Monday, April 13, 2026

सकरा कांग्रेस का ‘शॉर्टकट’ संग्राम: फोटो में पुतला एक, खबर में दो; नाम पूर्व प्रत्याशी का, पर चेहरा गायब!

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सकरा (मुजफ्फरपुर): राजनीति में संघर्ष अब पसीने से नहीं, बल्कि ‘पिक्सेल’ से तय होने लगा है। ताजा मामला सकरा प्रखंड कांग्रेस कमेटी का है, जहाँ ‘जनता के मुद्दों’ पर विरोध प्रदर्शन कम और ‘कैमरे’ के लिए इवेंट मैनेजमेंट ज्यादा देखने को मिला। महंगाई और रसोई गैस की किल्लत के खिलाफ आयोजित पुतला दहन कार्यक्रम ने संघर्ष के कई नए और ‘डिजिटल’ मायने पेश किए हैं।

गजब है सकरा कांग्रेस का गणित: तस्‍वीर में एक पुतले में फूंके दो-दो मंत्री!

200 मीटर का महासंग्राम!

आमतौर पर आंदोलन में मीलों पैदल चलकर नारेबाजी की जाती है, लेकिन सकरा कांग्रेस ने ऊर्जा बचाने का नया मॉडल पेश किया। पार्टी कार्यालय से निकले नेताजी लोग मात्र 200 मीटर की ‘लंबी दूरी’ तय कर आश्रम चौक पहुँचे और पुतला फूंक कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली। न कोई जोश, न कोई शोर, बस चिलचिलाती धूप में एक अदद फोटो खिंचवाने की जल्दी। शायद प्लान यह था कि जनता जाने न जाने, मीडिया में खबर छप जाए तो क्रांति सफल!

सकरा ब्‍लौक गेट (आश्रम चौक) पर पुतला दहन करते सकरा प्रखंड कांग्रेस इकाई के नेतागण

आंखों देखी और तस्वीरों की मानें तो मौके पर सिर्फ एक ही पुतला मौजूद था। लेकिन मीडिया को जो विज्ञप्ति भेजी गई, उसमें दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेट्रोलियम मंत्री, दोनों का पुतला दहन हुआ है। अब यह चमत्कार है या कलाकारी, यह तो सकरा कांग्रेस ही जाने। आश्चर्य तो तब हुआ जब जारी की गई चार तस्वीरों में एक तस्वीर किसी दूसरे ही कार्यक्रम की चिपका दी गई, जिसमें सिलेंडर का कट-आउट दिख रहा है। संघर्ष के इस ‘शॉर्टकट’ को क्या जनता के साथ ‘चार सौ बीसी’ नहीं कहा जाना चाहिए?

पुतला दहन या फोटो इवेंट? गायब नेताजी का नाम विज्ञप्ति में देख जनता हैरान।

सबसे दिलचस्प पहलू पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम का रहा। मिडिया में जारी विज्ञप्ति में उनका नाम प्रमुखता से दर्ज है, लेकिन भेजी गई किसी भी तस्वीर में उनका चेहरा ढूंढे नहीं मिल रहा। सकरा की राजनीति को जानने वाले हैरान हैं कि जिस कार्यक्रम में उमेश राम हों और वो फ्रेम के बीचों-बीच न दिखें, ऐसा मुमकिन नहीं। जब इस बाबत उनसे बात करने की कोशिश की गई, तो मुद्दे पर आते ही कॉल कट गया। क्या नेताजी ‘वर्चुअल’ तरीके से आंदोलन में शामिल थे?

हाईजैकहोती प्रखंड कांग्रेस और अंदरूनी कलह

सकरा प्रखंड अध्यक्ष का छलका दर्द— “हमारा तो नाम तक नहीं लिया जाता!” , इस पूरे ड्रामे के पीछे की कड़वी सच्चाई तब सामने आई जब प्रखंड अध्यक्ष राम सागर प्रसाद से संपर्क किया गया। पहले तो उन्होंने ‘डॉक्टर के पास होने’ का बहाना बनाकर टालना चाहा, फिर दबी जुबान में दर्द छलक ही गया। उन्होंने कहा, प्रोग्राम जिला से था, पर सारा नाम उन्हीं लोगों का रहता है, हम लोगों का नाम दिया ही नहीं जाता।” साफ है कि सकरा प्रखंड कांग्रेस के अंदर असंतोष की आग सुलग रही है। ऐसा लग रहा है जैसे संगठन को ‘हाइजैक’ कर लिया गया हो। तस्वीरों से असली चेहरों का गायब होना और कागजों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराना, शायद यही वह कारण था जिसने पिछले चुनाव में हार तय की थी और लगता है उस हार से फिलहाल कोई सबक नहीं लिया गया है।

जनता से छलावा: दूसरेशहर की फोटो लगाकर सकरा में जताया विरोध ? उपर तस्‍वीर में दिखता मिडिया में जारी विज्ञप्ति का क्‍या मायने लगााया जाय ?

मैदान में उतरीं ‘मैडम’: एमडीडीएम कॉलेज में शिक्षिकाओं ने दिखाया दम, म्यूजिकल चेयर में सुरबाला तो स्पून रेस में अर्चना ने मारी बाजी!

