प्रखंड मुख्यालय पर गूँजे नारे, 11 सूत्री मांगों का ज्ञापन बीडीओ को सौंपा; 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान
ताजपुर/समस्तीपुर (9 फरवरी, 2026): किसान रजिस्ट्री में वंशावली को शामिल करने, गंडक नहर परियोजना का उचित मुआवजा देने और कृषि संकट के समाधान जैसी 11 सूत्री मांगों को लेकर सोमवार को अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले किसानों ने ताजपुर में हुंकार भरी। सैकड़ों की संख्या में किसानों ने विशाल जुलूस निकालकर अंचल, कृषि और प्रखंड कार्यालयों का घेराव किया और घंटों प्रदर्शन कर अपनी आवाज बुलंद की।
11 सूत्री मांगों का ज्ञापन बीडीओ को सौंपते किसान नेता
राजधानी चौक से शुरू हुआ जनाक्रोश
सोमवार सुबह बड़ी संख्या में किसान राजधानी चौक पर एकत्रित हुए। हाथों में झंडे, बैनर और मांगों से संबंधित तख्तियां लिए किसानों का हुजूम नारेबाजी करते हुए सबसे पहले अंचल कार्यालय पहुँचा। वहां प्रदर्शन के बाद जुलूस कृषि कार्यालय और अंत में प्रखंड कार्यालय पहुँचा। किसानों के कड़े तेवर को देखते हुए प्रशासनिक महकमे में हलचल मची रही।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़े किसान:
भूमि व राजस्व: किसान रजिस्ट्री में वंशावली को शामिल करना और जमाबंदी पंजी में तत्काल सुधार।
मुआवजा: गंडक नहर परियोजना में अधिग्रहित जमीन और मकान का वर्तमान सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा।
ऋण व बिजली: केसीसी लोन माफी और बिजली व बीज विधेयक 2025 की वापसी।
पेंशन व खाद: वृद्ध किसानों को 10 हजार रुपये मासिक पेंशन और यूरिया-डीएपी की किल्लत दूर करना।
स्थानीय मुद्दे: ताजपुर को ‘मसाला उत्पादक प्रखंड’ का दर्जा देकर यहाँ कृषि आधारित उद्योग लगाना।
प्रतिनिधिमंडल ने बीडीओ को दी चेतावनी
प्रदर्शन के बाद किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में एक सभा आयोजित हुई। इस दौरान बीडीओ रवि भूषण के बुलावे पर एक 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें 11 सूत्री मांगपत्र सौंपा। किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई से अवगत नहीं कराया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
“सरकार किसानों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। अगर गंडक नहर परियोजना के विस्थापितों को चार गुना मुआवजा और किसानों को एमएसपी की गारंटी नहीं मिली, तो हम चुप नहीं बैठेंगे।” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह, प्रखंड सचिव (भाकपा माले)
12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल
सभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले नेता आसिफ होदा ने कहा कि आगामी 12 फरवरी को देशव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में गांधी चौक से सुबह 11 बजे संयुक्त जुलूस निकाला जाएगा। सभा को राजदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय, अनीता देवी, सुनैना देवी समेत दर्जनों वक्ताओं ने संबोधित किया।
दो दिनों में सबमर्सिबल ठीक नहीं हुआ तो 12 को होगा चक्का जाम: सुरेंद्र सिंह
ताजपुर (समस्तीपुर) | 9 फरवरी 2026 ताजपुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 27, ब्रह्मस्थान में पिछले एक महीने से जलापूर्ति ठप रहने से नाराज महिलाओं का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। पानी की किल्लत से जूझ रही दर्जनों महिलाएं अपनी फरियाद लेकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचीं। कार्यपालक पदाधिकारी जुल्फेकार अली प्यामी के कार्यालय में मौजूद न रहने पर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने कार्यालय के समक्ष खड़े होकर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
नेताओं के हस्तक्षेप के बाद बनी बात : हंगामे की सूचना मिलते ही भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राजद नेता दीपक यादव और वार्ड पार्षद अशोक राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित महिलाओं की समस्याओं को सुना और कार्यालय के कर्मियों के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर वार्ता की। अधिकारियों ने गंभीरता दिखाते हुए आश्वासन दिया कि अगले दो दिनों के भीतर खराब सबमर्सिबल की मरम्मत करा दी जाएगी या नया सबमर्सिबल लगाकर जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।
