पटना। राजधानी के एमिटी यूनिवर्सिटी परिसर में शनिवार को ‘बिहार-झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड 2026′ का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रदेश के कृषि मंत्री श्री रामकृपाल यादव ने जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि के भविष्य पर जोर देते हुए कहा कि यदि हमें नई पीढ़ी को मिट्टी से जोड़कर रखना है, तो खेती को तकनीकी रूप से आधुनिक और आर्थिक रूप से आकर्षक बनाना अनिवार्य होगा।

अगले 5 साल बिहार के लिए महत्वपूर्ण: संजय झा
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने विकास का खाका खींचते हुए कहा कि बिहार की प्रगति के लिहाज से आने वाले पांच साल अत्यंत निर्णायक हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे केवल पारंपरिक खेती (गेहूं-धान) पर निर्भर न रहें, बल्कि बाजार की मांग को देखते हुए ‘कैश क्रॉप्स‘ (नगदी फसलों) की ओर रुख करें। इससे किसानों की आय में बड़ा उछाल आएगा।
जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि पर मंथन
कार्यक्रम का मुख्य केंद्र ‘जलवायु परिवर्तन और सतत कृषि’ रहा। विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे बदलती जलवायु परिस्थितियों में खेती को अधिक टिकाऊ और भविष्य के अनुकूल बनाया जा सकता है। संवाद के दौरान आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बल दिया गया।
उत्कृष्ट कार्यों के लिए मिला सम्मान
इस अवसर पर कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाले प्रगतिशील किसानों, बेहतर कार्य करने वाले संस्थानों और कृषि-उद्यमियों (Agri-Preneurs) को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया गया।

संवाद का मुख्य उद्देश्य:
- बदलते मौसम के अनुकूल कृषि पद्धतियों को विकसित करना।
- खेती को अधिक आधुनिक और टिकाऊ (Sustainable) बनाना।
- क्षेत्रीय स्तर पर कृषि नीति निर्माण के लिए एक साझा मंच प्रदान करना।




