पटना | 07 अगस्त 2026 |ज्ञान भवन, पटना में आयोजित संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘समरसता संकल्प अभियान’ का दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक न्याय और बुनियादी ढांचे को लेकर कई ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी घोषणाएं कीं।
संत रविदास का संदेश हर गांव और टोले तक पहुंचेगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास महाराज के विचारों, समरसता, सेवा और मानवता के मार्ग को बिहार के कोने-कोने तक पहुंचाया जाएगा। संत रविदास जी की जन्मभूमि की पवित्र मिट्टी को राज्य के हर जिले, प्रखंड, पंचायत, मठ, मंदिर, धार्मिक स्थल और टोले तक पहुंचाने की विशेष व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संत रविदास जी सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं और करीब 650 वर्ष पूर्व दिया गया उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। गुरु नानक देव जी के पवित्र ग्रंथ में भी संत रविदास जी के विचारों को उच्च स्थान प्राप्त है।

शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव: सावित्रीबाई फुले आवासीय विद्यालय और कई नए विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे अभूतपूर्व सुधारों का खाका पेश किया:
- सावित्रीबाई फुले आवासीय विद्यालय: दलित समाज की बेटियों को उच्च और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए बिहार के सभी 38 जिलों में माता सावित्रीबाई फुले के नाम पर आवासीय छात्रावास सह विद्यालय खोले जा रहे हैं।
- नेताओं और अफसरों के बच्चों को भी पढ़ना होगा सरकारी स्कूल में: मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले 1 से 2 वर्षों में ऐसी ठोस व्यवस्था बनाई जा रही है जिससे मंत्रियों, विधायकों और जिला अधिकारियों (DM) के बच्चे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ें। जब सक्षम परिवारों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में पढ़ेंगे, तभी शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव माना जाएगा।
- रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षक सेवा: सरकारी स्कूलों के बच्चों को NEET और JEE की तैयारी कराने के लिए लाइव कक्षाओं की व्यवस्था की जा रही है। 15 अगस्त से यह व्यवस्था लागू होगी कि गरीब से गरीब परिवार का बच्चा भी रात 11 बजे तक ऑनलाइन शिक्षकों से मार्गदर्शन प्राप्त कर सके।
- शिक्षकों की बंपर बहाली: डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों की बहाली प्रक्रिया जारी है और 9,000 अतिरिक्त पद सृजित किए जा रहे हैं। TRE-4 के तहत लगभग 32,000 शिक्षकों की बहाली की जा रही है।
- नए विश्वविद्यालयों का निर्माण:
- भागलपुर: श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय स्थापित होगा। साथ ही प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय को 220 एकड़ भूमि पर पुनर्स्थापित किया जाएगा।
- बेगूसराय: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर साहित्य विश्वविद्यालय की स्थापना होगी।
- मुजफ्फरपुर: महान स्वतंत्रता सेनानी जुब्बा साहनी के नाम पर आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा।
- संस्कृत और उर्दू शिक्षा: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संस्कृत शिक्षा की उपेक्षा किसी भी कीमत पर नहीं होगी। वहीं, किशनगंज में बड़ी आबादी को ध्यान में रखते हुए उर्दू विद्यालय खोले जाएंगे।

सामाजिक न्याय और आरक्षण की परंपरा
सामाजिक न्याय पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आरक्षण का विरोध होने के समय भी दलितों के आरक्षण का समर्थन किया था। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर को ‘गुदड़ी का लाल’ बताते हुए उन्होंने कहा कि जब अति पिछड़ों और महिलाओं को आरक्षण देने की बात आई, तब पंडित कैलाशपति मिश्र ने उनका पूर्ण समर्थन किया था। इसके अलावा 1979 की मंडल आयोग की रिपोर्ट को विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार ने लागू किया, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी एवं सहयोगी दलों का समर्थन मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिसका लाभ मुस्लिम समुदाय के जरूरतमंदों को भी मिल रहा है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख गणमान्य व्यक्ति
कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित जनप्रतिधियों एवं मंत्रियों की उपस्थिति रही:
- खान एवं भूतत्व मंत्री: प्रमोद कुमार
- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री: लखेन्द्र कुमार रौशन
- डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री: नंदकिशोर राम
- सहकारिता मंत्री: रामकृपाल यादव
- राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री: दिलीप कुमार जायसवाल
- श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण मंत्री: अरुण शंकर प्रसाद
- शिक्षा मंत्री: मिथिलेश तिवारी
- पर्यटन मंत्री: केदार प्रसाद गुप्ता
- उच्च शिक्षा मंत्री: संजय टाइगर
- भाजपा संगठन महामंत्री: भीखूभाई दलसानिया
- विधायक: संजीव चौरसिया
- विधायक: रत्नेश कुमार
- विधान पार्षद: जनक राम
- धार्मिक न्यास परिषद अध्यक्ष: रणवीर नंदन

कार्यक्रम के अंत में संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के जीवन और विचारों पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
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