ताजपुर/समस्तीपुर | 6 अप्रैल 2026 | भाकपा माले के आगामी 18-19 अप्रैल को कल्याणपुर के वीरसिंहपुर स्थित चंदा विवाह भवन में आहूत होने वाले जिला सम्मेलन को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सम्मेलन की तैयारियों के तहत डेलीगेट चयन प्रक्रिया के लिए रविवार को नामांकन का कार्य संपन्न हुआ, जिसमें पार्टी के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं समेत कुल 21 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।
प्रमुख उम्मीदवारों ने पेश की दावेदारी नामांकन करने वालों में किसान नेता ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह, मनोज कुमार सिंह, संजीव राय, ललन दास, मुंशीलाल राय; मजदूर नेता प्रभात रंजन गुप्ता, शंकर महतो; छात्र नेता जीतेंद्र सहनी; युवा नेता मो० एजाज, मो० शाद, मो० क्यूम; फुटपाथी दुकानदार नेता मो० अबुबकर, मनोज साह, मो० गुलाब, मुकेश कुमार गुप्ता; तथा आशा एवं रसोईया संघ की रंजू कुमारी, रेखा कुमारी, सविता सिंह एवं ऐपवा नेत्री सुलेखा कुमारी और नीलम देवी आदि शामिल हैं। ताजपुर स्थित शंकर टॉकीज रोड के फलमंडी स्थित अस्थायी चुनाव कार्यालय में नामांकन के दौरान कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह देखा गया।
संगठन को मजबूती देने और आंदोलन की रूपरेखा पर होगा मंथन प्रखंड निर्वाचन पदाधिकारी सह प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने बताया कि यह जिला सम्मेलन संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर गहन विचार-विमर्श करने और आगामी आंदोलनों की रूपरेखा तैयार करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में किसान, मजदूर, छात्र और आम जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
शांतिपूर्ण रही नामांकन प्रक्रिया नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। जिला पर्यवेक्षक लोकेश राज की उपस्थिति में अब नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी, जिसके बाद तय प्रक्रिया के तहत डेलीगेट का चुनाव कराया जाएगा। सम्मेलन को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए पार्टी की ओर से विभिन्न स्तरों पर बैठकों का दौर जारी है और कार्यकर्ताओं को विशेष जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।
उजियारपुर (समस्तीपुर): जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, अख्तियारपुर की ओर से उजियारपुर प्रखंड के परोरिया गांव में बच्चों के बीच पोषण सामग्री (ग्लूकोज) का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्था ने बच्चों के पोषण और उनके बेहतर भविष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।
समान समाज के निर्माण का संकल्प संस्था के प्रतिनिधि बलराम चौरसिया ने बताया कि जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र एक समर्पित सामाजिक संस्था है, जो बच्चों की शिक्षा और उनके संरक्षण के लिए निरंतर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जहाँ सभी को समान अवसर मिलें और हर बच्चा खुशहाल बचपन जी सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्था आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तक पोषण पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहती है।
शिक्षा से ही संभव है विकास कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए अवकाश प्राप्त पंचायत सचिव रामचंद्र पासवान ने संस्था के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “काफी समय से मेरा आग्रह था कि उजियारपुर क्षेत्र में भी संस्था का सहयोग मिले, जो आज फलीभूत हुआ है।” उन्होंने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए शिक्षा को विकास की मुख्य कुंजी बताया। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुरीतियों से बच्चों को बचाएं और उन्हें स्कूल भेजें, ताकि संस्था का सपना साकार हो सके।
