एससीओ मंच से गरजे  रक्षा मंत्री: आतंकवाद के संरक्षकों को दुनिया में कहीं नहीं मिलेगी जगह, भारत ने दिया एकजुट कार्रवाई का कड़ा संदेश

दुशान्बे में गरजा  भारत, आतंकवाद और उसके समर्थकों के खिलाफ निर्णायक जंग की पुकार

दुशान्बे/नई दिल्ली(पी.आई.बी. ) । ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सबसे सख्त रुख अपनाया है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विश्व मंच से स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आतंकवाद के पूरे तंत्र और इसे आर्थिक व रणनीतिक पनाह देने वाले आकाओं के खिलाफ अब निर्णायक और सामूहिक कार्रवाई का समय आ गया है।

ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक के दौरान सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करते भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

इस उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने आतंकवाद को शांति, स्थिरता और विकास के लिए दुनिया का सबसे बड़ा खतरा करार दिया। उन्होंने दोहरे मापदंडों पर हमला बोलते हुए कहा कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। आतंकवादियों को आर्थिक सहायता देने, उनका समर्थन करने या उन्हें अपने देश में सुरक्षित पनाह देने वालों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

आतंकवाद से बर्बाद हो रहा युवाओं का भविष्य

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद केवल निर्दोष लोगों की जान ही नहीं लेता, बल्कि पूरे क्षेत्र में व्यापार, निवेश और आर्थिक प्रगति को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है। यह समाज में कट्टरता की जहर घोलता है और युवाओं को उन बेहतर अवसरों से वंचित कर देता है, जिनके वे हकदार हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिश्केक शिखर सम्मेलन में दिए गए संदेश का भी स्मरण कराया, जिसमें सुरक्षा, संपर्क और अवसरों के सृजन पर विशेष जोर दिया गया था।

 ताजिकिस्तान की राजधानी दुशान्बे में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शासनाध्यक्ष परिषद की 25वीं बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह [बायें से तीसरे क्रम में ]।

संप्रभुता का सम्मान जरूरी: चाबहार और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से खुलेगा नया रास्ता

क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था पर भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि कोई भी संपर्क परियोजना तभी सफल और टिकाऊ हो सकती है, जब वह सभी देशों के साथ विचार-विमर्श और उनकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर आधारित हो।

भारत ने चाबहार बंदरगाह और अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (आईएनएसटीसी) जैसी प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं मध्य एशिया को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और व्यापार को नए आयाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

डिजिटल क्रांति, स्टार्टअप और हरित ऊर्जा में भारत की मिसाल

भारत के विकास मॉडल को साझा करते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत ने डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक को तैयार किया है। इसके अलावा, महिलाओं के नेतृत्व में विकास और मिशन लाइफ जैसी पहलों के माध्यम से भारत दुनिया को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल प्रगति का मार्ग दिखा रहा है।

बैठक में सदस्य देशों ने वर्ष 2026 से 2030 के लिए बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग की कार्ययोजना को अपनाया तथा 2027 के बजट और प्रशासनिक प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्री ने वर्ष के अंत में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले पहले ‘एससीओ सभ्यता संवाद मंच’ में सभी सदस्य देशों को आमंत्रित भी किया।

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