ताजपुर (समस्तीपुर) | 27 जनवरी 2026 ताजपुर नगर परिषद में विकास कार्यों की अनदेखी और प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ मंगलवार को पांच वार्ड पार्षदों ने मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। पार्षदों का आरोप है कि नगर प्रशासन नियमों को ताक पर रखकर काम कर रहा है, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
अनशन पर बैठे पार्षद मुकेश कुमार मेहता, रवि कुमार, जावेद अकरम, अजहर मिकरानी और दुर्गा प्रसाद साह
प्रमुख आरोप: विश्राम कक्ष पर लाखों खर्च, गरीबों का भुगतान ठप
अनशन पर बैठे पार्षद मुकेश कुमार मेहता, रवि कुमार, जावेद अकरम, अजहर मिकरानी और दुर्गा प्रसाद साह ने कार्यपालक पदाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षदों का कहना है कि:
पिछले 6 महीनों से क्षेत्र में एक भी नई विकास योजना शुरू नहीं की गई है।
आवास योजना के लाभुकों का भुगतान जानबूझकर रोका गया है।
आवास लाभुकों से जबरन 1,000 रुपये के स्टाम्प पर एफिडेविट (शपथ पत्र) मांगा जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है।
जनता के पैसों का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर 25 लाख रुपये की लागत से कार्यपालक पदाधिकारी का ‘विश्राम कक्ष’ बनाया जा रहा है।
राजनीतिक समर्थन और जनसभा
अनशन स्थल पर वार्ड पार्षद राजीव सूर्यवंशी की अध्यक्षता और अहमद रज़ा उर्फ मिन्टू बाबू के संचालन में एक सभा आयोजित की गई। इस दौरान अशोक कुमार, संतोष कुमार, दिनेश कुमार साह समेत दर्जनों पार्षदों और स्थानीय नेताओं ने संबोधित किया।
अनशन कार्यक्रम को स्रबोधित करते भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह
भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अपनी टीम के साथ अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को अपना सक्रिय समर्थन दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही मांगें पूरी नहीं हुईं, तो भाकपा माले वार्ड पार्षदों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगी।
अधिकारी की अनुपस्थिति पर नाराजगी
आंदोलनकारियों ने इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया कि जब इतना बड़ा प्रदर्शन चल रहा है, तब कार्यपालक पदाधिकारी जुल्फेकार अली प्यामी कार्यालय से नदारद रहे। मौके पर मजिस्ट्रेट और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है, लेकिन प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी के वार्ता के लिए न आने से पार्षदों में आक्रोश है।
“जब तक आवास योजना के लाभुकों का भुगतान नहीं होता और भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लगती, हमारा अनशन जारी रहेगा।” — अनशनकारी पार्षद
मुजफ्फरपुर, सकरा। उत्तर बिहार के प्रमुख जिलों में शुमार मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड अंतर्गत प्रगति मोड़ स्थित वेव वर्ल्ड स्कूल (मझौलिया) में 77वें गणतंत्र दिवस का उत्सव केवल एक औपचारिक समारोह नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और शैक्षणिक क्रांति के संकल्प का गवाह बना। 26 जनवरी 2026 की सुबह जब पूरा देश तिरंगे के सम्मान में नतमस्तक था, तब वेव वर्ल्ड स्कूल के प्रांगण में देशभक्ति का एक अनूठा जज्बा देखने को मिला। यहाँ शिक्षकों ने अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता को राष्ट्र सेवा से जोड़ते हुए न सिर्फ तिरंगा फहराया, बल्कि समाज को शिक्षित करने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान का बिगुल भी फूँका।
वेव वर्ल्ड स्कूल (मझौलिया) में 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का दृश्य
गणतंत्र की गरिमा और शिक्षकों का संकल्प
समारोह की शुरुआत सुबह विद्यालय के निदेशक राजीव गुप्ता और प्राचार्या दिव्या कुमारी द्वारा संयुक्त रूप से ध्वजारोहण के साथ हुई। राष्ट्रगान की गूँज और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच पूरा परिसर तिरंगामय हो गया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए एक अनुकरणीय पहल की।
आठ शिक्षकों ने एक साथ मिलकर मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाई। यह श्रृंखला इस बात का प्रतीक थी कि समाज के निर्माण में शिक्षक एक सुदृढ़ कड़ी की तरह कार्य करते हैं। इस दौरान शिक्षकों ने सत्र 2026-2027 के लिए नामांकन जागरूकता संबंधी पोस्टर भी जारी किया। पोस्टर पर “वेलकम वेव वर्ल्ड स्कूल: एडमिशन सेशन ओपन” के माध्यम से अभिभावकों को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि बेहतर भविष्य के लिए बच्चों का सही उम्र में सही स्कूल से जुड़ना अनिवार्य है। शिक्षकों का मानना था कि एक शिक्षित बच्चा ही सशक्त गणतंत्र की नींव रख सकता है।
