Wednesday, November 4, 2026

अंबेडकर जयंती पर गूँजा बाबा साहेब का मूलमंत्र: “शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पियेगा वो दहाड़ेगा”

बंदरा में ‘समरसता दिवस’ के रूप में मनाई गई जयंती, एनडीए सरकार द्वारा विकसित ‘पंचतीर्थ’ पर हुई चर्चा

बंदरा (मुजफ्फरपुर): संविधान शिल्पी और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती रविवार को प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने बाबा साहेब के पदचिन्हों पर चलने और उनके द्वारा दिखाए गए समानता के मार्ग को अपनाने का संकल्प लिया।

नमन: बंदरा के महेशपुर में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते मंडल महामंत्री श्याम किशोर कुशवाहा, वार्ड सदस्य प्रेमलाल पासवान व अन्य ग्रामीण।

महेशपुर में भाजपा का ‘समरसता समागम‘

बंदरा मंडल पूर्वी के तेपरी पंचायत अंतर्गत महेशपुर (वार्ड संख्या 01, बूथ संख्या 406) में स्थानीय वार्ड सदस्य व भाजपा कार्यकर्ता प्रेमलाल पासवान के नेतृत्व में ‘समरसता दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंडल महामंत्री श्याम किशोर कुशवाहा ने केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा बाबा साहेब को दिए गए सम्मान का उल्लेख किया।

कुशवाहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बाबा साहेब की याद में स्थापित ‘पंचतीर्थ‘ के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि सरकार ने उनके जीवन से जुड़े पाँच महत्वपूर्ण स्थलों को राष्ट्रीय प्रेरणा केंद्र के रूप में विकसित किया है:

  • जन्मभूमि (महू): जिसे अब आधिकारिक तौर पर ‘डॉ. अंबेडकर नगर’ का नाम दिया गया है।
  • शिक्षा भूमि (लंदन): वह ऐतिहासिक घर जहाँ बाबा साहेब रहकर पढ़ाई की, उसे भारत सरकार ने खरीद कर भव्य स्मारक बनाया।
  • दीक्षा भूमि (नागपुर): जहाँ उन्होंने मानवता का संदेश फैलाने के लिए बौद्ध धर्म अपनाया।
  • परिनिर्वाण भूमि (दिल्ली): 26 अलीपुर रोड स्थित निवास, जिसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया।
  • चैत्य भूमि (मुंबई): अंतिम संस्कार स्थल, जहाँ आज लाखों लोग श्रद्धा अर्पित करने पहुँचते हैं।

उमेश कुमार राम बाबा साहेब के चित्र पर किया पुष्पांजलि अर्पित

दूसरी ओर, अखिल भारतीय रविदास जागरण महासभा के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य उमेश कुमार राम ने सकरा सु० विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ बाबा साहेब की 126वीं जयंती मनाई। उन्होंने बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके मूल मंत्र— “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” को जीवन में उतारने की अपील की।

श्री राम ने जोश भरते हुए कहा, “बाबा साहेब कहते थे कि शिक्षा शेरनी की वह दूध है, जो इसे पियेगा वो दहाड़ेगा। आज समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को जागरूक और शिक्षित होने की सबसे अधिक आवश्यकता है।”

कार्यक्रम में इनकी रही मौजूदगी

इस पावन अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में अधिवक्ता मनोज कु० सिंह, मो० गुलाम मैनुद्दीन, अनीता देवी, श्रद्धा खुशी, शिवम कुमार, सिद्धार्थ कुमार, डॉ० मनीष यादव, मो० हैदर रजक, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, दिनेश पासवान, गीता देवी, साधना देवी, उर्मिला देवी, उचित पासवान, चुनचुन कुमार और संजय चौधरी सहित भारी संख्या में ग्रामीण व कार्यकर्ता उपस्थित थे।


धमाकेदार खुलासा: स्कूल के नाम पर घर से विदाई, ब्रह्म स्थान पर ‘कोल्ड ड्रिंक’ की मलाई!

ब्रह्म स्थान पर लगती है इनकी क्लास,क्या आईएएस बनेंगे? मुरौल में ‘बंक मार’ छात्र,

मुरौल, मुजफ्फरपुर। क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बच्चे को आप माथे पर तिलक लगाकर या दुआएं देकर स्कूल भेजते हैं, वह रास्ते के मोड़ से ही अपने भविष्य की दिशा बदल लेता है? मुरौल प्रखंड कार्यालय से महज पांच सौ मीटर उत्तर, ब्रह्म स्थान के चबूतरे पर जो तस्वीर दिखी, वह केवल पांच बच्चों के क्लास बंक करने की खबर नहीं है, बल्कि हमारे दम तोड़ते सामाजिक उत्तरदायित्व का ‘पोस्टमार्टम’ है।

भविष्य के साथ ‘सिप’: स्कूल ड्रेस में चबूतरे पर मौज करते बच्चे, जो शिक्षा की जगह लापरवाही की घूंट पी रहे हैं।

सुबह घर से , नौ बजे मंदिर का चबूतरा, बारह बजे घर की राह

रिपोर्टर की नजर जब ब्रह्म स्थान पर पड़ी, तो वहां पांच छात्र स्कूल ड्रेस में ठहाके लगाते मिले। कोई हाथ में सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल थामे मजे ले रहा था, तो कोई गप्पों में मशगूल था। ये बच्चे सुबह घर से तो स्कूल के लिए निकले थे, लेकिन उनकी राहें क्लासरूम के बजाय इस चबूतरे की ओर मुड़ गईं। ताज्जुब की बात यह है कि राह चलते राहगीर भी इन्हें देखकर अनदेखा कर देते हैं। क्या हमारा समाज इतना संवेदनहीन हो गया है कि अपने ही बच्चों को बर्बाद होते देख मूकदर्शक बना रहेगा?

चबूतरे पर सॉफ्ट ड्रिंक पीते बच्चों से मुरौल का नाम रोशन होगा?

