बिहार में दहला लाल आतंक, एक्सप्रेस ट्रेन से एकता नगर के लिए  ग्यारह सौ युवाओं ने भरी गुजरात के लिए हुंकार!

  • नक्सलमुक्त बिहार की ऐतिहासिक गूंज: पाटलिपुत्र जंक्शन से विशेष ट्रेन रवाना, राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में दिखा गजब का उत्साह।
  • एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संकल्प: सरदार पटेल की जयंती पर केवड़िया में जुटेगा बिहार का बल, प्रधानमंत्री के विजन को मिल रही नई उड़ान।

पटना: बिहार की धरती पर कभी लाल आतंक के खौफ की गूंज हुआ करती थी, गोलियों की तड़तड़ाहट से राज्य के कई जिले सहमे रहते थे और विकास के रास्ते में बारूदी सुरंगें बिछी होती थीं। लेकिन अब वह दौर पीछे छूट चुका है। बदलाव की एक ऐसी नई और शक्तिशाली बयार बही है कि लाल आतंक की जड़ें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। इसी ऐतिहासिक बदलाव और जीत का जश्न मनाने के लिए आज बिहार की राजधानी पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन से एक अद्भुत और अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला। राज्य के बाईस नक्सलमुक्त जिलों से चुनकर आए ग्यारह सौ विशेष प्रतिभागियों और बिहार विशेष कार्य बल के दो सौ छह पुलिसकर्मियों को लेकर गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) जाने वाली एक विशेष आरक्षित पाटलिपुत्र-एकता नगर स्पेशल ट्रेन को पूरी धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

पटना के पाटलिपुत्र जंक्शन पर गुजरात के एकता नगर के लिए रवाना होने वाली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाते हुए सम्राट चौधरी व अन्य गणमान्य व्यक्ति।

प्रधानमंत्री के विजन और संकल्प की बड़ी जीत

यह पूरी पहल प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विजन और नक्सलमुक्त, सुरक्षित तथा समृद्ध बिहार की नई पहचान को राष्ट्रीय फलक पर स्थापित करती है। केंद्रीय गृह मंत्री के देश को नक्सलमुक्त बनाने के दृढ़ संकल्प को साकार करते हुए 31 मार्च 2026 को ही बिहार को पूर्ण रूप से नक्सलमुक्त घोषित किया जा चुका है। आज यह विशेष ट्रेन केवल पटरियों पर नहीं दौड़ी,, बल्कि यह बिहार के माथे से लाल आतंक के कलंक के मिटने और विकास की मुख्यधारा में लौटने की सबसे बड़ी गवाही है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो बरसों पुरानी नक्सली समस्या को भी जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

पाटलिपुत्र जंक्शन पर गूंजा ‘भारत माता की जय‘ का उद्घोष

जब इस विशेष ट्रेन को रवाना किया जा रहा था, तब पूरा रेलवे स्टेशन परिसर देशभक्ति के रंगों में रंग चुका था। ट्रेन के रवाना होने के समय उपस्थित प्रतिभागियों और आम लोगों के बीच गुजरात जाने का उत्साह चरम सीमा पर था। चारों तरफ ‘भारत माता की जय’ और वंदे मातरम के उद्घोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। यह यात्रा सिर्फ एक आवागमन नहीं है, बल्कि यह बिहार के युवाओं और ग्रामीण प्रतिभागियों के भीतर आए उस आत्मविश्वास का प्रतीक है, जो अब डर के साए में नहीं, बल्कि खुले आसमान के नीचे शान से जीना सीख चुके हैं।

लौह पुरुष की जयंती पर राष्ट्रीय एकता का संदेश

ये सभी ग्यारह सौ प्रतिभागी आगामी इकतीस अक्टूबर को देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर गुजरात के केवड़िया में आयोजित होने वाले भव्य राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में शामिल होंगे। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के प्रांगण में होने वाले इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में बिहार के इन युवाओं की भारी उपस्थिति देश को यह संदेश देगी कि संकट के दौर से बाहर निकलकर किस प्रकार कोई राज्य शांति, जनभागीदारी और विकास के पथ पर अग्रसर हो सकता है। यह यात्रा ‘संकल्प से सिद्धि’ तक की उस यात्रा को चरितार्थ करती है, जिसमें सरकार की कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा बलों के साझा प्रयासों ने एक नया इतिहास लिखा है।

पटना के पाटलिपुत्र जंक्शन पर गुजरात के एकता नगर के लिए रवाना होने वाले  उपस्थित जनसमूह व अधिकारियों का अभिवादन स्वीकार करते हुए सम्राट चौधरी व अन्य गणमान्य व्यक्ति।

तस्वीरों में कैद हुआ ऐतिहासिक क्षण

इस भव्य आयोजन के दौरान कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित जनसमूह और अधिकारियों में भारी उत्साह देखा गया। ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के इस ऐतिहासिक अवसर पर सम्राट चौधरी, रामकृपाल यादव, संजीव चौरसिया, अनामिका सिंह पटेल, पंकज कुमार, प्रीता वर्मा, कुंदन कृष्णन, सुनील कुमार, संजय कुमार सिंह, क्षत्रनील सिंह, जितेंद्र राणा, कुंदन कुमार और कार्तिकेय के० शर्मा सहित रेलवे के कई वरीय अधिकारी, प्रशासनिक एवं पुलिस महकमे के दिग्गज पदाधिकारी तथा गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने गुजरात जाने वाले प्रतिभागियों को उनकी इस मंगलमय यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बिहार का यह कारवां अब गुजरात की धरती पर नए भारत और नए बिहार की बुलंद तस्वीर पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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