एकजुटता का संदेश: सकरा के वेव वर्ल्ड स्कूल में गणतंत्र दिवस पर मानव श्रृंखला बनाकर शिक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते स्कूल के शिक्षक और शिक्षिकाएं। साथ ही नए सत्र के नामांकन हेतु जारी किया गया जागरूकता पोस्टर (उपर एवं नीचे के दृश्यों में।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में झलकी भारत की विविधता
गणतंत्र दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ देकर अतिथियों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ निहारिका द्वारा प्रस्तुत ‘श्री गणेश वंदना‘ से हुआ, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
इसके बाद मंच पर सुरों और ताल का ऐसा संगम हुआ कि हर कोई तालियाँ बजाने पर मजबूर हो गया:
बेटियों का सम्मान: सरस्वती और संजना ने ‘भारत की बेटी‘ गीत पर अपनी प्रस्तुति देकर समाज में नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित किया।
बचपन और उमंग: श्रेया मेहता और सान्वी ने ‘दिल है छोटा सा‘ गाने पर नृत्य कर बचपन की मासूमियत बिखेरी।
देशभक्ति का जोश: राष्ट्रभक्ति के गीतों की कड़ी में राजनन्दनी और पिहुरानी ने ‘तिरंगा ऊँचा रहेगा‘ गाकर सबका सीना फख्र से चौड़ा कर दिया। वहीं, सोनम ने ‘संदेशे आते हैं‘ के माध्यम से सीमाओं पर तैनात जवानों की याद दिला दी।
सामाजिक चेतना: समाज में व्याप्त कुरीतियों पर प्रहार करते हुए अनु ने ‘जीना है तो पापा शराब मत पीना‘ जैसे संवेदनशील गीत के जरिए शराबबंदी और नशामुक्त समाज का संदेश दिया।
संस्कृति और लोक:राधा कुमारी ने ‘जिस देश में गंगा बहती है‘ और रियांसी कुमारी ने ‘लंदन देखा पेरिस देखा‘ के जरिए भारतीय संस्कृति की महानता को दर्शाया।
महापुरुषों को नमन: सोनम ने ‘हम भीम राव के बच्चे‘ गीत के जरिए संविधान निर्माता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
सिमा, श्रृष्टी, स्वाती, अनु, और अनामिका की टीम ने ‘लल्ला लल्ला लोरी‘ पर मनमोहक प्रस्तुति दी, जबकि निशात, कृतिक, शिवाशु और अंशु ने भी अपनी कला का प्रदर्शन कर खूब वाहवाही लूटी।
कला के रंग, देश के संग: तिरंगे की आन-बान और शान में अपनी प्रस्तुति देते नन्हे कलाकार।
निदेशक का संबोधन: “इतिहास से सीखें युवा पीढ़ी”
समारोह को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक राजीव गुप्ता ने बच्चों को स्वतंत्रता संग्राम के अनसुने पन्नों से रूबरू कराया। उन्होंने वीर क्रांतिकारियों और अमर शहीदों की कहानियाँ सुनाते हुए कहा कि आज हम जिस आजाद हवा में सांस ले रहे हैं, उसके पीछे लाखों कुर्बानियाँ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनुशासन और शिक्षा ही वह अस्त्र हैं, जिनसे हम अपने देश को विश्व गुरु बना सकते हैं।
प्राचार्या दिव्या कुमारी ने अपने संबोधन में शिक्षकों के समर्पण की सराहना की और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बच्चों और अभिभावकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि वेव वर्ल्ड स्कूल केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा देने के लिए कृतसंकल्पित है।
मंच संचालन और व्यवस्था
पूरे कार्यक्रम का सफल और ऊर्जावान मंच संचालन आदित्य कुमार और सन्नी कुमार ने किया। उनकी शायरी और उत्साहवर्धक टिप्पणियों ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। इस अवसर पर शिक्षिका अदिबा सुल्ताना, रौशन खतून, अर्चना कुमारी, प्रियंका कुमारी और नेहा कुमारी ने कार्यक्रम के प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई।
समारोह के अंत में सभी बच्चों के बीच मिठाई का वितरण किया गया। गणतंत्र दिवस का यह उत्सव सकरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा, विशेषकर शिक्षकों द्वारा बनाई गई मानव श्रृंखला ने शिक्षा के प्रति एक नई चेतना जागृत करने का कार्य किया है।