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मुजफ्फरपुर | कार्यालय संवाददाता शहर के प्रतिष्ठित महंत दर्शन दास महिला महाविद्यालय (एमडीडीएम) के परिसर में बुधवार को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। जो हाथ आमतौर पर ब्लैकबोर्ड पर चॉक और पेन थामते हैं, वे आज खेल के मैदान में जीत की रणनीति बनाते नजर आए। अवसर था महाविद्यालय की ‘वार्षिक क्रीड़ा प्रतियोगिता 2025-26’ का, जिसके तहत शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मियों के बीच खेल-कूद स्पर्धा का आयोजन किया गया।

रोमांचक मुकाबला: एमडीडीएम कॉलेज के हॉल में शिक्षिकाओं के बीच आयोजित ‘म्यूजिकल चेयर’ प्रतियोगिता का एक दृश्य। संगीत रुकते ही कुर्सी पाने की जद्दोजहद में शिक्षिकाओं का उत्साह देखते ही बन रहा है।

प्राचार्य ने भरा जोश, तालियों से गूंजा परिसर

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल ने शिक्षकों में ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा, “आज के दौर में खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की जरूरत है। एक स्वस्थ शिक्षक ही एक स्वस्थ समाज और ऊर्जावान छात्राओं का निर्माण कर सकता है।” प्रतियोगिता का विधिवत शुभारंभ राजनीति विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो. कुमारी सरोज ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाते हुए इसे कॉलेज की एकजुटता का प्रतीक बताया।

म्यूजिकल चेयर में सुरबाला की ‘चाल’ और स्पून रेस में अर्चना की ‘रफ्तार’

प्रतियोगिता शुरू होते ही मैदान में गजब का रोमांच देखने को मिला। सबसे ज्यादा शोर और उत्साह म्यूजिकल चेयर के दौरान दिखा। संगीत की धुन पर कुर्सियों के इर्द-गिर्द घूमती शिक्षिकाओं के बीच कांटे की टक्कर हुई, जिसमें दर्शनशास्त्र विभाग की सहायक प्राध्यापिका डा. सुरबाला वर्मा ने सबको पछाड़ते हुए प्रथम स्थान पर कब्जा जमाया। अर्थशास्त्र विभाग की डॉ. स्वाति कुमारी दूसरे और हिंदी विभाग की डॉ. रिंकु कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं।

वहीं, एकाग्रता और संतुलन की परीक्षा लेने वाली स्पून मार्बल रेस (चम्मच-गोली दौड़) में जंतु विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने बाजी मारी। इस रेस में दर्शनशास्त्र की डॉ. नेहा रानी को दूसरा और हिंदी विभाग की डॉ. नूतन कुमारी को तीसरा स्थान मिला।

सामूहिक एकता: एमडीडीएम कॉलेज, मुजफ्फरपुर में आयोजित ‘वार्षिक क्रीड़ा प्रतियोगिता 2025-26’ के शुभारंभ के अवसर पर प्राचार्य डॉ. अलका जायसवाल, प्रो. कुमारी सरोज, क्रीड़ा सचिव डॉ. राम दुलार साहनी और कॉलेज के अन्य शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी एक सामूहिक तस्वीर के लिए पोज़ देते हुए।

सुई-धागा प्रतियोगिता में दिखा हुनर

पारंपरिक और दिलचस्प सुई-धागा प्रतियोगिता में भी शिक्षिकाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। गृह विज्ञान विभाग की डॉ. सुनीता कुमारी ने सबसे पहले सुई में धागा पिरोकर अपनी फुर्ती साबित की और प्रथम स्थान प्राप्त किया। डॉ. रिंकु कुमारी ने यहाँ भी अपनी प्रतिभा दिखाई और दूसरा स्थान हासिल किया, जबकि डॉ. आशा सिंह यादव तीसरे स्थान पर रहीं।

छात्राओं ने जमकर की हूटिंग

अपनी ‘प्रोफेसर मैडम’ को सलवार  सूट और साड़ियों में मैदान पर दौड़ते देख कॉलेज की छात्राओं का उत्साह चरम पर था। छात्राओं ने तालियों और नारों से अपनी चहेती शिक्षिकाओं का हौसला बढ़ाया, साथ ही खेल के बेहतरीन पल को  छात्रायें अपने अपने मोबाईल में कैद करती दिखीं  । मौके पर क्रीड़ा सचिव डॉ. राम दुलार साहनी ने अतिथियों का स्वागत किया। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. निशि कांति, डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. प्राजंलि, डॉ. प्रियम फ्रांसिस, डॉ. मधुसूदन कुमार सहित अन्य कर्मियों की सराहनीय भूमिका रही। अंत में डॉ. मीनाक्षी कुमारी एवं डॉ. नूतन कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम का समापन किया।

पटना में अवैध गैस रिफिलिंग पर प्रशासन का शिकंजा, एक गिरफ्तार; 221 पेट्रोल पंपों की सघन जांच

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पटना | मुख्य संवाददाता राजधानी पटना में घरेलू गैस के दुरुपयोग और पेट्रोलियम पदार्थों की कालाबाजारी रोकने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधिकारी के निर्देश पर सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में अवैध गैस रिफिलिंग सेंटर पर छापेमारी कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया, वहीं जिले के 221 पेट्रोल पंपों की जांच कर सुरक्षा और शुद्धता का जायजा लिया गया।

