और शोषितों की आवाज रहे हैं। उन्हें एक पुराने और झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजना लोकतंत्र की हत्या है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार जन-नेताओं को जेल भेजकर जनता के आंदोलनों को कुचलना चाहती है। प्रदर्शनकारी बार-बार “जेल का फाटक टूटेगा, जितेंद्र पासवान छूटेगा” के संकल्प को दोहरा रहे थे।

प्रमुख नेताओं की उपस्थिति और नेतृत्व: इस व्यापक आंदोलन का नेतृत्व भाकपा माले के जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल सड़क तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती से लड़ा जाएगा। सभा में रौशन कुमार, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, ललन कुमार, महावीर पोद्दार, फूल बाबू सिंह, दीपक यदुवंशी,अमित कुमार, अजय कुमार सहित भारी संख्या में युवा और वरिष्ठ नेता शामिल हुए,

भाकपा माले के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जितेंद्र पासवान के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस नहीं लिया गया और उन्हें न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन गोपालगंज और समस्तीपुर से निकलकर पूरे बिहार में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगा।

बन्‍दरा प्रखण्‍ड में कब होगा साकार डिग्री कॉलेज का सपना ?’

0

‘साहब! क्या हमारे बच्चों को हक नहीं कि वे अपने आँगन में पढ़ सकें?’

मुजफ्फरपुर (विशेष संवाददाता): बिहार के शैक्षिक मानचित्र पर विकास की लंबी-चौड़ी लकीरें खींची जा रही हैं, ‘पढ़ेगा बिहार, बढ़ेगा बिहार’ के नारे गूँज रहे हैं, लेकिन मुजफ्फरपुर जिले का बन्दरा प्रखंड आज भी एक बुनियादी हक के लिए छटपटा रहा है। यह हक है—उच्च शिक्षा का। आजादी के अमृत काल में भी यहाँ के मेधावी छात्रों के सपने मिलों दूर तक फैली धूल भरी सड़कों और असुरक्षित सफर की भेंट चढ़ रहे हैं। आलम यह है कि सरकार की ‘हर प्रखंड, एक डिग्री कॉलेज’ की घोषणा के बाद भी बन्दरा का नाम सरकारी फाइलों से गायब है, जिसने यहाँ के हजारों परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।

तीन शक्ति केंद्रों से एक ही गुहार

अपनी इस मार्मिक पीड़ा को लेकर बन्दरा प्रखंड के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों ने एक साथ तीन महत्वपूर्ण शक्ति केंद्रों का दरवाजा खटखटाया है। श्याम किशोर सिंह के नेतृत्व में प्रखंड के छात्र-छात्राओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने माननीय शिक्षा मंत्री (बिहार सरकार), माननीय विधान पार्षद (तिरहुत स्नातक क्षेत्र) और माननीया विधायक (गायघाट विधानसभा) के नाम एक विनम्र किंतु बेहद भावुक आवेदन प्रेषित किया है।

इस त्रिकोणीय मांग पत्र में क्षेत्र की जनता ने अपनी वर्षों की उपेक्षा का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जहाँ एक ओर सरकार हर प्रखंड में कॉलेज खोलने का श्रेय ले रही है, वहीं बन्दरा जैसे पिछड़े क्षेत्र को इस सूची से बाहर रखना यहाँ के भविष्य के साथ अन्याय है।

दूरी और मजबूरी: शिक्षा के पथ पर कांटे

बन्दरा प्रखंड आज भी जिले के अन्य प्रखंडों की तुलना में विकास के पायदान पर सबसे पीछे खड़ा है। यहाँ के विद्यार्थियों के लिए इंटरमीडिएट के बाद की पढ़ाई एक ‘जंग’ लड़ने के समान है। गाँव की कच्ची पगडंडियों से निकलकर मुजफ्फरपुर शहर या अन्य दूरस्थ कॉलेजों तक पहुँचने में छात्रों का आधा दिन सफर की थकान में ही गुजर जाता है।

अभिभावकों का कहना है कि सबसे बुरा हाल छात्राओं का है। उच्च शिक्षा के लिए सुरक्षित परिवहन की कमी और स्थानीय स्तर पर कॉलेज न होने के कारण कई मेधावी बेटियों की पढ़ाई बीच में ही छुड़वाने के लिए माता-पिता मजबूर हैं। यह केवल एक कॉलेज की मांग नहीं है, बल्कि उन हजारों आँखों के काजल की रक्षा की गुहार है जो पढ़-लिखकर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं।

सरकारी घोषणा और बन्दरा की शून्यउपलब्धि

बिहार सरकार की वह घोषणा अत्यंत सराहनीय और दूरदर्शी थी जिसमें प्रत्येक प्रखंड में एक डिग्री कॉलेज की स्थापना का संकल्प लिया गया था। इस घोषणा से बन्दरा के लोगों में एक उम्मीद जागी थी कि अब उनके बच्चों को मुजफ्फरपुर या दरभंगा के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। लेकिन जब हाल ही में जारी हुई सूची में बन्दरा प्रखंड का नाम नदारद पाया गया, तो यहाँ के विद्यार्थियों और अभिभावकों में निराशा और गहरी चिंता व्याप्त हो गई।

बंदरा प्रखंड के जागरूक नागरिकों का कहना है कि बन्दरा की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहाँ से मुख्य शहरों की दूरी काफी अधिक है। ऐसे में यहाँ डिग्री कॉलेज का न होना इस क्षेत्र के शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सबसे बड़ी बाधा बन गया है।

ज्ञापन के 4 मुख्य बिंदु: क्यों जरूरी है यहाँ कॉलेज?

