सहरसा सदर अस्पताल में बवाल: पत्रकार से मारपीट और सीसीटीवी फुटेज मिटाने के आरोप में प्रभारी अधीक्षक और चिकित्सा पदाधिकारी पर गिरी गाज, स्वास्थ्य विभाग ने पटना मुख्यालय किया तलब!

डीएम की सख्त जांच रिपोर्ट के बाद स्वास्थ्य विभाग ने की बड़ी कार्रवाई,एक सप्ताह के भीतर दोनों आरोपित डॉक्टरों से मांगा गया स्पष्टीकरण.

सहरसा के सदर अस्पताल में पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार, मारपीट और डिजिटल साक्ष्य मिटाने के कुत्सित प्रयास का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस गंभीर प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग ने त्वरित और कड़ी कार्रवाई करते हुए सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक सुशील कुमार आजाद और चिकित्सा पदाधिकारी रोशन लाल को उनके पद से हटा दिया है। दोनों आरोपी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में योगदान देने का सख्त निर्देश जारी किया गया है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद से पूरे प्रशासनिक और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

सहरसा सदर अस्पताल का मुख्य द्वार, जहां मिड-डे मील से बीमार बच्चों की रिपोर्टिंग के दौरान डिजिटल न्यूज के पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की घटना घटी थी।

मिड-डे मील से बीमार बच्चों की रिपोर्टिंग बनी विवाद की वजह

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला 12 सितंबर का है। मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) खाने के बाद अचानक बीमार हुए बच्चों के इलाज और उनकी स्थिति की जमीनी हकीकत जानने के लिए एक डिजिटल न्यूज के पत्रकार सदर अस्पताल पहुंचे थे। अस्पताल परिसर में जब पत्रकार अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाते हुए रिपोर्टिंग कर रहे थे, तभी वहां मौजूद चिकित्सा अधिकारियों और कर्मियों ने कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, मारपीट की और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। इस शर्मनाक घटना का वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक सुर्खियों में छा गया।

सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज से छेड़छाड़ का सनसनीखेज आरोप

मामला सिर्फ यहीं नहीं थमा, बल्कि अस्पताल प्रशासन पर अपने काले कारनामों को छिपाने के लिए डिजिटल सबूतों से खिलवाड़ करने का भी गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल परिसर में पहले से स्थापित सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ की गई और मारपीट के फुटेज को डिलीट (मिटा) कर दिया गया। हालांकि, प्रशासनिक स्तर पर हुई शुरुआती जांच में यह पोल खुल गई।

जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट पर हुई बड़ी कार्रवाई

घटना के तूल पकड़ने के बाद सहरसा के जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विस्तृत जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी थी। इस जांच रिपोर्ट में पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार, मारपीट करने और साक्ष्य छिपाने की नीयत से सीसीटीवी फुटेज मिटाने के सभी आरोपों का स्पष्ट उल्लेख किया गया था। जिलाधिकारी की इस रिपोर्ट के आधार पर सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य विभाग के अवर सचिव उपेन्द्र राम ने 18 सितंबर 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी।

एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण तलब

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, सुशील कुमार आजाद (कोटि क्रमांक-G643/2025) और रोशन लाल (कोटि क्रमांक-G4780/2025) को निर्देशित किया गया है कि वे बिना किसी विलंब के अपने वर्तमान प्रभार से मुक्त होकर स्वास्थ्य विभाग, बिहार (मुख्यालय), पटना में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं। इसके साथ ही, दोनों चिकित्सकों से इस कृत्य के लिए एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।

सदर अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले जिम्मेदारों द्वारा इस तरह की तानाशाही और आपराधिक प्रवृत्ति की हरकत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। बहरहाल, विभागीय मुख्यालय तलब किए जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इन दोनों दागी अधिकारियों पर आगे क्या और कितनी कड़ी विभागीय कार्रवाई करती है।

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