अवैध गैस रिफिलिंग सेंटर पर छापेमारी (दायें) एवं पेट्रोल पंपों की औचक जांच करते  अधिकारी

अवैध गैस रिफिलिंग का भंडाफोड़, प्राथमिकी दर्ज

गुप्त सूचना के आधार पर जिलाधिकारी के निर्देश पर सुल्तानगंज थाना अंतर्गत शाहगंज देवी स्थान के पास एक दुकाननुमा भवन में छापेमारी की गई। मार्केटिंग ऑफिसर और थाना प्रभारी की इस संयुक्त कार्रवाई में तीन डोमेस्टिक सिलेंडर से छोटे सिलेंडरों में अवैध रूप से गैस रिफिलिंग करते हुए एक व्यक्ति को रंगे हाथ पकड़ा गया।

इस छापेमारी में एक दुकानदार को घरेलू गैस सिलेंडर से छोटे सिलेंडर में अवैध रूप से गैस भरते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार दुकानदार की पहचान गोविंद कुमार मेहता के रूप में हुई है। प्रशासन की टीम ने मौके से गैस रिफिलिंग करते हुए तीन घरेलू सिलेंडरों को जब्त किया है, जिनमें एक भरा हुआ और दो खाली सिलेंडर शामिल हैं। सुल्तानगंज थाना में दुकानदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।अभियुक्त के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और एलपीजी (आपूर्ति और वितरण विनियमन) आदेश के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

221 पेट्रोल पंपों की औचक जांच, लिया गया फीडबैक

जिलाधिकारी के आदेश पर आज जिले के 221 पेट्रोल पंपों पर सघन जांच अभियान चलाया गया। अधिकारियों ने पेट्रोल-डीजल के स्टॉक, वितरण, शुद्धता (Purity), लाइसेंस की स्थिति और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की भौतिक जांच की।

  • सत्यापन: अधिकारियों ने इस महीने प्राप्त कुल ईंधन, बिक्री और मौके पर उपलब्ध स्टॉक का मिलान किया।
  • फीडबैक: जांच के दौरान आम जनता से भी संवाद किया गया और उनकी शिकायतों व सुझावों को दर्ज किया गया।
  • कार्रवाई: सभी निरीक्षण अधिकारियों को निर्धारित प्रपत्र में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

होटल-ढाबों पर फ्लाइंग स्क्वायड की नजर

घरेलू गैस के व्यावसायिक उपयोग को रोकने के लिए जिले में फ्लाइंग स्क्वायड, सेक्टर, जोनल और सुपर जोनल दंडाधिकारियों को सक्रिय कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि होटलों, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की निरंतर जांच की जाए। यदि कहीं भी डोमेस्टिक सिलेंडर का अवैध उपयोग पाया जाता है, तो सख्त विधि-सम्मत कार्रवाई की जाए।

क्रायसि‍स मैनेजमेंट के तहत जिला टास्‍क फोर्स की बैठक में निर्देश देते जिलाधिकारी, पटना

अपर मुख्य सचिव ने किया गैस हेल्पलाइन का निरीक्षण

इसी क्रम में प्रभारी सचिव (पटना जिला)-सह-अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर ने पटना समाहरणालय स्थित जिला एलपीजी गैस हेल्पलाइन एवं नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया। उन्होंने उपभोक्ताओं द्वारा प्राप्त शिकायतों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा की और नियंत्रण कक्ष के सुचारू संचालन पर संतोष व्यक्त किया।

आम जनता को गुणवत्तापूर्ण ईंधन और निर्बाध गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संपूर्ण प्रशासनिक तंत्र सजग है। उपभोक्ताओं के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।”  — जिलाधिकारी, पटना

जनरेटर और पंपसेट लेकर पंप पर जाएं किसान? जिला प्रशासन के ‘तुगलकी’ फरमान पर भड़की माले

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समस्तीपुर: जिला प्रशासन द्वारा पेट्रोल पंपों पर डिब्बे, बोतल या गैलन में ईंधन (पेट्रोल-डीजल) देने पर लगाई गई रोक ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रशासन के इस आदेश को भाकपा माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने अव्यावहारिक और तुगलकी करार देते हुए तीखा हमला बोला है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में जिला प्रशासन, समस्तीपुर द्वारा जारी एक पत्र के माध्यम से सभी रिटेल आउटलेट संचालकों को निर्देशित किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में वाहन के अलावा किसी अन्य कंटेनर (डब्बा, बोतल, गैलन आदि) में ईंधन की आपूर्ति न की जाए। प्रशासन का तर्क है कि ईंधन की कमी की अफवाहों के चलते विधि-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

प्रतीकात्‍मक (काल्‍पनिक ) तस्‍वीर : क्‍या अब आदेश के बाद यह स्थिति देखना पड़ेगा  

यह कमाल का आदेश है! अगर डब्बा-बोतल-गैलन में डीजल-पेट्रोल नहीं मिलेगा, तो क्या लोग अपना भारी-भरकम जेनरेटर या खेती का पम्पिंग सेट कंधे पर लादकर पेट्रोल पंप पर जाएंगे?”सुरेंद्र प्रसाद सिंह, माले नेता


आदेश पर उठे गंभीर सवाल

माले नेता ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आदेश जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है। इस फरमान से सबसे ज्यादा प्रभावित निम्नलिखित वर्ग होंगे:

  • किसान: सिंचाई के लिए पंपसेट चलाने हेतु डीजल की जरूरत होती है। पंपसेट को खेत से उखाड़कर पंप तक ले जाना असंभव है।
  • छोटे व्यवसायी: दुकानों और संस्थानों में पावर बैकअप के लिए जेनरेटर का इस्तेमाल होता है, जिनमें ईंधन गैलन के जरिए ही भरा जाता है।
  • आम नागरिक: शादी-ब्याह या अन्य आयोजनों में बिजली कटने पर जेनरेटर ही एकमात्र सहारा होता है।

अफवाह रोकने के नाम पर अव्यवस्था

प्रशासन का कहना है कि राज्य में ईंधन का पर्याप्त भंडार है और यह पाबंदी केवल ‘पैनिक बाइंग’ और अफवाहों को रोकने के लिए लगाई गई है। लेकिन जानकारों का मानना है कि ऐसे प्रतिबंधों से जनता में और भी अधिक डर (पैनिक) पैदा होता है।

एक ओर सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और किसान कल्याण की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे प्रतिबंधात्मक आदेश आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर देते हैं। अब देखना यह है कि विरोध के बाद क्या जिला प्रशासन इस आदेश में कोई संशोधन करता है या किसान अपनी मशीनों को पंप तक खींचने पर मजबूर होंगे।

नाम का नगर पंचायत, काम में ‘देहाती’ सुस्ती: सकरा की जनता के साथ शहरी टैक्स पर ‘ग्रामीण’ सुविधा का धोखा

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नाम का ‘नगर’, व्यवस्था ‘लाचार’: सकरा नगर पंचायत में शहरी सुविधाओं पर ग्रहण

सकरा (मुजफ्फरपुर): सरकार ने सकरा को नगर पंचायत का दर्जा तो दे दिया, लेकिन यहाँ की सुविधाओं को ‘शहरी’ चश्मा पहनाना भूल गई। स्थिति यह है कि सकरा की जनता कागजों पर तो शहरवासी बन गई है और शहरी दरों पर टैक्स का बोझ भी ढो रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर आज भी उनके साथ ग्रामीणों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है रसोई गैस की रिफिलिंग में होने वाली धांधली।


’25 दिनके हक पर ’45 दिनकी मार

नियमों के मुताबिक, शहरी क्षेत्र (नगर पंचायत) में गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि 25 दिन होनी चाहिए। लेकिन सकरा नगर पंचायत के निवासियों को 45 दिन का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब जनता से टैक्स शहरी लिया जा रहा है, तो उन्हें 45 दिनों वाले ग्रामीण सिस्टम में क्यों झोंका गया है?

एजेंसी का तर्क: “हवा में है नगर पंचायत का दर्जा”

जब ‘सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी’ के प्रोपराइटर संतोष राम से इस देरी पर सवाल किया गया, तो उनके जवाब ने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने स्पष्ट कहा:

हमे IOCL (इंडियन ऑयल) से अब तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है कि सकरा को शहरी क्षेत्र मानकर 25 दिन की समय सीमा लागू की जाए। जब तक प्रशासन या विभाग पत्र नहीं देता, हम इसे ग्रामीण क्षेत्र ही मानेंगे। अभी तो हालात इतने असामान्य हैं कि हम होम डिलीवरी तक नहीं दे पा रहे।”

एजेंसी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

तस्‍वीर में जानकारी देते ‘सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी’ के प्रोपराइटर संतोष राम

चिराग तले अंधेरा: नगर के बीचों-बीच रहकर भी नियमों से बेखबर

हैरानी की बात तो यह है कि सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी का मुख्य कार्यालय कहीं दूर नहीं, बल्कि स्वयं सकरा नगर पंचायत क्षेत्र की सीमाओं के भीतर ही स्थित है। एजेंसी के संचालक और कर्मचारी प्रतिदिन इसी नगर की सड़कों से गुजरते हैं, यहीं के संसाधनों का उपयोग करते हैं, लेकिन जब बात यहाँ के उपभोक्ताओं को शहरी सुविधा देने की आती है, तो ‘अभिलेखों और सूचनाओं के अभाव’ का बहाना थमा दिया जाता है। यह जानते हुए भी कि एजेंसी शहरी क्षेत्र में अवस्थित है, उपभोक्ताओं को ग्रामीण क्षेत्र के कोटे (45 दिन) में धकेलना न केवल प्रशासनिक अनदेखी है, बल्कि नगर पंचायत की अस्मिता के साथ एक भद्दा मजाक भी है। आखिर अपनी आंखों के सामने हो रहे इस बदलाव को एजेंसी प्रबंधन और विभाग क्यों अनदेखा कर रहा है?

सिस्टम पर चोट: टैक्स वसूली में तेजी, सुविधा देने में पैरालाइसिस

यह सिर्फ गैस की समस्या नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता है।

  • सवाल 1: क्या IOCL और जिला प्रशासन को यह नहीं पता कि सकरा अब नगर पंचायत है?
  • सवाल 2: क्या अधिकारियों को केवल टैक्स वसूलने के लिए नगर पंचायत की याद आती है?
  • सवाल 3: आम जनता इस विभागीय सुस्ती की सजा आखिर कब तक भुगतेगी?