  1. शैक्षणिक पिछड़ापन: बन्दरा की साक्षरता और उच्च शिक्षा के अनुपात को सुधारने का एकमात्र रास्ता स्थानीय डिग्री कॉलेज है।
  2. सुरक्षा और बेटियाँ: घर के पास कॉलेज होने से छात्राओं का ‘ड्रॉप-आउट’ रेट शून्य होगा और वे बिना किसी डर के स्नातक की डिग्री ले सकेंगी।
  3. आर्थिक मार: दूर जाकर पढ़ने में लगने वाला भारी बस किराया और हॉस्टल का खर्च यहाँ के गरीब किसानों और मजदूरों की कमर तोड़ रहा है।
  4. क्षेत्रीय असंतुलन: जब अन्य प्रखंडों को कॉलेज मिल रहा है, तो विकास की दृष्टि से पिछड़े बन्दरा को वंचित रखना न्यायसंगत नहीं है।

एक विनम्र आर्त पुकार

प्रेषक श्याम किशोर सिंह और बन्दरा के नागरिकों ने अपने पत्र में किसी विरोध या आक्रोश के बजाय एक ‘विनम्र निवेदन’ किया है। उन्होंने माननीय शिक्षा मंत्री की दूरदर्शिता, तिरहुत स्नातक MLC के शैक्षणिक प्रेम और क्षेत्रीय विधायक की कर्तव्यनिष्ठा पर भरोसा जताते हुए आग्रह किया है कि बन्दरा की भौगोलिक और सामाजिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाए।

क्या सुनेगी सरकार? :क्या बन्दरा के मेधावी छात्रों को अपनी ही मिट्टी पर स्नातक की टोपी पहनने का मौका मिलेगा? क्या सरकारी फाइलों में दबा यह प्रखंड कभी विकास की मुख्यधारा से जुड़ पाएगा? ये सवाल आज बन्दरा की सड़कों पर तैर रहे हैं। अब देखना यह है कि शिक्षा मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस ‘शैक्षणिक रेगिस्तान’ में उम्मीद की कितनी जल्दी बारिश करते हैं। बन्दरा की जनता को पूर्ण विश्वास है कि उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

भ्रष्ट स्कूलों पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’:शिक्षा के नाम पर ‘सफेदपोश’ ठगी, क्या आपका बच्चा भी किसी ‘फर्जी’ सीबीएसई स्कूल का शिकार है?

0

ट्रस्टके नाम पर छलावानिबंधन और मान्यता के बीच का घालमेल‘: कैसे और कहाँ करें आधिकारिक शिकायत?

रिपोर्ट : एस. एस. कुमार पंकज

आजकल हर गली-नुक्कड़ पर ‘इंटरनेशनल’ और ‘पब्लिक स्कूल’ के बोर्ड लटके मिल जाएंगे। ऊंची इमारतें, रंग-बिरंगे झूले और एयर-कंडीशन्ड क्लासरूम का लालच देकर अभिभावकों को फंसाया जाता है। सबसे बड़ा हथियार होता है— सीबीएसई पैटर्न ( “CBSE Pattern”) या सीबीएसई एफिलिएटेड (“CBSE Affiliated”) होने का दावा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके बच्चे का भविष्य संवारने का दावा करने वाले इन स्कूलों में से अधिकांश का नाता सीबीएसई बोर्ड से दूर-दूर तक नहीं है? यह शिक्षा नहीं, बल्कि शिक्षा के नाम पर खुली अराजकता और ठगी का कारोबार है।


शब्द का खेल: सीबीएसई पैटर्न ( “CBSE Pattern”) बनाम सीबीएसई एफिलिएटेड (“CBSE Affiliated”)

अभिभावकों को ठगने के लिए निजी स्कूल एक बहुत ही शातिर शब्दावली का प्रयोग करते हैं। वे विज्ञापन में लिखते हैं— “CBSE पैटर्न पर आधारित”

  • हकीकत: ‘पैटर्न’ का मतलब सिर्फ इतना है कि वे एनसीईआरटी (NCERT) की किताबें पढ़ा रहे हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह स्कूल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त है।
  • धोखा: मान्यता न होने के बावजूद ये स्कूल सीबीएसई के नाम पर भारी-भरकम फीस वसूलते हैं, जबकि कानूनी तौर पर उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

कैसे चलता है इन स्कूलों का गोरखधंधा‘?

आपके मन में सवाल होगा कि अगर स्कूल की मान्यता नहीं है, तो बच्चे 10वीं और 12वीं की परीक्षा कैसे देते हैं? यहीं से शुरू होता है सेटिंगऔर बच्चा जमा करने का खेल।

  • बच्चा कलेक्शन सेंटर: ये छोटे अनरजिस्टर्ड स्कूल केवल 8वीं या 9वीं कक्षा तक बच्चों को ‘जमा’ करते हैं।
  • फॉर्म की खरीद-फरोख्त: जब बच्चा बोर्ड परीक्षा के नजदीक पहुंचता है, तो ये स्कूल किसी अन्य शहर या दूरदराज के ‘मान्यता प्राप्त’ (Affiliated) स्कूल से सांठगांठ करते हैं।
  • फर्जी उपस्थिति: आपके बच्चे का नामांकन उस मान्यता प्राप्त स्कूल में ‘डमी’ छात्र के रूप में दिखा दिया जाता है। बच्चा परीक्षा किसी और स्कूल के नाम पर देता है, जिसे उसने कभी देखा तक नहीं होता। इस ‘सेटिंग’ के बदले मोटा कमीशन एक स्कूल से दूसरे स्कूल को जाता है।

यूडायस (UDISE) कोड: स्कूल की कुंडली खंगालने का अचूक हथियार

शिक्षा व्यवस्था की इस अराजकता से बचने के लिए भारत सरकार ने UDISE (Unified District Information System for Education) पोर्टल बनाया है। यह हर असली स्कूल का ‘आधार कार्ड’ है।

कैसे करें जांच?

