मुक्तापुर गुमटी ओवरब्रिज और नई रेल लाइन परियोजना को लेकर ‘रेल विकास मंच‘ का महा-उपवास; रेलवे प्रशासन को सौंपे गए 10 सूत्री मांग पत्र में इस रूट को अविलंब शुरू करने की दी गई चेतावनी।
समस्तीपुर, 29 मई 2026 क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली ‘कर्पूरीग्राम-ताजपुर-पातेपुर-महुआ-भगवानपुर नई रेल लाइन‘ के निर्माण कार्य को तुरंत शुरू करने की मांग को लेकर शुक्रवार को समस्तीपुर में बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो गया। ‘समस्तीपुर रेल विस्तार विकास मंच’ के बैनर तले डीआरएम (DRM) कार्यालय के समक्ष आयोजित एक दिवसीय उपवास आंदोलन में इस नई रेल लाइन की स्वीकृति और मुक्तापुर रेल गुमटी पर ओवरब्रिज निर्माण की मांग सबसे प्रमुखता से छाई रही। सुबह से हो रही मूसलाधार बारिश और खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक छाता तानकर, भीगते हुए धरने पर डटे रहे।

जनता के हक के लिए बारिश में भी डटे रहे आंदोलनकारी
इस महा-उपवास की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता शंकर प्रसाद साह ने की तथा संचालन जीबछ पासवान द्वारा किया गया। आंदोलन के दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मंच के संयोजक शत्रुघ्न राय ‘पंजी’ ने रेलवे प्रशासन पर सीधा हमला बोला। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में पूछा, “आखिर शिलान्यास हो जाने के बावजूद मुक्तापुर रेल गुमटी पर ओवरब्रिज का निर्माण कार्य अब तक शुरू क्यों नहीं हुआ? क्या रेलवे सिर्फ कागजी घोषणाओं तक सीमित है?”
भाकपा माले के स्थानीय नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने मुख्य मांग पर जोर देते हुए कहा कि कर्पूरीग्राम-ताजपुर-पातेपुर-महुआ-भगवानपुर नई रेल लाइन इस पूरे इलाके की लाइफलाइन है, जिसे ठंडे बस्ते में डालकर रेलवे प्रशासन लाखों की आबादी के साथ अन्याय कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन बुनियादी मांगों पर जल्द ही कोई ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में चक्का जाम और उग्र आंदोलन की जिम्मेदारी पूरी तरह प्रशासन की होगी।

10 सूत्री मांगों का स्मार पत्र सौंपकर अल्टीमेटम
आंदोलन के अंत में एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा को 10 सूत्री स्मार पत्र (ज्ञापन) सौंपा। सौंपे गए स्मार पत्र में प्रमुख रूप से ये मांगें शामिल हैं:
- कर्पूरीग्राम-ताजपुर-पातेपुर-महुआ-भगवानपुर नई रेल लाइन का निर्माण अविलंब शुरू करना।
- शिलान्यासित मुक्तापुर रेल गुमटी ओवरब्रिज का काम तुरंत चालू करना।
- अटेरन चौक रेल गुमटी पर नए ओवरब्रिज निर्माण को तत्काल मंजूरी देना।
- केबल स्थान से कर्पूरीग्राम, दलसिंहसराय से पटोरी, और मुक्तापुर से थानेश्वरस्थान तक नई रेल लाइन योजनाओं को हरी झंडी देना।
- समस्तीपुर रेल कारखाना में पूर्णरूपेण पीओपी (POP) कार्य संपन्न कराना।
- समस्तीपुर जंक्शन पर नए वाशिंग पिट का निर्माण और लंबी दूरी की नई ट्रेनों का परिचालन।
सर्वदलीय समर्थन से गूंजा परिसर
इस उपवास आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक दलों का भारी समर्थन मिला। आंदोलन में मुख्य रूप से भाकपा माले के उपेंद्र राय, विश्वनाथ गुप्ता, पूर्व पार्षद अर्जुन कुमार राय, रामलाल राय; राजद के नेता राकेश ठाकुर, राम विनोद पासवान, जगलाल राय, शाहिद हुसैन; माकपा के सत्यनारायण सिंह; कांग्रेस के डोमन राय, विश्वनाथ सिंह हजारी, परमानंद मिश्र; सामाजिक कार्यकर्ता संतोष कुमार, अशोक कुमार राय; और भाजपा के राकेश कुमार राज, रामगुलेब राय, राजेंद्र राय, शंभू राय, एवं कृष्ण कुमार शामिल हुए।