माले ने दी चक्का जाम की चेतावनी: मौके पर मौजूद भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रशासन को कड़े लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “यदि दो दिनों के अंदर जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, तो 12 फरवरी को भाकपा माले के बैनर तले चक्का जाम आंदोलन किया जाएगा।”
प्रदर्शन में ये रहीं शामिल प्रदर्शन करने वाली महिलाओं में मुख्य रूप से अनीता कुमारी, मीरा कुमारी, अनूपी कुमारी, भोली देवी, रीना देवी, पूनम देवी सहित वार्ड की कई अन्य महिलाएं उपस्थित थीं। महिलाओं का कहना है कि एक महीने से पानी के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
ताजपुर (समस्तीपुर): स्थानीय थाना क्षेत्र के दर्जीनिया चौर में बेखौफ अपराधियों ने रविवार को एक युवक की गोलियों से भूनकर बेरहमी से हत्या कर दी। मृतक की पहचान मिर्जापुर (निकसपुर) निवासी पलटन सहनी के 32 वर्षीय पुत्र गणेश कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है और आक्रोशित लोगों ने नेशनल हाईवे को जाम कर दिया है।
शव को सड़क पर रखकर एन एच को जाम करते लोग
घटना का विवरण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गणेश कुमार जब दर्जीनिया चौर की ओर गया था, तभी घात लगाए अपराधियों ने उसे घेर लिया। हमलावरों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए गणेश के शरीर में गोलियां उतार दीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना को अंजाम देने के बाद अपराधी हथियार लहराते हुए फरार हो गए।
सड़क पर उतरा जन-आक्रोश
हत्या की खबर मिलते ही मृतक के परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने शव के साथ ताजपुर के गांधी चौक पर नेशनल हाईवे (NH) को पूरी तरह जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हैं। जाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं।
शव को सड़क पर रखकर एन एच को जाम करते लोग
राजनीतिक प्रतिक्रिया और मांग
घटना की सूचना मिलते ही भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने मौके पर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की और कानून व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“क्षेत्र में हत्या और अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस का इकबाल खत्म होता दिख रहा है। हम मांग करते हैं कि इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच हो, हत्यारों को अविलंब गिरफ्तार किया जाए और बढ़ते अपराध पर लगाम लगाई जाए।”
पुलिस की कार्रवाई
सूचना मिलते ही ताजपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची है और लोगों को समझाने-बुझाने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है और आसपास के इलाकों में छापेमारी की जा रही है।
ताजपुर क्षेत्र में किसानों और मजदूरों की विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनों का दौर शुरू हो गया है। रविवार को दो अलग-अलग महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें 9 फरवरी के प्रखंड स्तरीय धरने और 12 फरवरी की देशव्यापी आम हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने का संकल्प लिया गया।
ताजपुर प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किये जाने को लेकर रविवार की रात बैठक करते किसान महासभा के नेता गण
9 फरवरी: किसान रजिस्ट्री और मुआवजे की मांग पर प्रखंड मुख्यालय पर प्रदर्शन
अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले 9 फरवरी 2026 को ताजपुर प्रखंड मुख्यालय पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इसकी तैयारी को लेकर रविवार रात मोतीपुर (वार्ड 26) में किसानों की एक अहम बैठक हुई।
मुख्य मांगें:
किसान रजिस्ट्री में वंशावली की अनिवार्यता लागू करना।
बिजली एवं बीज विधेयक 2025 को तत्काल वापस लेना।
KCC लोन को पूरी तरह माफ करना और खेतों तक सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था करना।
गंडक नदी परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि और मकानों का चार गुना मुआवजा देना।
मनरेगा में किए गए हालिया बदलावों को रद्द करना।
बैठक में शामिल प्रमुख लोग: किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मंजीत कुमार, दिनेश प्रसाद सिंह समेत बड़ी संख्या में स्थानीय किसान मौजूद थे।