उपाध्यक्ष ने दिया आश्वासन, अब कार्रवाई का इंतजार

इस गंभीर मुद्दे पर नगर पंचायत सकरा के उपाध्यक्ष रणवीर कुमार सिंह ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने ‘न्यूज़ भारत टीवी’ के स्‍थानीय संवाददाता से बातचीत में कहा कि वह कार्यपालक पदाधिकारी को इस स्थिति से अवगत कराकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही गैस एजेंसी और IOCL के वरीय अधिकारियों को पत्र जारी किया जाएगा ताकि नगर पंचााायत सकरा की तजनता को 25 दिन में गैस मिल सके।  

वैसे सकरा की जनता अब आश्वासनों से ऊब चुकी है। यदि नगर पंचायत का दर्जा केवल कागजों और टैक्स वसूली तक सीमित रहा, तो आने वाले दिनों में प्रशासन को जनता के उग्र आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है।

सकरा की सिसकती रसोई: सैकड़ों घरों में नहीं जला चूल्हा, चूरा-दालबूट पर कट रहे दिन

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सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी की मनमानी और अमानवीयता की इंतहा; धूप में बेहोश हुईं महिलाएं, कर्मचारी संजीत कुमार की गुंडागर्दी से आक्रोश

रिपोर्ट : एस. एस. कुमार ‘पंकज’

सकरा (मुजफ्फरपुर): मुजफ्फरपुर के सकरा क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस के लिए हाहाकार मचा है। सुजावलपुर चौक स्थित सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी की घोर लापरवाही ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। मंगलवार को इस एजेंसी के कारण सैकड़ों घरों में चूल्हा नहीं जल सका। छोटे बच्चे और बुजुर्ग चूरा-दालबूट खाकर दिन काटने को मजबूर हैं। एजेंसी पर होम डिलीवरी सेवा पूरी तरह ध्वस्त है और उपभोक्ता 20-20 दिनों से बुकिंग कराकर दर-दर भटक रहे हैं।

भीषण गर्मी में अमानवीयता: दो महिलाएं हुईं बेहोश

मंगलवार का नजारा हृदय विदारक था। गैस की किल्लत ऐसी कि 80 वर्ष की बुजुर्ग महिलाएं सुबह 5 बजे से ही कतार में खड़ी थीं। दोपहर 3 बजे तक चिलचिलाती धूप में डटे रहने के बाद भी जब गैस नहीं मिली, तो उपभोक्ताओं का सब्र जवाब दे गया। प्यास और गर्मी के कारण दो महिलाएं कतार में ही बेहोश होकर गिर पड़ीं, लेकिन पत्थरदिल एजेंसी संचालक ने शटर तक नहीं उठाया।

तस्‍वीर में कार्यालय का शटर बन्‍द , लोग पैनिक होने को मजबूर  

रिकॉर्ड में हेराफेरी का बड़ा खेल: 47 दिनों से गैस मिलने का इंतज़ार

सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी की घोर लापरवाही और डेटा में जानबूझकर की जा रही गड़बड़ी का सबसे बड़ा प्रमाण उपभोक्ता संख्या- 7594776641 के मामले में सामने आया है। इस उपभोक्ता ने पिछली बार 5 फरवरी को गैस रिफिल ली थी, जिसकी स्पष्ट प्रविष्टि (Entry) उनके पासबुक पर दर्ज है। नियमानुसार पर्याप्त समय बीत जाने के बाद नई बुकिंग होनी चाहिए, लेकिन एजेंसी के सिस्टम में जानबूझकर 11 फरवरी ( कभी 14 फरवरी)  को गैस का उठाव दिखाया जा रहा है। इस जानबूझकर की गई हेराफेरी के कारण पिछले 47 दिनों से उपभोक्ता का नया सिलेंडर बुक नहीं हो पा रहा है। उपभोक्ता का आरोप है कि एजेंसी पैनिक क्रिएट करने और अवैध लाभ कमाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड के साथ यह खिलवाड़ कर रही है, जिससे उनके घर में भोजन पकाने का संकट खड़ा हो गया है।

गैस की समस्‍या से जुड़ी खबर :-नाम का नगर पंचायत, काम में ‘देहाती’ सुस्ती: सकरा की जनता के साथ शहरी टैक्स पर ‘ग्रामीण’ सुविधा का धोखा, इसे जरूर पढ़े , सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी के प्रोपराइटर ने क्‍या कहा , नीचे इसी खबर के बॉक्‍स पर क्लिक करें –

पीड़ित उपभोक्ताओं की जुबानी: गैस नहीं, जिल्लत मिल रही है‘, पीड़ित उपभोक्ताओं की जुबानी (मौके से सीधा बयान)