सवाल सीधा है और बेहद कड़वा। हाथ में सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलें थामे ये बच्चे जब ठहाके लगाकर समय काटते हैं, तब वे केवल स्कूल का समय नहीं, बल्कि अपने मां-बाप के पसीने की कमाई और उम्मीदों का गला घोंट रहे होते हैं। क्या इन चबूतरे वाल क्‍लास से देश को अगला आईएएस या आईपीएस मिलेगा? यह सवाल या इस तरह का बंक मार छात्रों का दृश्य अमूमन हर स्‍कूल के आस पास दिख जा रहा है, जिस पर अभिभावकों को विचार करना होगा,

स्कूल के बाहर खाने-पीने के ठेलों पर जुटती बच्चों की भीड़, जो विद्यालय के अनुशासन को दे रही चुनौती एवं दीवार लांघकर भागता बचपन या कहे कि  प्रशासन की ढिलाई का फायदा उठा रहे बच्चे।

समाज, अभिभावक और व्यवस्था का गिरता स्तर

स्कूली बच्चों का ‘कोल्ड ड्रिंक‘ ब्रेक! क्या यही है भविष्य? नौ बजे जब इन बच्‍चों को स्कूल के क्‍लास रुम में होना  चाहिए, तब ये बच्चे चबूतरे पर ‘पार्टी’ कर रहे होते हैं। बारह बजे तक चलने वाला यह ‘कोल्ड ड्रिंक ब्रेक’ उस मानसिक खोखलेपन को दर्शाता है, जहाँ बच्चों को पढ़ाई से ज्यादा आनंद अनुशासन तोड़ने में आ रहा है। यह मौज-मस्ती आने वाले समय में एक ऐसी पीढ़ी तैयार करेगी, जिसके पास डिग्रियां तो शायद हों, पर योग्यता शून्य होगी।

नीचे की तस्‍वीर में देखें बच्‍चे कैसे खतरनाक ढ़ंग से दिवाल फांद रहे हैं,

मुरौल में शिक्षा का हाल बेहाल! यूनिफॉर्म में सजे बच्चों का इस तरह सड़कों पर आवारागर्दी करना मुरौल की शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक निगरानी पर सबसे बड़ा तंज है। यह तस्वीर चीख-चीख कर कह रही है कि शिक्षा का ढांचा केवल इमारतों तक सिमट गया है, संस्कारों और अनुशासन की जड़ें सूख चुकी हैं।

बाउंड्री पार, भविष्य बर्बाद! नया ‘एडवेंचर स्पोर्ट’ :  मध्य विद्यालय मुरौल के छात्रों के लिए स्कूल की बाउंड्री अब सुरक्षा नहीं, बल्कि एक चुनौती है जिसे वे हर रोज पार करते हैं। जब अनुशासन की सीमा (बाउंड्री) टूटती है, तो भविष्य की मर्यादा भी तार-तार होने लगती है।

खतरनाक लापरवाही: खेत में भागते बच्चे, जिम्मेदार कौन? जैसे ही इन बच्चों ने कैमरा देखा, वे अपनी पहचान छिपाने के लिए मकई के खेत की ओर भाग खड़े हुए। यह भागना उनके ‘अपराध बोध’ को दर्शाता है। लेकिन क्या केवल बच्चे जिम्मेदार हैं? वह समाज कहाँ है जो पहले मोहल्ले के हर बच्चे को अपना समझकर टोकता था? आज हम इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि भविष्य को बर्बाद होते देख भी आंखें मूंद लेते हैं।


अभिभावकों के लिए ‘वेक-अप कॉल‘

सावधान! अगर आप भी केवल बच्चे को स्कूल भेजकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझते हैं, तो आप अपने बच्चे के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। आपकी थोड़ी सी लापरवाही और निगरानी की कमी बच्चे को अंधेरी गलियों में धकेल सकती है। समय रहते हकीकत मालूम करें, वरना पछतावे के अलावा कुछ हाथ नहीं आएगा।

प्रधानाध्यापक का पक्ष: “अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता”

मध्य विद्यालय मुरौल के प्रधानाध्यापक शशि भूषण कुमार ने स्पष्ट किया कि विद्यालय के अंदर की जिम्मेदारी शिक्षकों की है, लेकिन बाहर की बागडोर समाज और अभिभावकों के हाथ में है। उन्होंने कहा—

“हम प्रतिमाह बैठक करते हैं, लेकिन अभिभावकों की कम उपस्थिति चिंताजनक है। बाउंड्री की ऊँचाई कम होना भी एक समस्या है, लेकिन जब तक गार्जियन और जनप्रतिनिधि साथ नहीं आएंगे, अनुशासन संभव नहीं है।”

एचएम साहब ने बताया कि हर महीने के आखिरी शनिवार को अभिभावकों  के साथ मीटिंग होती है, लेकिन अभिभावकों की उपस्थिति आधी भी नहीं रहती है ।


मुरौल के ये वही बच्चे हैं जिनसे कल को डॉक्टर, इंजीनियर या आईएएस बनने की उम्मीद की जाती है। लेकिन अगर बचपन ‘ब्रह्म स्थान’ पर सॉफ्ट ड्रिंक पीकर और क्लास बंक करके बीतेगा, तो भविष्य अंधकारमय ही होगा। अभिभावकों की यह मजबूरी है या लापरवाही कि वे यह भी नहीं देखते कि बच्चा स्कूल के गेट के अंदर गया या नहीं?यह खबर केवल एक घटना नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। यदि आज समाज ने इन बच्चों को सही रास्ता नहीं दिखाया, तो कल यही ‘बंक मार’ संस्कृति हमारे समाज की पहचान बन जाएगी।


समस्तीपुर: पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का मुरादपुर बंगरा में भव्य स्वागत, भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा

समस्तीपुर (13 अप्रैल 2026): बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश सोमवार को समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मुरादपुर बंगरा पंचायत पहुंचे। अवसर था राष्ट्रीय लोक मोर्चा द्वारा आयोजित ‘सम्मान सह अभिनंदन समारोह’ एवं ‘सदस्यता अभियान’ का। इस दौरान मंत्री जी का न केवल भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया, बल्कि जन समस्याओं और भ्रष्टाचार के मामलों पर उन्होंने कड़ा रुख भी अख्तियार किया।

सम्मान की परंपरा: राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता निशांत द्वारा मंत्री दीपक प्रकाश को पौधा भेंट कर स्वागत किया गया।

भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस‘: सकरा प्रखंड के गबन मामले में कार्रवाई का आश्वासन

कार्यक्रम के दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए मंत्री दीपक प्रकाश ने एक गंभीर भ्रष्टाचार के मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जब उनसे सकरा प्रखंड में सड़क निर्माण के नाम पर लाखों रुपये के गबन का सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“यह मामला मेरे संज्ञान में आया है और इसके लिए लिखित आवेदन भी प्राप्त हुआ है। विभाग इसकी गहन जांच कराएगा और जो भी दोषी होंगे, उन पर विधि सम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।”

मंत्री  दीपक प्रकाश ने आगे कहा कि पंचायती राज विभाग की योजनाओं का लाभ सीधे आम जनता तक पहुंचे, यह उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नि:संकोच अपनी समस्याएं और सुझाव उन्हें दे सकते हैं।

शाही स्वागत: कार्यकर्ताओं ने उत्साह में आकर मंत्री दीपक प्रकाश को लड्डूओं से तौला, क्षेत्र में चर्चा का विषय बना।

