पटना। बिहार की सियासत में आगामी चुनावी और सांगठनिक चुनौतियों को भांपते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी नई प्रदेश टीम का एलान कर दिया है। पत्रांक संख्या 630/26 के तहत जारी इस आधिकारिक सूची में पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए एक बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेला है। प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन के दिशा-निर्देशों पर तैयार की गई इस नई टीम में कुल अड़तीस बड़े पदाधिकारियों और सात मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति की गई है।

इस संगठनात्मक पुनर्गठन पर अपनी मुहर लगाते हुए राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर नई टीम को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संदेश में कहा, “भारतीय जनता पार्टी, बिहार प्रदेश के नवमनोनीत सभी प्रदेश पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ। आप सभी के सफल एवं गौरवपूर्ण कार्यकाल हेतु अनंत शुभकामनाएँ।”
संजय सरावगी द्वारा हस्ताक्षरित इस सूची के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि भाजपा ने इस बार जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को बेहद बारीकी से सुलझाने का प्रयास किया है, ताकि विपक्ष के सामाजिक गठजोड़ को मात दी जा सके।
संगठनात्मक सूची: किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी?
पार्टी द्वारा जारी सांगठनिक सूची को सुगमता के लिए नीचे तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें सभी नाम हूबहू पत्र के अनुसार बिना किसी आदरसूचक शब्द के दिए गए हैं:

1. प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश महामंत्री सूची
| क्र. सं. | नाम | पद / दायित्व |
| 1. | हरिभूषण ठाकुर बचौल (पूर्व विधायक) | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 2. | राकेश कुमार | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 3. | संतोष पाठक | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 4. | मनोज कुमार सिंह | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 5. | अनामिका पासवान | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 6. | शोभा सिंह | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 7. | पवन जायसवाल (पूर्व विधायक) | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 8. | प्रणव कुमार यादव (पूर्व विधायक) | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 9. | संतोष रंजन राय | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 10. | नंद प्रसाद चौहान | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 11. | अनिल ठाकुर | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 12. | मुकेश शर्मा (औरंगाबाद) | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 13. | शीला कुशवाहा | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 14. | बलराम मंडल | प्रदेश उपाध्यक्ष |
| 15. | सरोज रंजन पटेल | प्रदेश महामंत्री |
| 16. | धनराज शर्मा | प्रदेश महामंत्री |
| 17. | प्रीति शेखर | प्रदेश महामंत्री |
| 18. | नितिन अभिषेक | प्रदेश महामंत्री |
| 19. | राजेश झा उर्फ राजू झा | प्रदेश महामंत्री |

2. प्रदेश मंत्री, कोषाध्यक्ष एवं कार्यालय पदाधिकारी
| क्र. सं. | नाम | पद / दायित्व |
| 20. | सुषमा साहू | प्रदेश मंत्री |
| 21. | जन्मेजय कुमार सिंह | प्रदेश मंत्री |
| 22. | रागिनी रानी | प्रदेश मंत्री |
| 23. | कुमार राघवेंद्र | प्रदेश मंत्री |
| 24. | प्रभाकर मिश्रा | प्रदेश मंत्री |
| 25. | अंजनी निषाद | प्रदेश मंत्री |
| 26. | मनोज चौधरी | प्रदेश मंत्री |
| 27. | मुकेश सिंह कुशवाहा | प्रदेश मंत्री |
| 28. | सीमा झा | प्रदेश मंत्री |
| 29. | सरला रजक | प्रदेश मंत्री |
| 30. | सुनील राम | प्रदेश मंत्री |
| 31. | संजय कुमार-मुन्ना | प्रदेश मंत्री |
| 32. | मुकेश शर्मा (मुजफ्फरपुर) | प्रदेश मंत्री |
| 33. | दिवाकर सिंह | प्रदेश मंत्री |
| 34. | त्रिविक्रम नारायण सिंह (विधायक) | प्रदेश कोषाध्यक्ष |
| 35. | राजेश सिन्हा | सह कोषाध्यक्ष |
| 36. | अंकुर गुप्ता | सह कोषाध्यक्ष |
| 37. | अक्षय कुमार | प्रदेश मुख्यालय प्रभारी |
| 38. | विनय केरी | कार्यालय मंत्री |
3. विभिन्न मोर्चों के अध्यक्षों की सूची
संगठन के सातों प्रमुख पंखों (मोर्चों) को भी नए अध्यक्ष मिल गए हैं, जिनकी सूची इस प्रकार है:
| क्र. सं. | नाम | मोर्चा का नाम (अध्यक्ष) |
| 1. | जितेन्द्र सिंह | युवा मोर्चा |
| 2. | निशा सिंह (विधायक) | महिला मोर्चा |
| 3. | राम सुमिरन सिंह | किसान मोर्चा |
| 4. | प्रमोद चंद्रवंशी | ओबीसी मोर्चा |
| 5. | सुजीत पासवान (विधायक) | अनुसूचित जाति मोर्चा |
| 6. | निरंजन पजियार थारू | अनुसूचित जनजाति मोर्चा |
| 7. | मो० महबुल हक | अल्पसंख्यक मोर्चा |