बाल अधिकारों के प्रति किया जागरूक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सह आरपीएफ जवान जितेंद्र कुमार पासवान ने संस्था के कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बाल अधिकार तभी सुरक्षित हो सकते हैं जब बच्चे शिक्षित हों। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को बेहतर संस्कार देने और उन्हें शिक्षा के प्रति जागरूक करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। धन्यवाद ज्ञापन रविन्द्र पासवान ने किया। इस अवसर पर शम्भू पासवान, उत्तम पासवान, लखिन्दर पासवान, राजा कुमार, राहुल रौशन, कामिनी कुमारी, महिन्द्र पासवान, सुबोध कुमार साह, निधि कुमारी और राधा कुमारी सहित सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।
पटना: ऑल इंडिया रविदास जागरण महासभा के अध्यक्ष उमेश कुमार राम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय बाबू जगजीवन राम को मरणोपरांत देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग की है।
राष्ट्र निर्माण में ‘बाबूजी‘ का योगदान अद्वितीय प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में उमेश कुमार राम ने कहा कि बाबू जगजीवन राम का राष्ट्र निर्माण में अविस्मरणीय योगदान रहा है। उन्होंने न केवल देश की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि स्वतंत्र भारत के रक्षा मंत्री के रूप में 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में भारत को विजय दिलाने और कृषि मंत्री के रूप में ‘हरित क्रांति’ को सफल बनाने में निर्णायक नेतृत्व प्रदान किया।
सामाजिक न्याय के प्रबल पक्षधर थे बाबूजी उमेश कुमार राम ने इस बात पर जोर दिया कि बाबूजी ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित कर दिया था। एक समतामूलक समाज की स्थापना करना उनका मुख्य उद्देश्य था। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि सार्वजनिक जीवन में इतने लंबे और निष्कलंक कार्यकाल के बावजूद, उन्हें अब तक ‘भारत रत्न’ से अलंकृत नहीं किया जाना देश के वंचित समाज के लिए अत्यंत दुख का विषय है।
सरकार से ऐतिहासिक निर्णय की अपील अध्यक्ष उमेश कुमार राम ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि बाबू जगजीवन राम के ऐतिहासिक योगदान और देश के करोड़ों शोषित व पिछड़े वर्गों की अटूट श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए, उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ देने का निर्णय लें। उन्होंने कहा कि यह निर्णय न केवल बाबूजी के प्रति एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी, बल्कि यह देश में सामाजिक समरसता के संदेश को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।
समस्तीपुर | 5 अप्रैल, 2026|शहर के निजी विद्यालयों द्वारा किताबों, कॉपियों और यूनिफॉर्म के नाम पर की जा रही कथित कमीशनखोरी और अवैध वसूली के खिलाफ रविवार को ‘नागरिक समाज’ ने बिगुल फूंक दिया। नागरिक समाज के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने शहर में विरोध मार्च निकाला और समाहरणालय पर प्रदर्शन कर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की।
स्टेडियम गोलंबर से समाहरणालय तक गूंजे नारे
रविवार सुबह नागरिक समाज से जुड़े कार्यकर्ता और अभिभावक स्थानीय स्टेडियम गोलंबर पर एकत्रित हुए। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। यह विरोध मार्च शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होता हुआ समाहरणालय पहुंचा, जहां यह एक सभा में तब्दील हो गया। सभा की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सैनिक और नागरिक समाज के संयोजक रामबली सिंह ने की।
“एक देश, एक शिक्षा नीति तो किताबें अलग क्यों?”
सभा को संबोधित करते हुए समाजसेवी व मानवाधिकार कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने स्कूल प्रबंधनों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा:
“निजी स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर दबाव बनाकर स्कूल से ही ऊंचे दामों पर सामग्री खरीदने को मजबूर करते हैं या चुनिंदा दुकानों को निर्धारित करते हैं। एडमिशन, री-एडमिशन और टेस्ट के नाम पर मोटी रकम वसूली जा रही है। जब देश में एक शिक्षा नीति लागू है, तो सरकारी और निजी स्कूलों में किताबें एक समान क्यों नहीं हो सकतीं?”
राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का मिला समर्थन
राजद नेता राकेश ठाकुर ने कहा कि शिक्षा के नाम पर व्यापार और वसूली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
अधिवक्ता संजय कुमार बबलू ने जिला प्रशासन से मांग की कि एक जांच कमेटी गठित कर दोषी स्कूलों पर कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस लूट पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन और उग्र होगा।
एकजुटता की अपील
अपने अध्यक्षीय संबोधन में रामबली सिंह ने जिले के तमाम अभिभावकों और आम जनता से अपील की कि वे अपने बच्चों के भविष्य और अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए एकजुट होकर इस शोषण के खिलाफ आवाज उठाएं।
मौके पर मौजूद रहे गणमान्य: इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से जयलाल राय, राम विनोद पासवान, मो० अकबर अली, एसके निराला, अमित जायसवाल, अमित कुमार, अर्जुन राय, मनोज कुमार सिंह, मनोज शर्मा, मो० सगीर, राजू कुमार, लोकेश राज और जीतेंद्र कुमार सहित दर्जनों सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
विभूतिपुर के कौशल विकास केंद्र में “युवा वर्ग और रोजगार की संभावना” विषय पर संगोष्ठी आयोजित
समस्तीपुर/विभूतिपुर: प्रखंड क्षेत्र के खदियाही स्थित कौशल विकास केंद्र के सभागार में रविवार को “युवा वर्ग और रोजगार की संभावना” विषय पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, समस्तीपुर एवं दूर देहात संस्था, माना राय टोल के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित हुआ।
भव्य उद्घाटन और सांस्कृतिक प्रस्तुति
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रखंड प्रमुख सुनीता देवी, जिला पार्षद सदस्य जितेंद्र राम, समाजसेवी श्याम किशोर कुशवाहा, सचिव सुरेंद्र कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. दीप्ति कुमारी और सेवानिवृत्त शिक्षक रामशंकर प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इससे पूर्व अंजना भारती और रत्न प्रिया ने स्वागत गीत से अतिथियों का मन मोह लिया। मिथिला की परंपरा के अनुसार आगत अतिथियों को पाग, चादर और फूलों की माला देकर सम्मानित किया गया।
शिक्षा और कौशल पर वक्ताओं के विचार
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ताओं ने युवाओं के भविष्य निर्माण पर जोर दिया:
समाजसेवी श्याम किशोर कुशवाहा: उन्होंने कहा कि बेहतर भविष्य और पहचान बनाने के लिए केवल सरकारी नौकरी ही एकमात्र रास्ता नहीं है। युवा स्वरोजगार के क्षेत्र में कड़ी मेहनत कर उच्च मुकाम हासिल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए शिक्षा की बुनियाद मजबूत होनी चाहिए।
प्रभु नारायण झा (निदेशक, कौशल विकास केंद्र): उन्होंने आधुनिक युग में कंप्यूटर शिक्षा की अनिवार्यता पर बल दिया। उन्होंने कहा, “सरकार द्वारा संचालित ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ (KYP) के 3 माह के प्रशिक्षण को छात्र केवल डिग्री न समझें, बल्कि इसे अपने भविष्य की नींव मानकर सीखें।”
शिक्षकों का सम्मान और सामग्री वितरण
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए कई शिक्षकों और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में सेवानिवृत्त शिक्षक रामशंकर प्रसाद, समन्वयक पिंटू कुमार, सुजीत कुमार, संजीत कुमार, मुकेश कुमार सहित दर्जनों शिक्षक शामिल थे।
विशेष आकर्षण: कार्यक्रम के अंत में जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की ओर से उपस्थित छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच डाबर ग्लूकोज-सी का वितरण किया गया।
उपस्थिति: इस अवसर पर डॉ. दीप्ति कुमारी, चंद्रदेव प्रसाद सिंह, अजय आनंद, बीके शर्मा, केवाईपी प्रशिक्षक सुबोध सोनू, श्रवण कुमार दास, नीतीश कुमार, रचना राही, सोनम कुमारी समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश कुमार दिनकर ने की तथा मंच संचालन आचार्य प्रभु नारायण झा ने किया।
