शोषितों और पीड़ितों की सशक्त आवाज थे प्रेमचंद, एमडीडीएम कॉलेज में उठी उनके चरित्र को अपनाने की गूंज!

मुजफ्फरपुर, 31 जुलाई 2026 महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (एमडीडीएम कॉलेज) में शुक्रवार को महान कथाकार प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक भव्य एवं विचारोत्तेजक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रेमचंद की रचनाओं, उनके सामाजिक सरोकारों और साहित्य में छिपे यथार्थवाद पर विस्तार से प्रकाश डाला। समारोह की शुरुआत शिक्षकों और छात्राओं द्वारा प्रेमचंद के चित्र पर श्रद्धा-सुमन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

आम जन की संवेदना और युगबोध के अद्वितीय साहित्यकार

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य प्रभारी डॉ अनुराधा सिंह ने कहा कि प्रेमचंद केवल एक लेखक नहीं, बल्कि सच्चे अर्थों में जनता के कथाकार थे। उनकी हर कहानी और उपन्यास में आम आदमी की गहरी संवेदनाएं, दुख-दर्द और जीवन का यथार्थ निहित है।

मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद महाविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ निशिकांति ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद युगबोध के बेजोड़ साहित्यकार थे। उस काल की तमाम विडंबनाओं, सामाजिक विसंगतियों और असमानता को उन्होंने अपने साहित्य में बेहद निडरता से उकेरा है।

नैतिक यथार्थवाद, दलित व नारी विमर्श की गूंज

स्नातकोत्तर हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ राकेश रंजन ने प्रेमचंद के रचनात्मक एवं वैचारिक वैविध्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका यथार्थवाद केवल सामाजिक धरातल तक सीमित नहीं था, बल्कि वह गहराई से नैतिक भी था। उन्होंने सहानुभूति और नैतिक आत्मपरीक्षण के माध्यम से समाज के उपेक्षित, अनादृत, शोषित और पीड़ित वर्गों की पीड़ा को अभिव्यक्ति दी।

डॉ नूतन कुमारी ने प्रेमचंद के साहित्य में दलित विमर्श के प्रारंभिक बीजों की उपस्थिति को रेखांकित किया। वहीं डॉ रिंकु कुमारी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य संघर्षों से भरा पड़ा है, जिसमें नारी विमर्श का प्रारंभिक और सशक्त स्वरूप साफ झलकता है।

एमडीडीएम कॉलेज मुजफ्फरपुर में शुक्रवार को आयोजित प्रेमचंद जयंती समारोह के दौरान कथा सम्राट प्रेमचंद के चित्र के समीप खड़े एवं बैठे प्राचार्य प्रभारी डॉ अनुराधा सिंह, डॉ निशिकांति, डॉ राकेश रंजन, डॉ राम दुलार सहनी, अन्य शिक्षकगण एवं छात्राएं।

डॉ राम दुलार सहनी ने प्रेमचंद का जीवन परिचय देते हुए कहा कि वे हिंदी साहित्य के ऐसे युगप्रवर्तक कथाकार हैं, जिन्होंने पूरे हिंदी कथा साहित्य को एक नई दिशा और पहचान दी।

छात्राओं ने संवाद पाठ से किया मंत्रमुग्ध

छात्राओं ने भी अपने ओजस्वी विचारों से समारोह में समां बांध दिया। स्नातकोत्तर की छात्रा दिव्य लता ने जोर देकर कहा कि प्रेमचंद के चित्रों की पूजा करने के साथ-साथ उनके चरित्र और कृतित्व को भी अपने जीवन में व्यावहारिक रूप से अपनाने की सख्त आवश्यकता है।

पंचम सेमेस्टर की छात्रा कुमारी तान्या ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों के प्रमुख एवं जीवंत संवादों का प्रभावशाली पाठ किया और बताया कि किस तरह उनकी रचनाओं में सामाजिक सच की मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। छात्रा चांदनी ने प्रेमचंद का सामान्य परिचय प्रस्तुत करते हुए उन्हें हिंदी का आदर्श कथाकार बताया। इसके अलावा अंजलि कुमारी, भूमिका चंद्रा, रीता कुमारी, निधि कुमारी, नितांजलि कुमारी, पार्वती कुमारी और कृति कुमारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

गरिमामय संचालन और उपस्थिति

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन छात्रा कुमारी तान्या ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन स्नातकोत्तर की छात्रा अंजलि कुमारी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मी और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,

 ||  https://newsbharattv.in  || 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here