समस्तीपुर में खौफ का राज! अपराधियों के आगे बेबस पुलिस के खिलाफ ‘माले’ की आर-पार की जंग, 22 जून को ताजपुर थाना हिलाएंगे हजारों लोग!

  • फाइलों में दफन न्याय: थाना कांड संख्या 98/26 के तहत संजीव सहनी हत्याकांड के एक महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली, अपराधियों को मिल रहा राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण?
  • खाकी पर दाग: नीम चौक सोना लूटकांड में तीन पुलिस अधिकारियों के निलंबन के बाद भी नहीं बदला ढांचा, लूटा गया सोना और डकैत अब भी कानून की पहुंच से दूर।
  • व्यापारियों में हाहाकार: कोठिया मोड़ पर किराना दुकानदार नरेश चौधरी गोलीकांड ने तोड़ी ताजपुर के व्यवसायियों की कमर, शाम ढलते ही बाजारों में पसर जाता है सन्नाटा।
  • माले की हुंकार: प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने कहा— “देर से न्याय मिलना, असल में न्याय की हत्या है, 22 जून को जनता मैदान से थमेगी समस्तीपुर की रफ्तार।”

ताजपुर/समस्तीपुर, 18 जून 2026: बिहार का समस्तीपुर जिला इस समय एक अभूतपूर्व सुरक्षा संकट और प्रशासनिक शून्यता के दौर से गुजर रहा है। जिले का ताजपुर थाना क्षेत्र, जो कभी अपने शांत वातावरण और प्रगतिशील किसान-व्यापारी संस्कृति के लिए जाना जाता था, आज अपराधियों की खुली चरागाह बन चुका है। हत्या, दिनदहाड़े डकैती, राहजनी, रंगदारी और अंधाधुंध गोलीबारी की सिलसिलेवार घटनाओं ने आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों और उनके जीने की स्वतंत्रता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। क्षेत्र की जनता इस बात से बेहद आक्रोशित है कि जब अपराधी सरेआम वारदातों को अंजाम देकर सुरक्षित निकल जाते हैं, तब स्थानीय पुलिस केवल कागजी खानापूर्ति और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इंतजार में बैठी रहती है।

इस प्रशासनिक विफलता, खाकी की अकर्मण्यता और अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा माले ने अब सीधे तौर पर सत्ता और व्यवस्था के खिलाफ आर-पार की जंग का बिगुल फूंक दिया है। क्षेत्र में पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने और सोए हुए पुलिस तंत्र को जगाने के लिए भाकपा माले आगामी 22 जून 2026 को ताजपुर थाना का ऐतिहासिक महाघेराव करने जा रही है। इस कार्यक्रम की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने पुलिस अधीक्षक (एसपी), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) को लिखित पत्र भेजकर साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि कानून का राज स्थापित नहीं हुआ, तो उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

समस्तीपुर के ताजपुर में बेकाबू हो चुके अपराधियों और थानों की निष्क्रियता के खिलाफ आर-पार की जंग का एलान करते भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह। वे हाथ में पुलिस अधीक्षक (एसपी), अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीओ) को भेजा गया वह अल्टीमेटम पत्र दिखा रहे हैं, जिसमें 22 जून 2026 को हजारों की संख्या में ताजपुर थाना घेरने और व्यवस्था को हिला देने की पूरी रणनीति और चेतावनी दर्ज है।

कांड संख्या 98/26: संजीव सहनी हत्याकांड और पुलिस के झूठे वादे

ताजपुर में पुलिसिया नाकामी का सबसे क्रूर और ज्वलंत उदाहरण मोटरसाइकिल मिस्त्री संजीव सहनी की हत्या है। 15 मई 2026 को मोतिपुर वार्ड-27 निवासी संजीव कुमार सहनी की गांधी चौक के पास बेखौफ अपराधियों ने दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। गांधी चौक जैसे व्यस्ततम इलाके में दोपहर के समय हुई इस दुस्साहसिक वारदात से पूरा समस्तीपुर दहल उठा था। घटना के तुरंत बाद जब स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, तो जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों को शांत कराया था।

पुलिस अधिकारियों ने उस समय जनता के सामने सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया था कि 4 दिनों के भीतर अपराधियों को न सिर्फ चिन्हित कर लिया जाएगा, बल्कि उन्हें सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा। लेकिन आज इस घटना को बीते एक महीने से अधिक का समय हो चुका है, और तफ्तीश की सुई एक इंच भी आगे नहीं बढ़ी है।

भाकपा माले के नेताओं का आरोप है कि संजीव सहनी एक बेहद गरीब परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। उसकी हत्या के पीछे किसी गहरे आपराधिक सिंडिकेट का हाथ है, जिसे स्थानीय स्तर पर कुछ रसूखदार लोगों का संरक्षण प्राप्त है। यही कारण है कि पुलिस दबाव में आकर मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करने से कतरा रही है। एक गरीब की जान की कीमत समस्तीपुर पुलिस के लिए केवल एक फाइल नंबर—कांड संख्या 98/26 बनकर रह गई है।

नीम चौक सोना लूटकांड: निलंबन की कार्रवाई केवल आईवॉश?

