पीएम मोदी के ‘मन की बात’ में छाया सीतामढ़ी: कचरे से बन रही रंग-बिरंगी मजबूत बेंच, पूरे देश के लिए बनी मिसाल!

सीतामढ़ी (विशेष संवाददाता): बिहार के सीतामढ़ी जिले की एक अनूठी और पर्यावरण-अनुकूल पहल की गूंज अब पूरे देश में सुनाई दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम मन की बात में सीतामढ़ी जिले के बाजपट्टी में संचालित वेस्ट टू वेल्थ (कचरे से कंचन) मॉडल की जमकर सराहना की है। प्रधानमंत्री ने इस पहल को पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक और अनुकरणीय मॉडल बताया।

प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण से तैयार की गई बेहद आकर्षक और मजबूत रंग-बिरंगी इको-फ्रेंडली बेंच, जिन्हें सरकारी स्कूलों व पार्कों में लगाया जा रहा है।

40 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक से बन रही एक मजबूत बेंच

सीतामढ़ी में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत प्लास्टिक कचरे के पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) का काम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। बाजपट्टी स्थित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई में रिसाइकल किए गए प्लास्टिक से आकर्षक, बेहद मजबूत और पर्यावरण-अनुकूल बेंच तैयार किए जा रहे हैं।

इस प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि मात्र 1 बेंच को तैयार करने में लगभग 40 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरे का उपयोग किया जाता है। इससे जहां एक तरफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक कचरे का सही तरीके से निपटारा हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ टिकाऊ और लंबे समय तक चलने वाला फर्नीचर भी तैयार हो रहा है।

सीतामढ़ी के बाजपट्टी स्थित ‘प्लास्टिक अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई’ भवन के बाहर जमा किया गया प्लास्टिक कचरा और रिसाइकल कर तैयार की गई बेंच।

स्कूलों, पार्कों और सार्वजनिक स्थलों की बदल रही तस्वीर

प्लास्टिक कचरे से निर्मित इन मजबूत और रंग-बिरंगी बेंचों को जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों, सार्वजनिक पार्कों और अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर लगाया जा रहा है। स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए ये बेंच न केवल उपयोगी साबित हो रहे हैं, बल्कि अपनी आकर्षक बनावट और रंगों के कारण परिसरों की सुंदरता भी बढ़ा रहे हैं।

रोजगार और आय के खुल रहे नए द्वार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि रिड्यूस, रियूज और रिसाइकिल” (कम उपयोग, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण) अब केवल एक नारा नहीं रह गया है, बल्कि यह एक सशक्त जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सीतामढ़ी की यह पहल न केवल कचरा प्रबंधन का एक सफल उदाहरण है, बल्कि इसने स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के नए साधन भी सृजित किए हैं। इस प्रसंस्करण इकाई के माध्यम से कई स्थानीय लोगों और श्रमिकों को सीधे तौर पर रोजगार मिल रहा है।

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