पटना | विशेष संवाददाता | बिहार में सुशासन की कमान संभाल रहे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज राज्य की पूरी प्रशासनिक मशीनरी को स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है। पटना के अधिवेशन भवन में आयोजित जिला पदाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों (SP) की उच्चस्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका शत-प्रतिशत लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।

समीक्षा में फूटा गुस्सा: योजनाओं की कछुआ चाल पर नाराजगी
बैठक की शुरुआत विभिन्न जिलों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा से हुई। मुख्यमंत्री ने कई जिलों में योजनाओं की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पारदर्शिता और जवाबदेही में किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा, “हमारी सरकार की प्राथमिकता अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति है। यदि उस तक लाभ नहीं पहुँच रहा, तो यह प्रशासन की विफलता मानी जाएगी।”
विधि-व्यवस्था: अपराधियों में खौफ और जनता में विश्वास जरूरी
पुलिस अधीक्षकों (SP) के साथ संवाद के दौरान मुख्यमंत्री का रुख काफी सख्त नजर आया। राज्य की विधि-व्यवस्था पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस की छवि ऐसी होनी चाहिए कि अपराधी काँपें और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने थानों में आने वाले फरियादियों के साथ संवेदनशीलता बरतने और लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन करने का आदेश दिया।
अधिकारियों के लिए ‘पंचामृत‘ निर्देश:
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के लिए पांच मुख्य सिद्धांतों पर जोर दिया:
- संवेदनशीलता: आम जनता की समस्याओं को अपनी समस्या समझकर सुनें।
- तत्परता: फाइलों को अटकाने के बजाय तत्काल निर्णय लें।
- पारदर्शिता: हर योजना और चयन प्रक्रिया में ईमानदारी बरतें।
- प्रतिबद्धता: जनसेवा को केवल नौकरी नहीं, अपना सर्वोच्च दायित्व समझें।
- जवाबदेही: हर गलती की जिम्मेदारी तय की जाएगी और कार्रवाई होगी।
“जनता ही मालिक है”
मुख्यमंत्री ने कार्यशाला के समापन संबोधन में भावुक होते हुए कहा कि बिहार की जनता ने हमें सेवा का अवसर दिया है। अधिकारियों को यह याद रखना चाहिए कि वे जनता के सेवक हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार या लापरवाही की शिकायत मिली, तो संबंधित अधिकारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्यशाला में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित राज्य के सभी वरीय क्षेत्रीय पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज है और इसे आने वाले समय में बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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