तराजू पर तौले गए पंचायती राज विभाग के मंत्री  जी ,लड्डूओं से हुआ स्वागत

अभिनंदन समारोह का मुख्य आकर्षण वह पल रहा जब कार्यकर्ताओं ने उत्साह और प्रेम के वशीभूत होकरपंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश को तराजू के एक पलड़े पर बैठाया और दूसरे पलड़े को लड्डूओं से भरकर उन्हें तौला। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह इस क्षेत्र की पुरानी परंपरा है जिसे ‘तुलादान’ के रूप में देखा जाता है। लड्डूओं को बाद में प्रसाद के रूप में ग्रामीणों के बीच वितरित किया गया।

स्थानीय बुजुर्गों और अभिभावकों का आशीर्वाद लेते पंचायती राज मंत्री।

परंपरा और जोश का संगम

कार्यक्रम की शुरुआत भव्य तरीके से हुई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. ज्ञानशंकर कौशल ने की। मंच का संचालन डॉ. सत्येंद्र नाथ झा ने किया। ताजपुर प्रखंड जदयू अध्यक्ष कुमार समर्पण और प्रशांत पंकज सहित एनडीए के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री जी को पुष्पगुच्छ, माला, पाग और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। स्थानीय वक्ताओं ने भावुक होते हुए कहा, “आप आए श्रीमान जी, यूं लगा जैसे तकलीफ को दवा मिल गई।”

क्षेत्र से है गहरा लगाव

मंत्री दीपक प्रकाश ने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कहा कि इस क्षेत्र से उनके पिता आदरणीय उपेंद्र कुशवाहा जी का पुराना और गहरा लगाव रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि वे इस क्षेत्र के विकास के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। एनडीए के तमाम घटक दलों (जदयू, हम, रालोमो) के नेताओं ने एक स्वर में मंत्री जी का अभिनंदन किया और इसे ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर की धरती’ पर एक ऐतिहासिक दिन बताया।

सदस्यता अभियान समारोह को संबोधित करते पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश

पंचायती राज विभाग के मंत्री दीपक प्रकाश का भरोसा: “आपका छोटा भाई आपके लिए हमेशा हाजिर”

जनता को संबोधित करते हुए मंत्री दीपक प्रकाश ने भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “पंचायती राज विभाग के मंत्री के रूप में आपके पास कोई भी समस्या, सुझाव या शिकायत हो, तो नि:संकोच अपने छोटे भाई दीपक के पास आएं। मुझे जो जवाबदेही मिली है, मैं उससे दो कदम आगे बढ़कर आपकी सेवा करूँगा।” उन्होंने इस क्षेत्र से अपने पिता उपेंद्र कुशवाहा के पुराने जुड़ाव को भी याद किया।

सदस्यता अभियान का आगाज: मंत्री जी की उपस्थिति में नए सदस्यों को पार्टी से जोड़ने की प्रक्रिया।

मंत्री जी ने खुद सौंपी सदस्यता की पर्ची, सैंकड़ों युवाओं ने थामा दामन

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संगठन को मजबूती प्रदान करना था, जिसके तहत मंत्री दीपक प्रकाश ने स्वयं सदस्यता अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने मंच से कई युवाओं और स्थानीय गणमान्य लोगों को विधिवत रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई और उन्हें सदस्यता रसीद  सौंपी। सदस्यता दिलाते हुए मंत्री जी ने कहा कि संगठन की असली ताकत जमीनी कार्यकर्ता हैं। उनके हाथों से सदस्यता ग्रहण करने के बाद कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया और सैंकड़ों की संख्या में लोगों ने राष्ट्रीय लोक मोर्चा की नीतियों में विश्वास जताते हुए पार्टी का दामन थामा।

मंच की मजबूती और कार्यकर्ताओं की भीड़

भीड़ इतनी अधिक थी कि उद्घोषक को बार-बार चेतावनी देनी पड़ी कि “मंच कमजोर है, कृपया नीचे उतर जाएं।” सदस्यता अभियान के दौरान सैकड़ों लोगों ने पार्टी की सदस्यता ली, जिससे आगामी चुनावों से पहले राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने जिले में अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया है।

सदस्यता अभियान के दौरान उपस्थित एनडीए के नेतागण एवं उमड़ी समर्थकों की भीड़।

समारोह में मुख्य रूप से उपस्थित रहने वाले गणमान्‍य :

समारोह में मुख्य रूप से कुमार समर्पण जी (प्रखंड अध्यक्ष, जदयू, ताजपुर),प्रशांत पंकज (प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष, रालोमो),विनोद पासवान (पूर्व जदयू अध्यक्ष),रामप्रीत पासवान (पूर्व सरपंच, बंगड़ा),राम प्रीत कुशवाहा(पूर्व मुखिया, मझौलिया),राजनारायण सिंह (पैक्स अध्यक्ष),डॉ. राजकुमार सिंह, राम गणेश ठाकुर (शिक्षक), डॉ. शाकीर अहमद, डॉ. अमरेंद्र कुमार,अरुण कुमार सिंह, बालकृष्ण साह, रामबरन साह (अंकेक्षक),सतीश कुमार झा, जयनारायण साह, भोला सिंह,सनोज कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह, रंजीत कुमार सिंह,विनय कुमार सिंह, महेश सिंह,अनिमेश कुमार सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे,

महाविनाश की दहलीज पर दुनिया: स्वार्थी व्यापारियों और तानाशाहों की सनक ने मानवता को किया शर्मसार, समस्तीपुर से उठी शांति की हुंकार!

समस्तीपुर | 12 अप्रैल, 2026 दुनिया आज एक ऐसे चौराहे पर खड़ी है जहाँ एक तरफ प्रगति के बड़े-बड़े दावे हैं, तो दूसरी तरफ महाविनाशकारी महायुद्ध की जलती हुई आग। सामरिक शक्ति के प्रदर्शन और वर्चस्व की इस अंधी दौड़ में मानवता कराह रही है। इसी वैश्विक संकट के बीच समस्तीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्र सेवा दल (बिहार) के प्रतिनिधि सुरेन्द्र कुमार ने एक अपील जारी कर दुनिया के वर्तमान हालातों और सत्ताधीशों की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

बाजारवाद और निरंकुश सत्ता का घातक गठजोड़

सुरेन्द्र कुमार ने अपने वक्तव्य में वैश्विक राजनीति के गिरते स्तर पर चिंता जताते हुए कहा कि आज दुनिया की लोकतांत्रिक सरकारें ‘बाजारवादी मानसिकता वाले स्वार्थी नीति-निर्धारकों‘ की कठपुतली बन चुकी हैं। उन्होंने इसके कारण पर इशारा करते हुए कहा कि सत्ता जब जनसेवा के बजाय व्यापारिक मुनाफे और साम्राज्यवादी विस्तार की सोच से ग्रस्त हो जाती है, तो वह ‘निरंकुश’ हो जाती है। आज की सरकारें हथियारों की नुमाइश को ही राष्ट्रवाद समझ बैठी हैं, जबकि हकीकत में यह महाविनाश का आमंत्रण है।

महामारी पर जीत तो तानाशाहों पर क्यों नहीं?