पटना/नई दिल्ली। देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री और महान स्वतंत्रता सेनानी स्व० बाबू जगजीवन राम जी की 119वीं जयंती को ‘समता दिवस’ के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय रविदास जागरण महासभा एवं अखिल भारत अनुसूचित जाति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष उमेश कुमार राम ने बाबू जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कुशल प्रशासक और शोषितों के मसीहा थे बाबू जी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उमेश कुमार राम ने बाबू जगजीवन राम के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे एक कुशल प्रशासक थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन दलितों, पिछड़ों और शोषितों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा कि एक समता मूलक समाज की स्थापना करना बाबू जी का मुख्य सपना था।
श्री राम ने बाबू जी के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई, बल्कि आजाद भारत में रक्षा मंत्री के रूप में 1971 के युद्ध में देश को विजय दिलाई। वहीं, कृषि मंत्री के तौर पर उन्होंने ‘हरित क्रांति’ को सफल बनाकर देश को खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
‘भारत रत्न’ न मिलने से समाज में रोष इस दौरान एक महत्वपूर्ण मांग उठाते हुए उमेश कुमार राम ने कहा कि बाबू जी के राष्ट्रव्यापी योगदान के बावजूद उन्हें अब तक देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत नहीं किया गया है। इससे देश के करोड़ों दलित, पिछड़ा और वंचित समाज के लोगों में गहरा दुख और असंतोष है। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र के माध्यम से मांग की है कि बाबू जी को अविलंब ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाए, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
ये रहे उपस्थित इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में उमेश कुमार राम के अलावा अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह, अनिता देवी, खुशी श्रद्धा, शिवम कुमार, डॉ. मनीष यादव, मो० हैदर रजक, अखिलेश्वर प्रसाद कुशवाहा, नुनू राय, रामबाबू साह, राहुल कुमार, सिद्धार्थ कुमार सहित समाज के कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सकरा विधायक आदित्य कुमार का बड़ा बयान: “कांटी को 15 दिन में राहत, सकरा (ढ़ोली) के लिए जाएंगे दिल्ली”
मुजफ्फरपुर। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के प्रयासों के तहत मुजफ्फरपुर टाउन, कांटी, सकरा, बोचहां एवं मीनापुर के माननीय विधायकों ने समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक (डी आर एम) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक के बाद सकरा विधायक ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि कांटी में कपरपुरा रेलवे गुमटी बंद होने से उपजी समस्याओं का समाधान 10 से 15 दिनों के भीतर वैकल्पिक व्यवस्था और टेंडरिंग प्रक्रिया के जरिए कर दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि सकरा (ढोली) में आरओबी निर्माण की फाइल बिहार सरकार से स्वीकृत होने के बावजूद रेलवे स्तर पर लंबित है, जिसके लिए वे जल्द ही दिल्ली जाकर केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात करेंगे।
बैठक में शामिल रेलवे के अधिकारी एवं माननीय विधायक गण
छात्रों के भविष्य और व्यापार पर रेलवे की ‘सर्जिकल स्ट्राइक‘
मुजफ्फरपुर-समस्तीपुर रेल खंड पर ट्रेनों के वर्तमान समय ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। यह केवल यात्रा की समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक और आर्थिक बाधा बन चुकी है:
भूखे पेट कॉलेज जाने को मजबूर छात्र: सकरा विधानसभा क्षेत्र के अर्न्तगत आने वाले सिहो और दुबहा स्टेशनों की स्थिति सबसे दयनीय है। सुबह 7 बजे के बाद शाम 3:55 बजे (सिवान पैसेंजर) तक मुजफ्फरपुर के लिए कोई ट्रेन नहीं है। छात्रों का कहना है कि घर में भोजन 8 बजे तक बनता है, लेकिन ट्रेन पकड़ने के लिए उन्हें 7 बजे ही निकलना पड़ता है। इसके कारण छात्र भूखे पेट कॉलेज जाने को विवश हैं और जंक्शन पर घंटों बैठकर समय बर्बाद करते हैं।