मुजफ्फरपुर। 26 जनवरी 2026 देशभक्ति का जज्बा, तिरंगे की आन, और भविष्य की सुनहरी यादों का संगम—मुजफ्फरपुर स्थित संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के प्रांगण में आज कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। अवसर था 77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली उत्सव का, जिसे विद्यालय परिवार ने पूरी श्रद्धा, निष्ठा और हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस राष्ट्रीय पर्व के साथ-साथ विद्यालय ने अपने बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए एक भावुक विदाई समारोह का भी आयोजन किया, जिसने इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया।
संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के गणतंत्र दिवस समारोह में कार्यक्रम प्रस्तुत करती छात्रा
शान से लहराया तिरंगा
समारोह का विधिवत शुभारंभ प्रातः काल विद्यालय के सचिव डॉ. अरविन्द कुमार द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। जैसे ही तिरंगा आसमान की ऊंचाइयों को छूने लगा, पूरा परिसर ‘जन-गण-मन’ के स्वरों से गुंजायमान हो उठा। इस गौरवशाली क्षण के साक्षी बने विद्यालय के अध्यक्ष प्रवीण कुमार, निदेशक लालबाबू प्रसाद, प्राचार्य दीपक मिश्र, समस्त शिक्षकगण और तिरंगे के सम्मान में कतारबद्ध खड़े विद्यार्थी एवं अभिभावकगण ।
संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के गणतंत्र दिवस समारोह में कार्यक्रम प्रस्तुत करती छात्रा
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखी प्रतिभा की झलक
गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह के दूसरे चरण में छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। संगीत, नृत्य और ओजस्वी भाषणों ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए।
सुरों का संगम: संगीत प्रतियोगिता में कक्षा-8 की जोया ने अपनी मधुर आवाज से प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि नन्ही कनक (कक्षा-1) ने द्वितीय स्थान हासिल कर सबका दिल जीत लिया।
नृत्य की छटा: रिकॉर्डिंग डांस में वर्षा (कक्षा-8) ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से प्रथम स्थान पाया।
वाणी का ओज: अंग्रेजी भाषण में नमीत (10B) और हिंदी भाषण में नन्ही आरुषि (1B) ने अपनी वाकपटुता का लोहा मनवाया। वहीं उर्दू में जोया और संस्कृत में आदित्य ने प्रथम स्थान प्राप्त कर यह दिखाया कि संस्थान सभी भाषाओं और संस्कारों का सम्मान करता है।
भावुक विदाई: “जीवन उत्सव है, तो विछोह महोत्सव”
कार्यक्रम का सबसे मर्मस्पर्शी हिस्सा वह रहा जब सत्र 2025-26 के बोर्ड (अपीयरिंग) छात्र-छात्राओं को विदाई दी गई। इस अवसर पर अध्यक्ष प्रवीण कुमार का संबोधन किसी दर्शन से कम नहीं था। उन्होंने छात्रों की आँखों में नमी देखते हुए बड़े ही दार्शनिक अंदाज में कहा— “जीवन उत्सव है, तो विछोह महोत्सव है।”
उन्होंने समझाया कि जुदाई को दुख के रूप में नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत के उत्सव के रूप में मनाना चाहिए। उन्होंने कहा, “दुख को हंसकर जीना ही मनुष्य की सबसे बड़ी जीत है। आज आप यहाँ से विदा नहीं हो रहे, बल्कि समाज के बड़े फलक पर अपनी पहचान बनाने के लिए प्रस्थान कर रहे हैं।”
17 वर्षों का गौरवशाली इतिहास और संकल्प
अध्यक्ष प्रवीण कुमार ने संस्थान के 17 वर्षों (2008 से अब तक) के सफर को याद करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि “हमारा सिद्धांत अटल है—संस्थान की फीस सबसे कम होगी और व्यवस्थाएं सबसे बेहतर होंगी।” उन्होंने अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि उनके सुझाव ही विद्यालय की योजनाओं की नींव बनते हैं।
छात्र-छात्राओं को विदाई कार्यक्रम में भेंट प्रदान करते निदेशक लालबाबू प्रसाद एवं सचिव डॉ. अरविन्द कुमार(बायें से )
सफलता की वैश्विक गाथा: मुजफ्फरपुर से बर्लिन तक
संस्थान की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए अध्यक्ष ने बताया कि आज संत जोसेफ के पढ़ाए बच्चे न केवल भारत, बल्कि दुनिया के नक्शे पर चमक रहे हैं।
वैश्विक उपलब्धि: विद्यालय का एक छात्र तुलसी (मोहनपुर) आज जर्मनी के बर्लिन में कंप्यूटर इंजीनियर है, तो वहीं एक छात्र USA में अमेजन जैसी बड़ी कंपनी में कार्यरत है।
सरकारी सेवा: सुमन (सकरा हाई स्कूल) जैसे सैकड़ों छात्र आज सरकारी शिक्षक के रूप में समाज सेवा कर रहे हैं।
शून्य विफलता दर: संस्थान का यह रिकॉर्ड रहा है कि आज तक यहाँ का एक भी छात्र असफल नहीं हुआ है। सभी छात्रों ने प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण की है। 10 CGPA और 95% अंक लाना यहाँ की परंपरा बन चुकी है।
चुनौतियों को बनाया अवसर
