हैंडओवर से पहले खुली नल-जलकी पोल: सकरा में जांच के दौरान अधिकारियों के सामने गिरे सरकारी दावों के स्तर

मुजफ्फरपुर (सकरा)। सकरा नगर पंचायत और आस-पास की पंचायतों में ‘हर घर नल का जल’ योजना भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। गुरुवार को पीएचईडी (PHED) द्वारा नगर पंचायत को योजना हैंडओवर करने से पूर्व किए गए औचक निरीक्षण ने उन दावों की हवा निकाल दी, जिसमें इस प्रोजेक्ट को पूर्ण और सफल बताया जा रहा था। सहायक अभियंता प्रिया अग्रवाल और कनीय अभियंता राहुल कुमार की टीम ने जब धरातल पर जांच की, तो मानकों की अनदेखी और तकनीकी खामियों का अंबार मिला।

तस्‍वीर में मोटर साइकिल के सामने खड़ी  सहायक अभियंता प्रिया अग्रवाल और एवं हाथ में कागजात लिए कनीय अभियंता राहुल कुमार, सह संवेदक एवं स्‍थानीय लोगों से नल जल योजना की धरातल पर वास्‍तविक जानकारी लेते

निरीक्षण का विस्तार: मछही से लेकर सरमस्तपुर तक बदहाली

जांच टीम ने केवल नगर पंचायत ही नहीं, बल्कि मछही और सरमस्तपुर में भी नवनिर्मित जल मीनारों और पाइपलाइन नेटवर्क का सघन निरीक्षण किया।

  • मछही और सरमस्तपुर की स्थिति: यहाँ भी स्थिति नगर पंचायत से अलग नहीं है। नवनिर्मित जल मीनारों के निर्माण में तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखा गया है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को घेरकर घटिया निर्माण सामग्री और पाइपलाइन के अधूरे विस्तार की शिकायतें दर्ज कराईं।
  • दिखावा मात्र का निर्माण: कई जगहों पर स्ट्रक्चर तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन वे केवल ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं। जलापूर्ति शुरू होने से पहले ही टंकियों से रिसाव (लीकेज) होना संवेदक की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या-6  में औचक निरीक्षण करते पीएचईडी के सहायक अभियंता प्रिया अग्रवाल, एवं उपर तस्‍वीर में लाल इनसेट  में आधार को दुबारा ढ़ाल कर जल मीनार को सीधा करने की कोशिश  

भ्रष्टाचार का टेढ़ानमूना: वार्ड-6 की जमीनी हकीकत

निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला दृश्य सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या-6 (निब्युला फिल्म्स के सामने) में दिखा। यहाँ जल मीनार का सीमेंटेड प्लिंथ (आधार) ही टेढ़ा बना दिया गया है।

  • धोखाधड़ी की कोशिश: गलती छुपाने के लिए टेढ़े आधार के ऊपर दोबारा ढलाई कर उसे सीधा दिखाने का प्रयास किया गया, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है।
  • इंजीनियरिंग की विफलता: मीनार का लेयर सड़क से काफी नीचे रखा गया है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया कि इससे भविष्य में जलजमाव होगा और पूरा स्ट्रक्चर धंस सकता है। न तो बाहर से प्लास्टर किया गया है और न ही समुचित मिट्टी भराई हुई है।

जब माननीयही प्यासे: सिस्टम का ब्लॉक होना तय

योजना की विफलता का इससे शर्मनाक उदाहरण क्या होगा कि वार्ड संख्या-4 के पार्षद मो. आलम के अपने आवास (जो वार्ड-6 में स्थित है) में आज तक नल का कनेक्शन नहीं पहुँचा है।

  • वंचित मोहल्ले: फरीदपुर सकरा के पुराने वार्ड-13 (नया वार्ड-6) में 30 से अधिक घरों को जानबूझकर योजना से बाहर रखा गया है।
  • अधूरा नेटवर्क: शिक्षक नागेवर पासवान के मोहल्ले से लेकर डिक्की गुप्ता और संजीत कुमार चौधरी मुन्‍शी जी के घर तक पाइपलाइन पहुँची ही नहीं है। रेलवे लाइन के दक्षिण पुरवारी गुमटी के पास तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाकर पूरे इलाके की प्यास का सौदा किया गया है।

औचक निरीक्षण के दौरान  हरकत में आया संवेदक और मजदूरों को लगाया काम पर, तस्‍वीर में गंगा इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स के सामने सड़क पर जमीन से रिस कर बहता पानी, और  लाल इनसेट  में ईंट पत्‍थर से घेर का पानी को रोकने की कोशिश,

घटिया क्वालिटी और टपकती बूंदें: करोड़ों की बर्बादी

निरीक्षण में यह साफ दिखा कि जो सामान इस्तेमाल किया गया है, वह बेहद घटिया क्वालिटी का है। करोड़ों की लागत से बनी टंकियों से पानी ‘टप-टप’ टपक रहा है, जो प्लंबिंग और सिविल वर्क की विफलता का सबूत है। ग्रामीण इस बात से भी आक्रोशित हैं कि जलापूर्ति का समय बेहद कम है और प्रेशर न के बराबर है।


अधिकारियों का 3 दिन का अल्टीमेटम

सवालों के घेरे में आए कनीय अभियंता राहुल कुमार ने स्वीकार किया कि फील्ड में गंभीर अनियमितताएं हैं। उन्होंने कहा:

“हमने निरीक्षण में पाई गई त्रुटियों को लेकर संबंधित एजेंसी को 2 से 3 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। हैंडओवर से पहले हर कमी को दूर करना होगा। भीषण गर्मी को देखते हुए जो घर छूट गए हैं, उन्हें प्राथमिकता पर जोड़ा जाएगा।”

विभाग ने गर्मी के लिए नया शेड्यूल (सुबह 6-9, दोपहर 1-2 और शाम 4-6) जारी किया है, लेकिन अधूरा नेटवर्क इस शेड्यूल पर पानी फेर रहा है।


20 साल का इंतजार और अब मिला अधिकारियों का भरोसा

सकरा में पानी का संकट 20 साल पुराना है। पुरानी पाइपलाइनें पूरी तरह ब्लॉक हैं। अधिकारियों ने अब आश्वासन दिया है कि वे रविवार को पुनः फील्ड में रहकर पाइपलाइन की कुल लंबाई और स्ट्रक्चर के मानकों की पैमाइश करेंगे।

यदि हैंडओवर से पहले इन गंभीर खामियों को दूर नहीं किया गया, तो यह योजना नगर पंचायत के लिए ‘वरदान’ नहीं बल्कि ‘बोझ’ साबित होगी। विभाग को अब फाइलों से बाहर निकलकर लापरवाह ठेकेदारों पर कानूनी नकेल कसनी होगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, मुजफ्फरपुर (सकरा)।

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