का० रामदेव वर्मा स्मृति दिवस पर 22 मई को कर्पूरी सभागार में मचेगा सियासी तहलका; बंदना सिंह और सुरेंद्र प्रसाद की अगुआई में घर-घर पहुंचा ‘माले‘ का न्योता
समस्तीपुर/ताजपुर: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आने वाला है। देश में बढ़ते “बुलडोजर राज” और तानाशाही के खिलाफ भाकपा-माले ने समस्तीपुर की धरती से एक निर्णायक जंग का ऐलान कर दिया है। आगामी 22 मई 2026 (शुक्रवार) को सुबह 11:00 बजे शहर के ऐतिहासिक कर्पूरी सभागार में “बुलडोजर राज के खिलाफ लोकतंत्र की आवाज” विषय पर एक महा-सेमिनार का आयोजन होने जा रहा है।

इस सेमिनार को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करने खुद भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव का० दीपंकर भट्टाचार्य समस्तीपुर पहुंच रहे हैं। यह कार्यक्रम लोकप्रिय और कद्दावर कम्युनिस्ट नेता स्वर्गीय का० रामदेव वर्मा के चौथे स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।
शहर से लेकर गांवों तक सघन जनसंपर्क, थामे पोस्टर:
इस महा-आयोजन को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने के लिए भाकपा-माले ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मंगलवार और बुधवार को समस्तीपुर के मोहनपुर रोड से लेकर ताजपुर बाजार क्षेत्र के विभिन्न मोहल्लों और दुकानों में सघन जनसंपर्क अभियान चलाया गया।
- नेताओं की अपील: माले नेत्री बंदना सिंह और वरिष्ठ नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जनता को जागरूक करते हुए कहा, “आज देश में लोकतंत्र और आम जनता के अधिकारों पर चौतरफा हमले हो रहे हैं। गरीबों के आशियानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है। महंगाई और बेरोजगारी से जनता त्रस्त है। इस दमनकारी शासन को रोकने के लिए व्यापक जन-एकजुटता की जरूरत है।”
इस जनसंपर्क अभियान के दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में सेमिनार के पोस्टर थे और स्थानीय जनता व दुकानदारों के बीच इसे लेकर भारी उत्साह देखा गया। अभियान में रेल विकास मंच के मनोज कुमार सिंह, दीनबंधु प्रसाद, आसिफ होदा, मो० एजाज, प्रभात रंजन गुप्ता, लखींद्र पासवान सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मुस्तैदी से डटे रहे।
ताजपुर में लाल झंडे का महासंग्राम: सड़क पर उतरे मजदूर, मोदी सरकार के ‘4 लेबर कोड’ के खिलाफ आर-पार की जंग!
मजदूरों की हुंकार से हिला समस्तीपुर; ₹700 दिहाड़ी और 200 दिन काम की मांग को लेकर चक्का जाम, जेल में बंद साथियों को रिहा करने की चेतावनी

समस्तीपुर/ताजपुर: केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ समस्तीपुर जिला अंतर्गत ताजपुर का जनता मैदान बुधवार को लाल झंडे से पट गया और मजदूरों की गगनभेदी हुंकार से पूरा इलाका दहल उठा। अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के बैनर तले आयोजित इस देशव्यापी ‘मजदूर हड़ताल’ ने व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।
मजदूरों ने शहर के मुख्य मार्गों पर एक विशाल आक्रोश जुलूस निकाला और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए मुख्य मार्ग को पूरी तरह सांकेतिक रूप से जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि कॉर्पोरेट हितैषी नीतियों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मजदूरों की प्रमुख मांगें जिनपर अड़े आंदोलनकारी:
- ‘काला‘ श्रम कानून वापस लो: मजदूरों की गुलामी का दस्तावेज बन चुके 4 नए श्रमकोड (लेबर कोड) और जीरामजी को तुरंत रद्द किया जाए।
- ₹700 दिहाड़ी और 200 दिन काम: मनरेगा के तहत काम के दिनों को बढ़ाकर 200 दिन किया जाए और न्यूनतम मजदूरी ₹700 दैनिक तय हो।
- दमनकारी मुकदमे वापस लो: देश भर में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे मजदूरों पर दर्ज झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं और जेल में बंद मजदूर नेताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए।
- सुरक्षा और अधिकार: सभी असंगठित मजदूरों का सरकारी रजिस्ट्रेशन सुनिश्चित कर उन्हें लेबर कार्ड और सामाजिक सुरक्षा दी जाए।
इस हड़ताल ने साबित कर दिया है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन गरीब-मजदूरों की सुध नहीं ली, तो यह आक्रोश आने वाले दिनों में एक बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप अख्तियार कर लेगा।
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