छात्रवृत्ति के नाम पर करोड़ों रुपए , डीबीटी और डिजिटल सुधारों से फर्जीवाड़े का खेल खत्म!

नई दिल्‍ली :देश के वंचित और पिछड़े वर्गों के छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग और विमुक्त, घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू जनजातियों के लिए शिक्षा के दरवाजे पूरी तरह से खोल दिए हैं। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि वित्तीय बाधाओं को अब छात्रों के सपनों के बीच नहीं आने दिया जाएगा।

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इंफोग्राफिक में प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियों के आंकड़े और डिजिटल पारदर्शिता प्रणाली का विवरण दर्शाया गया है।

मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत ने बताया कि सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के जरिए देश के करोड़ों छात्रों की किस्मत संवारी जा रही है। उन्होंने आंकड़ों का पिटारा खोलते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 से लेकर वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत कुल 4,893.03 करोड़ रुपए की भारी-भरकम केंद्रीय सहायता जारी की जा चुकी है। इस अवधि के दौरान वार्षिक लाभार्थियों की कुल संख्या लगभग 299.66 लाख तक पहुंच गई है। केवल अकेले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही 562.36 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिससे 26.79 लाख छात्रों को सीधा फायदा मिला है।

वही दूसरी ओर, उच्च शिक्षा के सपनों को पंख देने वाली पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना ने तो रिकॉर्ड ही तोड़ दिए हैं। सचिव सुधांश पंत ने जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2025-26 के बीच इस योजना के तहत कुल 46,581.54 करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता वितरित की गई है। इस दौरान वार्षिक लाभार्थियों का कुल आंकड़ा 612.98 लाख दर्ज किया गया। इसके अलावा, अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में 6,186.95 करोड़ रुपए की राशि जारी कर 47.53 लाख छात्रों को लाभान्वित किया गया है।

डिजिटल सुधारों से बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर कड़ा प्रहार

छात्रवृत्ति वितरण में होने वाले भ्रष्टाचार और घपलेबाजों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब पूरी तरह से डिजिटल तंत्र अपना लिया है। सचिव सुधांश पंत ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 से पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को पूरी तरह से डीबीटी-सक्षम व्यवस्था में बदल दिया गया है, जिससे छात्रवृत्ति का पैसा सीधे लाभार्थियों के आधार-सीडेड बैंक खातों में पहुंच रहा है। इससे न सिर्फ बिचौलियों का खेल खत्म हुआ है, बल्कि पैसों के लीकेज और देरी पर भी पूरी तरह से ब्रेक लग गया है।

सरकार ने फर्जी और डुप्लीकेट लाभार्थियों का सफाया करने के लिए विशेष डुप्लीकेशन हटाने की व्यवस्था शुरू की है। इसके साथ ही छात्रों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और ई-केवाईसी आधारित सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। डिजिलॉकर और एपीआई सेतु के साथ एकीकरण से अब दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन पलक झपकते ही हो जाता है।

छात्रों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए वन-टाइम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू की गई है। एआईएसएचई, यूडीआईएसई, एनसीवीटी और एससीवीटी के डेटाबेस के साथ एकीकरण होने से फर्जी छात्र अभिलेखों की पोल तुरंत खुल जाती है। इसके अलावा यूआईडीएआई, एनपीसीआई और पीएफएमएस के साथ मिलकर छात्रवृत्ति के वितरण को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बना दिया गया है। सरकार के इन सख्त और डिजिटल कदमों से साफ है कि शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वालों की अब खैर नहीं है।

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