कनेक्टिविटी से राजस्व में वृद्धि: मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर शहर के बीच प्रत्येक दो घंटे पर एक स्पेशल ट्रेन चलाने से न केवल यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि रेलवे के राजस्व (रेवन्यू)में भारी वृद्धि होगी। पहले 8 बजे के आसपास सवारी गाड़ी चला करती थी, जिसे बहाल करना जरूरी है।
पटना के लिए सुबह की ट्रेन: समस्तीपुर से भाया मुजफ्फरपुर होते हुए पटना जंक्शन के लिए एक अलग सवारी गाड़ी की जरूरत है, जो हर हाल में सुबह 9 बजे तक पटना जंक्शन (पाटलीपुत्रा जंक्शन होते हुए पटना जंक्शन तक) पहुंचा दे।
कोरोना काल का दंश: कोरोना काल में बंद की गई मुजफ्फरपुर सियालदह सुपर फास्ट डेली पैसेंजर (गरीबों की सवारी) को अब तक बहाल नहीं किया गया है, जिससे गरीब यात्रियों में भारी आक्रोश है।मुजफ्फरपुर सियालदह सुपर फास्ट डेली पैसेंजर सकरा विधान सभा क्षेत्र से होकर गुजरती थी, जिससे प्रत्येक माह सकरा क्षेत्र के हजारों लोग लाभान्वित होते थे, मुजफ्फरपुर सियालदह सुपर फास्ट डेली पैसेंजर के द्वारा गरीब लोग सौ रूपया से भी कम किराया में हावड़ा,सियालदह तक की यात्रा कर लेते थे ।
अभिषेक ठाकुर ने ‘एक्स’ पर ट्वीट कर उठाई पुरजोर मांग: इन ट्रेनों का हो ठहराव
जनता की मांगों को प्रमुखता से उठाते हुए अभिषेक ठाकुर ने सोशल मीडिया के माध्यम से रेल प्रशासन से ढोली स्टेशन की उपेक्षा बंद करने की मांग की है। अभिषेक ठाकुर ने समस्तीपुर मंडल रेल प्रबंधक को ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा है:-
महत्वपूर्ण ठहराव: ढोली रेलवे स्टेशन पर 14649/50 सरयू यमुना एक्सप्रेस और 13211/12 जोगबनी दानापुर इंटरसिटी का स्टॉपेज सुनिश्चित हो।
दोपहर की मेमू ट्रेन: सुबह 6:33 के बाद मुजफ्फरपुर के लिए दोपहर 12 से 1 बजे के बीच एक जोड़ी मेमू सवारी गाड़ी चलाई जाए। अब जबकि मंडल इंटरचेंज की समस्या समाप्त हो गई है, तो ट्रेन चलाने में कोई तकनीकी बाधा नहीं होनी चाहिए।
गुमटी नंबर 79: ढोली स्टेशन के पास गुमटी नंबर 79 स्पेशल पर अविलंब ओवरब्रिज का निर्माण किया जाए।
कछुआ गति से चल रहा ‘अमृत भारत‘ का काम; बंद गुमटी नंबर 78 बनी मुसीबत
ढोली स्टेशन के समीप समस्तीपुर की ओर गुमटी नंबर 78 (पुरवारी गुमटी) को बंद किए जाने से सकरा का सबसे पुराना हाट और व्यावसायिक परिसर बर्बाद हो रहा है। गुमटी बंद करते समय नीमतल्ला चौक से ऐनुल हक चौक की ओर जाने वाली सड़क को पैदल पुल से जोड़ने का आश्वासन दिया गया था, जो आज तक अधूरा है।
खतरे में जान: प्रतिदिन औसतन एक हजार से ज्यादा लोग (महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग) जान जोखिम में डालकर रेलवे लाइन पार करने को मजबूर हैं। शाम के समय यहां दृश्य भयावह होता है, कब दुर्घटना हो जाय कहना मुश्किल है ।
धीमी रफ्तार:अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत ढोली स्टेशन का पुनर्विकास कार्य इतना धीमा है कि स्थानीय लोगों का कहना है कि इसे पूरा होने में वर्षों लग जाएंगे। यह रेलवे की कार्यक्षमता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है
जनप्रतिनिधियों का साझा दबाव: रेलवे की मनमानी पर लगा अंकुश
जनप्रतिनिधियों का साझा दबाव: रेलवे की मनमानी पर लगा अंकुश :-मुजफ्फरपुर जिले के पांचों विधायकों—कांटी विधायक अजीत कुमार, मुजफ्फरपुर नगर विधायक रंजन कुमार, बोचहां विधायक बेबी कुमारी, सकरा विधायक आदित्य कुमार एवं मीनापुर विधायक अजय कुमार कुशवाहा—ने एकजुट होकर मंडल रेल प्रबंधक ज्योति प्रकाश मिश्रा से मुलाकात की और कड़ा विरोध दर्ज कराया। जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि कांटी की रेलवे गुमटी संख्या 107 को बिना किसी पूर्व सूचना या वैकल्पिक व्यवस्था के बंद करना पूरी तरह जनविरोधी कदम है। इस मार्ग का मोतिपुर, मीनापुर