12 फरवरी: ‘आम हड़ताल’ से थमेगा चक्का, संयुक्त संगठनों ने भरी हुंकार
आगामी 12 फरवरी को होने वाली देशव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए रविवार को जनता मैदान में श्रम, किसान और खेत-मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक संपन्न हुई।
विवाद के मुख्य बिंदु: नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 44 श्रम कोड को बदलकर 4 कोड बनाना मजदूर विरोधी है। साथ ही, मनरेगा का नाम बदलने और बिजली-बीज विधेयक 2025 को कॉर्पोरेट घरानों के हित में बताया।
जनता मैदान में श्रम, किसान और खेत-मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक में शामिल नेता गण
नेताओं के प्रमुख बयान
बैठक के दौरान विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी:
“हमने फैसला लिया है कि 12 फरवरी को पूरे आंदोलन के माध्यम से किसान और रसोइया के हित में मोदी सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।” — रामप्रीत पासवान, कार्यकारिणी सदस्य, सीपीआई समस्तीपुर।
“मजदूरों को गुलाम बनाने वाले श्रम कानूनों और बिजली विधेयक के खिलाफ 12 फरवरी को भारत को पूर्ण रूप से जाम करने का निर्णय लिया गया है।” — चंद्रशेखर राय, जिला संयोजक, एआईसीयू (AICU), समस्तीपुर।
“ताजपुर के जनता मैदान में संयुक्त बैठक कर रणनीति बनाई गई है। हम क्षेत्र में जाकर बड़ी तैयारी करेंगे ताकि इस आम हड़ताल को सफल बनाया जा सके।” — ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, प्रखंड अध्यक्ष, अखिल भारतीय किसान महासभा, ताजपुर।
हड़ताल का कार्यक्रम:
समय: 12 फरवरी, सुबह 11:00 बजे।
स्थान: गांधी चौक, ताजपुर से संयुक्त जुलूस निकलेगा।
समापन: राजधानी चौक पर धरना-प्रदर्शन और सभा के साथ।
प्रमुख उपस्थिति: भाकपा माले के सुरेंद्र प्रसाद सिंह, भाकपा के रामप्रीत पासवान, एसयूसीआई के चंद्रशेखर राय, आशा संघ की सविता सिंह, रसोइया संघ की गिरजा देवी समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। किसान और मजदूर नेताओं ने ताजपुर के आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए इन दोनों कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
समीक्षा प्रकाशन से प्रकाशित हो रही है लेखक की 17वीं कृति; बज्जिका भाषा के गौरव को पुनर्जीवित करने का प्रयास
पटना/मुजफ्फरपुर। साहित्य और संस्कृति के संगम से उपजी लोकगाथाएं जब महाकाव्य का रूप लेती हैं, तो वह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास बन जाती है। इसी कड़ी में, सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरि विलास राय की बहुप्रतीक्षित कालजयी कृति ‘बसावन-बख्तौर (बज्जिका महाकाव्य)‘ शीघ्र ही पाठकों के बीच आ रही है। समीक्षा प्रकाशन (दिल्ली/मुजफ्फरपुर) द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक न केवल बज्जिका भाषा के साहित्य को समृद्ध करेगी, बल्कि समाज के उन लोकनायकों की वीरता को भी स्वर देगी, जिन्होंने सदियों से जनमानस के हृदय में ‘लोक देवता’ के रूप में स्थान बना रखा है।
हरि विलास राय की बहुप्रतीक्षित कृति ‘बसावन-बख्तौर (बज्जिका महाकाव्य) की एक झलक
लोक देवता से महाकाव्य तक का सफर
लेखक हरि विलास राय का लोकनायकों के प्रति अनुराग किसी से छिपा नहीं है। यह उनकी 17वीं कृति है। इससे पूर्व भी उन्होंने बाबा बसावन और बाबा बख्तौर के शौर्य को अपनी लेखनी के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया है। उनकी पूर्व प्रकाशित कृतियों में बज्जिका नाटक ‘लोक देवता बाबा बसावन‘ और ‘लोक देवता बाबा बख्तौर‘ को पाठकों ने खूब सराहा था। वहीं, हिंदी में रचित ‘बसावन बख्तौर चरित मानस‘ ने तो लोकप्रियता के नए कीर्तिमान स्थापित किए थे।
हिन्दी कृति की अपार सफलता के बाद, बज्जिका क्षेत्र के पाठकों और मातृभाषा प्रेमियों की ओर से निरंतर यह मांग उठ रही थी कि इन लोक देवताओं की वीरगाथा को उनकी अपनी मिट्टी की बोली—’बज्जिका’ में महाकाव्य के रूप में पिरोया जाए। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए, हरि विलास राय ने अपनी लेखनी से इस ‘बसावन बख्तौर बज्जिका महाकाव्य’ का सृजन किया है।
कवि हरि विलास राय अपने रचना संसार के साथ एवं दायें में बाबा बसावन एवं बाबा बख्तौर पर पूर्व में प्रकाशित पुस्तक
कौन थे बसावन, बखतौर और शक्तिरूपा माता गहिल ?
