मुजफ्फरपुर: सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के जीवन की रक्षा के लिए केंद्र सरकार और जिला प्रशासन मुजफ्फरपुर की ओर से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक पहल की शुरुआत की गई है। अब सड़क हादसे में घायल मरीजों को पैसे के अभाव में इलाज के बिना तड़पना नहीं पड़ेगा और न ही अस्पताल में भर्ती कराने में देरी होगी। ‘पीएम राहत‘ (PM-RAHAT) योजना के तहत सड़क हादसे के पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती होते ही 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज बिल्कुल मुफ्त और तत्काल उपलब्ध कराया जाएगा।

जिला अधिकारी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक
जिला परिवहन कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और मुजफ्फरपुर समाharṇālay (कलेक्ट्रेट) में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान इस योजना के त्वरित और प्रभावी क्रियान्वयन के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। मुजफ्फरपुर के जिला अधिकारी की अध्यक्षता में अधिकारियों एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि दुर्घटना के शिकार लोगों को ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के ठीक बाद का बेहद कीमती पहला घंटा) के भीतर हर हाल में निकटतम अधिकृत अस्पताल पहुंचाकर तुरंत इलाज शुरू कराया जाए।

योजना की मुख्य बातें और सुविधाएं:
- कैशलेस इलाज: पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 1.50 लाख रुपये तक का इलाज निशुल्क मिलेगा।
- त्वरित उपचार: अस्पताल पहुंचते ही बिना पैसों का इंतजार किए तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा।
- अवधि: इलाज की अधिकतम समय सीमा दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक की होगी।
- व्यापक दायरा: यह योजना किसी एक विशेष सड़क तक सीमित नहीं है, बल्कि मोटर वाहन से हुई सभी पात्र सड़क दुर्घटनाओं पर लागू होती है।

हादसा होने पर आम नागरिक तुरंत करें ये काम:
- 112 पर तुरंत दें सूचना: सड़क हादसा होते ही आपातकालीन नंबर 112 पर कॉल करें ताकि निकटतम एम्बुलेंस और पुलिस सहायता तुरंत पहुंचे।
- समय बर्बाद न करें: घायल व्यक्ति को बिना किसी देरी के निकटतम निर्धारित/अधिकृत अस्पताल पहुंचाएं।
- पैसों की चिंता छोड़ें: इलाज शुरू कराने के लिए पहले पैसों की व्यवस्था करने में अपना कीमती समय बर्बाद न करें।
- अस्पताल और पुलिस प्रक्रिया: अस्पताल पहुंचते ही इलाज शुरू होगा, जिसके बाद ऑनलाइन प्रणाली से विवरण दर्ज कर पुलिस द्वारा आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

‘गोल्डन आवर‘ है सबसे कीमती
सड़क दुर्घटना के बाद का शुरुआती समय (गोल्डन आवर) किसी भी घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है। समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से गंभीर रूप से घायल व्यक्ति के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। “पहले जीवन बचाएं, बाद में औपचारिकताएं पूरी करें” के मूल सिद्धांत के तहत जिला प्रशासन एवं जिला परिवहन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे घायलों की मदद करने में तनिक भी न झिझकें।
याद रखें—दुर्घटना के बाद कुछ मिनटों की देरी भी किसी की जान पर भारी पड़ सकती है!



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