बंगाल में बड़ा बदलाव! सुवेंदु सरकार ने 75 साल पुराने कानून में फूंकी जान; गाय-बैल काटने से पहले अब देनी होगी सरकारी ‘अग्निपरीक्षा‘
कोलकाता | विशेष संवाददाता | पश्चिम बंगाल की सियासत और प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राज्य सरकार ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ को पूरी सख्ती के साथ लागू करने का फरमान जारी कर दिया। सुवेंदु सरकार के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य में पशु वध कोई सामान्य बात नहीं होगी। नए निर्देशों के अनुसार, बिना ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ के किसी भी मवेशी पर कुल्हाड़ी चलाना अब सीधे जेल का रास्ता साफ करेगा।

बिना सर्टिफिकेट वध यानी सीधा अपराध सरकार द्वारा जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार, अब कोई भी व्यक्ति सांड, बैल, गाय, बछड़े, या भैंस (नर और मादा दोनों) का वध तब तक नहीं कर सकता जब तक उसके पास सक्षम अधिकारी द्वारा जारी किया गया ‘फिटनेस प्रमाण पत्र’ न हो। यह प्रमाण पत्र केवल तभी जारी किया जाएगा जब नगर पालिका के अध्यक्ष या पंचायत समिति के सभापति और एक सरकारी पशु चिकित्सक इस बात पर सहमत हों कि पशु वध के योग्य है।
14 साल की उम्र और बीमारी की शर्त कानून को इतना पेचीदा और सख्त बना दिया गया है कि प्रमाण पत्र पाना आसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर और अधिकारी तभी वध की अनुमति देंगे जब:
- जानवर की उम्र 14 वर्ष से अधिक हो चुकी हो और वह काम करने या प्रजनन के लायक न रहा हो।
- या फिर जानवर किसी ऐसी लाइलाज बीमारी, चोट या विकृति का शिकार हो गया हो जिससे उसका जीवित रहना कष्टकारी हो।

खुले में वध पर पूर्ण पाबंदी और जेल का प्रावधान सुवेंदु सरकार के इस आदेश ने ‘खुले में वध’ करने वालों की कमर तोड़ दी है। अब केवल उन्हीं बूचड़खानों में वध हो सकेगा जिन्हें प्रशासन ने अधिकृत किया है। सार्वजनिक स्थानों पर वध को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने पर:
- 6 महीने तक की जेल और जुर्माना देना होगा।
- सभी उल्लंघन संज्ञेय अपराध माने जाएंगे, यानी पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकेगी।
- सरकारी अधिकारियों को किसी भी परिसर में घुसकर ‘निरीक्षण’ करने का पूर्ण अधिकार होगा, और इसमें बाधा डालना भी कानूनी जुर्म होगा।

अन्य खबरों के लिए नीचे ’न्यूज भारत टीवी ’के लिंक पर क्लिक करें,
|| https://newsbharattv.in ||