बज्जिका क्षेत्र के लोक-साहित्य और जनमानस में बाबा बसावन और बाबा बखतौर का नाम केवल वीरों के रूप में नहीं, बल्कि शोषितों के रक्षक ‘लोक देवता’ के रूप में अंकित है। ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, बाबा बसावन का अवतार वैशाली के पानापुर लंगा ग्राम में यादव कुल की माता बहुरा की कोख से तब हुआ था, जब सामंती शक्तियों द्वारा निर्बलों का शोषण चरम पर था. वे प्राचीन इतिहास के ऐसे प्रथम पुरुष माने जाते हैं जिन्होंने हलवाहों और चरवाहों को संगठित कर एक विशाल सेना तैयार की और अत्याचारी राजा दलेल सिंह की गोगरी जेल पर चढ़ाई कर न केवल अपने भाई संतोषी को छुड़ाया, बल्कि 700 कैदियों को दासता से मुक्त कराया. उनकी वीरता का लोहा मानकर अंततः सामंतों को उनके समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा. बसावन और बख्तौर केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि एक ‘चरवाहा संस्कृति’ के रक्षक और संगीत प्रेमी भी थे। हाथ में बांसुरी और मन में क्रांति की ज्वाला लिए इन वीरों ने ‘भुइयां संघ’ बनाकर शोषितों, दलितों, पिछड़ों और पशुपालकों को एकजुट किया।
इसी शौर्य परंपरा की दूसरी कड़ी बाबा बखतौर हैं, जिनका जन्म सहरसा जिले के गढ़िया रसलपुर (नोला पंचायत) में हुआ था. बाबा बसावन और बखतौर, दोनों ही अदम्य साहसी, स्वाभिमानी और पशुपालक संस्कृति के अनन्य उपासक थे. इन दोनों वीरों की अटूट श्रद्धा माता गहिल में थी, जो उनकी कुलदेवी थीं. माता गहिल को ‘आदिशक्ति जगदम्बा’ का रूप माना जाता है, जिन्हें लोक में ‘सहस्र चंडी’ या ‘गहिलवार’ के रूप में पूजा जाता है. आज भी पानापुर लंगा में बाबा बसावन, बाबा बखतौर और माता गहिल की प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं, जहाँ भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए दुग्धाभिषेक करते हैं. यह स्थान आज भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और अटूट लोक-आस्था के ‘सिद्धि-पीठ’ के रूप में जीवंत है.
महाकाव्य में वर्णन है कि कैसे इन नायकों ने तत्कालीन अत्याचारी शासकों और जनपदीय सामंत दलेल सिंह के दमनकारी चक्र को चुनौती दी। यह पुस्तक उस कालखंड का सजीव चित्रण करती है जब समाज का एक बड़ा वर्ग अपनी रक्षा के लिए किसी त्राता की राह देख रहा था।
कृति की विशेषताएं: एक सांस्कृतिक दस्तावेज
डॉ. शत्रुघ्न राय ‘शशांक’ ने पुस्तक की समीक्षा में इसे “संस्कृति का दस्तावेज और बसावन-बख्तौर के चरित का दर्पण” बताया है। पुस्तक की भाषा में वह ओज और माधुर्य है जो पाठक को सीधे उस युग से जोड़ देता है।
कला और शौर्य का संगम: नायकों को तेजस्वी रूप में दिखाया गया है, जिनके साथ बाघ और धर्मध्वजा उनकी शक्ति और शुचिता के प्रतीक हैं।
विस्तृत रचना संसार: हरि विलास राय की लेखनी का विस्तार ‘सती सुलोचना’ से लेकर ‘वज्जिकामृत’ और ‘अंगार के फूल’ जैसी विधाओं तक फैला हुआ है।
प्रेरणा का स्रोत: यह महाकाव्य कबीर के सिद्धांतों की तरह ही समाज को एक नई दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखता है।
लेखक परिचय: कलम के धनी हरि विलास राय
वैशाली जिले के हाजीपुर सदर (ग्राम-नैनहा) के मूल निवासी हरि विलास राय (जन्म: 07.05.1946) ने अपना संपूर्ण जीवन साहित्य की सेवा में समर्पित कर दिया है। पिता स्व. सीताराम राय और माता स्व. धनपति देवी के संस्कारों को आत्मसात कर उन्होंने बज्जिका और हिन्दी साहित्य को कई अनमोल रत्न दिए हैं। उनकी प्रकाशित कृतियों की सूची लंबी है, जिसमें ‘राजर्षि मोरध्वज’, ‘भक्ति-सरिता’, और ‘संस्मरण के आईने में’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तकें शामिल हैं।
बहुआयामी रचना संसार: सत्रह कृतियों के शिल्पी
हरि विलास राय का साहित्यिक सफर केवल लोकगाथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने विविध विधाओं में अपनी लेखनी का लोहा मनवाया है। उनकी सत्रहवीं कृति के रूप में ‘बसावन-बख्तौर’ महाकाव्य के आगमन से पूर्व उनकी 16 अन्य पुस्तकें साहित्य जगत को समृद्ध कर चुकी हैं। उनके रचना संसार में ‘सती सुलोचना‘ (प्रबंध काव्य), ‘वज्जिकामृत‘ (काव्य संग्रह) और ‘बंजारन‘ (कहानी संग्रह) जैसी महत्वपूर्ण बज्जिका रचनाएँ शामिल हैं। वहीं हिंदी साहित्य में उन्होंने ‘राजर्षि मोरध्वज‘ (खंड काव्य), ‘अंगार के फूल‘ (काव्य संग्रह), ‘भक्ति-सरिता‘ जैसी कालजयी कृतियों का सृजन किया है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री स्व. दीप नारायण सिंह के व्यक्तित्व पर ‘संस्मरण के आईने में‘ लिखकर अपनी गद्य क्षमता का भी परिचय दिया है। उनकी कृतियों की यह विस्तृत सूची दर्शाती है कि वे समाज, संस्कृति और लोक-आस्था के एक गंभीर अध्येता और साधक हैं।
