नई दिल्ली / ब्यूरो अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर आज इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) ने केंद्र की मोदी सरकार, भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और धारदार मोर्चा खोल दिया है। देश के विभिन्न प्रमुख शहरों में एक साथ ‘विस्फोटक’ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कटघरे में खड़ा किया।
कांग्रेस ने इस घटना को करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था पर ‘डकैती’ करार देते हुए आरोप लगाया कि “भगवान के नाम पर राजनीति करने वालों ने मर्यादा पुरुषोत्तम के दरबार को भी नहीं छोड़ा।” नेताओं ने दावा किया कि राम मंदिर में मात्र 40 दिनों के भीतर 70 बार चोरी की गई, जिसने क्रूर शासक गजनवी के कृत्य को भी पीछे छोड़ दिया है।

आंकड़ों का खेल: रोजाना हो रहा था 10 लाख का हेरफेर!
इंदौर (मध्य प्रदेश) में मोर्चा संभालते हुए गुजरात कांग्रेस के दिग्गज नेता शक्तिसिंह गोहिल ने चोरी के गणित को उजागर करते हुए सनसनीखेज आंकड़े सामने रखे। गोहिल ने कहा:
“जब तक राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का भंडाफोड़ नहीं हुआ था, तब तक रोजाना करीब 16 से 18 लाख रुपये का दान दर्ज हो रहा था। लेकिन जैसे ही चोरी का खुलासा हुआ, दान का आंकड़ा अचानक बढ़कर प्रतिदिन 24 से 26 लाख रुपये हो गया। यानी साफ है कि हर दिन भक्तों की गाढ़ी कमाई के करीब ₹10 लाख का खुलेआम हेरफेर किया जा रहा था।” कांग्रेस की मांग: वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत बर्खास्त कर नया ट्रस्ट बनाया जाए, चंपत राय को फौरन गिरफ्तार किया जाए और पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो।
“गजनवी को भी पीछे छोड़ा, 40 दिन में 70 बार लूटा”
पंजाब में दहाड़ते हुए AICC सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत और हरियाणा में राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा-संघ पर तीखा हमला बोला।

- सुप्रिया श्रीनेत ने कहा: “चढ़ावा चोरी का यह महापाप BJP-RSS ने मिलकर किया है। इन्होंने ‘मुंह में राम और बगल में छुरी’ रखने का काम किया। 40 दिनों में 70 बार मंदिर का चढ़ावा लूटा गया, इन स्वयंभू हिंदुत्व के ठेकेदारों ने गजनवी को भी पीछे छोड़ दिया। यह हमारे धर्म पर कलंक हैं।”
- दीपेंद्र हुड्डा बोले: “मैं हरियाणा से आता हूँ जहाँ सुबह ‘राम-राम’ से होती है। आज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में बैठा हर भारतीय इस डकैती से दुखी है। सवाल यह है कि इन चोरों को किसका राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था?”
“श्रेय लेने में मोदी आगे, तो पाप की जवाबदेही से पीछे क्यों?”
जम्मू-कश्मीर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा और उत्तर प्रदेश (लखनऊ) में एम. पल्लम राजू ने सीधे प्रधानमंत्री की ‘खामोशी‘ पर सवाल दागे।
- पवन खेड़ा का प्रहार: “सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बने मंदिर का क्रेडिट लेने में नरेंद्र मोदी सबसे आगे रहे। प्राण प्रतिष्ठा में भी सारा फोकस खुद पर रखवाया। लेकिन जब महापाप हुआ तो छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर खुद पीछे छिप गए।”
- पल्लम राजू ने पूछा: “जिस ट्रस्ट को प्रधानमंत्री ने खुद अपने हाथों से चुना, उसने करोड़ों का गबन कर दिया। जब इतना बड़ा मुद्दा सामने है, तो प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं? वह करोड़ों राम भक्तों की आस्था का सम्मान क्यों नहीं कर रहे?”

पप्पू यादव के 4 सुलगते सवाल: ‘सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर गाज क्यों?’
कानपुर (उत्तर प्रदेश) में हुंकार भरते हुए सांसद पप्पू यादव ने देश के बड़े मंदिरों पर कॉरपोरेट और RSS के कब्जे पर सवाल उठाते हुए 4 सीधे सवाल दागे:
- जब राम मंदिर ट्रस्ट का गठन पीएम मोदी की देखरेख में हुआ, तो चढ़ावा चोरी की नैतिक जवाबदेही कौन लेगा?
- अगर सब कुछ सही था और कोई घोटाला नहीं हुआ, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा ने गुपचुप तरीके से अपने पदों से इस्तीफा क्यों दिया?
- प्रधानमंत्री इस पूरे महापाप पर मौन क्यों साधे हुए हैं?
- जब पूरा ट्रस्ट इस भ्रष्टाचार में लिप्त है, तो सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामले को क्यों रफा-दफा किया जा रहा है?
RTI के दायरे से ट्रस्ट को क्यों बचाया गया?
दक्षिण भारत के कोयंबटूर (तमिलनाडु) में राजीव गौड़ा ने पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस की यूपीए सरकार जो RTI एक्ट लाई थी, वह जनता का हथियार है। लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट को जानबूझकर आरटीआई के दायरे से बाहर रखा गया। अगर कोई संगठन पाक-साफ है, तो उसे जनता की नजरों से क्यों छुपाया जा रहा है?
वहीं चेन्नई (तमिलनाडु) में मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने सनातन परंपराओं के अपमान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भाजपा ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए अधूरे मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा की और देश के बड़े साधु-संतों को दरकिनार कर सनातन परंपरा को रौंदने का काम किया।
बड़ी राजनीतिक बहस: क्या बैकफुट पर आएगी भाजपा?
कांग्रेस के इस राष्ट्रव्यापी और संगठित हमले ने राम मंदिर मुद्दे पर भाजपा की घेराबंदी मजबूत कर दी है। पहली बार कांग्रेस बैकफुट से निकलकर फ्रंटफुट पर ‘हिंदू आस्था’ और ‘राम भक्ति’ के नाम पर ही भाजपा को घेर रही है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के दावों और 10 लाख रुपये रोज के हेरफेर के आंकड़ों ने इस मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। अब देखना यह है कि इस धारदार हमले पर प्रधानमंत्री कार्यालय और भाजपा की तरफ से क्या सफाई आती है।
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