पटना। बिहार सरकार द्वारा “सात निश्चय-3” के तहत राज्य के 208 प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोलने और 6656 शिक्षकों की बहाली की घोषणा ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। सरकार की इस महा-योजना में उर्दू विषय को पूरी तरह नजरअंदाज किए जाने से उर्दू भाषी समुदायों और बुद्धिजीवियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ऑल इंडिया मुस्लिम मजलिस-ए-मुशावरत (बिहार) ने इसे उर्दू के साथ बड़ा अन्याय करार देते हुए सरकार की नीति और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

उर्दू के साथ सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं: प्रो. अबूज़र
मुशावरत के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) सैयद अबूज़र कमालुद्दीन और राज्य महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने एक संयुक्त बयान जारी कर कहा कि बिहार में उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। इसके बावजूद, उच्च शिक्षा के इस बड़े विस्तार में उर्दू को शामिल न करना यह दर्शाता है कि भाषा के शैक्षणिक आधार को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। प्रो. अबूज़र ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “मंत्री जी ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया था, लेकिन यह निर्णय उनकी कथनी और करनी के अंतर को साफ उजागर करता है।”
एक मंच पर आएं सभी संगठन: मोहम्मद इश्तेयाक की बड़ी अपील
मुशावरत के राज्य महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने बिहार की तमाम मिल्ली, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं उर्दू संगठनों से भावुक अपील करते हुए कहा कि अब घर बैठने का वक्त नहीं है। उन्होंने कहा, “उर्दू के अस्तित्व को बचाने के लिए राज्य के सभी संगठनों को तुरंत एक मंच पर एकत्र होना होगा। हमें एक संयुक्त और शक्तिशाली प्रतिनिधिमंडल बनाकर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मिलकर यह मांग करनी चाहिए कि अधिसूचना में तुरंत संशोधन कर उर्दू को शामिल किया जाए।”
6656 पदों में उर्दू का नामोनिशान नहीं
महासचिव मोहम्मद इश्तेयाक ने कहा कि सरकार ने 16 विषयों की सूची जारी की है, जिसमें उर्दू को जगह नहीं मिली है। यदि उर्दू विषय ही नहीं होगा, तो न शिक्षकों की नियुक्ति होगी और न ही छात्र इसे पढ़ पाएंगे। उन्होंने बिहार के सभी सामाजिक, सांस्कृतिक और मिल्ली संगठनों से एकजुट होने की अपील की है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
मुशावरत ने ऐलान किया है कि जल्द ही एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात कर अधिसूचना में संशोधन की मांग करेगा। नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से उग्र विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
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