  1. UDISE Code की मांग करें: स्कूल प्रशासन से उनका 11 अंकों का यूडायस कोड मांगें।
  2. ऑनलाइन वेरिफिकेशन: UDISE+ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ‘Know Your School’ सेक्शन में यह कोड डालें।
  3. क्या दिखेगा सच? * स्कूल किस कक्षा तक मान्यता प्राप्त है?
    • शिक्षक कितने हैं और वे प्रशिक्षित (Trained) हैं या नहीं?
    • स्कूल के पास अपनी जमीन है या किराए की बिल्डिंग?
    • शौचालय, बिजली और लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं कागजों पर हैं या असलियत में?

चेतावनी: यदि कोई स्कूल यूडायस कोड देने से कतराए या पोर्टल पर उसकी जानकारी संदिग्ध लगे, तो समझ लीजिए कि वहां आपके बच्चे का भविष्य सुरक्षित नहीं है।


सीबीएसई (CBSE) के कड़े नियम बनाम निजी स्कूलों की बदहाली

सीबीएसई बोर्ड किसी स्कूल को मान्यता देने से पहले कड़े मानकों की सूची जारी करता है, लेकिन ठगी करने वाले स्कूल इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं:

मानक (Norms)सीबीएसई का प्रावधान‘फर्जी’ स्कूलों की हकीकत
शिक्षककेवल B.Ed/CTET पास प्रशिक्षित शिक्षक।कम वेतन पर रखे गए अनट्रेन्ड युवा, जिन्हें खुद विषय का ज्ञान नहीं।
खेल मैदानस्कूल परिसर में एक निश्चित क्षेत्रफल का खेल मैदान अनिवार्य।छत पर या छोटी गली में खेलकूद का दिखावा।
वेतनशिक्षकों को सरकारी स्केल के अनुसार बैंक ट्रांसफर द्वारा वेतन।नकद (Cash) में बहुत कम वेतन, रजिस्टर पर फर्जी हस्ताक्षर।
लाइब्रेरी/लैबआधुनिक लैब और हजारों किताबों वाली लाइब्रेरी।सिर्फ नाम की अलमारी, जिसमें पुरानी धूल फांकती किताबें।

अनट्रेन्ड टीचर: शिक्षा की नींव पर चोट

इन प्राइवेट स्कूलों में सस्ते श्रम का बोलबाला है। अनुभवी और प्रशिक्षित शिक्षकों को मोटी सैलरी न देनी पड़े, इसलिए ये स्कूल स्नातक (Graduate) पास युवाओं को 3-7 हजार रुपये में रख लेते हैं।

  • इन शिक्षकों के पास पढ़ाने का कोई औपचारिक प्रशिक्षण (B.Ed/D.El.Ed) नहीं होता।
  • नतीजतन, बच्चों की नींव कमजोर रह जाती है और वे केवल रट्टा मारने की प्रवृत्ति की ओर बढ़ते हैं।

आरटीई (RTE) पर बगले झांकतेस्कूल संचालक

शिक्षा का अधिकार कानून (Right to Education – RTE) के तहत हर निजी स्कूल को 25% सीटें गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं।

  • अराजकता: जब भी कोई अभिभावक आरटीई के तहत नामांकन की बात करता है, तो ये स्कूल टालमटोल करने लगते हैं।
  • कारण: क्योंकि ये स्कूल खुद को कागजों पर ‘अल्पसंख्यक संस्थान’ बता देते हैं या अपनी मान्यता को छिपा लेते हैं ताकि उन्हें मुफ्त शिक्षा न देनी पड़े।

अभिभावक क्या करें? (सुरक्षा चेकलिस्ट)

नामांकन से पहले केवल स्कूल की पेंटिंग और यूनिफॉर्म न देखें, बल्कि ये सवाल पूछें:

  1. Affiliation Letter: स्कूल से सीबीएसई का एफिलिएशन लेटर मांगें और उस पर लिखे Affiliation Number को CBSE SARAS पोर्टल पर चेक करें।
  2. Transfer Certificate (TC): पूछें कि क्या स्कूल डिजिटल टीसी जारी करने के लिए अधिकृत है?
  3. शिक्षक प्रोफाइल: स्कूल से शिक्षकों की योग्यता का ब्योरा मांगें।

ट्रस्टके नाम पर छलावानिबंधन और मान्यता के बीच का घालमेल

शिक्षा माफियाओं का सबसे बड़ा और शातिर हथियार है— ट्रस्ट (Trust) या सोसायटीका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट। जब कोई जागरूक अभिभावक स्कूल की मान्यता (Affiliation) के बारे में पूछता है, तो स्कूल संचालक तुरंत दीवार पर टंगा एक फ्रेम किया हुआ सरकारी कागज दिखा देते हैं, जिस पर बड़े अक्षरों में लिखा होता है: पंजीकृत (Registered) – भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा।” अभिभावक इसे ही स्कूल की असल मान्यता समझकर निश्चिंत हो जाते हैं, लेकिन यहीं सबसे बड़ा ट्रस्ट गेम शुरू होता है।

क्या है ट्रस्ट और मान्यता का अंतर?