बाबा बसावन, बाबा बख्तौर एवं बाबा भूंईया के बारे में, न्यूज भारत टीवी के स्क्रीन पर विचार रखते कवि हरि विलास राय शीघ्र ही अगले खबर में –
साहित्यकारों में उत्साह
समीक्षा प्रकाशन के इस प्रयास की साहित्य जगत में चौतरफा प्रशंसा हो रही है। विद्वानों का मानना है कि क्षेत्रीय भाषाओं में ऐसे उच्च स्तरीय महाकाव्यों के आने से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सकेगी। बसावन-बख्तौर का चरित्र आज के युवाओं के लिए भी प्रासंगिक है, जो स्वाभिमान और न्याय के लिए लड़ने की प्रेरणा देता है।
यह पुस्तक जल्द ही प्रमुख पुस्तक केंद्रों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। बज्जिका भाषी समाज के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है जब उनके अपने नायकों की गाथा एक ‘महाकाव्य’ के रूप में प्रतिष्ठित होने जा रही है।
बाबा बसावन के जन्म स्थान वैशाली जिला के पानापुर लंगा ग्राम में बने भव्य मंदिर का दृश्य
ताजपुर/समस्तीपुर | 7 फरवरी 2026 शनिवार को ताजपुर के फलमंडी में भाकपा माले प्रखंड कमिटी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिला सचिव उमेश कुमार के पर्यवेक्षण और प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कई बड़े आंदोलनात्मक और संगठनात्मक निर्णय लिए गए।
सुरेंद्र प्रसाद सिंह का आह्वान: “जनता के हक के लिए तेज होगा संघर्ष”
बैठक को संबोधित करते हुए प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा कि भाकपा माले ताजपुर के विकास, खुशहाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के लिए संकल्पित है। उन्होंने केंद्र सरकार की मजदूर व किसान विरोधी नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए जनता से अपील की कि वे आने वाले आंदोलनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
आंदोलन की रूपरेखा:
8 फरवरी: ताजपुर के जनता मैदान में श्रम, मजदूर और किसान संगठनों की संयुक्त बैठक होगी।
9 फरवरी: अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा प्रखंड मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
12 फरवरी: मजदूर विरोधी 4 श्रमकोड, मनरेगा में बदलाव और बिजली एवं बीज विधेयक 2025 के खिलाफ देशव्यापी आम हड़ताल के तहत ताजपुर के गांधी चौक से जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया जाएगा।
संगठन विस्तार पर चर्चा:आंदोलनात्मक फैसलों के साथ-साथ पार्टी के आंतरिक ढांचे पर भी बात हुई। 2025 की बकाया लेवी वसूली, ‘लोकयुद्ध‘ पत्रिका की सदस्यता और नए सदस्य बनाने के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। साथ ही, छात्र संगठन आइसा, महिला संगठन एपवा, किसान महासभा और खेग्रामस को और अधिक मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में उपस्थित सदस्य:
बैठक में संगठन की मजबूती और आगामी प्रखंड सम्मेलन पर चर्चा की गई। इसमें निम्नलिखित सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त किए: उमेश कुमार (जिला सचिव), सुरेंद्र प्रसाद सिंह (प्र प्रखंड सचिव), आसिफ होदा, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, प्रभात रंजन गुप्ता, मो० एजाज, संजीव राय, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, मुकेश कुमार गुप्ता, मो० क्यूम, मुंशीलाल राय, नौशाद तौहीदी, शाद तौहीदी, बस्साम तौहीदी, मो० मुखलिस तौहीदी और आइसा जिला अध्यक्ष सुनील कुमार।
अंतर-राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम: सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र-निर्माण का लेंगे संकल्प
मुजफ्फरपुर | कार्यालय संवाददाता भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) अभियान के तहत बिहार की प्रतिभा अब उत्तराखंड की वादियों में राज्य का प्रतिनिधित्व करेगी। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित अंतर-राज्य युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुजफ्फरपुर के सात प्रतिभागियों सहित एक एस्कॉर्ट दल नैनीताल (उत्तराखंड) के लिए रवाना हो गया है।
