मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ‘संकल्प’ बैठक में बड़े फैसले: नल का जल आपूर्ति का समय 2 घंटे बढ़ा, बिना वजह मरीजों को रेफर करने पर 15 अगस्त से पूर्ण प्रतिबंध, जिलाधिकारियों को सीधी कमान!
पटना। बिहार के विकास और आमजन की बुनियादी सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक रुख अपनाया है। लोक सेवक आवास, 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प’ सभागार में आयोजित चार प्रमुख विभागों—लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण (PHED), पथ निर्माण, उच्च शिक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग की मैराथन समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कई धमाकेदार निर्णय लिए। उन्होंने सीधे तौर पर अधिकारियों को चेतावनी दी है कि जनता की समस्याओं में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हर घर शुद्ध पानी: सुबह-शाम 1-1 घंटा ज्यादा खुलेगी टोंटी
आम जनता को भीषण गर्मी और पानी की जरूरतों से राहत देने के लिए मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए ‘हर घर नल का जल योजना’ के तहत पानी आपूर्ति की समय-सीमा को सुबह और शाम एक-एक घंटा और बढ़ाने का आदेश दिया है। अब राज्य में पेयजल की उपलब्धता निरंतर और निर्बाध बनी रहेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि पेयजल से जुड़ी किसी भी शिकायत का त्वरित समाधान होना चाहिए और इस पूरी व्यवस्था को पारदर्शी व सुदृढ़ बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का उपयोग किया जाए, ताकि शिकायतें सीधे मॉनिटर हो सकें। इसके अलावा, उन्होंने आगामी 30 जून से पहले राज्य के सभी चिन्हित व आवश्यक स्थानों पर युद्ध स्तर पर नए चापाकल लगाने का सख्त निर्देश जारी किया है।
महासमीक्षा बैठक के 8 सबसे बड़े और धमाकेदार निर्णय:
- पानी की महा-सप्लाई: हर घर तक निर्बाध शुद्ध पेयजल आपूर्ति, सुबह और शाम 1-1 घंटे अतिरिक्त समय बढ़ाया गया ताकि उपलब्धता निरंतर बनी रहे।
- शिकायतों पर AI का पहरा: पेयजल संबंधी जन-शिकायतों के त्वरित निवारण हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम।
- चापाकल मिशन: भीषण गर्मी को देखते हुए 30 जून से पहले सभी आवश्यक जगहों पर नए चापाकल लगाने का कड़ा अल्टीमेटम।
- फोर-लेन से जुड़ेंगे जिला मुख्यालय: बिहार के सभी जिला मुख्यालयों को शानदार फोर-लेन सड़कों से जोड़ने की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी।
- कनेक्टिविटी पर महा-फोकस: एक्सप्रेस-वे, नेशनल हाईवे और स्टेट हाईवे के काम जल्द पूरे होंगे। पर्यटन, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों को मिलेगी वर्ल्ड-क्लास कनेक्टिविटी।
- शिक्षा क्रांति: 1 जुलाई से राज्य के उन सभी 211 प्रखंडों में डिग्री की पढ़ाई शुरू होगी जहाँ अब तक कोई डिग्री कॉलेज नहीं था।
- जमीन दान करने वालों को सम्मान: डिग्री कॉलेज के लिए जमीन देने वाले दानी या उनके द्वारा अनुशंसित व्यक्ति के नाम पर ही कॉलेज का नामकरण होगा।
- अनावश्यक ‘रेफरल‘ पर पूर्ण सर्जिकल स्ट्राइक: 15 अगस्त तक सभी जिला और अनुमंडलीय अस्पतालों में बिना वजह मरीजों को रेफर करने पर रोक की पुख्ता व्यवस्था।

सड़कों का जाल: सभी जिला मुख्यालय होंगे फोर-लेन, पुलों की होगी नियमित जांच
सड़क और बुनियादी ढांचे की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य के सभी जिला मुख्यालयों को फोर-लेन कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। बिहार में चल रहे तमाम एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और स्टेट हाईवे (SH) के निर्माण कार्यों में गति और गुणवत्ता दोनों से कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने निर्देश दिया कि बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों, सांस्कृतिक विरासतों, औद्योगिक कॉरिडोरों और विशेष कृषि उत्पादन क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से बेहतरीन तरीके से जोड़ा जाए। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी पुलों की गुणवत्ता और मजबूती की नियमित व अनिवार्य जांच सुनिश्चित करने का आदेश दिया है।
उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव: विक्रमशिला विश्वविद्यालय के लिए जल्द मिलेगी जमीन
शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई देने के लिए मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि आगामी 1 जुलाई से राज्य के डिग्री कॉलेज रहित सभी 211 प्रखण्डों में हर हाल में डिग्री स्तर की पढ़ाई शुरू करा दी जाए। साथ ही, ऐतिहासिक विक्रमशिला विश्वविद्यालय को उसके प्राचीन गौरव के साथ पुनर्स्थापित करने के लिए भारत सरकार को शीघ्र भूमि हैंडओवर की जाएगी और इसके लिए केंद्र को तुरंत पत्र भेजा जा रहा है। राज्य के सभी रिसर्च सेंटरों को भी अब स्पेशलाइज्ड और सिस्टेमेटिक बनाया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग पर कड़ा एक्शन: अस्पतालों की लापरवाही पर DM रखेंगे नजर
स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार अब PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत राज्य में नए ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज विकसित करने जा रही है। सबसे बड़ा निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला व अनुमंडलीय अस्पतालों से मरीजों को बिना ठोस वजह के सीधे बड़े अस्पतालों में रेफर (अनावश्यक रेफरल) करने की आदत पर तत्काल रोक लगाई जाए। आगामी 15 अगस्त तक यह पूरी तरह सुनिश्चित हो जाना चाहिए कि स्थानीय स्तर पर ही मरीजों को बेहतर इलाज मिले। इस पूरी व्यवस्था की पल-पल की जिम्मेदारी सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को सौंपी गई है, जो इसकी खुद मॉनिटरिंग करेंगे।
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