टैक्स शहर वाला और गैस गांव वाला! प्रशासन की दोहरी नीति के खिलाफ मुरौल की जनता का फूटा गुस्सा, डीएम ऑफिस पर आमरण अनशन शुरू

मुजफ्फरपुर: मुजफ्फरपुर के नवगठित नगर निकाय मुरौल में प्रशासन और तेल कंपनियों की ‘दोहरी नीति’ के खिलाफ जन-आक्रोश चरम पर है। वार्ड पार्षद आनंद कंद साह के नेतृत्व में स्थानीय नागरिकों ने 30 अप्रैल 2026 से जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष अपना ऐतिहासिक आमरण अनशन प्रारंभ कर दिया है। जनता का स्पष्ट कहना है कि जब सरकार उनसे होल्डिंग टैक्स और बिजली बिल ‘शहरी दरों’ पर वसूल रही है, तो उन्हें रसोई गैस की सुविधा ‘ग्रामीण मानकों’ (45 दिन) पर क्यों दी जा रही है?

हक की हुंकार: मुजफ्फरपुर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने ‘सत्याग्रह एवं आमरण अनशन’ पर बैठे वार्ड पार्षद आनंद कंद साह और मुरौल की आक्रोशित महिलाएं, जो दोहरी नीति के खिलाफ एकजुट हुई हैं।

डी डी सी को सौंपा गया मांग पत्र

आंदोलन के दौरान वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने जिलाधिकारी की अनुपस्थिति में उप विकास आयुक्त मुजफ्फरपुर से मुलाकात कर उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में बिहार सरकार की गजट अधिसूचना (संख्या 1037) का हवाला देते हुए मांग की गई है कि तेल कंपनियों के पुराने और त्रुटिपूर्ण ‘सॉफ्टवेयर डेटाबेस’ में तत्काल सुधार किया जाए। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि प्रशासन की सुस्ती के कारण नागरिकों के ‘समान अधिकार’ का हनन हो रहा है, और जब तक 25-दिवसीय शहरी रिफिल चक्र को लागू नहीं किया जाता, यह सत्याग्रह और आमरण अनशन जारी रहेगा। इस ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री कार्यालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और मुख्य सचिव, बिहार सरकार को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।

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आंदोलन में शामिल महिलाओं का दर्द तब छलक पड़ा जब उन्होंने रसोई चलाने में हो रही दिक्कतों को साझा किया। 45 दिनों के लंबे रिफिल चक्र के कारण अधिकांश परिवारों के घरों में महीने भर बाद ही सिलेंडर खाली हो जाते हैं।

  • दुखनी देवी का बयान: “लकड़ी पर खाना बनावे में बहुत नोरियाई (दिक्कत) है। गैस मिलबे न करई है। हमरा समय से गैस चाही, केत्ते दिन से बुकिंग भइले है और ना मिलइया।”
  • अंजना देवी का बयान: “हम गैस बुक करते हैं तो 52 दिन या 60 दिन में मिलता है। फैमिली वाले हैं, गैस 25-30 दिन में खत्म हो जाता है। जलावन की व्यवस्था नहीं है जो खरीद सकें, गरीब आदमी हैं।”
  • सविता देवी का बयान: “हम लोग का नगर पंचायत है, फिर भी 45 दिन पर गैस मिलता है। जबकि बाकी शहरी क्षेत्रों में 25 दिन पर मिलता है। घर में बहुत दिक्कत हो रहा है।”

दोहरा शोषण: बिल शहरी, सुविधा ग्रामीण

अनशनकारी वार्ड पार्षद आनंद कंद साह ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि मुरौल को शहरी निकाय घोषित हुए 5 साल हो चुके हैं। अधिसूचना (गजट संख्या 1037) के बावजूद तेल कंपनियों ने अपने डेटाबेस में सुधार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि आम जनता जमीन रजिस्ट्री से लेकर बिजली बिल तक में अतिरिक्त ‘शहरी शुल्क’ दे रही है, लेकिन प्रशासन की उदासीनता के कारण रसोई गैस के लिए अभी भी ग्रामीण कोटे की बेड़ियों में जकड़ी हुई है।  

आमरण अनशन में शामिल प्रमुख नागरिक

इस ‘रसोई की लड़ाई’ में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए हैं, जिनमें मुख्य रूप से: कृष्णा देवी, पिंकी देवी, सविता देवी, मेथुर भगत, विनोद राम, दुखनी देवी, इंदु देवी, संगीत देवी, झलिया देवी, शोभा देवी, फुलझरिया देवी, रीता देवी, ममता देवी, रामपरी देवी, मीना देवी, सीता देवी, रंजना देवी, नगीना देवी, सोनी देवी, और आशा देवी शामिल हैं।

प्रशासनिक कदम: वहीं इस मामले में सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर ने भी अनशन के मद्देनजर अधीक्षक, सदर अस्पताल को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्रांक 1822 दिनांक 30.04.26 के माध्यम से निर्देशित किया है।


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