सांस्कृतिक एकता का बनेगा मंच कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं को देश की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराना है। इस यात्रा के दौरान युवा न केवल नेतृत्व कौशल सीखेंगे, बल्कि अनुभव आधारित शिक्षा के माध्यम से सामाजिक एकता और राष्ट्र-निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
इन जिलों के प्रतिभागी हुए शामिल इस कार्यक्रम में बिहार के कुल पांच जिलों का चयन किया गया है, जिसमें शामिल हैं: मुजफ्फरपुर ,पटना,बेगूसराय, समस्तीपुर और वैशाली,
कुल 35 प्रतिभागी और 2 एस्कॉर्ट इस दल का हिस्सा हैं, जो विभिन्न राज्यों के युवाओं के साथ अपने अनुभवों को साझा करेंगे।
मुजफ्फरपुर की टीम में ये हैं शामिल मुजफ्फरपुर जिले से सात होनहार युवाओं का चयन किया गया है, जिनमें विनीत कुमार सिंह, प्रिंस कुमार, संजीत कुमार, विवेक कुमार, शुभम रानी, गौतम कुमार झा और विकास कुमार शामिल हैं। टीम के साथ एस्कॉर्ट के रूप में चंदन कुमार नेतृत्व कर रहे हैं।
“यह कार्यक्रम युवाओं को अपने राज्य की सीमाओं से बाहर निकलकर देश को समझने और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित होने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।”
— उप निदेशक (माय भारत) सह जिला युवा अधिकारी, मुजफ्फरपुर
रवानगी के अवसर पर जिला युवा अधिकारी ने सभी प्रतिभागियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं और उम्मीद जताई कि ये युवा बिहार की गौरवशाली संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखेंगे।
बन्दरा(मुजफ्फरपुर): शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता, वह समाज के लिए आजीवन एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। इसी भावना के साथ मध्य विद्यालय तेपरी के प्रांगण में संकुल संसाधन केंद्र, तेपरी के तत्वावधान में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विशंभूनाथ राय के सम्मान में एक भव्य ‘विदाई सह सम्मान समारोह‘ का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल एक विदाई का अवसर था, बल्कि एक कर्मठ शिक्षक के दशकों के समर्पण को नमन करने का दिन भी रहा।
विदाई सह सम्मान समारोह के अवसर पर मंचासीन शिक्षकगण
सम्मान और सत्कार का संगम
समारोह की अध्यक्षता मध्य विद्यालय तेपरी के प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक दीपक प्रसाद सिंह ने की। कार्यक्रम की शुरुआत भावपूर्ण गीतों और उपस्थित अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। विदाई की इस बेला में श्री राय के सम्मान में संकुल के विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर वरिष्ठ शिक्षकों और समन्वयकों—ब्रजेश कुमार (प्रभारी प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक), विजय कुमार ठाकुर (प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक) एवं नरेश राय (प्रभारी प्रधानाध्यापक सह संकुल समन्वयक) ने संयुक्त रूप से विशंभूनाथ राय को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। विद्यालय के मुख्य सभागार को रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से किसी उत्सव की तरह सजाया गया था। मंच पर लगे आधिकारिक बैनर पर श्री राय की सेवानिवृत्ति तिथि 31 जनवरी 2026 और सम्मान समारोह की तिथि 7 फरवरी 2026 अंकित थी।
सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विशंभूनाथ राय को भेंट प्रदान करते समाजसेवी श्याम किशोर
अनुशासन और समर्पण की मिसाल
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने श्री राय के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनका पूरा सेवाकाल निष्ठा, कठोर अनुशासन और विद्यालय के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक रहा है। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि:
श्री राय ने न केवल छात्रों के भविष्य को संवारा, बल्कि विद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक ढांचे को भी मजबूती प्रदान की।
उनके कार्यकाल में विद्यालय ने अनुशासन के नए मापदंड स्थापित किए, जिससे स्थानीय समुदाय में विद्यालय की प्रतिष्ठा बढ़ी।
मध्य विद्यालय तेपरी की प्रभारी प्रधानाध्यापिका स्मिता कुमारी सहित समस्त विद्यालय परिवार ने भी अपने प्रिय सहकर्मी को भावभीनी विदाई दी। सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए समय को याद करते हुए उन्हें एक अभिभावक तुल्य मार्गदर्शक बताया।