सुरेन्द्र कुमार ने एक तार्किक सवाल उठाते हुए कहा कि यदि विज्ञान और मानव संकल्प ने पोलियो, चेचक, हैजा और हाल ही में कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया, तो फिर हम इन ‘बेकाबू तानाशाहों’ और युद्धोन्मादी शासकों से मुक्ति पाने में अक्षम क्यों हैं? सुरेन्द्र कुमार के अनुसार, तानाशाही किसी वायरस से कम खतरनाक नहीं है, जो पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि को लील रही है।

युवा ऊर्जा: सृजन या विध्वंस?

खबर का सबसे मर्मस्पर्शी पहलू युवाओं और बच्चों की अनदेखी है। सुरेन्द्र कुमार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दुनिया की आधी आबादी युवाओं की है, लेकिन उनकी आकांक्षाएं किसी भी सरकार के एजेंडे में नहीं हैं।

  • रोजगार बनाम हथियार: सरकारों ने कभी यह नहीं पूछा कि नौजवानों को किस तरह के रोजगार की जरूरत है। उनकी असीम ऊर्जा को नवीनतम तकनीक और सृजन में लगाने के बजाय युद्ध की भट्टी में झोंका जा रहा है।
  • शोषित बचपन: जब तक दुनिया में शांति की ‘गारंटी’ नहीं होगी, तब तक हम बाल मजदूरी, बाल विवाह और बाल यौन शोषण जैसे जघन्य अपराधों को समाप्त नहीं कर पाएंगे।

वैकल्पिक मार्ग: शांति, सद्भाव और गांधीवाद

सुरेन्द्र कुमार ने विश्व के तमाम समतावादी, समाजवादी और गांधीवादी विचारधारा के लोगों से अपील की है कि वे युद्ध के उन्माद के खिलाफ एकजुट हों। उन्होंने जोर दिया कि असली ‘सामरिक प्रदर्शन’ हथियारों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षा और संरक्षण के साधन जुटाना होना चाहिए। युवाओं के लिए वैकल्पिक रोजगार की संभावनाएं तलाशना ही वह प्रार्थना है जो विश्व को महाविनाश से बचा सकती है।

बदहाली के खिलाफ सड़क पर उतरेगी भाकपा माले, ताजपुर से शुरू होगा जन-आंदोलन का बड़ा अभियान

सम्मेलन की तैयारियों को लेकर गांधी चौक पर जुटी प्रखंड कमिटी, मिशन 2026 के लिए कसी कमर

12 अप्रैल 2026| ताजपुर (समस्तीपुर) : ताजपुर प्रखंड के गांधी चौक पर रविवार को भाकपा माले प्रखंड कमिटी की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पार्टी ने सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बैठक में न केवल संगठन की मजबूती पर चर्चा हुई, बल्कि भविष्य के बड़े आंदोलनों की रूपरेखा भी तैयार की गई।

ताजपुर के गांधी चौक पर आयोजित भाकपा माले की बैठक में उपस्थित सदस्य संगठन की मजबूती एवं आगामी आंदोलनों का संकल्प लेते हुए।

जनता की समस्याओं पर सरकार को घेरने की तैयारी

बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज आम जनता महंगाई और बेरोजगारी की दोहरी मार झेल रही है। किसान और मजदूर बेहाल हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। प्रखंड कमिटी ने निर्णय लिया है कि:

  • बिजली और राशन में धांधली: बिजली आपूर्ति की अनियमितता और राशन वितरण में हो रही व्यापक गड़बड़ी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य: बदहाल सरकारी स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति सुधारने के लिए गांव-गांव में जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा।
  • पंचायत स्तर पर घेराबंदी: हर पंचायत में शाखा कमिटी को सक्रिय कर नए सदस्यों को जोड़ा जाएगा और जल्द ही प्रखंड मुख्यालय पर एक विशाल ‘हल्ला बोल‘ धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।

चुनावी और सांगठनिक एजेंडा तय

आगामी राज्य और जिला सम्मेलनों को सफल बनाने के लिए पार्टी ने समय-सारणी निर्धारित की है:

  1. 15 अप्रैल: समस्तीपुर शहर के मालगोदाम चौक स्थित जिला कार्यालय में राज्य सम्मेलन के डेलीगेट चुनाव हेतु निर्वाचक मंडल के सदस्य मतदान करेंगे।
  2. 18-19 अप्रैल: कल्याणपुर के वीरसिंगपुर में आयोजित होने वाले जिला सम्मेलन में ताजपुर से बड़ी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
  3. 16-18 मई: दरभंगा में होने वाले ऐतिहासिक राज्य सम्मेलन की सफलता के लिए घर-घर जाकर कोष संग्रह और पर्चा वितरण किया जाएगा।

इनकी रही मौजूदगी

रणनीतिक बैठक में प्रखंड के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें मुख्य रूप से ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, संजीव राय, राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर महतो, प्रभात रंजन गुप्ता, आसिफ होदा, मनोज कुमार सिंह, मो० एजाज, रंजू कुमारी, जीतेंद्र सहनी, और ललन दास शामिल थे। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि पार्टी का अगला लक्ष्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को न्याय दिलाना है।


घूसखोर मुंशी पर विजिलेंस का शिकंजा: पिस्टल लाइसेंस के नाम पर मांग रहा था रिश्वत, रंगे हाथों दबोचा!

मोतिहारी/पटना। भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में नीतीश सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ अभियान आज उस वक्त और तेज दिखा, जब निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) की टीम ने पूर्वी चम्पारण के आदापुर थाने में तैनात एक निजी मुंशी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया।

कानून के फंदे में घूसखोर: निगरानी विभाग की टीम द्वारा 14,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया आदापुर थाने का मुंशी इन्तेखाब आलम (लाल घेरे में)।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, आदापुर थाना अंतर्गत बखरी गांव के निवासी आफताब अंसारी ने हथियार के लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था। थानाध्यक्ष द्वारा सत्यापन (Verification) कराने और रिपोर्ट भेजने के एवज में थाने का निजी मुंशी इन्तेखाब आलम लगातार रुपयों की मांग कर रहा था। परेशान होकर पीड़ित ने इसकी शिकायत पटना स्थित निगरानी ब्यूरो कार्यालय में की।

जाल बिछाकर दबोचा गया आरोपी

शिकायत मिलने के बाद ब्यूरो ने मामले की गुप्त जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। इसके बाद पुलिस उपाधीक्षक गौतम कृष्ण के नेतृत्व में एक विशेष ‘धावादल’ (Raid Team) का गठन किया गया।

शनिवार (11 अप्रैल, 2026) को जैसे ही आरोपी मुंशी इन्तेखाब आलम ने आदापुर स्थित जमुनापुर चौक पर पीड़ित से 14,000 रुपये की घूस ली, वैसे ही सादे लिबास में तैनात निगरानी की टीम ने उसे दबोच लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से चौक पर हड़कंप मच गया।

मुजफ्फरपुर कोर्ट में होगी पेशी

गिरफ्तारी के बाद टीम आरोपी को लेकर पटना रवाना हो गई है। पूछताछ और कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी को मुजफ्फरपुर स्थित माननीय विशेष न्यायालय (निगरानी) में पेश किया जाएगा। ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के इस खेल में और कौन-कौन शामिल है, इसकी भी गहनता से जांच की जा रही है।


बेटियों की आबरू पर वार बर्दाश्त नहीं: नालंदा दरिंदगी के खिलाफ समस्तीपुर की सड़कों पर उतरा जनसैलाब!

