दाल आयात में 31.52% की भारी गिरावट, निर्यात 13.40% उछला; 2030-31 तक 350 लाख टन उत्पादन का ऐतिहासिक लक्ष्य!
नई दिल्ली: भारत ने खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में नया इतिहास रचने की तैयारी कर ली है। देश को दालों के उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने 11,440 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ (2025-26 से 2030-31) को लागू किया है। इस ऐतिहासिक मिशन की पहली वर्षगाँठ के अवसर पर जारी आंकड़ों ने साबित कर दिया है कि भारत अब आयात पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया को दाल बेचने वाला सबसे बड़ा ताकतवर देश बन रहा है।

विदेशी आयात पर करारी चोट, निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
जारी व्यापार आंकड़ों के अनुसार, भारत में विदेशों से दालों का आयात 31.52% घटकर 2024-25 के 46,427.60 करोड़ रुपये से 2025-26 में मात्र 31,793.59 करोड़ रुपये रह गया है। दूसरी ओर, भारतीय दालों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने से निर्यात में 13.40% का उछाल दर्ज किया गया है। वर्ष 2024-25 में 855 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निर्यात बढ़कर 2025-26 में 969.53 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 10.01 लाख टन) तक पहुंच गया। भारतीय दालों के प्रमुख खरीदार देशों में चीन, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, अमेरिका और श्रीलंका शामिल हैं।

एमएसपी (MSP) में तगड़ा इजाफा: किसानों की जेब में पहुंचे 7,047 करोड़ रुपये
किसानों को फसल का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बंपर बढ़ोतरी की है:
- तूर (अरहर): एमएसपी 7,550 रुपये प्रति क्विंटल (2024-25) से 11.92% (900 रुपये) बढ़ाकर 8,450 रुपये प्रति क्विंटल (2026-27) किया गया।
- उड़द: एमएसपी 7,400 रुपये प्रति क्विंटल से 10.81% (800 रुपये) बढ़ाकर 8,200 रुपये प्रति क्विंटल किया गया।
- मसूर: एमएसपी 6,700 रुपये प्रति क्विंटल से 4.48% (300 रुपये) बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति क्विंटल किया गया।
एनसीसीएफ (NCCF) और नेफेड (NAFED) को चार वर्षों के लिए तूर, उड़द और मसूर की 100% सुनिश्चित खरीद का अधिकार दिया गया है। 17 जून 2026 तक एनसीसीएफ ने 9 राज्यों में 10.55 लाख टन दालों की खरीद कर 4.69 लाख किसानों के खातों में सीधे 7,047 करोड़ रुपये की एमएसपी राशि हस्तांतरित की है।

6-वर्षीय योजना के मुख्य आकर्षण और आंकड़े:
- उत्पादन लक्ष्य: 2030-31 तक देश में दालों का कुल उत्पादन 350 लाख टन पहुँचाना और प्रति हेक्टेयर उपज को 1,130 किलोग्राम तक बढ़ाना।
- रकबा एवं उत्पादकता: दालों की खेती का दायरा 277.20 लाख हेक्टेयर (2024-25) से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर (2025-26) हो चुका है। राष्ट्रीय उत्पादकता 926 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़कर 957 किग्रा/हेक्टेयर पहुँच गई है।
- मुफ्त बीज और इकाइयाँ: 6 वर्षों में 87.5 लाख मुफ्त बीज किट और 126 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज बांटे जाएंगे। 1,000 दाल मिलों में से 528 इकाइयाँ आवंटित कर दी गई हैं।
- प्रमुख उत्पादक राज्य: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल मुख्य केंद्र बने हुए हैं।
- डिजिटल निगरानी: ‘साथी’ पोर्टल, ‘कृषि मैपर’ ऐप, ‘एग्रीस्टैक’ और ‘ई-समृद्धि’ के ज़रिए बीज से लेकर खरीद तक की रियल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है।

| फसल | पुरानी एमएसपी (2024-25) | नई एमएसपी (2026-27) | प्रतिशत वृद्धि | कुल बढ़ोतरी |
| तूर (अरहर) | ₹ 7,550 / क्विंटल | ₹ 8,450 / क्विंटल | 11.92% | ₹ 900 / क्विंटल |
| उड़द | ₹ 7,400 / क्विंटल | ₹ 8,200 / क्विंटल | 10.81% | ₹ 800 / क्विंटल |
| मसूर | ₹ 6,700 / क्विंटल | ₹ 7,000 / क्विंटल | 4.48% | ₹ 300 / क्विंटल |
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