आखिर इस क्षेत्र के लिए क्या वरदान होगा यह रेल मार्ग?
कर्पूरीग्राम-ताजपुर-पातेपुर-महुआ-भगवानपुर रेल मार्ग केवल पटरियों का बिछना भर नहीं है, बल्कि यह इस ग्रामीण और अर्ध-शहरी बेल्ट के लिए ‘आर्थिक समृद्धि का कॉरिडोर‘ साबित हो सकता है। इस रेल मार्ग की जरूरत को इन मुख्य बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- मंडी और व्यापार को सीधा जुड़ाव: ताजपुर और महुआ के इलाके बड़े पैमाने पर सब्जी, फल और कृषि उत्पादों के उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। रेल कनेक्टिविटी न होने के कारण किसानों को अपनी फसल कौड़ियों के भाव स्थानीय स्तर पर बेचनी पड़ती है। इस रेल लाइन के बनने से किसान अपने उत्पादों को सीधे बड़े बाजारों और अन्य राज्यों तक आसानी से और कम लागत में भेज सकेंगे।
- सड़क मार्ग पर दबाव होगा कम: वर्तमान में समस्तीपुर से वैशाली (भगवानपुर) और मुजफ्फरपुर-पटना की ओर जाने वाली सड़कों पर गाड़ियों का भारी दबाव रहता है, जिससे हर दिन घंटों लंबा जाम लगता है। इस रेल मार्ग के चालू होने से न सिर्फ यात्रा का समय आधा हो जाएगा, बल्कि सड़कों पर से लोड भी काफी कम होगा।
- रोजगार और नए उद्योगों का सृजन: यह रेल खंड उत्तर बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों की सीमाओं को जोड़ता है। रेल संपर्क स्थापित होने से ताजपुर और महुआ जैसे तेजी से विकसित हो रहे कस्बों में छोटे और मध्यम दर्जे के उद्योगों (MSMEs) और कोल्ड स्टोरेज चेन के निर्माण का रास्ता साफ होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा।

यह मांग पिछले लगभग दो दशकों (करीब 20 साल) से लगातार उठ रही है, जब रेल मंत्रालय ने इस पिछड़े इलाके को मुख्य रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए शुरुआती सर्वे की बात कही थी, लेकिन बजट की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण यह योजना फाइलों में ही दबी रह गई। दूरी के मामले में, वर्तमान में समस्तीपुर से महुआ, हाजीपुर या वैशाली क्षेत्र जाने के लिए मुजफ्फरपुर होकर एक लंबा चक्कर (यू-शेप) लगाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी होती है। अगर यह नया रेल मार्ग बनता है, तो समस्तीपुर से कर्पूरीग्राम, ताजपुर और महुआ होते हुए भगवानपुर (जो कि हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेल खंड पर स्थित है) की दूरी सीधे तौर पर लगभग 35 से 40 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे समस्तीपुर से हाजीपुर और राजधानी पटना आने-जाने वाले यात्रियों का सफर न सिर्फ बेहद सीधा हो जाएगा, बल्कि सफर का समय भी करीब डेढ़ से दो घंटे घट जाएगा।
यही कारण है कि इस रेल मार्ग को लेकर आम जनता से लेकर राजनीतिक दल के नेता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं।
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