अध्यक्ष ने 2009 के उस दौर को याद किया जब लोगों ने चुनौती दी थी कि हिंदी माध्यम के बच्चे सीबीएसई बोर्ड कैसे पास करेंगे। उन्होंने गर्व से बताया कि टीम ‘संत जोसेफ’ के कठिन परिश्रम से उन बच्चों ने न केवल परीक्षा पास की, बल्कि 60% से अधिक अंक लाए। उन्हीं में से एक छात्र इंजीनियर अजय कुमार आज इसी विद्यालय में विज्ञान और गणित के शिक्षक के रूप में नई पीढ़ी को तैयार कर रहे हैं।
चार स्तंभ: शिक्षा, संस्कार और विकास
प्रवीण कुमार ने विद्यालय के चार मुख्य संकल्पों को दोहराया:
सर्व सुलभ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए भी संभव हो।
सर्वांगीण विकास: पढ़ाई के साथ-साथ खेल और कला में निपुणता।
शैक्षणिक उत्कृष्टता: गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं।
नैतिक मूल्य: ‘विद्यार्थी’ वही है जो शिक्षा और संस्कार से लबरेज हो।
गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के छात्रगण
समर्पण की जीवंत मिसाल
अपने व्यक्तिगत जीवन पर चर्चा करते हुए 58 वर्षीय प्रवीण कुमार ने कहा कि जब वे अपने छात्रों की सफलता की कहानियां सुनते हैं, तो उनकी शुगर, प्रेशर और शरीर का दर्द गायब हो जाता है। उनकी बुलंद आवाज और अटूट संकल्प इस बात का प्रमाण था कि वे आने वाले कई दशकों तक बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए तैयार हैं।
समारोह का समापन सामूहिक राष्ट्रगान के साथ हुआ। विदाई के भावुक क्षणों के बीच छात्रों ने संकल्प लिया कि वे जहाँ भी जाएंगे, संत जोसेफ पब्लिक स्कूल के संस्कारों की महक फैलाएंगे।
कभी समाज ने सुनाई थी लानतें, अब सलाम करेगा बिहार; महादलित समुदाय की 6 बेटियां बनीं राज्य की पहली महिला बस ड्राइवर।
पटना | 25 जनवरी, 2026 बिहार के सामाजिक इतिहास में 26 जनवरी 2026 की तारीख स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रही है। पटना का गांधी मैदान इस दिन न केवल गणतंत्र का उत्सव मनाएगा, बल्कि उस ‘इतिहास’ का गवाह भी बनेगा जिसे समाज के सबसे निचले पायदान से आने वाली छह जांबाज बेटियों ने अपने संघर्ष से गढ़ा है। आरती, रागिनी, अनीता, सावित्री, गायत्री और बेबी—मुसहर समुदाय की ये छह युवतियां बिहार की पहली महिला बस ड्राइवर के रूप में पिंक बस की कमान संभालकर परेड में अपना हुनर दिखाएंगी।
तस्वीर में एक साथ खड़ी 6 बेटियां , जो राज्य की पहली महिला बस ड्राइवर बन चुकी है
रूढ़ियों का गियर बदला, तानों को पीछे छोड़ा
इन लड़कियों का बस की स्टियरिंग तक पहुंचने का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। अत्यंत निर्धन परिवारों से आने वाली इन बेटियों को सबसे पहले अपने ही समाज और आसपास के लोगों के तीखे कटाक्षों का सामना करना पड़ा।
पटना के पुनपुन की रहने वाली अनीता के लिए राहें तब और कठिन हो गईं जब उनके ससुराल तक ताने पहुंचने लगे। अनीता बताती हैं, “लोग कहते थे कि बहू को इधर-उधर भेज देते हो, पता नहीं क्या करेगी। पुरुष मजाक उड़ाते थे कि हम बस नहीं संभाल पाते, यह लड़की 50 सवारी कैसे ढोएगी?” कुछ ऐसा ही दर्द रागिनी का भी था, जिन्हें शादी की उम्र और ‘भाग जाने’ जैसे ओछे तानों से डराया गया। बेबी को उनकी कम हाइट के लिए कमतर आंका गया, लेकिन आज उन्हीं के हाथ एक्सीलेटर पर हैं और हौसला आसमान पर।
जब सरकार को हार माननी पड़ी, तब इन बेटियों ने संभाली कमान
दिलचस्प बात यह है कि पिछले साल जब ‘पिंक बस’ सेवा शुरू हुई, तो सरकार का संकल्प था कि इसमें सारा स्टाफ महिलाएं होंगी। कंडक्टर तो मिल गईं, लेकिन पूरे बिहार में बस चलाने के लिए एक भी महिला ड्राइवर नहीं मिली। मजबूरन पुरुष ड्राइवरों को रखा गया।
इस खाली जगह को भरने का बीड़ा उठाया पद्मश्री सुधा वर्गीज की संस्था ‘नारी गुंजन’ ने। उन्होंने महिला विकास निगम के साथ मिलकर इन लड़कियों को औरंगाबाद के IDTR संस्थान में प्रशिक्षण दिलाया। आज ये लड़कियां न केवल बस चला रही हैं, बल्कि परिवहन विभाग के लिए एक मिसाल बन गई हैं।
भविष्य की ‘सारथी‘: सम्मान और रोजगार
परिवहन विभाग अब इन बेटियों के आत्मविश्वास को देखकर गदगद है। विभाग की नोडल अधिकारी ममता कुमारी की देखरेख में ये लड़कियां नियमित अभ्यास कर रही हैं।
वेतन और सुरक्षा: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद इन्हें 21 हजार रुपये प्रतिमाह का वेतन मिलेगा।
विस्तार: परिवहन मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार, बिहार को फिलहाल 250 महिला ड्राइवरों की जरूरत है और सरकार अब इच्छुक महिलाओं को निशुल्क प्रशिक्षण देगी।
तस्वीर में बस की स्टियरिंग संभालती गायत्री
क्यों यह एक इतिहास है?
यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक ‘क्रांति’ है। मुसहर समुदाय, जिसे ‘महादलित’ श्रेणी में सबसे पिछड़ा माना जाता रहा है, वहां की बेटियों का बस चलाना लैंगिक और जातीय बेड़ियों को तोड़ने जैसा है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि अवसर मिले, तो ‘आधी आबादी’ का यह हिस्सा न केवल अपना घर, बल्कि पूरे राज्य की परिवहन व्यवस्था का चक्का घुमा सकता है।
जब 26 जनवरी को ये बेटियां गांधी मैदान की धूल उड़ाते हुए पिंक बस लेकर निकलेंगी, तो वह केवल एक परेड नहीं होगी, बल्कि उन तमाम रूढ़ियों की विदाई होगी जिन्होंने सदियों से इन लड़कियों को पीछे रोक रखा था।
समस्तीपुर | 25 जनवरी 2026 नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 34 और 40 के आधा दर्जन मुहल्लों में विकास कार्य आम लोगों के लिए मुसीबत बन गया है। नाला और सड़क निर्माण के नाम पर जेसीबी से गड्ढे खोदकर ठेकेदार पिछले 6 महीनों से गायब है, जिससे स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल हो गया है।
नाला निर्माण के नाम पर खोदे गये गड्ढे का दृश्य
जांच टीम ने लिया जायजा, भ्रष्टाचार का आरोप
स्थानीय लोगों की लगातार शिकायतों के बाद रविवार को भाकपा माले की एक जांच टीम निर्माण स्थल पर पहुंची। जिला स्थाई समिति सदस्य सुरेंद्र प्रसाद सिंह के नेतृत्व में दीनबंधु प्रसाद और जीतेंद्र कुमार ने वार्ड संख्या 40 के गली नंबर 3B, नक्कू स्थान और वार्ड संख्या 34 के शांति विहार व सरोजिनी गली का दौरा किया। टीम ने पाया कि खुदाई के कारण सड़कों की स्थिति जर्जर है और लोग आए दिन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
नाला निर्माण के नाम पर खोदे गये गड्ढे का दृश्य दो
न बोर्ड, न जानकारी: अंधेरे में जनता
जांच टीम ने निर्माण कार्य में पारदर्शिता के अभाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि:
किसी भी निर्माण स्थल पर प्राक्कलन (Estimate) बोर्ड नहीं लगाया गया है।
जनता को यह तक नहीं पता कि सड़क और नाला RCC बनेगा या PCC।
कार्य शुरू होने, समाप्ति की तिथि और बजट की कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
निर्माण सामग्री (ईंट, बालू, सीमेंट) की गुणवत्ता बेहद घटिया है।
“नगर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि कमीशनखोरी में व्यस्त हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद जेई और आयुक्त इस गंभीर समस्या पर मौन साधे हुए हैं।” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नेता, भाकपा माले
नाला निर्माण के नाम पर खोदे गये सड़क का दृश्य
15 दिनों का अल्टीमेटम
भाकपा माले ने नगर निगम प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर रुका हुआ निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर पूरा नहीं किया गया, तो पार्टी स्थानीय मुहल्लेवासियों के साथ मिलकर नगर निगम का घेराव करेगी और उग्र आंदोलन व सड़क जाम को बाध्य होगी।
मुजफ्फरपुर | 25 जनवरी, 2026 राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर रविवार को मुजफ्फरपुर में ‘मेरा युवा भारत’ (MY Bharat) और युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के संयुक्त तत्वावधान में भव्य जिला स्तरीय पदयात्रा का आयोजन किया गया। “माय भारत-माय वोट” अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम ने शहर को लोकतांत्रिक जागरूकता के रंग में सराबोर कर दिया।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मुजफ्फरपुर में पदयात्रा का दृश्य
विधायक ने हरी झंडी दिखाकर किया रवाना
पदयात्रा का शुभारंभ जिला समाहरणालय परिसर से हुआ, जिसे स्थानीय विधायक श्री रंजन कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह यात्रा कंपनी बाग रोड, सदर अस्पताल रोड, स्टेशन रोड, इमली चट्टी और रेड क्रॉस सोसाइटी रोड जैसे प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस समाहरणालय पहुंची। रास्ते भर युवाओं ने नारों और तख्तियों के माध्यम से ‘जिम्मेदार नागरिकता’ और ‘सशक्त लोकतंत्र’ का संदेश प्रसारित किया।
पहली बार वोट देने वालों का सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘फर्स्ट टाइम वोटर्स’ (पहली बार मतदान करने वाले युवा) रहे। विधायक श्री रंजन कुमार और उप-निर्वाचन पदाधिकारी श्री सत्य प्रिय ने संयुक्त रूप से इन नए मतदाताओं को विशेष रूप से सम्मानित किया। इसके पश्चात विधायक ने उपस्थित सभी युवाओं और नागरिकों को निष्पक्ष और नैतिक मतदान की शपथ दिलाई।
राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मुजफ्फरपुर में पदयात्रा का दृश्य
“Nation First की भावना के साथ प्रत्येक युवा मतदाता को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभानी चाहिए। युवा वर्ग जागरूक होकर मतदान करेगा, तभी मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है।” — रंजन कुमार, विधायक (मुजफ्फरपुर)
युवा शक्ति का दिखा संगम
इस पदयात्रा में ‘माय भारत’ वॉलंटियर्स, युवा क्लबों के सदस्य, NCC कैडेट्स, NSS स्वयंसेवक और विभिन्न स्कूलों-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने भारी उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना और युवाओं को चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करना था।
समस्तीपुर। बिहार में बाल विवाह के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियानों और सख्त कानूनों के दावों की जमीनी हकीकत भयावह है। समस्तीपुर समेत पूरे बिहार में 13 से 17 वर्ष की मासूम बेटियां आज भी बाल विवाह के दंश का शिकार हो रही हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि जिस उम्र में इन किशोरियों को स्कूल में शिक्षा लेनी चाहिए, उस उम्र में वे मातृत्व का बोझ उठाने को मजबूर हैं।
अस्पताल में इलाज हेतु किशोरी की प्रतीकात्मक तस्वीर
आंकड़ों ने खोली पोल: अस्पताल पहुंच रही हैं गर्भवती किशोरियां
सरकारी तंत्र की विफलता का सबसे बड़ा सबूत स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े दे रहे हैं। एसकेएमसीएच (SKMCH) के साल 2025 के पंजीकरण आंकड़ों पर नजर डालें तो रूह कांप जाती है। जिले में हर माह औसतन 100 से ज्यादा किशोरियां गर्भवती हो रही हैं।
महीने दर महीने बढ़ता आंकड़ा:
जुलाई 2025: सबसे अधिक 357 नाबालिग गर्भवती दर्ज की गईं।
अगस्त 2025:309 किशोरियों का पंजीकरण हुआ।
मई से दिसंबर तक: कुल आंकड़ों के अनुसार, हजारों जिंदगियां पढ़ाई छोड़ अस्पतालों के चक्कर काट रही हैं।
अधिकांश मामले उन लड़कियों के हैं जो 8वीं से 12वीं कक्षा की छात्राएं हैं। यह स्थिति न केवल कानून-व्यवस्था की विफलता है, बल्कि बाल विकास परियोजना और पंचायत स्तर की निगरानी समितियों की कार्यशैली पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है।
निगरानी समितियां फेल, जनप्रतिनिधि मौन
दावा किया जाता है कि बाल विवाह रोकने के लिए पंचायत और प्रखंड स्तर पर निगरानी टीमें गठित हैं, लेकिन हकीकत में ये टीमें कागजों तक सिमट कर रह गई हैं। अधिकांश बाल विवाह स्थानीय जनप्रतिनिधियों की देख-रेख में हो रहे हैं। कहीं चोरी-छिपे शादी की जा रही है, तो कहीं आधार कार्ड में उम्र बढ़ाकर कानून की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। गरीबी, दहेज और पिछड़ी सोच के कारण अभिभावक अपनी बेटियों के भविष्य की बलि दे रहे हैं।
दो पीढ़ियों की जान को खतरा
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र के सचिव सुरेंद्र कुमार ने बताया कि “हाई रिस्क प्रेग्नेंसी” के कारण जच्चा और बच्चा दोनों की जान पर बन आती है। किशोरियों का शारीरिक विकास अधूरा होने के कारण वे एनीमिया और कुपोषण का शिकार हो जाती हैं, जिससे प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
इन नंबरों पर करें शिकायत, बचाएं बचपन
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत सक्रिय संस्था ‘जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र’ और ‘क्राई’ जैसी संस्थाएं लगातार संघर्ष कर रही हैं। प्रशासन ने अपील की है कि बाल विवाह की सूचना तुरंत इन नंबरों पर दें:
चाइल्ड हेल्पलाइन: 1098
पुलिस सहायता: 112
बचपन बचाओ आन्दोलन: 18001027222
सरकारी योजनाओं का लाभ तब तक नहीं दिखेगा जब तक जमीनी स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होगी। प्रशासन को केवल जागरूकता के नाम पर खानापूर्ति करने के बजाय उन पर नकेल कसनी होगी जो बच्चियों के बचपन की बलि चढ़ा रहे हैं।