सच्चाई यह है कि किसी भी चैरिटेबल ट्रस्ट या एनजीओ (NGO) का पंजीकरण कराना बेहद आसान प्रक्रिया है। यह पंजीकरण केवल यह बताता है कि ‘अमुक संस्था’ एक कानूनी इकाई है जो सामाजिक कार्य कर सकती है। लेकिन, ट्रस्ट का निबंधन होने का मतलब यह कतई नहीं है कि उस संस्था को स्कूल चलाने या सीबीएसई (CBSE) बोर्ड से जुड़ने की अनुमति मिल गई है।

सीबीएसई बोर्ड की मान्यता प्राप्त करने के लिए स्कूल को ‘ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन’ के अलावा कई कठिन चरणों से गुजरना पड़ता है, जैसे:

  1. NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र): संबंधित राज्य सरकार से शिक्षा विभाग की अनुमति।
  2. भूमि और भवन मानक: स्कूल के नाम पर कम से कम 1.5 से 2 एकड़ जमीन का मालिकाना हक या लंबी लीज।
  3. एफिलिएशन कोड: सीबीएसई द्वारा जारी एक विशिष्ट 7 अंकों का नंबर।

कैसे होता है कागजी घालमेल?

ये फर्जी स्कूल संचालक ट्रस्ट के नाम पर बैंक खाता खोलते हैं और रसीद पर ‘सीबीएसई पैटर्न’ छाप देते हैं। वे अक्सर तर्क देते हैं कि हमारी संस्था (Trust) दिल्ली से रजिस्टर्ड है, इसलिए हमें सीबीएसई की जरूरत नहीं है।” यह सरासर झूठ है। सीबीएसई एक परीक्षा बोर्ड है, न कि कोई ट्रस्ट।

अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ये स्कूल अपनी वैन(गाड़ी), रसीद बुक और विज्ञापनों पर ‘ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर’ ऐसे लिखते हैं जैसे वह सीबीएसई का मान्यता नंबर हो। कई बार तो ये स्कूल एक ही ट्रस्ट के नाम पर शहर में 4-5 शाखाएं खोल लेते हैं, जबकि मान्यता केवल एक मुख्य शाखा के पास होती है। बाकी शाखाएं केवल ‘फीडर सेंटर’ या ‘बच्चा जमा केंद्र’ के रूप में अवैध रूप से चलती रहती हैं।

अभिभावक कैसे पहचानें यह जाल?

जब आप स्कूल जाएं, तो सोसायटी रजिस्ट्रेशन (Society Registration) के बजाय स्कूल एफिलिएशन लेटर (Affiliation Letter) की मांग करें। ध्यान रहे:

  • यदि स्कूल कहता है कि “अभी प्रोसेस में है” या “ट्रस्ट के नाम पर चल रहा है,” तो सावधान हो जाएं।
  • ट्रस्ट का निबंधन केवल संस्था की वैधता है, शिक्षा की गुणवत्ता या बोर्ड की गारंटी नहीं।
  • असली सीबीएसई स्कूल के पास एक Affiliation Number और एक School Code दोनों होते हैं।

इन स्कूलों का यह ‘गोरखधंधा’ तब तक फलता-फूलता रहेगा जब तक अभिभावक ‘ट्रस्ट के निबंधन’ और ‘बोर्ड की मान्यता’ के बीच के इस बारीक लेकिन घातक अंतर को नहीं समझेंगे। शिक्षा के इन सौदागरों के लिए बच्चा केवल एक ‘रोल नंबर’ है जिससे वे साल भर मोटी फीस वसूलते हैं, जबकि अंत में छात्र के हाथ में केवल एक ‘अमान्य’ या ‘सेटिंग’ वाला सर्टिफिकेट थमा दिया जाता है।


भ्रष्ट स्कूलों पर सर्जिकल स्ट्राइक‘: कैसे और कहाँ करें आधिकारिक शिकायत?

अगर आपको पता चलता है कि आपके बच्चे का स्कूल फर्जी सीबीएसई (CBSE) दावों, यूडायस (UDISE) विसंगतियों या ट्रस्ट के नाम पर ठगी कर रहा है, तो चुप न बैठें। आपकी एक शिकायत न केवल आपके बच्चे का भविष्य बचाएगी, बल्कि हजारों अन्य परिवारों को लुटने से रोकेगी।

सीबीएसई (CBSE) के पास ऑनलाइन शिकायत (Saras Portal)

सीबीएसई ने फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया है।

  • प्रक्रिया: सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट पर ‘Public Grievance’ सेक्शन में जाएं या सीधे CBSE SARAS पोर्टल पर लॉगिन करें।
  • क्या लिखें: स्कूल का नाम, पता और उनके द्वारा किए जा रहे फर्जी दावों (जैसे: बिना मान्यता के सीबीएसई लोगो का इस्तेमाल) का प्रमाण संलग्न करें।

जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को लिखित शिकायत

किसी भी निजी स्कूल पर नकेल कसने की पहली शक्ति जिला प्रशासन के पास होती है।

  • अपने जिले के DEO (District Education Officer) जिला शिक्षा अधिकारी या BSEO (Block Education Officer) प्रखंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में एक हस्ताक्षरित आवेदन दें।
  • इसमें स्कूल के UDISE कोड की अनुपलब्धता या RTE (शिक्षा का अधिकार) के नियमों के उल्लंघन का स्पष्ट जिक्र करें।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनसुनवाई पोर्टल