समस्तीपुर | 11 अप्रैल 2026 नालंदा जिले के नूरसराय में प्रजापति समाज की महिला के साथ हुई रूह कंपा देने वाली अमानवीय घटना के विरोध में आज समस्तीपुर की सड़कें आक्रोश और न्याय की मांग से गूंज उठीं। प्रजापति समन्वय समिति के बैनर तले आयोजित इस विशाल कैंडल मार्च ने शासन और प्रशासन को कड़ा संदेश दिया है कि अब नारी सुरक्षा से समझौता स्वीकार नहीं होगा।

न्याय की लौ: नूरसराय (नालंदा) की घटना के विरोध में समस्तीपुर समाहरणालय पर कैंडल मार्च निकालते प्रजापति समन्वय समिति के सदस्य एवं आक्रोशित ग्रामीण।

समाहरणालय से शुरू हुआ आक्रोश का सफर

सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग हाथों में जलती कैंडल और इंसाफ की तख्ती लेकर समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) के गेट पर एकत्रित हुए। यहाँ से शुरू हुआ मार्च पूरे जिला मुख्यालय का भ्रमण करते हुए वापस समाहरणालय पर एक सभा में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों के नारों से पूरा वातावरण आवेशित रहा, जिसमें दोषियों को फांसी देने और मां-बहन-बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख थी।

“स्पीडी ट्रायल चलाकर दरिंदों को मिले फांसी”

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने सरकार की कानून व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए। नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा:

“नूरसराय की घटना मानवता पर कलंक है। हम मांग करते हैं कि इस मामले का स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो मिसाल बने। अगर हमारी बेटियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली, तो यह आंदोलन जिला मुख्यालय से निकलकर पूरे प्रदेश में फैलेगा।”

जिलाधिकारी को सौंपा मांगपत्र, दी चेतावनी

मार्च के समापन पर प्रदर्शनकारियों ने मौके पर उपस्थित मजिस्ट्रेट के माध्यम से जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि दोषियों पर तत्काल और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी दिनों में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

मौके पर मौजूद रहे: प्रमोद कुमार पंडित, महेंद्र पंडित, लक्ष्मी पंडित, दिलीप कुमार प्रजापति, सोहन कुमार पंडित, रामदयाल पंडित, योगेन्द्र पंडित, राजेश पंडित, सुरेंद्र पंडित, राकेश पंडित, राम प्रह्लाद पंडित, मोहन पंडित, बृजमोहन पंडित, मनोज पंडित, रामाशीष पंडित एवं भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह सहित भारी संख्या में गणमान्य लोग।


सकरा के ‘विकास पुरुष’ फकीरचंद बाबू की 29वीं पुण्यतिथि पर, याद किए गए उनके ऐतिहासिक कार्य

मुजफ्फरपुर। सकरा के पूर्व विधायक, बिहार विधानसभा के पूर्व मुख्य सचेतक और दलित-पिछड़ों की बुलंद आवाज रहे स्वर्गीय फकीरचंद राम की 29वीं पुण्यतिथि शनिवार को उनके स्मृति कार्यालय स्थित स्मारक पर श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित नेताओं और समर्थकों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

“श्रद्धांजलि: पूर्व विधायक स्व० फकीरचंद राम की 29वीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करते जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल, उमेश कुमार राम एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति।”

ईमानदारी और संघर्ष के प्रतीक थे फकीरचंद बाबू: अरविंद मुकुल

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरविंद कुमार मुकुल ने उन्हें नमन करते हुए कहा कि फकीरचंद बाबू कांग्रेस पार्टी के एक ऐसे स्तंभ थे, जिनका व्यक्तित्व ईमानदारी और मिलनसारिता की मिसाल था। उन्होंने कहा, “फकीरचंद जी ने अपना पूरा जीवन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति, दलितों और पिछड़ों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनके द्वारा किए गए संघर्ष आज भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।”

सकरा कॉलेज का सरकारीकरण: एक अविस्मरणीय उपलब्धि

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम ने फकीरचंद बाबू के योगदानों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सकरा के चौतरफा विकास के लिए उन्होंने जो कार्य किए, उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। विशेष रूप से सकरा कॉलेज के सरकारीकरण में उनकी मुख्य भूमिका ने क्षेत्र में शिक्षा की मशाल जलाई। जनहित में उनके द्वारा किए गए साहसिक कार्यों के कारण ही वे आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।

इन दिग्गजों ने अर्पित किए श्रद्धा-सुमन

पुण्यतिथि कार्यक्रम में मुख्य रूप से अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, प्रदेश कांग्रेस प्रतिनिधि अनीता देवी, श्रद्धा खुशी, शिवम कुमार, सिद्धार्थ कुमार, डॉ. मनीष यादव, मो. गुलाम मैनुद्दीन, सरोज कुमार उर्फ हरी यादव, रामचंद्र राम, मो. ज़ुबैर आलम, विश्वनाथ राम, मो. हैदर रजक, नुनू राय, लालाबाबू राम और संजय चौधरी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग व कार्यकर्ता मौजूद रहे।


मेहंदी के रंगों में निखरी छात्राओं की प्रतिभा, हथेलियों पर उकेरी कला की नई परिभाषा!

