पटना: राजद नेता तेजस्वी यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए राज्य की एनडीए सरकार पर बेहद तीखा हमला बोला है। उन्होनें कहा कि विगत 28 दिनों से बिहार बाढ़ की विभीषिका के साथ-साथ सुखाड़ की भी गंभीर मार झेल रहा है। राज्य में 35 फीसदी से कम बारिश हुई है, जिसके कारण भीषण सूखे की चपेट में आकर लाखों हेक्टेयर जमीन में खड़ी फसलें नष्ट हो रही हैं और लाखों किसानों का लागत मूल्य तक नहीं निकल पा रहा है। सरकार ने अभी तक सूखे का कोई आंकलन तक नहीं किया है और किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

बाढ़ पीड़ितों की सुध लेने वाला कोई नहीं
एक तरफ जहां सूखा है, वहीं दूसरी तरफ बिहार विनाशकारी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित है। राज्य के 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, लेकिन एनडीए की संवेदनहीन सरकार पीड़ितों की कोई सुध नहीं ले रही है। खानापूर्ति के लिए कुछ गिने-चुने सामुदायिक राहत शिविर और रसोई शुरू किए गए थे, जो फंड की कमी के चलते मात्र 2 से 4 दिन में ही बंद कर दिए गए। तेजस्वी यादव ने सवाल उठाया कि जिन गरीबों के मकान गिर गए, घरों में पानी भर गया, कपड़े, बर्तन और जूते-चप्पल बह गए तथा चारों तरफ बदबूदार पानी जमा है, वे पीड़ित आखिर इन हालातों में कहां जाएं? सरकार का सारा पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है और पीड़ितों को राहत या तिरपाल तक नसीब नहीं हुई।

आकस्मिक निधि और केंद्रीय भेदभाव पर गंभीर सवाल
पुराने दिनों को याद करते हुए तेजस्वी ने कहा कि 2015 में जब महागठबंधन की सरकार थी और आपदा प्रबंधन विभाग राजद के पास था, तब राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद की सलाह पर बजट में यह प्रावधान किया गया था कि आपदा और संकट के समय कुल बजट का 4 फीसदी हिस्सा आकस्मिक निधि के रूप में उपयोग होगा। आज वह राशि कहां गई? बाढ़ के कारण लगभग डेढ़ लाख हेक्टेयर में धान, मक्का, सब्जी और केले की फसल बर्बाद हो चुकी है, लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला है।

उन्होनें केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बिहार दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि उनके दौरे की रिपोर्ट या नुकसान का आंकलन सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? पीएम केयर्स फंड से बिहार की मदद क्यों नहीं की गई? गोवा और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों की कुल जनसंख्या से अधिक लोग अकेले बिहार में बाढ़ प्रभावित हैं, फिर भी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री द्वारा बिहार की सहायता न करना सीधा-सीधा भेदभाव है।

जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना और की मांग
सत्ताधारियों पर कटाक्ष करते हुए तेजस्वी ने कहा कि बाढ़ के बाद 100 करोड़ के दीये जलाकर पीड़ितों का जिया जलाने वाले लोग अब एक-दो लाख की सैलरी देने की प्रतीकात्मक नौटंकी कर रहे हैं, जिससे कुल 2 से 3 करोड़ रुपए ही जमा होंगे। क्या यह राशि 50 लाख लोगों के लिए पर्याप्त है? बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बिहार से हैं, लेकिन प्रधानमंत्री से राज्य का दौरा करने का आग्रह करने की भी उनकी हैसियत नहीं है। बिहार में बीजेपी के मुख्यमंत्री, 8 केंद्रीय मंत्री, कुल 42 एनडीए सांसद और 250 से अधिक विधायक-विधान पार्षद हैं, लेकिन सभी नकारे और निकम्मे साबित हो रहे हैं।
अंत में मांग करते हुए कहा गया कि कथित डबल इंजन सरकार बाढ़ पीड़ितों को अविलंब 15 हजार रुपए की मदद दे तथा बाढ़ और सुखाड़ प्रभावित किसानों का सर्वेक्षण करवाकर यथाशीघ्र मुआवजा प्रदान करे।

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