डी-लिमिटेशन के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव, सम्राट चौधरी का ऐलान!

पटना: राजधानी पटना में आयोजित ‘ग्राम संसद–बिहार चैप्टर’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत चुनाव और ग्रामीण विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि आगामी पंचायत चुनाव डी-लिमिटेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कराए जाएंगे। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए उन्होंने विकसित भारत 2047 और समृद्ध बिहार 2037 के विजन को रेखांकित किया।

ग्राम संसद-बिहार चैप्टरके  कार्यक्रम में सीएम सम्राट चौधरी एवं अन्‍य ।  

डी-लिमिटेशन के बाद ही होंगे पंचायत चुनाव

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि कई पंचायतों की आबादी काफी अधिक है, जिसे देखते हुए हाईकोर्ट के निर्देशों और मुखिया संघ के अध्यक्ष मिथिलेश राय एवं अमोद निराला के प्रयासों के बाद डी-लिमिटेशन (परिसीमन) का काम शुरू कर दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस पर काम करना शुरू कर दिया है और अगली चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से डी-लिमिटेशन कराने के बाद ही संपन्न होगी। उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव कराने से विकास कार्य बाधित होते हैं और आचार संहिता में लोग फंसे रहते हैं, इसलिए इस व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है।

मुखिया सबसे शक्तिशाली और काम का पद

लोकतंत्र की त्रिस्तरीय व्यवस्था पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस देश में सबसे शक्तिशाली व्यक्ति यदि कोई होता है, तो वह मुखिया होता है। विधायक या सांसद का चुनाव आसान हो सकता है, लेकिन वार्ड और मुखिया का चुनाव सबसे कठिन होता है। उन्होंने बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक पंचायत से एक करोड़ का राजस्व आता है, और बिहार में भी नीचे की व्यवस्था तथा राजस्व सृजन को मजबूत करना होगा।

अगले 5 वर्षों में पंचायतों में खर्च होंगे 1 लाख करोड़ रुपये

ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाली राशि का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत बिहार जैसे राज्य को सिर्फ केंद्र से लगभग बावन हजार करोड़ रुपये मिलने वाले हैं। इसके अलावा विकसित भारत योजनाओं के तहत लगभग सैंतालीस हजार करोड़ रुपये और राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर राशि दी जाएगी। इस प्रकार अगले पांच वर्षों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

गांवों में टैक्स और कमर्शियल गतिविधियों पर नजर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आम गरीबों और जनता पर कोई नया टैक्स नहीं लगाया जाएगा, जो लोग पक्के मकान में रह रहे हैं उन पर कोई कर नहीं होगा। हालांकि, गांवों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों जैसे ईंट-भट्ठों, स्कूलों, और मोबाइल टावरों से पंचायत को टैक्स मिलना चाहिए ताकि कचरा प्रबंधन और पानी जैसी व्यवस्थाओं को बेहतर किया जा सके।

सरकार आपके द्वार और अधिकारियों पर सख्ती

सरकार की कार्यप्रणाली पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि गांवों में पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाए जा रहे हैं। यदि आवेदनों पर दस दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं होती है, तो ग्यारहवें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से अधिकारियों को नोटिस जारी किया जाता है। साथ ही, हर महीने के अंतिम इतवार को ‘पंचायत विकास दिवस’ के रूप में मनाने और साल में कम से कम 12 ग्राम सभाएं आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।

शिक्षा और रोजगार पर बड़ा फोकस

युवाओं और शिक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले एक महीने के भीतर 211 डिग्री कॉलेज खोले गए हैं और रिकॉर्ड 30 दिनों के भीतर शिक्षकों की बहाली की गई है। सरकार का लक्ष्य अगले चार-पांच वर्षों में बिहार के युवाओं को यहीं रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि किसी को बाहर मजदूरी करने न जाना पड़े। इसके अलावा औद्योगिक विकास के लिए यह कानून बनाया गया है कि सरकारी योजनाओं और टेंडर में इस्तेमाल होने वाले सामानों का 30 प्रतिशत हिस्सा बिहार में ही निर्मित होना चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा एवं विधि विभाग के संजय सिंह टाइगर, भारतीय जनता पार्टी के नेता और ग्राम संसद के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय मयुक, बृजेश कुमार शर्मा, किरण प्रभाकर, मृत्युंजय, चेतना, मुखिया संघ के अध्यक्ष मिथिलेश राय, पंच और सरपंच के राज्यस्तरीय अध्यक्ष अमोद निराला, दीपक ठाकुर, दिगंबर मंडल, संजीव भूषण, शेखर, राहुल सिंह, अजय प्रताप समेत कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।

अन्‍य खबरों  के लिए नीचे  ’न्‍यूज भारत टीवी ’ के लिंक पर क्लिक करें ,

||  https://newsbharattv.in  ||

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here