मुजफ्फरपुर। महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (MDDM) में शनिवार को कला और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कॉलेज के ब्यूटी केयर विभाग द्वारा आयोजित ‘मेहंदी प्रतियोगिता’ में छात्राओं ने अपनी सृजनात्मकता का ऐसा जादू बिखेरा कि हर कोई देखता रह गया। छात्राओं ने न केवल अपनी प्रतिभा दिखाई, बल्कि कॉलेज के शिक्षकों के हाथों पर पारंपरिक और आधुनिक डिजाइनों की मेहंदी लगाकर इस आयोजन को और भी यादगार बना दिया।

“हुनर की छाप: एमडीडीएम कॉलेज में आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता के दौरान अपनी कला का प्रदर्शन करतीं छात्राएं और उनके हुनर की सराहना करतीं प्राचार्या प्रो. अलका जयसवाल (मोबाईल लिए मध्‍य में) व अन्य शिक्षिका ।”

प्राचार्या ने बढ़ाया उत्साह : कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्राचार्या प्रो. अलका जयसवाल ने कहा कि मेहंदी केवल श्रृंगार नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध संस्कृति और कला प्रदर्शन का एक उत्तम माध्यम है। उन्होंने छात्राओं के कौशल की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य में भी इसी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इन्होंने मारी बाजी कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच निर्णायक मंडल ने विजेताओं की घोषणा की:

  • प्रथम स्थान: सोफिया परवीन
  • द्वितीय स्थान: गुंजन कुमारी एवं आरती कुमारी
  • तृतीय स्थान: नीता कुमारी एवं मुस्कान कुमारी

इनका रहा विशेष योगदान यह भव्य आयोजन ब्यूटी केयर विभाग की समन्वयक डॉ. रिंकु कुमारी के कुशल निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग की सहायक पिंकी कुमारी और ब्यूटीशियन मधु प्रिया ने अहम भूमिका निभाई। इस अवसर पर कॉलेज के कई शिक्षक और भारी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं।


महाघोटाला या महालापरवाही? मुरौल नगर पंचायत की वेबसाइट पर बारसोई का कब्जा, जनता के टैक्स और अस्मिता से सरेआम खिलवाड़!

रिर्पोट: एस. एस. कुमार ‘पंकज’

मुजफ्फरपुर (मुरौल): सरकारी फाइलों में डिजिटल इंडिया के सपने सजाए जा रहे हैं, लेकिन जमीन पर ‘डिजिटल धांधली’ का ऐसा खेल चल रहा है जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। मामला नगर पंचायत मुरौल का है, जहाँ की आधिकारिक वेबसाइट e-murol.com पर मुरौल की नहीं, बल्कि कटिहार जिले के ‘बारसोई नगर पंचायत‘ की तस्वीर चमक रही है। यह महज एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि मुरौल की जनता की अस्मिता और उनके खून-पसीने की कमाई (टैक्स) के साथ किया गया एक भद्दा मजाक है।

तस्‍वीर में नगर पंचायत मुरौल के बदले  कटिहार जिले के ‘बारसोई नगर पंचायत’ की चमकती तस्वीर, नीचे लाल इनसेट में ‘बारसोई नगर पंचायत’ की जूम इन  तस्‍वीर

लाखों की बंदरबांट, फिर भी वेबसाइट ‘उधार‘ की?

हैरानी की बात यह है कि इस वेबसाइट के नाम पर कंपनी को लाखों रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बावजूद इसके, साइट पर मुरौल की कोई पहचान नहीं दिखती। यहाँ तक कि भौगोलिक जानकारी में गलतियां भरी पड़ी हैं। वार्ड संख्या 3 के पार्षद आनंद कंद साह ने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि, “नगर पंचायत की नींव ही कमजोर है, यहाँ प्रशासक और प्रशासन दोनों पूरी तरह विफल हैं। लाखों रुपये डकारने के बाद भी वेबसाइट पर होल्डिंग टैक्स या ग्रीवांस रिड्रेसल का कोई विकल्प काम नहीं करता।”

क्या कटिहार प्रेम में डूबा है मुरौल का प्रशासन?

मुरौल के पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी वीरेंद्र राय ने एक सनसनीखेज आरोप लगाते हुए इस लापरवाही के तार सीधे कार्यपालक पदाधिकारी (EO) के ससुराल से जोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा, “पैसा मुरौल की जनता का लग रहा है और प्रचार कटिहार के बारसोई का हो रहा है। ईओ साहिबा का ससुराल कटिहार में है, इसीलिए स्ट्रीट लाइट से लेकर सीसीटीवी और वेबसाइट तक का सारा काम कटिहार की एजेंसियां ही देख रही हैं।” ### ‘सफेद झूठ‘ बोल रहीं कार्यपालक पदाधिकारी! जब इस संबंध में नगर कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से कह दिया कि उन्होंने बारसोई की तस्वीर नहीं देखी। उन्होंने इसे सिरे से नकार दिया, जबकि वेबसाइट का स्क्रीनशॉट चिल्ला-चिल्लाकर लापरवाही की गवाही दे रहा है। सवाल यह है कि एक पढ़ी-लिखी अधिकारी को अपनी ही संस्था की वेबसाइट का हाल क्यों नहीं पता? क्या यह ‘अनजान’ बने रहने का नाटक भ्रष्टाचार को ढंकने की एक कोशिश है?

न्‍यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर, तिमूल के पूर्व चेयरमैन एवं  नगर पंचायत मुरौल के पूर्व मुख्य पार्षद प्रत्याशी वीरेंद्र राय

मौन साधे ‘माननीय‘ और जनता की बेबसी

नगर पंचायत अध्यक्ष नरेश मेहता इस पूरे विवाद पर अंत-अंत तक बयान देने से बचते रहे। उनकी यह चुप्पी दर्शाती है कि वे भी इस लापरवाही में बराबर के हिस्सेदार हैं। पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार कहते हैं, “बोर्ड की बैठकों में क्या फैसले होते हैं, यह सार्वजनिक नहीं किया जाता। पारदर्शिता का घोर अभाव है और जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।”

एक नजर: संस्थान के लिए क्या है वेबसाइट का महत्व?

आज के डिजिटल युग में किसी भी सरकारी संस्थान की वेबसाइट उसका ‘डिजिटल चेहरा’ होती है। यह न केवल सूचना का केंद्र है, बल्कि जनता और सरकार के बीच संवाद का एकमात्र पारदर्शी सेतु है। जब वेबसाइट ही गलत तथ्यों और दूसरी जगह की तस्वीरों से भरी हो, तो जनता का भरोसा प्रशासन से उठना लाजमी है। एक आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ही लोग घर बैठे टैक्स जमा करते हैं और अपनी समस्याएं दर्ज कराते हैं, लेकिन मुरौल में यह ‘सेतु’ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

न्‍यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर, हकीकत बयां करते नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या चार के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार ,एवं  सामने लैपटॉप पर ‘बारसोई नगर पंचायत’ की तस्‍वीर दिखाते हुए,   

पार्षद बबलू कुमार का तीखा प्रहार: ‘यह भ्रष्टाचार का जीता-जागता नमूना है‘

इस पूरे मामले में वार्ड संख्या चार के पार्षद बबलू कुमार उर्फ दिलीप कुमार ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने इस लापरवाही को सीधे तौर पर भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा:

“मज़ाक तो सर्वदा से हो रहा है जब से नगर पंचायत बना है। और वेबसाइट जो बना है, उस पर लाखों रुपया का बंदरबांट किया गया है। वेबसाइट कंपनी को पैसा भुगतान कर दिया गया है, लेकिन वेबसाइट पर आज भी बारसोई नगर पंचायत का तस्वीर लगा हुआ है। जब हम लोग आवाज़ उठाते हैं, तो कहा जाता है कि सुधार हो जाएगा, लेकिन सुधार आज तक नहीं हुआ। यह सिर्फ और सिर्फ भ्रष्टाचार का नमूना है। जनता का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है और धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है।”

