गुणवत्तापूर्ण निर्माण और एप्रोच सड़क को वाहन योग्य (मोटरेबल) बनाने की उठी जोरदार मांग; डीएम और डीआरएम को सौंपा जाएगा ज्ञापन।
समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर शहर के बहुप्रतीक्षित मुक्तापुर रेल ओवरब्रिज (आरओबी) का निर्माण कार्य इन दिनों सुस्त रफ्तार और प्रशासनिक लालफीताशाही के दलदल में फंसा नजर आ रहा है। जाम के नासूर बन चुके इस मार्ग पर जनता की रोज-रोज की परेशानियों को संज्ञान में लेते हुए आखिरकार रविवार को समस्तीपुर रेल विस्तार एवं विकास मंच की टीम सड़क पर उतर आई। मंच के पदाधिकारियों और सदस्यों ने मुक्तापुर रेल गुमटी पहुंचकर निर्माणाधीन आरओबी स्थल का औचक निरीक्षण किया और चल रहे कार्यों की जमीनी हकीकत का बारीकी से विश्लेषण किया।

जमीनी हकीकत: क्या है रुकावटों का सच?
निरीक्षण के दौरान मंच की टीम ने केवल कागजी दावों को परखने के बजाय सीधे मैदान पर जाकर स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान स्थानीय दुकानदारों, आम नागरिकों, रोजाना सफर करने वाले वाहन चालकों और मौके पर मौजूद निर्माण कंपनी के प्रबंधक से लंबी बातचीत की गई। चर्चा में यह बात खुलकर सामने आई कि निर्माण कार्य की गति इतनी धीमी क्यों है।

विश्लेषण करने पर मुख्य रूप से तीन विभागों के बीच आपसी तालमेल की कमी और प्रशासनिक अड़चनें बड़ी बाधा के रूप में उभरीं:
- बिजली विभाग: निर्माण स्थल के दायरे में आ रहे बिजली के पोलों को समय पर हटाकर किनारे शिफ्ट नहीं किया गया है।
- वन विभाग: मार्ग की बाधा बन रहे पेड़-पौधों के स्थानांतरण और आवश्यक औपचारिकताओं में देरी हो रही है।
- रेल विभाग: गुमटी के पास वैकल्पिक आवागमन के लिए सुचारू डायवर्सन मार्ग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधूरी है।
इन तमाम बाधाओं के कारण निर्माण एजेंसी चाहकर भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही है, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

मंच की दो टूक: समन्वय बिठाकर तय सीमा में हो काम
समस्तीपुर रेल विस्तार एवं विकास मंच के प्रतिनिधियों ने कड़े शब्दों में कहा कि विभागों की आपसी सुस्ती और लालफीताशाही की कीमत समस्तीपुर की जनता नहीं चुकाएगी। मंच ने संबंधित सभी विभागों (रेल, विद्युत और वन विभाग) के बीच तत्काल उच्चस्तरीय समन्वय स्थापित करने की मांग की। प्रतिनिधियों ने जोर देकर कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर तेजी नहीं लाई गई, तो यह महत्वाकांक्षी परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पाएगी, जिससे लागत और जनसमस्याएं दोनों बढ़ेंगी।
जनता की तीन प्रमुख मांगें
निरीक्षण के बाद मंच ने निर्माण कार्य को लेकर तीन सूत्रीय प्राथमिक मांगें रखी हैं, जिनपर कोई समझौता नहीं किया जा सकता:

- गुणवत्ता से समझौता नहीं: ओवरब्रिज का निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना या संरचनात्मक कमजोरी न आए।
- समुचित एप्रोच सड़क: पुल के दोनों सिरों पर मानकों के अनुसार चौड़ी और सुदृढ़ एप्रोच सड़क का निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
- सड़क को मोटरेबल बनाना: निर्माण कार्य के दौरान उड़ने वाली धूल, कीचड़ और गड्ढों से बेहाल हो चुकी सड़क को तत्काल ‘मोटरेबल’ (वाहन योग्य) बनाया जाए ताकि राहगीरों और वाहन चालकों को रोजाना के त्रासद जाम और हादसों से राहत मिल सके।

अब उच्चाधिकारियों के दरबार में उठेगी आवाज
मुक्तापुर रेल गुमटी पर वर्षों से सुलग रही इस समस्या के समाधान के लिए मंच ने अब आर-पार की रणनीति बनाई है। निरीक्षण दल ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इन तमाम समस्याओं, जमीनी बाधाओं और जनता की मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन तैयार किया जाएगा। इस ज्ञापन को जल्द ही जिला कलेक्टर (DM), रेल मंडल प्रबंधक (DRM) और अन्य संबंधित उच्चाधिकारियों को सौंपा जाएगा, ताकि प्रशासनिक दबाव बनाकर निर्माण कार्य को तीव्र गति से पटरी पर लाया जा सके।

निरीक्षण दल में ये रहे शामिल
इस महत्वपूर्ण जन-निरीक्षण अभियान के दौरान समस्तीपुर रेल विस्तार एवं विकास मंच के कई प्रमुख और सक्रिय सदस्य मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राकेश कुमार ठाकुर, शंकर प्रसाद साह, राम विनोद पासवान, विश्वनाथ सिंह हजारी, शत्रुघ्न राय पंजी, मनोज कुमार, अशोक कुमार, मो. असगर अंसारी, और मिथिलेश कुमार राय शामिल रहे।
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