विदाई समारोह के अवसर दर्शक दीर्घा में उपस्थित शिक्षकगण एवं छात्र
नवनियुक्त शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित समाजसेवी श्याम किशोर ने श्री राय के व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “विशंभूनाथ जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा की अलख जगाए रखी। उनका कार्यकाल आने वाली पीढ़ी के लिए एक खुली किताब की तरह है।” उन्होंने वहां मौजूद नवनियुक्त शिक्षकों से विशेष आह्वान किया कि वे श्री राय के कार्य-आदर्शों, उनकी समयबद्धता और उनके धैर्य से प्रेरणा लें ताकि वे भी शिक्षा जगत में अमिट छाप छोड़ सकें।
भावुक कर देने वाले पल
जैसे-जैसे कार्यक्रम अपने समापन की ओर बढ़ा, वातावरण काफी भावुक हो गया। अपने संबोधन में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक विशंभूनाथ राय ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय उनके लिए केवल एक कार्यस्थल नहीं बल्कि एक परिवार रहा है। उन्होंने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और शिक्षकों से शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने का अनुरोध किया।
इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि एक शिक्षक की असली पूंजी उसके द्वारा तैयार किए गए संस्कार और उसके प्रति साथियों का सम्मान ही है। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भी हिस्सा लिया।
समस्तीपुर जिले को बाल विवाह के कलंक से मुक्त करने के लिए ‘चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया’ (CMFI) अभियान के तहत ‘बाल विवाह मुक्ति रथ‘ का सघन अभियान पूरे उफान पर है। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, समस्तीपुर और ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस देशव्यापी ‘एक्सेस टू जस्टिस’ कार्यक्रम ने ग्रामीण इलाकों में जागरूकता का नया संचार किया है।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दिखाई हरी झंडी
बुधवार को अभियान के तहत रोसड़ा प्रखंड कार्यालय परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) राकेश कुमार ने बाल विवाह मुक्ति रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी कुरीति को जड़ से मिटाने के लिए प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का यह साझा प्रयास सराहनीय है।
इसके बाद यह रथ विभिन्न पंचायतों और धार्मिक स्थलों पर संदेश प्रसारित करते हुए विभूतिपुर प्रखंड मुख्यालय पहुंचा। वहाँ बीडीओ सुनील कुमार ने रथ का स्वागत किया और इसे आगे के क्षेत्रों के लिए रवाना किया। यह रथ अब जिले के सुदूर गांवों और मोहल्लों में घूम-घूम कर लोगों को इस सामाजिक बुराई के गंभीर परिणामों के प्रति सचेत कर रहा है।
बाल विवाह: केवल अपराध नहीं, भविष्य के साथ अन्याय
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सरिता कुमारी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “बाल विवाह केवल एक कानूनी जुर्म नहीं है, बल्कि यह मासूम बच्चों के सुनहरे भविष्य के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अन्याय है। यह लड़कियों की शिक्षा और स्वास्थ्य के अधिकार को छीन लेता है।” उन्होंने इस अभियान में जनभागीदारी को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
वहीँ, जिला कार्यक्रम समन्वयक काजल राज ने एक गंभीर पहलू की ओर इशारा करते हुए बताया कि बाल विवाह केवल शादी तक सीमित नहीं है। इस अपराध के पीछे नाबालिग बच्चियों की खरीद-फरोख्त, बाल मजदूरी और बाल तस्करी (ट्रैफिकिंग) जैसे काले कारोबार भी जुड़े होते हैं। उन्होंने जोर दिया कि जब समाज, सामाजिक संगठन और स्थानीय निकाय एक सुर में बोलेंगे, तभी इस बुराई का अंत होगा।
हस्ताक्षर अभियान और शपथ ग्रहण
कार्यक्रम के दौरान एक संकल्प सभा का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित ग्रामीणों और अधिकारियों ने सामूहिक शपथ ली। लोगों ने संकल्प लिया कि वे:
लड़की की शादी 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले नहीं करेंगे।
समाज में कहीं भी बाल विवाह की सूचना मिलते ही तुरंत प्रशासन या ‘बचपन बचाओ आंदोलन‘ को सूचित करेंगे।
कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. दीप्ति कुमारी ने अभियान की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए ‘त्रिकोणीय संगम’ (सरकार, प्रशासन और समाज) का साथ आना अनिवार्य है। इसके बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हस्ताक्षर अभियान का हिस्सा बनकर अपनी प्रतिबद्धता जताई।
