मोकामा के ‘घूसखोर’ जूनियर इंजीनियर धरनीधर राय को कोर्ट ने ठहराया दोषी! : भ्रष्टाचार पर सम्राट  सरकार का बड़ा प्रहार

विजिलेंस कोर्ट का बड़ा फैसला: सर्व शिक्षा अभियान में ₹5,000 की घूस लेते रंगे हाथों पकड़े गए थे साहब, अब भुगतेंगे सजा

निगरानी विभाग की तगड़ी चार्जशीट से थर्राए रिश्वतखोर सरकारी बाबू, ₹300 से लेकर ₹2 लाख तक की घूस खाने वालों का खुला कच्चा चिट्ठा!

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही ‘जीरो टॉलरेंस’ की मुहिम के तहत विजिलेंस (निगरानी) विभाग को एक और बड़ी कामयाबी मिली है। पटना के विशेष निगरानी कोर्ट के माननीय न्यायाधीश ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए सर्व शिक्षा अभियान, मोकामा (पटना) के कनीय अभियंता (JE)  धरनीधर राय को भ्रष्टाचार का दोषी करार दिया है। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अदालत में पेश किए गए पुख्ता सबूतों और चार्जशीट के आगे आरोपी इंजीनियर की एक न चली और कोर्ट ने उसे सलाखों के पीछे भेजने का रास्ता साफ कर दिया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस कोर्ट का बड़ा हथौड़ा; मोकामा के कनीय अभियंता धरनीधर राय को ₹5,000 की घूसखोरी मामले में पटना निगरानी अदालत ने ठहराया दोषी।दायें में  मुजफ्फरपुर के जिला योजना पदाधिकारी (₹2 लाख घूसकांड) से लेकर नवादा के बिजली विभाग के JE (₹300 घूसकांड) समेत कुल 9 घूसखोरों को पटना की विशेष निगरानी अदालत ने जारी किया नाम ।

₹5000 की रिश्वत लेते दबोचे गए थे साहब

मामला साल 2016 का है। निगरानी थाना कांड संख्या-35/2016 (विशेष वाद सं.-19/2016) के तहत आरोपी कनीय अभियंता धरनीधर राय को विजिलेंस की टीम ने ₹5,000 की रिश्वत की राशि के साथ रंगे हाथों दबोचा था। बच्चों की शिक्षा और स्कूलों के विकास के लिए आने वाले फंड में भी कमीशनखोरी का यह घिनौना खेल चल रहा था।

इन धाराओं के तहत तय हुआ दोष, जाएगी नौकरी!

अदालत ने आरोपी धरनीधर राय को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(2) सह पठित धारा 13(1)(डी) के तहत दोषी पाया है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस दोषसिद्धि के बाद अब आरोपी इंजीनियर की सरकारी नौकरी जाना तय है, साथ ही उन्हें एक लंबी जेल टर्म और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की इस बड़ी सफलता से रिश्वतखोर सरकारी बाबुओं और इंजीनियरों के खेमे में हड़कंप मच गया है।

कुर्सी भी जाएगी और जेल की चक्की भी पीसेंगे!

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, विजिलेंस कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद अब इन सभी 9 आरोपियों की सरकारी नौकरी जाना लगभग तय माना जा रहा है। इसके साथ ही इन सभी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भारी आर्थिक जुर्माना और कई सालों की कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। बिहार सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह फैसला उन सभी कर्मचारियों के लिए एक कड़ा सबक है जो जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका डालते हैं।”

निगरानी विभाग की तगड़ी चार्जशीट से थर्राए रिश्वतखोर सरकारी बाबू, ₹300 से लेकर 2 लाख तक की घूस खाने वालों का खुला कच्चा चिट्ठा!

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ विशेष निगरानी अदालत ने एक साथ बड़ा हथौड़ा चलाते हुए राज्य के विभिन्न विभागों में तैनात रहे 9 घूसखोर अधिकारियों और कर्मियों को दोषी करार देने की पक्रिया जारी की है। विजिलेंस ब्यूरो द्वारा अदालत में पेश किए गए अकाट्य साक्ष्यों और वैज्ञानिक तरीके से तैयार की गई चार्जशीट के आधार पर माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) ने इन सभी आरोपियों को अलग-अलग मामलों में सजा सुनाने का रास्ता साफ कर दिया है।

अदालत के इस फैसले से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। इस सूची में वन विभाग के रेंजर, पुलिस के थानेदार, बिजली विभाग के कनीय अभियंता और जिला योजना पदाधिकारी जैसे रसूखदार नाम शामिल हैं, जिन्हें निगरानी की टीम ने सैकड़ों रुपये से लेकर लाखों रुपये तक की रिश्वत लेते हुए दबोचा था।

इन 9 ‘महा-भ्रष्टाचारियोंके पाप का घड़ा फूटा, देखिए पूरी ब्लैक लिस्ट:

  1.  ओम प्रकाश (तत्कालीन जिला योजना पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर): इस सूची के सबसे बड़े खिलाड़ी, जिन्हें ₹2,00,000 (दो लाख रुपये) की भारी-भरकम रिश्वत राशि के साथ विजिलेंस ने दबोचा था।
  2.  धरनीधर राय (कनीय अभियंता, सर्व शिक्षा अभियान, मोकामा, पटना): बच्चों की शिक्षा के फंड में कमीशनखोरी करने वाले इन साहब को ₹5,000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
  3.  राम नरेश प्रसाद (प्रभारी प्रधान लिपिक, अंचल कार्यालय, दिनारा, रोहतास): जमीन और अंचल के कामों के बदले ₹8,000 की घूस लेते पकड़ा गया था।
  4. लाल बाबू प्रसाद (तत्कालीन थाना प्रभारी, अतरी, गया): खाकी को दागदार करने वाले इस पूर्व थानेदार को केस रफा-दफा करने के नाम पर ₹6,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।
  5. जयराम सिंह (कनीय अभियंता, ग्रामीण विकास विभाग, नवादा): ग्रामीण सड़कों और विकास योजनाओं में ₹3,000 की कमीशनखोरी के जाल में फंसे JE साहब भी अब नप गए हैं।
  6. कृष्णदेव पासवान (प्रधान लिपिक-सह-लेखापाल, नगर परिषद, डेहरी ऑन सोन): नगर परिषद के फंड में हेराफेरी और ₹2,900 की घूसखोरी के मामले में नप गए हैं।
  7. सीताराम चौधरी (तत्कालीन रेंजर, जिला-वैशाली): पर्यावरण और जंगलों की सुरक्षा के बदले ₹1,500 की रिश्वत लेने वाले पूर्व रेंजर ।
  8.  सुदामा राय (कनीय विद्युत अभियंता, नवादा): आम जनता को बिजली कनेक्शन या बिल सुधार के नाम पर महज ₹300 जैसी छोटी रकम की भी घूस खाने वाले कनीय अभियंता है।
  9. नरेश प्रसाद (तत्कालीन सहायक अवर निरीक्षक, थाना-गिरियक, नालंदा) एवं नरेश प्रसाद (दलाल): थाने में दलाली का नेक्सस चलाने वाले इस दारोगा और उसके दलाल साथी को भी विजिलेंस रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था।

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