दो बार मांगे गए ऑनलाइन आवेदन, फिर भी खाली रहा झोली; सरकारी नौकरी के टोटे के बीच हैरान करने वाला सच आया सामने!
पटना : आज देश और दुनिया में बेरोजगारी का आलम यह है कि चपरासी या क्लर्क की एक-एक छोटी नौकरी के लिए भी लाखों-करोड़ों युवाओं की भीड़ उमड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि परीक्षा केंद्रों पर काबू पाने के लिए प्रशासन को कई-कई शिफ्टों में परीक्षाएं आयोजित करानी पड़ रही हैं। लेकिन इसी बीच बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था से एक ऐसा हैरान करने वाला और चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई भौचक्का रह जाएगा। जहाँ एक तरफ नौकरी के लिए हाहाकार मचा है, वहीं विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के तहत निकले पदों पर आवेदन करने के लिए एक भी वीर नहीं मिला!

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत राजकीय पॉलिटेक्निक और राजकीय महिला पॉलिटेक्निक संस्थानों में विभागाध्यक्ष के कुल 218 रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या 91/2025 से 107/2025 तक प्रकाशित किए गए थे। लेकिन हैरानी की हद तब हो गई जब इनमें से कुल 09 विज्ञापनों (विज्ञापन संख्या 96/2025, 97/2025, 98/2025, 99/2025, 101/2025, 102/2025, 103/2025, 104/2025 एवं 107/2025) के लिए एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ।

विज्ञापन रिवाइज हुए, फिर भी शून्य रही संख्या मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इन विज्ञापनों को रिवाइज किया और दोबारा ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए। उम्मीद थी कि शायद अबकी बार बेरोजगार युवाओं या योग्य विशेषज्ञों की भीड़ उमड़ेगी, लेकिन नतीजा सिफर रहा। इन सभी विज्ञापनों के लिए आवेदकों की संख्या पूरी तरह शून्य ही बनी रही।
अधियाचना वापस लौटाई गई जब लाख कोशिशों के बाद भी एक भी आवेदन नहीं आया, तो आयोग के स्तर से आगे की कोई भी कार्रवाई करना संभव नहीं रह गया। परिणामस्वरूप, संबंधित सभी अध्याचनों को विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार को वापस लौटा दिया गया है।

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत राजकीय पोलिटेकनिक और राजकीय महिला पोलिटेकनिक संस्थानों में विभिन्न विभागों तथा विषयों के अंतर्गत विभागाध्यक्ष के इन पदों के लिए संबंधित तकनीकी या इंजीनियरिंग विषयों में उच्च शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित पठन-पाठन या कार्य अनुभव अनिवार्य होता है। चूँकि ये पद राजकीय तकनीकी संस्थानों में विभागाध्यक्ष जैसे उच्च और विशिष्ट उत्तरदायित्व वाले थे, इसलिए इनके लिए निर्धारित सख्त तकनीकी डिग्रियों एवं अहर्ताओं के कारण इन विज्ञापनों पर एक भी योग्य आवेदक आगे नहीं आया और आवेदन शून्य रहे।
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