और साहेबगंज जैसे प्रमुख क्षेत्रों से सीधा जुड़ाव है, जहाँ से प्रतिदिन हजारों मरीज, छात्र और किसान गुजरते हैं। जनप्रतिनिधियों ने डीआरएम के सामने यह तथ्य भी रखा कि इस मार्ग का मुजफ्फरपुर-पटना बाईपास से कोई सीधा संबंध न होने के बावजूद इसे बंद करना स्थानीय लोगों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है। दबाव का ही नतीजा रहा कि रेल प्रशासन को न केवल 10 करोड़ की लागत से अंडरपास बनाने का आश्वासन देना पड़ा, बल्कि अगले 15 दिनों के भीतर वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने का भी वादा करना पड़ा। यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि यदि जनप्रतिनिधि एकजुट होकर जनता की आवाज उठाएं, तो रेलवे की मनमानी को चुनौती देकर समाधान निकाला जा सकता है।
पटना | बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बनने जा रही है। अखिल भारतीयपिछड़ा वर्ग संघ ने केंद्र सरकार की नीतियों और विशेष रूप से यूजीसी (UGC) 2026 बिल के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान कर दिया है। संघ ने इसे ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ करार देते हुए 29 अप्रैल को ऐतिहासिक गांधी मैदान में जुटने का आह्वान किया है।
29 अप्रैल: गांधी मैदान से गूंजेगी क्रांति की आवाज
पटना में सम्पन्न अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ की कार्य समिति की बैठक के बाद संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इन्द्र कुमार सिंह चन्द्रापुरी ने कहा कि यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि देश के बहुजन, पिछड़े और वंचित समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए एक नई क्रांति की शुरुआत है। मौजूदा नीतियां पिछड़ों के आरक्षण और शैक्षणिक अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। 29 अप्रैल के इस प्रदर्शन में बिहार के कोने-कोने से लाखों लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है।
UGC 2026 बिल: विवाद की मुख्य जड़
आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा यूजीसी रेगुलेशन 2026 है। हालांकि सरकार इसे शिक्षण संस्थानों में समानता लाने वाला कदम बता रही है, लेकिन पिछड़ा वर्ग संघ और कई छात्र संगठनों ने इसके प्रावधानों पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
आरक्षण की स्वायत्तता पर खतरा: संघ का आरोप है कि नए नियमों के जरिए विश्वविद्यालयों की भर्ती प्रक्रिया और दाखिलों में पिछड़ों (OBC) के संवैधानिक आरक्षण को परोक्ष रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
निजीकरण को बढ़ावा: प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिल के कुछ प्रावधान उच्च शिक्षा में निजी निवेश के नाम पर सरकारी संस्थानों को कमजोर करेंगे, जिससे पिछड़ों और दलितों के लिए शिक्षा महंगी और दुर्लभ हो जाएगी।
जवाबदेही का अभाव: संघ ने यह मुद्दा भी उठाया है कि बिल में शिकायतों के निपटारे के लिए जो तंत्र बनाया गया है, वह पारदर्शी नहीं है और उसमें वंचित वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित नहीं किया गया है।
‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ क्यों?
संघ के प्रतिनिधियों ने प्रेस वार्ता में कहा, “पहली आजादी हमें अंग्रेजों से मिली थी, लेकिन आज हमें अपने ही तंत्र में हकों की चोरी से लड़ना पड़ रहा है। UGC 2026 जैसे बिल हमारी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेल देंगे। इसलिए हम इसे आजादी की दूसरी लड़ाई कह रहे हैं।”
देशभर से जुटेंगे दिग्गज नेता
अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इन्द्र कुमार सिंह चन्द्रापुरी के नेतृत्व में होने वाले इस प्रदर्शन में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। मुख्य अतिथियों में:
छत्तीसगढ़ से शत्रुघ्न सिंह साहू
उत्तर प्रदेश से सी.एल. गंगवार
महाराष्ट्र से प्रदीप डोबले
झारखंड से रामदेव विश्वबंधु
आयोजन का विवरण