एजेंसी पर उमड़ी भीड़ और व्यवस्था की पोल खोलते हुए उपभोक्ताओं ने पत्रकार के सामने अपना दर्द बयां किया। दिलीप कुमार चंदू (महद्दीपुर) ने बताया, “भोर के 3 बजे से लाइन में लगे हैं, कोई सही समय बताने वाला नहीं है कि गैस मिलेगी या नहीं।” वहीं मझौलिया से आए मोहम्मद इम्तियाज आलम ने कहा, “6-7 घंटे लाइन में लगने के बाद भी गैस नसीब नहीं हो रही, 45 दिन बीतने पर भी खाली हाथ हैं।” सादुल्लापुर चंदनपट्टी के मोहम्मद नौशाद ने व्यवस्था पर चोट करते हुए कहा, “सुबह 5 बजे से खड़े हैं, तीन महीने से गैस नहीं मिल रही, बस आज-कल दौड़ाया जा रहा है।” चम्पापुर अगरैल की सुधा देवी ने तंज कसते हुए कहा, “महिलाओं को सुविधा देने के नाम पर अब इतनी दिक्कत दी जा रही है कि गाड़ी भाड़ा लगा कर आने पर भी काम नहीं हो रहा।” सबसे मार्मिक स्थिति नरसिंहपुर की 80 वर्षीय बुजुर्ग पचास कुमारी देवी की दिखी, जिन्होंने रुआंसे मन से कहा, “रिजर्व गाड़ी करके गैस लेने आए हैं, 10 बजे से खड़े हैं पर गेट खोलते ही फिर बंद कर दिया जाता है; कार्तिक महीने के बाद से अब तक गैस नहीं मिली है।”

तस्‍वीर में खिड़की पर दाहिने से खड़ा खुद को आई ओ सी एल का  कथित अधिकारी बताकर  धौंस दिखाता  संजीत कुमार  

कर्मचारी संजीत कुमार की गुंडागर्दीऔर कथित धौंस

एजेंसी की कार्यसंस्कृति पर सवाल उठाते हुए लोगों ने बताया कि मुख्य शटर बंद कर बगल की खिड़की से तानाशाही चलाई जा रही है। खिड़की पर खड़ा संजीत कुमार नामक कर्मचारी उपभोक्ताओं से ‘रैयत’ (गुलाम) जैसा व्यवहार कर रहा है। वह खुद को इंडेन का बड़ा अधिकारी बताकर लोगों पर धौंस जमाता है। जांच में पता चला कि वह मूल रूप से डिहुली स्थित मंशा गैस एजेंसी का कर्मी है, जो यहाँ आकर उपभोक्ताओं को प्रताड़ित कर रहा है। वह सरेआम लोगों को तंज कसते हुए एक स्‍थानीय सोशल मिडिया का नाम लेकर (न्‍यूज भारत टीवी नहीं) चुनौती दे रहा था कि किसी मीडिया को बुला लो, काम नहीं होगा।”

गैस के लिए खड़े आक्रोशित लोगो को समझाती सकरा थाना पुलिस के गश्‍ती दल के अधिकारी

NH-28 पर मंडरा रहा है विधि-व्यवस्था का संकट

एजेंसी एनएच-28 के बिल्कुल सटीक स्थित है। कर्मचारियों के अभद्र व्यवहार से गुस्साए लोग सड़क जाम करने और उग्र प्रदर्शन की तैयारी में थे। गनीमत रही कि उसी समय सकरा थाना की गश्ती गाड़ी पहुँच गई, जिससे लोग थोड़े शांत हुए। यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो यहाँ कभी भी बड़ा जनाक्रोश भड़क सकता है और हाईवे जाम होने से विधि-व्यवस्था बिगड़ सकती है।

एक ही क्षेत्र, दो अलग तस्वीरें

हैरानी की बात यह है कि इसी एजेंसी से मात्र पौन किलोमीटर दूर माँ लक्ष्मी एचपी गैस (सरमस्तपुर) में स्थिति बिल्कुल सामान्य है। वहां उपभोक्ताओं को कुर्सी पर बैठाकर सम्मान के साथ गैस दी जा रही है। वहां के कर्मी कुणाल कुमार ने बताया कि उनके पास पर्याप्त स्टॉक है और बुकिंग के आधार पर 45 दिनों के भीतर रिफिल आसानी से दी जा रही है।

माँ लक्ष्मी एचपी गैस (सरमस्तपुर) में उपभोक्ता को कार्यालय के अन्‍दर बिठा कर समस्‍या का समाधान करते कर्मी

जब पड़ोस की एजेंसी बेहतर सेवा दे रही है, तो सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी में ‘सर्वर डाउन’ और ‘स्टॉक खत्म’ का ड्रामा क्यों? क्या विभाग के अधिकारी इस मिलीभगत और रिकॉर्ड की हेराफेरी की जांच करेंगे, या गरीब जनता यूँ ही जिल्लत सहती रहेगी?

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को जन्मदिन की बधाई, कांग्रेस नेताओं ने दी शुभकामनाएं

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नई दिल्ली/निज प्रतिनिधि । लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती मीरा कुमार का जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनसे मुलाकात कर उन्हें पुष्प गुच्छ भेंट किए और उनके दीर्घायु होने की कामना की।

वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति

जन्मदिन के इस पावन अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य और सकरा (सु०) विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस महागठबंधन के पूर्व प्रत्याशी उमेश कुमार राम ने मीरा कुमार से भेंट की। उन्होंने पुष्प गुच्छ भेंट कर उन्हें हार्दिक बधाई दी। इस दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अंशुल अभिजीत भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

राजनीतिक गलियारों में शुभकामनाओं का दौर

मुलाकात के दौरान उमेश कुमार राम ने कहा कि मीरा कुमार जी का व्यक्तित्व और सामाजिक न्याय के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने भारतीय राजनीति और संसदीय परंपराओं को जो ऊँचाई दी है, वह अतुलनीय है।