ताजपुर पुलिस की कार्यशैली पर दूसरा सबसे बड़ा धब्बा नीम चौक पर हुआ सनसनीखेज सोना लूटकांड है। इस वारदात ने समस्तीपुर ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर बिहार के आभूषण व्यापारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अपराधियों ने योजनाबद्ध तरीके से, अत्याधुनिक हथियारों के बल पर लाखों  रुपये मूल्य के सोने और नकदी की डकैती की थी। इस घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों के भारी दबाव और चौतरफा किरकिरी के बाद पुलिस मुख्यालय ने कर्तव्य में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में तीन पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया था।

लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस अधिकारियों का निलंबन पीड़ित व्यापारियों को उनका खोया हुआ धन वापस दिला सकता है? भाकपा माले और स्थानीय व्यवसाई संघ का स्पष्ट मानना है कि यह निलंबन केवल जनता के गुस्से को शांत करने के लिए किया गया एक ‘आईवॉश’ (दिखावा) था। महीनों बीत जाने के बाद भी पुलिस न तो लूटे गए सोने का एक कतरा बरामद कर पाई है और न ही इस डकैत गिरोह के मास्टरमाइंड का पता लगा सकी है। अधिकारी बदल जाते हैं, लेकिन ताजपुर थाने की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं होता। डकैत आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और संभवतः अगली बड़ी डकैती की योजना बना रहे हैं।

नरेश चौधरी गोलीकांड और व्यापारियों का पलायन

ताजपुर बाजार और इसके आसपास के इलाके समस्तीपुर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में व्यापारियों को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, उससे यहां के व्यापार जगत की कमर टूट गई है। अभी संजीव सहनी और सोना लूटकांड की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि बीते 12 जून 2026 को कोठिया मोड़ चौक पर एक और दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया गया। यहां के  किराना दुकानदार नरेश चौधरी की दुकान पर अपराधियों ने धावा बोला और उन्हें सीधे तौर पर गोली मार दी।

नरेश चौधरी गोलीकांड ने व्यापारियों के भीतर के बचे-खुचे हौसले को भी समाप्त कर दिया है। रंगदारी न देने या अपराधियों के सामने न झुकने का परिणाम आज सीधे तौर पर गोली के रूप में सामने आ रहा है। व्यवसाई संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि ताजपुर के बाजारों में अब शाम के 8:00 बजते ही सन्नाटा पसर जाता है। कोई भी व्यापारी देर रात तक दुकान खुली रखने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। अगर यही स्थिति रही, तो ताजपुर से व्यापारियों का बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो जाएगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह तबाह हो जाएगी।

लंबित हत्याकांडों की लंबी फेहरिस्त: दर्जिनिया चौर से हरपुर भिंडी तक

ताजपुर थाना क्षेत्र में केवल एक या दो घटनाएं नहीं हुई हैं, बल्कि यहां अपराध का एक व्यवस्थित पैटर्न बन चुका है। भाकपा माले द्वारा जारी किए गए मांगपत्र में कई ऐसे लंबित मामलों का जिक्र है जिन पर पुलिस ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है:

  1. दर्जिनिया चौर हत्याकांड: इस सुनसान इलाके में हुई हत्या के मामले में पुलिस आज तक यह भी साफ नहीं कर पाई है कि हत्या का मुख्य मकसद क्या था और इसमें कौन से पेशेवर शूटर शामिल थे।
  2. हरपुर भिंडी पीट-पीटकर हत्याकांड: सामाजिक न्याय और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली इस घटना में एक नागरिक को पीट-पीटकर मार डाला गया था। इस मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कोई ठोस छापेमारी नहीं की, जिससे पीड़ित परिवार आज भी खौफ के साए में जीने को मजबूर है।

इन सभी मामलों में एक बात सामान्य है—अपराधियों में कानून का कोई डर नहीं है। उन्हें पता है कि ताजपुर की पुलिस केवल घटना के बाद मौका-ए-वारदात पर पहुंचकर औपचारिकता निभाना जानती है, अपराधियों का पीछा करना उसके बस की बात नहीं है।

“देर से न्याय मिलना, न्याय न मिलने के बराबर है” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने समस्तीपुर के मौजूदा हालातों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने राजनीतिक और प्रशासनिक दर्शन का हवाला देते हुए कहा कि “देर से न्याय मिलना, असल में न्याय न मिलने के बराबर है।” जब एक पीड़ित परिवार अपने मुखिया या अपने प्रियजन को खो देता है, और महीनों तक पुलिस के चक्कर काटने के बाद भी उसे केवल आश्वासन मिलता है, तो वह न्याय प्रणाली से अपना विश्वास खो बैठता है।

सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने साफ कहा कि ताजपुर पुलिस केवल सत्ताधारी दल के नेताओं की सुरक्षा और अवैध उगाही में व्यस्त है। आम जनता की सुरक्षा रामभरोसे छोड़ दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि 22 जून का आंदोलन केवल एक साधारण प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह समस्तीपुर पुलिस के खिलाफ जनता का निर्णायक विद्रोह होगा।

22 जून का महासंग्राम: कैसे थमेगी ताजपुर की रफ्तार?

