राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री की राज्यव्यापी हाई-लेवल समीक्षा बैठक; राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे और पथ निर्माण की परियोजनाओं में बाधा बनने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
विशेष ब्यूरो, पटना | दिनांक: 17 जून 2026
पटना, 17 जून। बिहार में विकास योजनाओं की कछुआ चाल पर नीतीश सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य में चल रही विभिन्न बुनियादी ढांचा और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण (भू-अर्जन) की सुस्त रफ्तार पर नाराजगी जताते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है। बुधवार को विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण राज्यव्यापी समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि भू-अर्जन कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस मैराथन बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिला भू-अर्जन अधिकारियों (डीएलएओ) को लंबित मामलों का समयबद्ध निपटारा करने का सख्त निर्देश दिया गया है।

समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), रेलवे, पथ निर्माण विभाग, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्ट) तथा अन्य प्रमुख तकनीकी विभागों से जुड़ी महात्वाकांक्षी परियोजनाओं की जिलावार वर्तमान स्थिति पर बेहद विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि बिहार की तरक्की के लिए बुनियादी ढांचे का मजबूत होना अनिवार्य है, और इसमें भूमि की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। उन्होंने निर्देश दिया कि विकास परियोजनाओं के रास्ते में आने वाली किसी भी प्रकार की कानूनी, प्रशासनिक या प्रक्रियात्मक बाधा को पूरी तरह से प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दूर किया जाए, ताकि करोड़ों-अरबों रुपये की ये योजनाएं अपने निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी हो सकें और जनता को इनका लाभ मिल सके।
पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए मंत्री ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी जिला भू-अर्जन अधिकारियों को आदेश दिया कि वे अपने-अपने कार्यालयों के बाहर अनिवार्य रूप से एक बड़ा सूचना बोर्ड (डिस्प्ले बोर्ड) स्थापित करें। इस बोर्ड पर जिले में संचालित होने वाली सभी भू-अर्जन परियोजनाओं की सूची, अधिग्रहित की जाने वाली जमीन का रकबा और उसकी अद्यतन (करंट) स्थिति साफ-साफ अक्षरों में लिखी होनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि इस कदम से न केवल कार्यों को अभूतपूर्व गति मिलेगी, बल्कि आम जनता और जमीन मालिकों को भी यह पता रहेगा कि उनकी फाइलों की स्थिति क्या है। इसके साथ ही, उन्होंने सभी परियोजनाओं की नवीनतम और सटीक जानकारी को अनिवार्य रूप से विभाग के एमआईएस (प्रबंधन सूचना प्रणाली) पोर्टल पर दर्ज करने का हुक्म दिया, ताकि मुख्यालय स्तर पर इसकी हर दिन प्रभावी मॉनिटरिंग की जा सके।

इस उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक अमले के कई दिग्गज मौजूद रहे। मुख्य रूप से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, सचिव सीमा त्रिपाठी, अपर सचिव प्रशांत सीएच, निदेशक भू-अर्जन कमलेश कुमार सिंह, सहायक निदेशक सह अपर सचिव आजीव वत्सराज, सहायक निदेशक सह जनसंपर्क पदाधिकारी जूही कुमारी, सहायक भू-अर्जन पदाधिकारी कमल नयन कश्यप, पंकज कुमार झा, मनोज गुप्ता, और अवर सचिव शिव जी सहित अन्य विभागीय उच्चाधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े रेलवे, एनएचएआई और पथ निर्माण विभाग के शीर्ष इंजीनियरों एवं वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया और अपनी-अपनी परियोजनाओं में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को साझा किया, जिसके आपसी समन्वय से तत्काल निष्पादन का रास्ता निकाला गया।

मंत्री के कड़े निर्देश: बैठक के मुख्य बिंदु
- समय सीमा का कड़ाई से पालन: भू-अर्जन के सभी लंबित मामलों, मुआवजा भुगतान और अवार्ड घोषणा की प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने का अल्टीमेटम दिया गया है।
- टीम भावना से होगा काम: जहां कहीं भी जिला प्रशासन या अन्य तकनीकी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी है, वहां टीम भावना के साथ समन्वय स्थापित कर समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने की हिदायत दी गई है।
- गति और पारदर्शिता दोनों जरूरी: बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए भू-अर्जन की प्रक्रिया में रफ्तार के साथ-साथ पूरी पारदर्शिता का होना अत्यंत आवश्यक है।
- मुनावजा वितरण में तेजी: रैयतों (जमीन मालिकों) के मुआवजे से जुड़े विवादों को त्वरित गति से सुलझाने और सही हकदार को अविलंब भुगतान करने का निर्देश दिया गया।
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