आजकल लगभग हर राज्य में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन सक्रिय है, जहाँ शिक्षा विभाग से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई होती है।

  • उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री हेल्पलाइन – 1076 या ‘IGRS’ पोर्टल।
  • बिहार: मुख्यमंत्री जनता दरबार या ‘लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम’ के तहत आवेदन।
  • मध्य प्रदेश/राजस्थान: ‘CM Helpline’ 181 पर कॉल करें।

महत्वपूर्ण टोल-फ्री नंबर और संपर्क सूत्र (Helpdesk)

अभिभावक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए निम्नलिखित नंबरों का उपयोग कर सकते हैं:

विभाग/संस्थाहेल्पलाइन नंबर / ईमेलउद्देश्य
CBSE हेड ऑफिस1800-11-8002मान्यता और बोर्ड परीक्षा संबंधी धोखाधड़ी
NCPCR (बाल अधिकार आयोग)011-23478200स्कूल द्वारा प्रताड़ित करने या RTE उल्लंघन पर
MHRD (शिक्षा मंत्रालय)011-23383451राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा संबंधी बड़ी शिकायतें
Cyber Crime Portal1930यदि स्कूल ने फीस के नाम पर ऑनलाइन ठगी की है

सावधान रहें: शिकायत करते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • साक्ष्य जुटाएं: स्कूल के विज्ञापनों के पंपलेट, फीस की रसीद और उनके लेटरहेड की फोटो जरूर रखें जहाँ उन्होंने ‘CBSE’ या ‘Registered’ होने का फर्जी दावा किया है।
  • गोपनीयता: यदि आप डरते हैं कि स्कूल आपके बच्चे को परेशान करेगा, तो आप अपनी पहचान गुप्त रखते हुए ‘गुमनाम शिकायत’ (Anonymous Complaint) भी पोर्टल पर दर्ज करा सकते हैं।
  • यूडायस की स्क्रीनशॉट: UDISE+ पोर्टल पर अगर स्कूल का डेटा ‘In-active’ या ‘Not Found’ दिखा रहा है, तो उसका स्क्रीनशॉट शिकायत के साथ जरूर लगाएं।

स्‍कूलों की मान्‍यता खुद कैसे करे चेक, जानें स्‍टेप बाय स्‍टेप

UDISE+ पोर्टल पर स्कूल की जांच करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले अपने ब्राउज़र (Google Chrome या कोई अन्य) में udiseplus.gov.in टाइप करें और एंटर दबाएं।

चरण 2: ‘Know Your School’ (अपने स्कूल को जानें) विकल्प चुनें

  • पोर्टल के होमपेज पर आपको ऊपर की तरफ या नीचे स्क्रॉल करने पर “Know Your School” का एक विकल्प/बटन दिखाई देगा। उस पर क्लिक करें।
  • सीधे लिंक के लिए आप src.udiseplus.gov.in पर भी जा सकते हैं।

चरण 3: सर्च करने का तरीका चुनें वहां आपको स्कूल खोजने के तीन मुख्य विकल्प मिलेंगे:

  1. By UDISE Code: यदि आपके पास स्कूल का 11 अंकों का यूडायस कोड है (जो स्कूल के बाहर बोर्ड पर लिखा होना चाहिए), तो इसे डालकर सीधे सर्च करें।
  2. By Name: यदि कोड नहीं है, तो आप स्कूल के नाम से भी खोज सकते हैं।
  3. By Location: आप राज्य (Bihar), जिला (Muzaffarpur) और ब्लॉक (Sakra) चुनकर भी स्कूलों की सूची देख सकते हैं।

चरण 4: विवरण (Details) भरें

  • अपना राज्य ‘Bihar’ चुनें।
  • कैप्चा कोड (जो स्क्रीन पर टेढ़े-मेढ़े अक्षर दिख रहे हैं) भरें।
  • ‘Search’ बटन पर क्लिक करें।

चरण 5: स्कूल की रिपोर्ट कार्ड देखें सर्च रिजल्ट में स्कूल का नाम आने पर उस पर क्लिक करें। यहाँ आपको स्कूल की पूरी कुंडली मिल जाएगी, जैसे:

  • Category: स्कूल कक्षा 1 से 5 तक है, 1 से 8 तक, या 10वीं-12वीं तक। (यहीं से फर्जीवाड़े का पता चलता है—अगर स्कूल 10वीं तक चल रहा है लेकिन यहाँ केवल 5वीं तक दर्ज है, तो वह अवैध है)।
  • Management: स्कूल प्राइवेट है या सरकारी।
  • Affiliation Board: यहाँ लिखा होगा कि स्कूल CBSE से मान्यता प्राप्त है या State Board (बिहार बोर्ड) से।
  • Status: स्कूल एक्टिव (Active) है या नहीं।

अभिभावकों के लिए कुछ जरूरी टिप्स:

  1. कोड की मांग करें: यदि स्कूल अपना UDISE कोड बताने में आनाकानी करता है, तो समझ लीजिए कि दाल में कुछ काला है। हर निबंधित स्कूल के लिए इसे सार्वजनिक करना अनिवार्य है।
  2. Affiliation No. की जांच: यदि पोर्टल पर स्कूल CBSE दिखाता है, तो वहां एक Affiliation Number भी होगा। आप इस नंबर को CBSE की अपनी वेबसाइट (SARAS पोर्टल) पर जाकर दोबारा क्रॉस-चेक कर सकते हैं कि वह नंबर वैध है या नहीं।
  3. शिक्षक और सुविधाएं: इसी पोर्टल पर आप यह भी देख सकते हैं कि स्कूल में कितने कमरे हैं, कितने शिक्षक ‘ट्रेन्ड’ हैं और वहां शौचालय/पेयजल की क्या स्थिति है।