स्थान: गेट नंबर-1, गांधी मैदान, पटना।
दिनांक: 29 अप्रैल, बुधवार।
समय: सुबह 11:00 बजे।
मुख्य एजेंडा: UGC 2026 बिल की वापसी और पिछड़ों के अधिकारों की सुरक्षा।
राजनीतिक हलचल तेज
29 अप्रैल के इस प्रस्तावित प्रदर्शन ने बिहार की राजनीति में भी उबाल ला दिया है। विपक्षी दलों ने इस आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन देने का संकेत दिया है, वहीं प्रशासन भी गांधी मैदान में होने वाली इस विशाल रैली को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने में जुट गया है।
यह खबर पटना में बढ़ते सामाजिक-राजनीतिक असंतोष और शिक्षा नीति में बदलावों को लेकर हो रहे विरोध को दर्शाती है। 29 अप्रैल का यह प्रदर्शन भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
समस्तीपुर | 03 अप्रैल, 2026 शहर के विवेक विहार मोहल्ला स्थित प्रवीण कुमार के आवासीय परिसर में शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) पेंशनर्स एसोसिएशन, जिला समिति समस्तीपुर की त्रैवार्षिक आमसभा का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान संगठन की मजबूती और पेंशनभोगियों की समस्याओं के समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों ने किया उद्घाटन
आमसभा का विधिवत उद्घाटन एजीएम समीर कुमार ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सी. पी. सिंह, सर्किल उपाध्यक्ष टुनटुन बैठा, पटना जोन के जनरल सेक्रेटरी एम. के. घोष और मुजफ्फरपुर जोन की उपाध्यक्ष नीलम सिन्हा ने शिरकत की। वक्ताओं ने पेंशनधारियों के हितों की रक्षा के लिए संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया।
पेंशनभोगियों के अधिकारों पर मंथन
जिला अध्यक्ष अजय कुमार की अध्यक्षता एवं जिला सचिव प्रमोद कुमार सिंह के संचालन में आयोजित इस सभा में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त कर्मियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि:
पेंशनभोगियों की समस्याओं का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
आगामी गतिविधियों और कार्यक्रमों की रूपरेखा भी इस दौरान तय की गई।
नई जिला कमेटी का निर्विरोध चयन
सभा के अंतिम चरण में सर्वसम्मति से नई जिला कार्यकारिणी का चुनाव संपन्न हुआ। जिसमें अजय कुमार को पुनः जिला अध्यक्ष और प्रमोद कुमार सिंह को पुनः जिला सचिव चुना गया। अन्य नवनिर्वाचित पदाधिकारियों की सूची इस प्रकार है:-
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद सिंह, राजेश कुमार, राजू कुमार सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन आयोजनकर्ता प्रवीण कुमार द्वारा दिए गए धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
हैंडओवर से पहले खुली ‘नल-जल‘ की पोल: सकरा में जांच के दौरान अधिकारियों के सामने गिरे सरकारी दावों के स्तर
मुजफ्फरपुर (सकरा)। सकरा नगर पंचायत और आस-पास की पंचायतों में ‘हर घर नल का जल’ योजना भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी है। गुरुवार को पीएचईडी (PHED) द्वारा नगर पंचायत को योजना हैंडओवर करने से पूर्व किए गए औचक निरीक्षण ने उन दावों की हवा निकाल दी, जिसमें इस प्रोजेक्ट को पूर्ण और सफल बताया जा रहा था। सहायक अभियंता प्रिया अग्रवाल और कनीय अभियंता राहुल कुमार की टीम ने जब धरातल पर जांच की, तो मानकों की अनदेखी और तकनीकी खामियों का अंबार मिला।
तस्वीर में मोटर साइकिल के सामने खड़ी सहायक अभियंता प्रिया अग्रवाल और एवं हाथ में कागजात लिए कनीय अभियंता राहुल कुमार, सह संवेदक एवं स्थानीय लोगों से नल जल योजना की धरातल पर वास्तविक जानकारी लेते
निरीक्षण का विस्तार: मछही से लेकर सरमस्तपुर तक बदहाली
जांच टीम ने केवल नगर पंचायत ही नहीं, बल्कि मछही और सरमस्तपुर में भी नवनिर्मित जल मीनारों और पाइपलाइन नेटवर्क का सघन निरीक्षण किया।