तस्वीरों में नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण वातावरण देखा गया, जहाँ डॉ. अंशुल अभिजीत और उमेश कुमार राम ने पूर्व स्पीकर के साथ भविष्य की राजनीति और पार्टी की मजबूती पर भी संक्षिप्त चर्चा की। सोशल मीडिया पर भी सुबह से ही कांग्रेस समर्थकों और प्रबुद्ध जनों द्वारा मीरा कुमार को जन्मदिन की बधाई देने का तांता लगा रहा।

 अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ की हुंकार: “सत्ता के चारों स्तंभों में चाहिए 90% भागीदारी”

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पटना। अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ (रजि.) की राज्य कार्यकारिणी बैठक सह संवाददाता सम्मेलन का आयोजन पटना स्थित केंद्रीय कार्यालय में किया गया। इस बैठक में पिछड़ों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा हेतु “संपूर्ण आरक्षण क्रांति” का बिगुल फूँका गया।

90% आबादी, 90% भागीदारी का नारा

सम्मेलन को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने ओजस्वी शैली में अमर शहीद जगदेव प्रसाद के नारों को दोहराया। उन्होंने कहा कि “100 में 90 शोषित हैं, 90 भाग हमारा है।” संघ के नेताओं ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और राष्ट्रीय मीडिया के साथ-साथ निजी क्षेत्रों में भी पिछड़ों की 90% हिस्सेदारी सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने इसे “आजादी की दूसरी लड़ाई” करार देते हुए कहा कि पहली पीढ़ी ने संघर्ष किया, दूसरी जेल गई, तीसरी राज कर रही है और अब चौथी पीढ़ी आरक्षण विरोधियों को करारा जवाब देगी।

संतोष कुशवाहा और शशि गुप्ता ने भरी हुंकार

संगठन की मजबूती और आगामी रणनीति पर चर्चा करते हुए संतोष कुशवाहा और शशि गुप्ता के नामों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। संतोष कुशवाहा ने कहा कि अब समय आ गया है जब हमें घर-घर जाकर हर व्यक्ति को जगाना होगा। वहीं शशि गुप्ता ने संगठन के विस्तार और महिलाओं की भागीदारी पर जोर देते हुए कहा कि पिछड़ा समाज अब अपने मान-सम्मान और अधिकारों के लिए किसी भी हद तक संघर्ष करने को तैयार है।

अनिल कुमार अकेला का सक्रिय सहयोग

कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार अकेला की भूमिका भी सराहनीय रही। उन्होंने जोर देकर कहा कि संगठन 1947 से सक्रिय है, लेकिन अब इसे एक नए जन-आंदोलन का रूप देने की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांधी मैदान से लेकर बिहार के गांव-गांव तक इस लड़ाई को ले जाएं।

मुख्य मांगें और भावी रणनीति

  • निजी क्षेत्र में आरक्षण: सरकारी नौकरियों के साथ-साथ प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की मांग।
  • जागरूकता अभियान: बिहार के प्रत्येक जिले और प्रखंड स्तर पर कार्यकारिणी का गठन।
  • संवैधानिक अधिकार: SC, ST, OBC और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के प्रति सजगता।

इस अवसर पर नवनियुक्त पदाधिकारियों का स्वागत बुके और माला पहनाकर किया गया। कार्यक्रम में संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित कई गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में सामाजिक न्याय की लड़ाई को तेज करने का संकल्प लिया।

बैठक में मुख्य रूप से डॉ. अम्बेडकर व त्यागमुर्ति चन्दापुरी के पदचिन्हों पर चलने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर मुख्‍य अतिथि अरूण कुशवाहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष  इन्द्र कुमार सिंह चन्दापुरी, दिगविजय कुमार दिवाकर, (प्रदेश अध्यक्ष),पलटन सिंह (संघ प्रदेश उपाध्यक्ष),लाल मोहन सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष), शान्ति सााह, जैसे प्रमुख नेताओं ने भी अपने विचार रखे और संगठन को धार देने की बात कही।

केस डायरी से नाम हटाने के बदले रिश्वत लेते पातेपुर का दारोगा गिरफ्तार

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बड़ी कार्रवाई: निगरानी ब्यूरो ने भागलपुर में भी स्टेनो और लिपिक को 70 हजार लेते दबोचा, एक ही दिन में तीन गिरफ्तार

पटना/वैशाली/भागलपुर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। ब्यूरो की टीम ने वैशाली जिले के पातेपुर थाने में तैनात एक पुलिस अवर निरीक्षक (SI) को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। वहीं, एक अन्य कार्रवाई में भागलपुर से दो कर्मियों को भी घूस लेते पकड़ा गया है।

निगरानी के गिरफ्त में स्टेनो प्रेम कुमार और लिपिक मयंक कुमार बायें से,  एवं तस्‍वीर के दाहिने पातेपुर थाने  के पु०अ०नि० अखिलेश कुमार सिंह ,  सभी लाल घेरे में

पातेपुर में जाल बिछाकर धरा गया दारोगा

निगरानी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वैशाली जिले के पातेपुर थाने में तैनात पु०अ०नि० अखिलेश कुमार सिंह को 15,000 रुपये रिश्वत लेते हुए थाना परिसर से ही गिरफ्तार किया गया।