सावधान रहें: कई स्कूल केवल बिहार सरकार से ‘निबंधन’ (Registration) कराते हैं और बोर्ड पर ‘CBSE पैटर्न’ लिख देते हैं। UDISE पोर्टल आपको स्पष्ट बता देगा कि वह स्कूल वास्तव में CBSE बोर्ड से जुड़ा है या नहीं।

सीबीएसई (CBSE) बोर्ड की मान्यता की जांच करना यूडायस (UDISE) पोर्टल से थोड़ा अलग और अधिक सटीक है। सीबीएसई ने इसके लिए एक समर्पित पोर्टल बनाया है जिसे SARAS (School Affiliation Re-engineered Automation System) कहा जाता है।

सकरा के अभिभावक नीचे दिए गए चरणों का पालन करके किसी भी स्कूल की “असली मान्यता” का पता लगा सकते हैं:

CBSE मान्यता (Affiliation) जांचने की चरण-दर-चरण प्रक्रिया:

चरण 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं सबसे पहले सीबीएसई की आधिकारिक एफ़िलिएशन वेबसाइट saras.cbse.gov.in पर जाएं।

चरण 2: ‘Check Affiliation’ विकल्प चुनें होमपेज पर आपको “Affiliated Schools” या “List of Affiliated Schools” का विकल्प दिखेगा। यहाँ आप कई तरीकों से खोज सकते हैं:

  • Affiliation Number द्वारा: यदि स्कूल के पास नंबर है (जैसे 330XXX), तो इसे भरें।
  • State-wise (राज्य के अनुसार): बिहार (Bihar) चुनें, फिर जिला (Muzaffarpur) चुनें।
  • School Name: स्कूल का नाम टाइप करें।

चरण 3: ‘Search’ बटन पर क्लिक करें विवरण भरने के बाद सर्च करें। यदि स्कूल वास्तव में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त है, तो उसकी पूरी जानकारी स्क्रीन पर आ जाएगी।

चरण 4: ‘Status’ और ‘Period’ चेक करें (सबसे महत्वपूर्ण) जब स्कूल का नाम स्क्रीन पर आए, तो इन दो चीजों को ध्यान से देखें:

  1. Affiliation Status: यहाँ ‘Grant’ या ‘Active’ लिखा होना चाहिए।
  2. Valid Up To: यह जांचें कि मान्यता किस वर्ष तक वैध है। कई स्कूलों की मान्यता खत्म हो चुकी होती है और वे अवैध रूप से स्कूल चलाते रहते हैं।
  3. Level: यह देखें कि मान्यता Secondary (10वीं तक) है या Senior Secondary (12वीं तक)। कई स्कूल केवल 8वीं या 10वीं तक मान्यता रखते हैं लेकिन 12वीं तक की कक्षाएं चलाते हैं।

याद रखें: सीबीएसई स्पष्ट रूप से कहता है कि बिना एफ़िलिएशन नंबर के कोई भी स्कूल अपने नाम के साथ “CBSE” शब्द का प्रयोग नहीं कर सकता। ऐसा करना कानूनी अपराध है।

जागिए, वरना देर हो जाएगी : समय निकल जाने पर पछताना होगा

शिक्षा अब सेवा नहीं, एक बेलगाम मुनाफाखोरी का जरिया बन चुकी है। ‘बोर्ड’ के नाम पर चल रहा यह ‘चकमा’ न केवल आपके पैसे की लूट है, बल्कि आपके बच्चे के उन बहुमूल्य वर्षों की बर्बादी भी है जो कभी लौटकर नहीं आएंगे।

याद रखिए, एक चमकती हुई बिल्डिंग कभी अच्छा भविष्य नहीं दे सकती, एक ‘मान्यता प्राप्त’ और ‘नैतिक’ संस्थान ही आपके बच्चे को सही दिशा दे सकता है। अगली बार स्कूल की फीस भरने से पहले, उनका यूडायस कोड और सीबीएसई एफिलिएशन जरूर जांचें। शिक्षा का मंदिर व्यापार का अड्डा नहीं होना चाहिए। आपका सजग रहना ही इन फर्जी स्कूलों की दुकानों पर ताला लगवा सकता है।


ज़कात अल्लाह की अमानत, इसमें ग़रीबों का हक़ तय: रिज़वान रफ़ीक़ी

0

ज़कात से बदल रही है तक़दीर: विधवाओं को पेंशन और छात्रों को मिल रहा शिक्षा का सहारा”

मुजफ्फरपुर | 15 फरवरी, 2026  समाज से गरीबी के उन्मूलन, बेरोजगारी को समाप्त करने और आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से ज़कात सेंटर इंडिया द्वारा एक विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत रविवार को शहर के चंदवारा स्थित एक विवाह भवन में भव्य सार्वजनिक संबोधन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस को ज़कात की सामूहिक व्यवस्था के प्रति जागरूक करना और इसके माध्यम से समाज में व्याप्त आर्थिक असंतुलन को दूर करना था।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ ‘तिलावत-ए-क़ुरआन’ से हुआ। उद्घाटन भाषण देते हुए ज़कात सेंटर इंडिया, मुज़फ्फरपुर के अध्यक्ष डॉ. महमूदुल हसन ने ज़कात की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि ज़कात को व्यक्तिगत रूप से देने के बजाय एक संगठित और सामूहिक व्यवस्था के तहत जमा और वितरित किया जाए, तो समाज से ग़रीबी और बेरोज़गारी को पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ज़कात सेंटर की स्थापना का मूल उद्देश्य ज़रूरतमंदों को केवल तात्कालिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मानजनक तरीके से आत्मनिर्भर बनाना है।