बबलू कुमार यहीं नहीं रुके, उन्होंने वेबसाइट पर दिए गए संपर्क विवरणों की पोल खोलते हुए प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी को उजागर किया। उन्होंने बताया कि सरकारी वेबसाइट पर किसी आधिकारिक कार्यालय नंबर के बजाय एक एमटीएस (MTS) कर्मी का निजी नंबर दिया गया है। पार्षद ने सवाल उठाया:

“किसी भी सरकारी वेबसाइट पर कार्यालय का आधिकारिक नंबर या टोल-फ्री नंबर होना चाहिए ताकि जनता अपनी समस्याओं को दर्ज करा सके। एक निजी कर्मी का नंबर देना यह दर्शाता है कि प्रशासन कितना गैर-जिम्मेदार है। यह केवल खानापूर्ति की जा रही है ताकि दिखाया जा सके कि वेबसाइट चल रही है। पारदर्शिता का यहाँ पूरी तरह अभाव है।”

तस्‍वीर में नगर पंचायत मुरौल के साइट पर प्रदर्शित मोबाइल नम्‍बर एवं ईमेल  

आखिर क्यों गंभीर है यह लापरवाही?

किसी भी सरकारी संस्थान के लिए वेबसाइट उसका डिजिटल हस्ताक्षर होती है। इसे ‘अस्मिता से खिलवाड़’ क्यों कहा जा रहा है, इसे इन बिन्दुओं से समझा जा सकता है:

  1. पहचान की चोरी: मुरौल की जनता का पैसा जिस पोर्टल के रखरखाव के लिए जा रहा है, वह पोर्टल किसी दूसरे जिले की नगर पंचायत का पहचान दिखा रहा है। यह स्थानीय गौरव का अपमान है।
  2. राजस्व की हानि: वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य होल्डिंग टैक्स, ट्रेड लाइसेंस और अन्य नागरिक सुविधाओं को ऑनलाइन करना होता है। जब वेबसाइट ही भ्रमित करने वाली हो, तो राजस्व संग्रह (Collection) प्रभावित होता है।
  3. सुरक्षा और डेटा: एक सरकारी वेबसाइट पर निजी कर्मियों के नंबर होना डेटा सुरक्षा और आधिकारिक प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
  4. प्रशासनिक दूरदर्शिता का अभाव: यदि अधिकारी अपनी वेबसाइट तक को मॉनिटर नहीं कर पा रहे, तो वे क्षेत्र के भौतिक विकास की निगरानी कैसे करेंगे?

कार्यपालक पदाधिकारी का ‘अनजान‘ रवैया: सवालों के घेरे में बयान

जब इस गंभीर विसंगति को लेकर नगर कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी से जवाब मांगा गया, तो उनका जवाब किसी को भी हैरान कर सकता है। उन्होंने कहा:

“नहीं, बारसोई का तो नहीं आता है। मैं तो जब भी ओपन करती हूँ तो मुरौल नगर पंचायत का ही आता है। इसके रिगार्डिंग मैं बात करती हूँ एजेंसी से। अगर ऐसा है तो उसको देखती हूँ।”

हैरानी की बात यह है कि जिस वेबसाइट को दुनिया देख रही है, जिस पर बारसोई का चित्र स्पष्ट रूप से अंकित है, उसे विभाग की मुख्य अधिकारी ने कभी ‘देखा’ ही नहीं। जब उनसे कटिहार की एजेंसी को काम देने और स्थानीय पार्षदों के असंतोष पर सवाल किया गया, तो उन्होंने संक्षिप्त में कहा:

“कटिहार की एजेंसी नहीं है। यह बिल्कुल गलत है। सारे काम नियमानुसार और पारदर्शिता के साथ ही होते हैं।”


नगर पंचायत मुरौल की कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी न्‍यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर पक्ष रखते हुए बायें से एवं अपने मातहत कर्मचारी से टैब पर साइट खुलवा कर जानकारी लेती , साथ ही के फोन पर नगर पंचायत मुरौल की वेबसाइट मेन्‍टेनेन्‍स करने वाली एजेन्‍सी से बात करती हुई

बयान बनाम हकीकत: ईओ का ‘काल्पनिक‘ डिजिटल लोक

प्रशासनिक लापरवाही का सबसे हास्यास्पद और शर्मनाक पहलू तब सामने आया जब नगर कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी ने कैमरे पर रिकॉर्डेड बयान में एक ऐसी वेबसाइट का जिक्र किया, जिसका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने आधिकारिक तौर पर ‘murol.in-nagarpalika’ नामक साइट का हवाला दिया, जबकि इंटरनेट की दुनिया में इस नाम का कोई पोर्टल मौजूद नहीं है। हकीकत यह है कि मुरौल के नाम पर दो वेबसाइटें ऑनलाइन दिख रही हैं—एक https://muraul.e-nagarpalika.com और दूसरी e-murol.com। विडंबना देखिए कि जिस e-murol.com पर ‘बारसोई नगर पंचायत’ की तस्वीरें और गलत तथ्य भरे पड़े हैं, उसे ईओ साहिबा ने ‘मुरौल की अपनी साइट’ मानने से ही इनकार कर दिया। एक जिम्मेदार पद पर बैठी अधिकारी द्वारा ऐसी ‘काल्पनिक’ वेबसाइट का नाम लेना और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध साक्ष्यों को नकारना यह साफ करता है कि नगर पंचायत मुरौल का आईटी तंत्र और प्रशासनिक नेतृत्व न केवल दिशाहीन है, बल्कि जनता को गुमराह करने में भी माहिर है। जब अधिकारी को अपनी संस्था के सही वेब एड्रेस तक का ज्ञान न हो, तो उस वेबसाइट के नाम पर होने वाले लाखों के भुगतान पर सवाल उठना लाजिमी है।


तकनीकी दिवालियापन: स्मार्ट गवर्नेंस के नाम पर ‘डिजिटल अंधेरा‘

नगर पंचायत मुरौल का यह पूरा प्रकरण केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उस ‘तकनीकी दिवालियापन‘ का प्रमाण है जो सरकारी तंत्र में दीमक की तरह लगा हुआ है। एक तरफ बिहार सरकार और केंद्र सरकार ‘स्मार्ट सिटी’ से लेकर ‘स्मार्ट पंचायत’ तक के नारे बुलंद कर रही हैं, डिजिटल भुगतान और पारदर्शी शासन के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मुरौल की हकीकत इन दावों के गाल पर एक तमाचा है।

हैरानी की बात यह है कि नगर पंचायत के सबसे जिम्मेदार पद पर बैठी कार्यपालक पदाधिकारी कल्पना कुमारी को खुद यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी जनता किस पोर्टल का उपयोग करे। कैमरे पर उन्होंने जिस ‘murol.in-nagarpalika’ का नाम लिया, वह अस्तित्वहीन है। यह स्थिति उस जनता के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है, जो अपना होल्डिंग टैक्स या अन्य सरकारी शुल्क ईमानदारी से जमा करना चाहती है। जब विभाग के मुखिया को ही ‘सही डिजिटल पते’ का ज्ञान न हो, तो आम नागरिक ठगी और भ्रम का शिकार क्यों न हो?