भाकपा माले ने 22 जून 2026 के थाना घेराव कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत झोंक दी है। पार्टी के शीर्ष और जमीनी नेताओं की फौज पिछले एक हफ्ते से ताजपुर के कोने-कोने में कैंप कर रही है।

  • जमीनी स्तर पर तैयारियां: माले नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, आसिफ होदा, मो० एजाज, प्रभात रंजन गुप्ता, शंकर महतो, ललन दास और राजदेव प्रसाद सिंह जैसे कद्दावर कार्यकर्ता लगातार गांवों, टोलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जाकर ‘जनता बैठकें’ (नुक्कड़ सभाएं) कर रहे हैं। इन बैठकों में आम लोगों का अभूतपूर्व समर्थन मिल रहा है।
  • आंदोलन का रूट मैप: तय योजना के अनुसार, 22 जून को सुबह 11:00 बजे समस्तीपुर और ताजपुर के हजारों लोग, व्यवसाई, किसान और नौजवान ताजपुर के ऐतिहासिक जनता मैदान में एकत्रित होंगे। यहां से एक विशाल और आक्रामक आक्रोश महाजुलूस निकाला जाएगा।
  • बाजारों का भ्रमण: यह महाजुलूस जनता मैदान से निकलकर ताजपुर के मुख्य बाजार, गोलंबर और विभिन्न संवेदनशील चौराहों से होते हुए गुजरेगा। इस दौरान पूरे बाजार क्षेत्र के व्यापारियों ने स्वतः स्फूर्त रूप से अपनी दुकानें बंद रखकर आंदोलन को समर्थन देने का फैसला किया है।
  • थाने पर दस्तक: बाजार का भ्रमण करने के बाद यह जनसैलाब सीधे ताजपुर थाना पहुंचेगा और वहां चारों तरफ से घेराव कर प्रदर्शन किया जाएगा। वहीं पर एक लंबी विरोध सभा होगी, जिसमें पुलिस के आला अधिकारियों को बुलाकर सीधे जनता के सामने जवाबदेही तय करने के लिए मजबूर किया जाएगा।

भाकपा माले और व्यवसाई संघ की मुख्य मांगें (मांगपत्र के मुख्य बिन्‍दु ) :

पार्टी ने स्पष्ट किया है कि जब तक निम्नलिखित मांगों पर लिखित और समयबद्ध आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा:

  • मांग 1: ताजपुर थाना कांड संख्या 98/26 (संजीव सहनी हत्याकांड) का अविलंब उद्भेदन किया जाए और मुख्य शूटरों तथा इसके पीछे के साजिशकर्ताओं को तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
  • मांग 2: नीम चौक सोना लूटकांड के दोषियों को दबोचा जाए और लूटे गए आभूषणों की शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़ित व्यापारियों को राहत मिल सके।
  • मांग 3: किराना दुकानदार नरेश चौधरी पर जानलेवा हमला करने वाले और रंगदारी मांगने वाले गिरोह का समूल नाश किया जाए।
  • मांग 4: दर्जिनिया चौर हत्याकांड और हरपुर भिंडी पीट-पीटकर हत्याकांड सहित थाना क्षेत्र के सभी लंबित मामलों में फरार चल रहे अपराधियों की संपत्तियों की कुर्की-जब्ती की जाए।
  • मांग 5: पूरे ताजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस गश्त (पेट्रोलिंग) को चौबीस घंटे सक्रिय किया जाए, मुख्य चौराहों पर सीसीटीवी कैमरे चालू किए जाएं और व्यापारियों तथा आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए।

समस्तीपुर का यह संकट अब केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह आम इंसान के अस्तित्व और गरिमा की लड़ाई बन चुका है। जब कानून के रखवाले ही पंगु हो जाएं, तो जनता को सड़कों पर उतरना ही पड़ता है। भाकपा माले ने क्षेत्र की समस्त न्यायप्रिय जनता, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और सभी लोकतांत्रिक संगठनों से अपील की है कि वे 22 जून को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, जाति और धर्म की सीमाओं को तोड़कर, अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य और अपराधियों के सफाए के लिए इस थाना घेराव कार्यक्रम में शामिल हों। 22 जून को ताजपुर की सड़कों पर उतरने वाला एक-एक कदम समस्तीपुर के प्रशासनिक गलियारों में बैठे भ्रष्ट और अकर्मण्य अधिकारियों की कुर्सी हिलाने का काम करेगा।

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