8 मार्च तक चलेगा विशेष अभियान
जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के वित्त प्रबंधक पप्पू यादव ने जानकारी दी कि यह विशेष जागरूकता रथ 24 जनवरी 2026 से 08 मार्च 2026 (अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस) तक जिले के सभी प्रखंडों और मोहल्लों का भ्रमण करेगा। कार्यक्रम समन्वयक रवि कुमार मिश्रा ने बताया कि नारों और बाल विवाह निषेध अधिनियम की जानकारी के माध्यम से लोगों को कानूनी परिणामों से भी अवगत कराया जा रहा है।
कार्यक्रम में इनकी रही सक्रिय उपस्थिति: इस अभियान को सफल बनाने में मयंक कुमार सिन्हा, राजीव कुमार साह, रीता कुमारी, बलराम चौरसिया, विभा कुमारी, ललिता कुमारी, सोनाली भगत और रौशन कुमार सहित दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपना सक्रिय योगदान दिया।
तिरहुत-गंडक नहर परियोजना के पुनर्जीवित होने के साथ ही समस्तीपुर जिले के ताजपुर और आसपास के क्षेत्रों में मुआवजे को लेकर संघर्ष तेज हो गया है। दशकों से लंबित इस परियोजना में अपनी जमीन गंवाने वाले किसान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। बुधवार को अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा माले की एक संयुक्त जांच टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों की समस्याओं को सुना और सरकार के खिलाफ आंदोलन का एलान किया।
ताजपुर प्रखंड मुख्यालय पर जमीन के मुआवजा के लिए पहॅुची महिला
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान संकट
गंडक नहर परियोजना, जो तिरहुत मुख्य नहर से निकलकर पूसा, ताजपुर और सरायरंजन की ओर जाती है, इसकी शुरुआत वर्ष 1962-65 के आसपास हुई थी। उस समय भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन कई कारणों से यह परियोजना ‘मृतप्राय’ हो गई थी। ऑडियो क्लिप के अनुसार, उस दौर में कुछ किसानों को तो मुआवजा मिला, लेकिन एक बड़ी संख्या ऐसे किसानों की थी जिनका मुआवजा सरकारी जटिलताओं के कारण ट्रेजरी (खजाना) में ही फंसा रह गया।
अब दशकों बाद जब सरकार ने इस परियोजना पर दोबारा काम शुरू किया है, तो मुआवजे का पुराना जिन्न फिर बाहर आ गया है। जहाँ मुआवजा मिल चुका था, वहाँ काम लगभग पूरा है, लेकिन जहाँ भुगतान लंबित था, वहाँ किसान काम रोककर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
जांच टीम का दौरा और किसानों की व्यथा
बुधवार को किसान महासभा के ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय और भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह व प्रभात रंजन गुप्ता ने मोतीपुर, चकहैदर, फतेहपुर और योगियामठ जैसे निर्माण स्थलों का दौरा किया।
बातचीत के दौरान यह तथ्य सामने आया कि संबंधित अधिकारी वर्तमान समय में भी किसानों को उनके पूर्वजों के नाम पर ट्रेजरी में जमा पुरानी राशि ही देना चाहते हैं। किसानों का कहना है कि आज के समय में उस मामूली राशि का कोई मूल्य नहीं है। प्रशासन और किसानों के बीच इसी बात को लेकर गहरा गतिरोध बना हुआ है।
प्रमुख मांगें और आंदोलन की रणनीति
भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि किसान किसी भी कीमत पर पुराना मुआवजा स्वीकार नहीं करेंगे। किसान संघर्ष मोर्चा और माले की संयुक्त टीम ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
चार गुना मुआवजा: अधिग्रहित जमीन और मकान का वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाए।
भूमि बंदोबस्ती: जो किसान इस परियोजना के कारण पूरी तरह भूमिहीन हो रहे हैं, उन्हें सरकार द्वारा अन्यत्र भूमि बंदोबस्ती कर जमीन दी जाए।
काम पर रोक: जब तक उचित मुआवजे का ठोस आश्वासन और भुगतान नहीं होता, तब तक नहर निर्माण का कार्य बाधित रहेगा।
9 फरवरी को महा-घेराव का आह्वान
किसान महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने घोषणा की कि इन मांगों को लेकर 9 फरवरी 2026 को ताजपुर प्रखंड मुख्यालय का ऐतिहासिक घेराव और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने क्षेत्र के समस्त किसानों, गृहस्वामियों और भूस्वामियों से अपील की है कि वे अपनी हक की लड़ाई के लिए बड़ी संख्या में जुटकर इस आंदोलन को सफल बनाएं।
इस विवाद ने प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार विकास और किसानों के हितों के बीच का रास्ता कैसे निकालती है।