सकरा/सुजावलपुर: क्षेत्र के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर स्थापित माँ शारदे की प्रतिमाओं का विसर्जन शनिवार को श्रद्धा और भावुकता के साथ संपन्न हुआ। ‘अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष और नम आँखों के साथ छात्र-छात्राओं ने अपनी आराध्या को विदाई दी।
ए.पी.जे. पब्लिक स्कूल के विसर्जन का दृश्य
ए.पी.जे. पब्लिक स्कूल: गुरु-शिष्यों ने भारी मन से दी विदाई
ए.पी.जे. पब्लिक स्कूल में विसर्जन का दृश्य अत्यंत भावुक रहा। यहाँ प्राचार्य संतोष झा और निदेशक नीतेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में पूजन संपन्न हुआ। विसर्जन के समय शिक्षकों और छात्रों की आँखें भर आईं। इस मौके पर रोकरपाल सुनील कुमार, शिक्षक राजीव कुमार, आशीष झा और रवि वर्मा ने सहभागिता की। वहीं विदाई समारोह में छात्र आयुष, संजय, अनमोल, आदर्श और हिमांशु ने माँ के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया।
संत जोसेफ प्रे/पब्लिक स्कूल: भव्य आयोजन के बीच विसर्जन
सबहा स्थित संत जोसेफ प्रे/पब्लिक स्कूल में आयोजित भव्य पूजनोत्सव का समापन विसर्जन के साथ हुआ। विद्यालय के चेयरमैन प्रवीण कुमार, सचिव डॉ. अरविन्द कुमार, निदेशक सह कोषाध्यक्ष लालबाबू प्रसाद एवं प्राचार्य दीपक कुमार मिश्र ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना की। मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच माँ सरस्वती की प्रतिमा को विसर्जित किया गया। इस दौरान पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा।
संत जोसेफ प्रेप पब्लिक स्कूल द्वारा भव्य आयोजन के बीच विसर्जन
वेव वर्ल्ड पब्लिक स्कूल: बच्चों ने लिया ज्ञान का संकल्प
प्रगति मोड़ (सकरा) स्थित वेव वर्ल्ड पब्लिक स्कूल, मझौलिया में बच्चों द्वारा स्थापित आकर्षक प्रतिमा का विसर्जन पूरी रीति-रिवाजों के साथ किया गया। नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अश्रुपूर्ण नेत्रों के साथ विद्या की देवी को विदा किया। शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि विसर्जन केवल प्रतिमा का होता है, माता का आशीर्वाद और ज्ञान हमेशा उनके साथ रहेगा।
संत जोसेफ प्रेप पब्लिक स्कूल द्वारा भव्य आयोजन के बीच विसर्जन
एक्सपर्ट कॉम्पिटेटिव क्लास: भविष्य की सफलता हेतु माँ से माँगा आशीर्वाद
सुजावलपुर रोड स्थित एक्सपर्ट कॉम्पिटेटिव क्लास में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छात्रों ने सफलता की कामना के साथ माँ सरस्वती की विशेष आराधना की। विसर्जन यात्रा के दौरान छात्र भावुक दिखे और सफलता के संकल्प के साथ नम आँखों से प्रतिमा का विसर्जन किया। यहाँ छात्रों ने माता से अपनी मेहनत को सार्थक करने का वरदान माँगा।
राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर शनिवार को समस्तीपुर जिला समाहरणालय परिसर में बेटियों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत जिला प्रशासन और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं ने एकजुट होकर समाज से इस कुरीति को मिटाने का संकल्प लिया।
बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाते उप-समाहर्ता ब्रजेश कुमार
उप-समाहर्ता ने हरी झंडी दिखाकर किया रथ रवाना
जवाहर ज्योति बाल विकास केन्द्र, एक्सेस टू जस्टिस और क्राई (चाइल्ड राइट्स एंड यू) के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ रहा। उप-समाहर्ता ब्रजेश कुमार ने हरी झंडी दिखाकर इस रथ को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना किया। यह रथ आगामी 100 दिनों तक जिले के सुदूर गांवों में भ्रमण करेगा और लोगों को बाल विवाह के कानूनी व स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेगा। इस मौके पर उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों और नागरिकों को बाल विवाह रोकने की शपथ भी दिलाई।
प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की एकजुटता
कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति पदाधिकारी जूही कुमारी, महिला एवं बाल विकास निगम के राजेश कुमार, डॉली कुमारी, दीपशिखा कुमारी और चाइल्ड हेल्पलाइन के शंकर मल्लिक सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि बाल विवाह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह बेटियों के सुनहरे भविष्य की राह में सबसे बड़ी बाधा है।
जमीनी स्तर पर जागरूकता: सरायरंजन में नुक्कड़ नाटक और संवाद