सोशल इंजीनियरिंग और भाजपा का मास्टरस्ट्रोक
भाजपा की इस नई टीम का यदि बारीकी से विश्लेषण किया जाए, तो इसमें पार्टी की भविष्य की रणनीति साफ दिखाई देती है। यह फेरबदल महज पदों का बंटवारा नहीं है, बल्कि बिहार के जटिल सामाजिक ताने-बाने को साधने की एक सोची-समझी कोशिश है।
अगड़ी और पिछड़ी जातियों का सटीक संतुलन
बिहार की राजनीति हमेशा से जातीय ध्रुवीकरण के इर्द-गिर्द घूमती रही है। इस सूची में पार्टी ने अपने मुख्य आधार वोट बैंक यानी सवर्ण (अगड़ी) जातियों को भी पूरा सम्मान दिया है और साथ ही अत्यंत पिछड़ी (ईबीसी) और अन्य पिछड़ी जातियों (ओबीसी) को बहुत बड़ा प्रतिनिधित्व दिया है।
- उपाध्यक्ष की सूची में हरिभूषण ठाकुर बचौल, संतोष पाठक, पवन जायसवाल जैसे स्थापित चेहरों को रखकर सवर्ण और वैश्य समाज को मजबूत संदेश दिया गया है।
- वहीं दूसरी ओर, शीला कुशवाहा और मुकेश सिंह कुशवाहा जैसे नामों को शामिल कर लव-कुश समीकरण में सेंधमारी की कोशिश तेज की गई है।
- प्रमोद चंद्रवंशी को ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष बनाना यह दर्शाता है कि पार्टी अति पिछड़ा वर्ग को अपने पाले में बनाए रखने के लिए कितनी गंभीर है।
दलित और आदिवासी समाज को मुख्यधारा में जगह
इस सांगठनिक फेरबदल में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को न केवल संख्या बल दिया गया है, बल्कि उन्हें फ्रंटलाइन पर रखा गया है। अनामिका पासवान को सीधे प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे कद्दावर पद पर बिठाया गया है, जबकि सरला रजक और सुनील राम को प्रदेश मंत्री बनाकर दलित चेहरों को आगे बढ़ाया गया है। इसके अलावा विधायक सुजीत पासवान को अनुसूचित जाति मोर्चा और निरंजन पजियार थारू को अनुसूचित जनजाति मोर्चा का जिम्मा देकर सुदूर इलाकों के कार्यकर्ताओं को साधने की कवायद की गई है।

महिला शक्ति पर विशेष भरोसा
इस सूची में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय है। पार्टी ने केवल महिला मोर्चा तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि मुख्य संगठन में महिलाओं को महत्वपूर्ण सांगठनिक ताकत दी है। अनामिका पासवान और शोभा सिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है, तो प्रीति शेखर को प्रदेश महामंत्री जैसी बड़ी संगठनात्मक भूमिका मिली है। वहीं सुषमा साहू, रागिनी रानी, सीमा झा और सरला रजक को प्रदेश मंत्री बनाकर आधी आबादी के बीच अपनी पैठ मजबूत करने का एक बड़ा दांव खेला गया है।
अनुभव और युवा ऊर्जा का मेल
पार्टी ने अपने पुराने और आक्रामक नेताओं जैसे हरिभूषण ठाकुर बचौल को संगठन में ऊंचा ओहदा देकर यह साफ कर दिया है कि वह अपनी मूल विचारधारा और आक्रामक रुख से समझौता नहीं करेगी। वहीं दूसरी ओर, युवा मोर्चा की कमान जितेन्द्र सिंह को देकर नए मतदाताओं और युवाओं को पार्टी से जोड़ने का जिम्मा सौंपा गया है।

क्षेत्रीय संतुलन का खास ध्यान
इस सूची में पटना के अलावा उत्तर बिहार, दक्षिण बिहार, सीमांचल और मिथिलांचल का विशेष ध्यान रखा गया है। औरंगाबाद के मुकेश शर्मा और मुजफ्फरपुर के मुकेश शर्मा दोनों को सूची में जगह देकर भौगोलिक संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है। धनराज शर्मा और राजेश झा जैसे जमीन से जुड़े नेताओं को महामंत्री बनाकर संगठन के कामकाज को गति देने की योजना है।
कुल मिलाकर, बिहार भाजपा की यह नई टीम मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व और नितिन नवीन के सांगठनिक कौशल का एक मिलाजुला नतीजा दिखती है। इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ के जरिए भाजपा ने न केवल अपने कैडर को रिचार्ज किया है, बल्कि विपक्ष के सामने एक ऐसी सोशल इंजीनियरिंग पेश की है जिसका मुकाबला करना आसान नहीं होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई सांगठनिक फौज जमीन पर कितनी कामयाब साबित होती है।
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