सफलता के आंकड़े : 180 लोग हुए स्वरोजगार से सशक्त

संस्था के सचिव सैयद अहमद ने पिछले तीन वर्षों की विस्तृत कार्य-रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि योजनाबद्ध तरीके से किए गए कार्यों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि:

  • संस्था ने पिछले तीन वर्षों में 180 लोगों को विभिन्न रोज़गारों से जोड़कर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में सफलता प्राप्त की है।
  • शिक्षा के क्षेत्र में 29 ज़रूरतमंद और मेधावी छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की गई, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
  • सामाजिक सुरक्षा के तहत लगभग 80 विधवाओं, असहाय एवं परित्यक्त महिलाओं को संबल प्रदान करने के लिए हर महीने एक हज़ार रुपये की पेंशन सीधे तौर पर दी जा रही है।

पूंजी का संचय ईश्वरीय आदेश के विरुद्ध

मुख्य अतिथि और प्रख्यात इस्लामिक विद्वान रिज़वान अहमद रफ़ीक़ी ने क़ुरआन की आयतों का संदर्भ देते हुए सभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “अल्लाह तआला ने माल को जमा कर रोक कर रखने वालों के लिए कड़ी चेतावनी दी है। धन असल में अल्लाह की अमानत है, जिसमें समाज के ग़रीबों और वंचितों का हक़ पहले से तय है।” उन्होंने सूरह तौबा का हवाला देते हुए सचेत किया कि जो लोग सोना-चाँदी जमा करके रखते हैं और उसे जन-कल्याण में खर्च नहीं करते, उनके लिए कठोर दंड का प्रावधान है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ज़कात अदा करने से संपत्ति घटती नहीं, बल्कि उसमें ईश्वरीय बरकत और बढ़ोतरी होती है।

सामाजिक न्याय के लिए सामूहिक प्रयास ज़रूरी : मीडिया प्रभारी मोहम्मद इश्तेयाक ने समाज के सक्षम और संभ्रांत लोगों से अपील की कि वे अपनी ज़कात पाबंदी से अदा करें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सामूहिक ज़कात व्यवस्था इस्लाम के सामाजिक न्याय का आधार है और इसे सुदृढ़ बनाना हम सभी का सामूहिक कर्तव्य है।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर शहर की कई गणमान्य हस्तियां मौजूद रहीं, जिनमें मुख्य रूप से सरफराज आलम, हमीद हुसैन, एजाज़ अहमद, हैदर अली, मोहम्मद आसिफ, मोहम्मद आरिफ, तारिक जमाल और हस्साम तारिक शामिल थे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस जागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बना दिया।

सदन से सड़क तक रतवारा–ढोली घाट पुल की गूंज: विधायक कोमल सिंह और एमएलसी बंशीधर ब्रजवासी की बड़ी जीत

0

मुजफ्फरपुर (विशेष संवाददाता)। उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के अंतर्गत बंदरा और कटरा प्रखंड की लाइफलाइन माने जाने वाले रतवारा–ढोली घाट (बूढ़ी गंडक नदी) और सिसवाड़ा सियारी नदी (कटरा प्रखंड) पर पुल निर्माण की मांग अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विकास के मुद्दों पर चर्चा के बीच, बंदरा और गायघाट क्षेत्र की जनता की दशकों पुरानी पीड़ा को सदन के पटल पर पुरजोर तरीके से रखा गया।

जनप्रतिनिधियों का साझा मोर्चा: सदन में घेरी सरकार

तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद बंशीधर ब्रजवासी और गायघाट की लोकप्रिय विधायक कोमल सिंह ने एक सशक्त और साझा रणनीति के तहत सदन में अपनी आवाज बुलंद की। विधान परिषद में श्री ब्रजवासी ने तारांकित प्रश्न संख्या-1/212/746 के माध्यम से सरकार से स्पष्ट पूछा कि क्या रतवारा-ढोली घाट पर आरसीसी पुल निर्माण हेतु ग्रामीणों के लंबे आंदोलन और जिलाधिकारी की अनुशंसा (पत्रांक-2486, दिनांक-02.08.2025) के बावजूद प्रशासनिक स्वीकृति में देरी क्यों हो रही है?

वहीं, बिहार विधानसभा में विधायक कोमल सिंह ने नेवा डायरी संख्या-18/2/1933 के जरिए सरकार का ध्यान इस ओर खींचा कि पुल के अभाव में बंदरा के रतवारा और कटरा के सोनपुर पंचायत के सिसवाड़ा सियारी नदी के पास रहने वाले हजारों ग्रामीणों को हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है या मीलों का चक्कर लगाना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराया जाए ताकि ग्रामीणों के ‘आवागमन के अधिकार’ की रक्षा हो सके।

विधान सभा में कोमल सिंह  एवं (दायें )विधान परिषद में बंशीधर ब्रजवासी ने तारांकित प्रश्न के माध्‍यम से उठाया आम लोगों के लिए आवाज

मंत्री का जवाब: “प्राथमिकता सूची में तीसरे स्थान पर है पुल”

