पटना/नई दिल्ली। देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी स्व० बाबू जगजीवन राम जी की 119वीं जयंती को ‘समता दिवस’ के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय रविदास जागरण महासभा एवं अखिल भारत अनुसूचित जाति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष उमेश कुमार राम ने बाबू जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।

कुशल प्रशासक और शोषितों के मसीहा थे बाबू जी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उमेश कुमार राम ने बाबू जगजीवन राम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक कुशल प्रशासक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन दलितों, पिछड़ों और शोषितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि एक समता मूलक समाज की स्थापना करना बाबू जी का मुख्य सपना था।
श्री राम ने बाबू जी के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि आजाद भारत में रक्षा मंत्री के रूप में 1971 के युद्ध में देश को विजय दिलाई। वहीं, कृषि मंत्री के तौर पर उन्होंने ‘हरित क्रांति’ को सफल बनाकर देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
‘भारत रत्न’ न मिलने से समाज में रोष इस दौरान एक महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए उमेश कुमार राम ने कहा कि बाबू जी के राष्ट्रव्यापी योगदान के बावजूद उन्हें अब तक देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत नहीं किया गया है। इससे देश के करोड़ों दलित, पिछड़ा और वंचित समाज के लोगों में गहरा दुख और असंतोष है। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र के माध्यम से मांग की है कि बाबू जी को अविलंब ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाए, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
ये रहे उपस्थित इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उमेश कुमार राम के अलावा अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, अनिता देवी, खुशी श्रद्धा, शिवम कुमार, डॉ. मनीष यादव, मो० हैदर रजक, अखिलेश्वर प्रसाद कुशवाहा, नुनू राय, रामबाबू साह, राहुल कुमार, सिद्धार्थ कुमार सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