मछही और सरमस्तपुर की स्थिति: यहाँ भी स्थिति नगर पंचायत से अलग नहीं है। नवनिर्मित जल मीनारों के निर्माण में तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखा गया है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को घेरकर घटिया निर्माण सामग्री और पाइपलाइन के अधूरे विस्तार की शिकायतें दर्ज कराईं।
दिखावा मात्र का निर्माण: कई जगहों पर स्ट्रक्चर तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन वे केवल ‘शो-पीस’ बनकर रह गए हैं। जलापूर्ति शुरू होने से पहले ही टंकियों से रिसाव (लीकेज) होना संवेदक की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या-6 में औचक निरीक्षण करते पीएचईडी के सहायक अभियंता प्रिया अग्रवाल, एवं उपर तस्वीर में लाल इनसेट में आधार को दुबारा ढ़ाल कर जल मीनार को सीधा करने की कोशिश
भ्रष्टाचार का ‘टेढ़ा‘ नमूना: वार्ड-6 की जमीनी हकीकत
निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला दृश्य सकरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या-6 (निब्युला फिल्म्स के सामने) में दिखा। यहाँ जल मीनार का सीमेंटेड प्लिंथ (आधार) ही टेढ़ा बना दिया गया है।
धोखाधड़ी की कोशिश: गलती छुपाने के लिए टेढ़े आधार के ऊपर दोबारा ढलाई कर उसे सीधा दिखाने का प्रयास किया गया, जो किसी भी समय बड़े हादसे को न्यौता दे सकता है।
इंजीनियरिंग की विफलता: मीनार का लेयर सड़क से काफी नीचे रखा गया है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को बताया कि इससे भविष्य में जलजमाव होगा और पूरा स्ट्रक्चर धंस सकता है। न तो बाहर से प्लास्टर किया गया है और न ही समुचित मिट्टी भराई हुई है।
जब ‘माननीय‘ ही प्यासे: सिस्टम का ब्लॉक होना तय
योजना की विफलता का इससे शर्मनाक उदाहरण क्या होगा कि वार्ड संख्या-4 के पार्षद मो. आलम के अपने आवास (जो वार्ड-6 में स्थित है) में आज तक नल का कनेक्शन नहीं पहुँचा है।
वंचित मोहल्ले: फरीदपुर सकरा के पुराने वार्ड-13 (नया वार्ड-6) में 30 से अधिक घरों को जानबूझकर योजना से बाहर रखा गया है।
अधूरा नेटवर्क: शिक्षक नागेवर पासवान के मोहल्ले से लेकर डिक्की गुप्ता और संजीत कुमार चौधरी मुन्शी जी के घर तक पाइपलाइन पहुँची ही नहीं है। रेलवे लाइन के दक्षिण पुरवारी गुमटी के पास तकनीकी दिक्कतों का बहाना बनाकर पूरे इलाके की प्यास का सौदा किया गया है।
औचक निरीक्षण के दौरान हरकत में आया संवेदक और मजदूरों को लगाया काम पर, तस्वीर में गंगा इलेक्ट्रॉनिक्स के सामने सड़क पर जमीन से रिस कर बहता पानी, और लाल इनसेट में ईंट पत्थर से घेर का पानी को रोकने की कोशिश,
घटिया क्वालिटी और टपकती बूंदें: करोड़ों की बर्बादी
निरीक्षण में यह साफ दिखा कि जो सामान इस्तेमाल किया गया है, वह बेहद घटिया क्वालिटी का है। करोड़ों की लागत से बनी टंकियों से पानी ‘टप-टप’ टपक रहा है, जो प्लंबिंग और सिविल वर्क की विफलता का सबूत है। ग्रामीण इस बात से भी आक्रोशित हैं कि जलापूर्ति का समय बेहद कम है और प्रेशर न के बराबर है।
अधिकारियों का 3 दिन का अल्टीमेटम
सवालों के घेरे में आए कनीय अभियंता राहुल कुमार ने स्वीकार किया कि फील्ड में गंभीर अनियमितताएं हैं। उन्होंने कहा:
“हमने निरीक्षण में पाई गई त्रुटियों को लेकर संबंधित एजेंसी को 2 से 3 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। हैंडओवर से पहले हर कमी को दूर करना होगा। भीषण गर्मी को देखते हुए जो घर छूट गए हैं, उन्हें प्राथमिकता पर जोड़ा जाएगा।”
विभाग ने गर्मी के लिए नया शेड्यूल (सुबह 6-9, दोपहर 1-2 और शाम 4-6) जारी किया है, लेकिन अधूरा नेटवर्क इस शेड्यूल पर पानी फेर रहा है।
20 साल का इंतजार और अब मिला अधिकारियों का भरोसा
सकरा में पानी का संकट 20 साल पुराना है। पुरानी पाइपलाइनें पूरी तरह ब्लॉक हैं। अधिकारियों ने अब आश्वासन दिया है कि वे रविवार को पुनः फील्ड में रहकर पाइपलाइन की कुल लंबाई और स्ट्रक्चर के मानकों की पैमाइश करेंगे।
यदि हैंडओवर से पहले इन गंभीर खामियों को दूर नहीं किया गया, तो यह योजना नगर पंचायत के लिए ‘वरदान’ नहीं बल्कि ‘बोझ’ साबित होगी। विभाग को अब फाइलों से बाहर निकलकर लापरवाह ठेकेदारों पर कानूनी नकेल कसनी होगी।