एक ही दिन, एक ही शहर और महज 1 किलोमीटर का दायरा… निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बैक-टू-बैक दो बड़े ऑपरेशनों में अंचलाधिकारी (CO) समेत 3 को रंगे हाथों दबोचा; प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप।
सासाराम (रोहतास)। बिहार के रोहतास जिले से भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई सामने आई है। सासाराम शहर में शुक्रवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की पटना मुख्यालय टीम ने एक ही दिन में, महज एक किलोमीटर की दूरी पर दो अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस महा-कार्रवाई में सासाराम अंचल के अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार, उनके निजी घरेलू सहायक सोनू कुमार और सासाराम सदर अस्पताल के लिपिक (क्लर्क) सतीश कुमार को कुल 3 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।

तस्वीर 2 (दाएं): ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर 20 हजार की रिश्वत लेते सड़क किनारे से दबोचा गया सासाराम सिविल सर्जन कार्यालय का घूसखोर क्लर्क सतीश कुमार (सफेद शर्ट में) पुलिस अभिरक्षा में।
निगरानी विभाग की इस दोहरी सर्जिकल स्ट्राइक से पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच खलबली मची हुई है।
पहला वज्रपात: दाखिल-खारिज के नाम पर 3 लाख डकार रहे CO और उनका गुर्गा ढेर
निगरानी ब्यूरो की पहली बड़ी सफलता सासाराम अंचल के अंचलाधिकारी (CO) कार्यालय से जुड़ी है। पुलिस उपाध्यक्ष पवन कुमार-I के नेतृत्व में गठित एक विशेष धावा दल ने सासाराम के बेदा, मोरसराय स्थित CO आकाश कुमार रौनियार के निजी आवास पर धावा बोला।
क्या है पूरा मामला? राजस्व कर्मचारी (सासाराम अंचल) के पद पर तैनात परिवादी राकेश कुमार (पिता- स्वर्गीय कमला प्रसाद सिंह, निवासी- दिनारा, रोहतास) ने पटना स्थित निगरानी ब्यूरो के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अंचलाधिकारी (CO) आकाश कुमार रौनियार द्वारा प्रत्येक दाखिल-खारिज (Mutation) के बदले 50,000 रुपये की अवैध मांग की जा रही थी। इसके अलावा एक विशिष्ट दाखिल-खारिज वाद संख्या (0-4499/2025-26) में परिवादी अशोक प्रसाद से काम करने के एवज में कुल 8,00,000 (आठ लाख) रुपये रिश्वत देने के लिए मजबूर किया जा रहा था।
निगरानी ब्यूरो ने जब गोपनीय तरीके से इस शिकायत का सत्यापन कराया, तो आरोप शत-प्रतिशत सही पाए गए। सत्यापन के दौरान अंचलाधिकारी द्वारा पहली किस्त के रूप में 3,00,000 रुपये (तीन लाख रुपये) रिश्वत मांगे जाने का पुख्ता प्रमाण मिला। इसके बाद डीएसपी पवन कुमार-I के नेतृत्व में जाल बिछाया गया। जैसे ही परिवादी ने तीन लाख रुपये की रकम बढ़ाई, विजिलेंस टीम ने CO आकाश कुमार रौनियार और उनके निजी घरेलू सहायक सोनू कुमार को रंगे हाथों दबोच लिया।

दूसरा वज्रपात: ट्रांसफर रोकने के नाम पर सदर अस्पताल का क्लर्क भी सड़क किनारे से नापा गया
CO के आवास पर हुई इस बड़ी कार्रवाई के तुरंत बाद, महज 1 किलोमीटर की दूरी पर निगरानी की दूसरी टीम ने एक और भ्रष्ट सरकारी ‘शिकारी’ को दबोच लिया। पुलिस उपाध्यक्ष विकास कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में काम कर रही टीम ने सासाराम सदर अस्पताल परिसर के पास जाल बिछाया।
क्या है पूरा मामला? इस मामले की परिवादिनी सुनीता कुमारी (पति- शैलेश कुमार चौधरी, निवासी- मौलाबाग, आरा, भोजपुर) हैं, जो संझौली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में प्रखंड लेखा प्रबंधक (Block Accountant) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने शिकायत दर्ज कराई थी कि सदर अस्पताल, सासाराम के सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात लिपिक (क्लर्क) सतीश कुमार द्वारा उनका ट्रांसफर (स्थानांतरण) रुकवाने के एवज में सिविल सर्जन के नाम पर रिश्वत की मांग की जा रही थी।
शिकायत के सत्यापन के बाद जैसे ही परिवादिनी ने 20,000 रुपये (बीस हजार रुपये) की घूस लिपिक सतीश कुमार को थमाई, वैसे ही सदर अस्पताल के सामने स्थित शिव मंदिर के पास सड़क किनारे से निगरानी की टीम ने क्लर्क सतीश कुमार को दबोच लिया।

पूरी विजिलेंस टीम को मिलेगा विशेष पुरस्कार
एक ही दिन, एक ही शहर और बेहद गोपनीयता व कार्यकुशलता के साथ दो अलग-अलग बड़े ऑपरेशनों को सफल बनाने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के महानिदेशक (DG) ने पूरी धावा दल (निगरानी टीम) को नकद पुरस्कार और सम्मान देने की घोषणा की है। निगरानी ब्यूरो के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों अभियुक्तों (CO आकाश कुमार रौनियार, निजी सहायक सोनू कुमार और क्लर्क सतीश कुमार) से फिलहाल गहन पूछताछ की जा रही है, जिसके बाद उन्हें पटना स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा।
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