क्या है पूरा मामला? परिवादी चंदन कुमार (पिता स्व. बहादुर पासवान) ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी कि दारोगा अखिलेश कुमार सिंह केस डायरी में मदद करने और अभियुक्त का नाम निकालने के एवज में रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत के सत्यापन के बाद पुलिस उपाधीक्षक सतेन्द्र राम के नेतृत्व में एक धावा दल का गठन किया गया, जिसने सोमवार को जाल बिछाकर दारोगा को रंगे हाथों धर दबोचा।


भागलपुर में स्टेनो और क्लर्क पर भी गिरी गाज

निगरानी की दूसरी टीम ने भागलपुर जिले में बड़ी सफलता हासिल की। सदर अनुमंडल कार्यालय में तैनात स्टेनो प्रेम कुमार और लिपिक मयंक कुमार को 70,000 रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए उनके कार्यालय कक्ष से गिरफ्तार किया गया।

इन दोनों पर आरोप था कि इन्होंने परिवादी अभिजीत कुमार (प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, नाथनगर) से उनकी सेवा संपुष्टि संबंधी फाइल को आगे विभाग में भेजने के बदले रिश्वत मांगी थी। डीएसपी विन्ध्याचल प्रसाद के नेतृत्व वाली टीम ने यह गिरफ्तारी सुनिश्चित की।


2026 में अब तक 29 आरोपी गिरफ्तार

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक कुल 37 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस अभियान में अब तक कुल 29 अभियुक्तों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से 10,29,000 रुपये की बरामदगी की गई है।

निगरानी की अपील: ब्यूरो ने जनता से अपील की है कि यदि कोई भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो तुरंत निगरानी के हेल्पलाइन नंबरों 0612-2215344 या व्हाट्सएप नंबर 9473494167 पर शिकायत दर्ज कराएं।

रात भर थाने के चक्कर काटते रहे पिता, सुबह चौर में मिली बेटी की लाश

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सकरा (मुजफ्फरपुर)। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के सकरा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। भटंडी गांव की 18 वर्षीय जोया परवीन, जो रविवार शाम से लापता थी, उसका शव सोमवार सुबह बेझा गांव के एक सुनसान चौर (मैदानी इलाके) में बरामद हुआ। इस घटना ने पुलिस की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बेझा गांव में घटना की जानकारी के बाद लोगो की उमड़ी भीड़, एवं  दाहिने की तस्‍वीर में  तहकीकात करती सकरा थाना की पुलिस   

सुबह आना” कहकर पिता को लौटाया

मृतिका के पिता मोहम्मद जसीम ने बताया कि उनकी बेटी रविवार शाम करीब 4:45 बजे से लापता थी। काफी खोजबीन के बाद जब वह नहीं मिली, तो परेशान पिता रात करीब 9:00 बजे सकरा थाने पहुंचे ताकि पुलिस की मदद ली जा सके। आरोप है कि पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने या खोजबीन शुरू करने के बजाय पिता को रात भर इंतजार करने और सुबह फोटो के साथ आवेदन देने की बात कहकर वापस भेज दिया।

बेबस पिता पूरी रात बेटी की सलामती की दुआ मांगते रहे, लेकिन सुबह 8:45 बजे एक अनजान संदेश ने उनकी दुनिया उजाड़ दी। संदेश पाकर जब वे बेझा चौर पहुंचे, तो वहां उनकी मंझली बेटी जोया का शव पड़ा मिला।

FSL और डॉग स्क्वायड की जांच

घटना की सूचना के बाद पुलिस महकमे में हलचल तेज हुई। आनन-फानन में FSL (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) की टीम को बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। अपराधियों का सुराग लगाने के लिए डॉग स्क्वायड की भी मदद ली गई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

पिता ने नकारा तनाव का दावा, लगाया हत्या का आरोप

शुरुआती चर्चाओं में यह बात उठी कि इंटर की परीक्षा (अंग्रेजी विषय) में कम अंक आने के कारण छात्रा तनाव में हो सकती है। हालांकि, पिता मोहम्मद जसीम ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जोया किसी तनाव में नहीं थी, बल्कि उसके साथ ‘अन्याय और अत्याचार’ हुआ है। परिवार का मानना है कि जोया की हत्या की गई है।

पुलिस का पक्ष

मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (पूर्वी-02) मनोज कुमार सिंह ने बताया:

“सकरा थाना अंतर्गत बेझा गांव का एक चौर है जहाँ पर एक लड़की की डेड बॉडी यहाँ पर बरामद हुई है चौर में। प्रथम दृष्टया तो उसका पहचान नहीं हो पाया, तो उनको पोस्टमार्टम में भेज दिया गया है। साथ ही साथ एफएसएल की टीम द्वारा भी यहाँ का साक्ष्य संकलन किया गया है, डॉग स्क्वायड को भी बुलाया गया था और ये पहचान लड़की की हो गई है, वो भटंडी गाँव की ही एक व्यक्ति है जसीम उनकी पुत्री है जो कल से ही लापता थी। और अब सभी बिंदुओं पर छानबीन की जा रही है।”

गांव में मातम और आक्रोश

जोया अपने चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थी। उसकी मौत की खबर फैलते ही भटंडी गांव में मातम पसर गया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि यदि पुलिस रात में ही सक्रियता दिखाती, तो शायद परिणाम कुछ और होता। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत की असल वजह साफ हो सके।