संस्था के संस्थापक सचिव सुरेंद्र कुमार ने बताया कि केवल शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी सघन अभियान चलाया जा रहा है। सरायरंजन प्रखंड के 40 गांवों में बालिका दिवस के उपलक्ष्य में:
बाल रैली और संकल्प सभा: किशोर-किशोरियों ने रैलियों के माध्यम से ‘बाल विवाह मुक्त समाज’ का नारा बुलंद किया।
नुक्कड़ नाटक: कला जत्थों ने नाटकों के जरिए बाल विवाह के दुष्प्रभावों को प्रदर्शित किया।
सेनेटरी पैड बैंक: नौ महादलित टोलों में किशोरियों के बीच मासिक धर्म स्वच्छता और सेनेटरी पैड बैंक की उपयोगिता पर विस्तृत चर्चा की गई।
वैकल्पिक रोजगार की नई पहल
अल्पसंख्यक बस्ती खालिसपुर में एक नई शुरुआत की गई। ‘पैरवी’ (नई दिल्ली) के सहयोग से बीड़ी श्रमिक परिवारों की 30 महिलाओं और किशोरियों के लिए ‘महिला सिलाई प्रशिक्षण सह उत्पादन केन्द्र‘ का उद्घाटन किया गया। इसका उद्देश्य इन परिवारों को बीड़ी बनाने के जोखिम भरे कार्य से निकालकर सम्मानजनक वैकल्पिक रोजगार प्रदान करना है।
इनकी रही मुख्य उपस्थिति
कार्यक्रम को सफल बनाने में अवकाश प्राप्त शिक्षक अर्जुन प्रसाद सिंह, पूर्व जिला पार्षद जगन्नाथ कुंवर, सामाजिक कार्यकर्ता देव कुमार, मयंक कुमार सिन्हा, दीप्ती कुमारी, काजल राज, रवि कुमार मिश्रा, और पप्पू यादव सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सामाजिक न्याय के मसीहा और ‘भारत रत्न’ जननायक कर्पूरी ठाकुर की याद में आज ताजपुर की सड़कें जन-आंदोलन की गवाह बनीं। भाकपा माले के बैनर तले प्रखंड मुख्यालय के राजधानी चौक पर कार्यकर्ताओं और आम जनता ने एक विशाल मानव श्रृंखला बनाकर सरकार का ध्यानाकर्षण किया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य कर्पूरी ठाकुर के अधूरे कार्यों को पूरा करने और क्षेत्र की लंबित विकास परियोजनाओं को गति देना था।
“अधूरे कार्य पूरे करना ही सच्ची श्रद्धांजलि”
मानव श्रृंखला को संबोधित करते हुए भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने दो टूक कहा, “जननायक को केवल याद करना काफी नहीं है। उनके द्वारा शुरू किए गए जनहित के कार्यों को पूरा करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।” उन्होंने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर दशकों बाद भी कर्पूरी ठाकुर की योजनाएं अधूरी क्यों हैं?
क्षेत्रीय विकास के लिए उठी मांगें
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने ताजपुर और समस्तीपुर की उपेक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
ताजपुर का गौरव: आसिफ होदा ने मांग की कि जननायक की कर्मभूमि रहे ताजपुर को पुनः विधानसभा और अनुमंडल का दर्जा दिया जाए।
परियोजनाएं: ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने किसान हितैषी जमुआरी नदी परियोजना को अविलंब पूरा करने की मांग की।
रेल और बुनियादी ढांचा: मो० एजाज ने कर्पूरीग्राम-ताजपुर-भगवानपुर रेल लाइन, दूधपुरा हवाई अड्डा, मुक्तापुर रेल ओवरब्रिज और रोसड़ा को जिला बनाने की मांगों को पुरजोर तरीके से रखा।
भ्रष्टाचार और पुलिसिया उत्पीड़न पर कड़ा प्रहार
मानव श्रृंखला के माध्यम से कार्यकर्ताओं ने प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज बुलंद की। कार्यकर्ताओं ने “मनीष पोद्दार को टॉर्चर करने वाले पुलिसकर्मियों को बर्खास्त करो” और “घूसखोर राजस्व कर्मचारी की जांच करो” जैसे नारों से माहौल गरमा दिया। इसके साथ ही बंद पड़ी चीनी व पेपर मिलों को चालू करने, यूरिया की कालाबाजारी रोकने और भूमिहीनों को पर्चा देने की मांग की गई।
चेतावनी: मांगों की अनदेखी पर तेज होगा संघर्ष
भाकपा माले ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि सरकार जनहितैषी मुद्दों और ताजपुर की विकास योजनाओं पर जल्द फैसला नहीं लेती है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
मौके पर मौजूद रहे: इस कार्यक्रम में आसिफ होदा, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, मो० एजाज, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, संजीव राय, चांद बाबू, संतोष साह, शाद तौहीदी, मो० मोखलिस समेत सैकड़ों कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे। मौके पर सुरक्षा के मद्देनजर मजिस्ट्रेट और भारी पुलिस बल की तैनाती भी देखी गई।