सदन में सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के मंत्री अशोक चौधरी ने लिखित और मौखिक उत्तर के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की। मंत्री ने स्वीकार किया कि इन स्थलों पर पुल निर्माण की आवश्यकता को लेकर विभागीय सर्वे और स्थल निरीक्षण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है।

उन्होंने सदन को बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि उक्त पुल का निर्माण जिला संचालन समिति द्वारा चयनित सूची के क्रमांक 03 पर अंकित है।” मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि निधि की उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर इसे जल्द ही प्रशासनिक स्वीकृति देकर निर्माण कार्य के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

रतवारा–ढोली घाट (बूढ़ी गंडक नदी) को नाव के सहारे  पार करते ग्रामीण

क्षेत्र में खुशी की लहर और आंदोलनकारियों की जीत

सरकार के इस सकारात्मक रुख के बाद बंदरा, मुरौल और कटरा प्रखंड के गांवों में उत्सव जैसा माहौल है। ‘रतवारा–ढोली घाट पुल बनाओ आंदोलन’ के संयोजक श्याम किशोर और अन्य आंदोलनकारियों ने इसे जनता के संघर्ष और जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति की जीत बताया है।

आंदोलन से जुड़े प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि यह पुल केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास का द्वार खोलेगा।

  • कनेक्टिविटी: इसके बनने से मुजफ्फरपुर का यह हिस्सा सीधे राजधानी पटना से सुगम सड़क मार्ग से जुड़ जाएगा।
  • आर्थिक लाभ: किसानों की उपज मंडियों तक जल्दी पहुंचेगी।
  • रेलवे-हाईवे संपर्क: यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग और निकटतम रेलवे स्टेशनों से सीधा संपर्क स्थापित करेगा।

विकास की नई इबारत

विधायक कोमल सिंह के कार्यालय द्वारा जारी संदेश में कहा गया है कि वे क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और जब तक पुल का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो जाता, वे निरंतर सरकार के संपर्क में रहेंगी। ग्रामीणों को अब पूरी उम्मीद है कि 2026 के अंत तक इस दिशा में कंक्रीट का काम शुरू हो जाएगा।

क्षेत्रवासियों ने अपनी विधायक और एमएलसी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि जनप्रतिनिधियों ने उनके भरोसे का मान रखा है। इस पुल के बन जाने से बंदरा प्रखंड की भौगोलिक दूरी और मानसिक पीड़ा, दोनों कम होगी।

मुजफ्फरपुर: विकास की दौड़ में पीछे छूटा तुलसी मोहनपुर का मांझी टोला, बदहाली के बीच बंटी उम्मीद की किरणें

0

कपकपाती ठंड और गरीबी का साया

हाल ही में समाजसेवी राजेश कुमार राम द्वारा इस टोले में वस्त्र वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह केवल कपड़ों का वितरण नहीं था, बल्कि उन अभावों को उजागर करने का एक जरिया भी था, जिसमें यह समुदाय जी रहा है। टोले के बच्चे और बुजुर्ग फटे-पुराने कपड़ों में ठंड से ठिठुरने को मजबूर थे। वितरण के दौरान जब बच्चों के चेहरे पर मुस्कान आई, तो उनकी आँखों में छिपी गरीबी और लाचारी को साफ पढ़ा जा सकता था।

गंदगी और बीमारी का अंबार

मांझी टोला में प्रवेश करते ही सबसे पहली चीज जो ध्यान खींचती है, वह है चारों ओर पसरी गंदगी। नालियों का अभाव और स्वच्छता के प्रति जागरूकता की कमी के कारण यह क्षेत्र बीमारियों का केंद्र बना हुआ है। राजेश कुमार राम ने वितरण के दौरान ग्रामीणों को साफ-सफाई के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे कचरा और जमा हुआ पानी एवं जानवरों का सीधा सम्‍पर्क उनके बच्चों के स्वास्थ्य के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। “गरीबी अलग चीज है, लेकिन स्वच्छता हमारे हाथ में है,” यह संदेश उन्होंने घर-घर पहुँचाने की कोशिश की।

प्रशासनिक उपेक्षा: बिना पहियों की जिंदगी

इस टोले की सबसे मार्मिक तस्वीर तब सामने आई जब एक विकलांग बच्चा दिखाई दिया। सरकारी योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, इस मासूम को अब तक चलने के लिए ट्राइसाइकिल (व्हीलचेयर) तक नसीब नहीं हुई है। वह बच्चा आज भी अपनी शारीरिक अक्षमता के साथ जमीन पर घिसटने को मजबूर है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार गुहार लगाने के बाद भी सरकारी तंत्र की नजर इस टोले की जरूरतों पर नहीं पड़ी है।

विकास की मुख्यधारा से कटा समाज

मांझी टोला आज भी बुनियादी सुविधाओं—शिक्षा, स्वास्थ्य और सुलभ रास्तों—से कोसों दूर है। यहाँ के लोग आज भी दिहाड़ी मजदूरी और अभावों में अपना जीवन काट रहे हैं। राजेश कुमार राम द्वारा किया गया यह छोटा सा प्रयास सराहनीय तो है, लेकिन यह सवाल भी खड़ा करता है कि आखिर कब तक यह टोला केवल समाजसेवियों के भरोसे रहेगा? सरकारी योजनाओं का लाभ इन तक क्यों नहीं पहुँच रहा?

तुलसी मोहनपुर के इस मांझी टोले को आज किसी सहानुभूति की नहीं, बल्कि ठोस सरकारी कार्रवाई और विकास की नीतियों की जरूरत है, ताकि यहाँ के बच्चे भी एक स्वच्छ और गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।