यह तकनीकी दिवालियापन ही है कि लाखों रुपये वेबसाइट मेंटेनेंस के नाम पर डकारे जा रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर पहचान किसी और शहर (बारसोई) की है। यह दर्शाता है कि प्रशासन के लिए ‘डिजिटल’ होने का मतलब केवल एक वेबसाइट बनवाना और भुगतान करना है, उसकी गुणवत्ता और सत्यता से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। एक पढ़े-लिखे अमले के होते हुए ऐसी अंधेरगर्दी यह साबित करती है कि मुरौल नगर पंचायत में ‘स्मार्टनेस’ केवल फाइलों तक सीमित है, जबकि हकीकत में यहाँ ‘डिजिटल अंधेरा‘ छाया हुआ है।


न्‍यूज भारत टी.वी. के कैमरे पर, हकीकत बयां करते नगर पंचायत मुरौल के वार्ड संख्या तीन के पार्षद आनंद कंद साह

पार्षद आनंद कंद साह और वीरेंद्र राय के गंभीर आरोप

वार्ड संख्या तीन के पार्षद आनंद कंद साह ने तो यहाँ तक कह दिया कि नगर पंचायत का नींव ही कमजोर है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहाँ “काला अक्षर भैंस बराबर” वाली स्थिति है। उनके अनुसार, प्रशासक और प्रशासन दोनों पूर्ण रूप से विफल हैं और उन्हें इस बात की फुर्सत नहीं है कि वे देखें कि सरकारी पोर्टल पर क्या चल रहा है।

वहीं, पूर्व प्रत्याशी वीरेंद्र राय ने सीधे तौर पर ‘कटिहार कनेक्शन’ पर ऊँगली उठाई। उन्होंने दावा किया कि मुरौल नगर पंचायत का पैसा कटिहार के लोगों और एजेंसियों को फायदा पहुँचाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है, क्योंकि कार्यपालक पदाधिकारी का ससुराल कटिहार में है। उन्होंने चुनौती दी कि ईओ साहिबा कैमरे के सामने आकर टेंडर और भुगतान का ब्योरा जनता को दें।


नगर पंचायत अध्यक्ष की चुप्पी: मौन सहमति या लाचारी?

नगर पंचायत के अध्यक्ष नरेश मेहता इस पूरे विवाद के केंद्र में होने के बावजूद मौन साधे हुए हैं। एक निर्वाचित प्रतिनिधि के नाते यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे जनता के टैक्स के पैसे का हिसाब लें। लेकिन उनका बयान देने से बचना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं इस ‘महालापरवाही’ में वे भी बराबर के हिस्सेदार हैं।


अस्मिता का सौदा: किसी और की पहचान कब तक ढोएगा मुरौल?

किसी भी क्षेत्र की अस्मिता उसके इतिहास, भूगोल और उसकी अपनी पहचान से जुड़ी होती है। लेकिन नगर पंचायत मुरौल के सरकारी पोर्टल की सूरत देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन की नजर में मुरौल की अपनी कोई विशिष्ट पहचान है ही नहीं। अपनी वेबसाइट पर किसी दूसरे नगर पंचायत (बारसोई) की तस्वीर को बेशर्मी से ढोना, केवल एक ‘अपलोड’ की गलती नहीं है, बल्कि यह मुरौल के प्रत्येक नागरिक के स्वाभिमान पर सीधी चोट है।

नगर पंचायत मुरौल के कार्यालय का एक दृश्‍य

क्या मुरौल इतना विपन्न है कि उसके पास अपनी एक तस्वीर तक नहीं? क्या यहाँ की हरियाली, यहाँ की सड़कें या यहाँ के गौरवशाली संस्थान (जैसे ढोली एग्रीकल्चर कॉलेज) इतने कमतर हैं कि उन्हें वेबसाइट पर जगह देने के बजाय कटिहार के बारसोई का सहारा लेना पड़ा? यह स्थिति दर्शाती है कि वातानुकूलित कमरों में बैठे अधिकारियों के लिए मुरौल केवल एक ‘रेवेन्यू कोड’ या ‘फाइल का नाम’ मात्र है। उनके लिए इस मिट्टी की गरिमा का कोई मूल्य नहीं है।

जब मुरौल का आम नागरिक टैक्स भरता है, तो वह बदले में केवल सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान और अपनी पहचान की सुरक्षा भी चाहता है। लेकिन जब उसे अपनी ही सरकारी वेबसाइट पर किसी दूसरे शहर का चेहरा देखना पड़ता है, तो यह ‘अस्मिता के सौदे’ जैसा प्रतीत होता है। प्रशासन का यह रवैया साफ़ संदेश देता है कि उनके लिए मुरौल की विशिष्टता और यहाँ के लोगों की भावनाएं कोई मायने नहीं रखतीं। यह मानसिक गुलामी और प्रशासनिक आलस का वह चरम है, जहाँ लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी हम अपनी पहचान तक गिरवी रख देते हैं।


यह खबर केवल एक वेबसाइट की तस्वीर बदलने की नहीं है, बल्कि उस कार्यप्रणाली को बदलने की है जहाँ जनता के पैसे को अपनी जागीर समझकर लुटाया जाता है। अगर एक पढ़ा-लिखा प्रशासनिक अमला अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर दूसरे शहर की तस्वीर नहीं पहचान पा रहा, तो यह उनकी योग्यता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।

पढ़े-लिखे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की फौज होने के बावजूद अगर ऐसी भारी चूक हो रही है, तो यह ‘काला अक्षर भैंस बराबर’ वाली कहावत को चरितार्थ करता है। क्या जिला प्रशासन इस ‘वेबसाइट घोटाले’ और कटिहार कनेक्शन की जांच कराएगा? या मुरौल की जनता इसी तरह अपनी पहचान के लिए तरसती रहेगी?

पार्षद बबलू कुमार की बातों ने स्पष्ट कर दिया है कि नगर पंचायत मुरौल में पारदर्शिता केवल कागजों तक सीमित है। अब देखना यह है कि इस रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन जागता है या मुरौल की जनता बारसोई के साये में ही ‘डिजिटल विकास’ का आनंद लेती रहेगी।


तस्‍वीर में नगर पंचायत मुरौल के वेबसाइट के स्‍क्रीन शॉट का एक  विहंगम दृश्‍य